वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जहाँ सोशल डिस्टेंस के पालन की सलाह दी जा रही है वही अगर जरुरी न हो तो घर से ही काम करने की सलाह दी जा रही है |
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ऑनलाइन क्लास का प्रचलन (online class trend):
ऑनलाइन क्लास का प्रचलन मुख्यत; करोना महामारी के बाद से बड़े स्तर पर शुरू हुआ है | आज जहां पूरी दुनिया कोरोना महामारी के कारण बंद है | इस वायरस के दर के कारण हर कोई अपने घरो मे बंद है | बाजार, मॉल, स्कूल, कॉलेज यहाँ तक की सरकारी दफ्तर भी बंद है ऐसे मे आज एक नए तरह की विश्व व्यवस्था का जन्म हो रहा है|
वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जहा सोशल डिस्टेंस के पालन की सलाह दी जा रही है वही अगर जरुरी न हो तो घर से ही काम करने की सलाह दी जा रही है |
जैसे की हमें यह पता है की यह वायरस बच्चो और बुजुर्गो के लिए बोहोत ही घातक है | लगतार सरकारे भी लोगो से इन आयु वर्गों के लोगो का विशेष ख्याल रखने की अपील कर रही है |
बच्चो को घर मैं ही रखने के लिए सभी स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया | लेकिन जैसा हमें यह ज्ञात है की कोरोना का खतरा कितने दिनों तक रहेगा और मानव जाति की लड़ाई इस वायरस से कितनी लम्बी चलने वाकी है यह किसी को नहीं पता |
इन सब के बीच बच्चो की शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और उनका सत्र भी लेट हो रहा है |
इस समस्या के समाधान के लिए बोहोत से स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास की सुविधा शुरू कर दी है | लेकिन ऑनलाइन क्लास की शुरुआत होते ही बोहत से मुद्दों पर बहस शुरू हो गए है |
1. इन्टरनेट सुविधा का अभाव
ऑनलाइन क्लास के लिए जो सबसे महत्वपर्ण है वो है इन्टरनेट कनेक्शन, एक अनुमान के मुताबिक भारत में शहरी इलाको मे लगभग 60 से 70% लोगो के पास ही एक्टिव इन्टरनेट कनेक्शन है |
लेकिन ग्रामीण इलाको में यह संख्या केवल 35% से 40% ही है | ऐसे में ऑनलाइन पढाई में अगर कोई पीछे छूट रहा है तो वो है उस गरीब परिवार का बच्चा जिसके पास इन्टरनेट की सुविधा नहीं है |
बोहोत से ऐसे ग्रामीण इलाके है जहां लोगो के पास न ही स्मार्ट फ़ोन है और न ही कंप्यूटर फिर ऐसे में उन गरीब बच्चो तक शिक्षा को पहुचाना एक बड़ी चुनौती है |
सयुक्त राष्ट्र बाल कोष के मुताबिक लगभग 82.6 करोड़ छात्र ऐसे है जिनके पास कंप्यूटर की सुविधा नहीं है और लगभग 70.6 करोड़ छात्र ऐसे है जिनके पास इन्टरनेट की सुविधा नहीं है |
2. मानसिक अवसाद और यौन उत्पीड़न का खतरा
ज्यादा समय तक इन्टरनेट पर समय बिताने के कारण कई सारी मानसिक और शारीरिक महामारियो का खतरा भी बढ़ता है | आज के युग जहा इन्टरनेट पर बोहोत से सोशल प्लेटफॉर्म ऐसे है जहा पर यौन उत्पीड़न का खतरा बोहोत अधित रहता है | यदि हम कुछ परिस्थितियों को देखे तो यह फायदेमंद हो सकता है लेकिन इसके दुष्प्रभाव अधिक है और अधिक समय ऑनलाइन बिताना यह स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है |
3. गुणवत्ता का अभाव
(i) बहुत से एक्सपर्ट की माने तो ऑनलाइन एजुकेशन मे शिक्षक के अभाव मे बच्चो के सीखने और अनुशासन की कमी के कारण उनकी शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ रहा है |
(ii) कुछ बच्चो का यह भी कहना है की समय की कमी और शिक्षक का सभी बच्चो पर ध्यान न दे पाने के कारण वह बोहोत से प्रशन भी नहीं पाते है |
(iii) बच्चो से प्रत्येक पाठ के बाद टेस्ट लेना, एसैन्मेंट बनवाना इन सब एक्टिविटीज मैं भी बोहोत सी समस्यों का सामना करना पड़ रहा है |
(iv) अगर हम सही माएनो मे देखे तो ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली मे सबसे ज्यादा प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर ही पड़ रहा है |
(v) अगर हम अकादमिक कक्षाओ मतलब 1 से 12 तक कक्षाओ की बात करे तो यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सॉर्ट टर्म के लिए तो प्रभावशाली है लेकिन लम्बी अवधि तक इससे जुड़े रहने वाले छात्रों पर इसके खतरनाक प्रभाव देखने को मिल रहे है |