भारत की द्रुत गति से बढती जनसँख्या पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ देश कल और समाज सभी के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी करने वाला है अपितु देश के संसाधनों के न्यायपूर्ण बंटवारा में भी बाधक है |
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देश दुनिया की बढती जनसंख्या और उसके तत्कालीन एवं दूरगामी प्रभाव
आज 11 जुलाई का दिन विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाना अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण और बढती जनसंख्या के कारण उत्पन्न होने वाली समस्यों की और पुरे विश्व का ध्यान अपनी और आकर्षित करता है | विश्व की तमाम सरकारों और निति निर्माताओ को ये ध्यान रखने की जरुरत है कि जनसंख्या और उससे जुड़े मसलो का हल उनकी विकास नीतियों के मूल में होना चाहिए | अगर भारत के सन्दर्भ में बात करे तो 1920 तक भारत में उच्च जनम डर और उच्च मृत्यु डर थी लेकिन उसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई | ऐसा सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक कारणों से संभव हुआ | बढती तकनीक, स्वस्थ सुविधाओ का बहतर होना, परिवार नियोजन के बारे में बढती शिक्षा और स्थिर राजनीतिक हालत भी जिम्मेदार है |

सेम्पल रजिस्ट्रेसन सिस्टम stastical report 2017 के अनुसार देश में जन्मदर 20.2 जबकि शहरो में 16.8 है| इसी तरह मृत्यु डर 6.3 जबकि शहरो में 5.3 है | अगर भारत को बढती जनसंखिया का लाभ लेना है तो उसे मानव पूंजी में अत्यधिक निवेश करना होगा | साल 2041 तक भारत में देश की कुल आबादी में 58.9% हिस्सा 21-59 आयु वर्ग के लोगो का होगा | इसका मतलब ये है की इस युवा भारत में अब हमें रोजगार के और आधिक अवसर पैदा करने होंगे | बहतर स्वस्थ सुविधाओ के साथ महिलाओ की भागीदारी को भी बढ़ाना होगा |
लेकिन भारत की बुजुर्ग होती आबादी भी एक बड़ी समस्या है | बुजुर्गो को जरुरत को पूरा करना उनको सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी एक बड़ी समस्या है अगर भारत में यही स्थिति बनी रही तो भारत जल्द ही चीन को पीछे छोड़ देगा |
बढती जनसंख्या का लाभ अगर लेना है तो देश को बुनियादी रूप से मजबूत होना होगा | प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर और पढाई छोड़ने वाले बच्चो की संखिया भी चिंता का विषय है | आंकड़ो की अगर बात करे तो मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ राज्यों में प्राथमिक स्कूलों की संखिया भले ही अधिक है लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर काफी निचा है |
भारत की द्रुत गति से बढती जनसँख्या पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ देश कल और समाज सभी के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी करने वाला है अपितु देश के संसाधनों के न्यायपूर्ण बंटवारा में भी बाधक है | आज जितने रोजगार के अवसर नहीं है उससे ज्यादा रोजगार लेने वालों की एक लम्बी कतार लगी हुई है | यह समस्या केवल रोजगार तक ही सिमित नहीं है अपितु देश की स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा या उपलब्ध अवसरों के लिए जरुरतमंद लोग भी लाभ नहीं ले पा रहे है | इसका मूल कारण है अवसरों का कम होना और अवसरों का लाभ लेने वालों की संख्या अधिक होना | हमें जनसँख्या नियंत्रण पर एक कठोर निर्णय लेना पड़ेगा ताकि देश के संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग हो सके और मिल रहे अवसरों का लाभ उठाया जा सके |
अगर भारत देश को बढती जनसंख्या का लाभ लेना है तो उन सभी पहलुओ पर विचार करना होगा |