समास की परिभाषा, समास के भेद, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्वंद्व, बहुव्रीहि, द्विगु और अव्ययीभाव समास उदाहरण सहित विस्तार से पढ़ें। कक्षा 6 से 10 और बोर्ड परीक्षा हेतु संपूर्ण हिंदी व्याकरण नोट्स।
Contents:
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समास – परिभाषा, भेद और उदाहरण सहित संपूर्ण अध्ययन
समास हिंदी व्याकरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी अध्याय है। समास भाषा को संक्षिप्त, प्रभावशाली तथा साहित्यिक बनाता है। जब दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया अर्थपूर्ण शब्द बनाते हैं और उनके बीच की विभक्ति लुप्त हो जाती है, तब उस रचना को समास कहते हैं।
समास की परिभाषा
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने ऐसे संक्षिप्त शब्द को समास कहते हैं, जिसमें विभक्ति चिह्न (का, के, की, से, में, पर आदि) हटा दिए जाते हैं।
उदाहरण
- राजा का पुत्र = राजपुत्र
- ग्राम में वास करने वाला = ग्रामवासी
- माता और पिता = मातापिता
इन उदाहरणों में स्पष्ट है कि विभक्ति हटाकर संक्षिप्त रूप बनाया गया है।
समास के अंग
- पूर्वपद – पहला शब्द
- उत्तरपद – दूसरा शब्द
जैसे: राजपुत्र → राज (पूर्वपद) + पुत्र (उत्तरपद)
समास के प्रमुख भेद
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- कर्मधारय समास
- द्वंद्व समास
- बहुव्रीहि समास
- द्विगु समास
1. अव्ययीभाव समास
जिस समास में पहला पद अव्यय होता है और वही प्रधान होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
उदाहरण
- प्रतिदिन
- यथाशक्ति
- आजीवन
- सदैव
2. तत्पुरुष समास
जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच कोई कारक चिह्न लुप्त रहता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
उदाहरण
- राजपुत्र = राजा का पुत्र
- जलपान = जल का पान
- देवालय = देव का आलय
तत्पुरुष के उपभेद
- कर्म तत्पुरुष
- करण तत्पुरुष
- संबंध तत्पुरुष
- अधिकरण तत्पुरुष
- संप्रदान तत्पुरुष
- अपादान तत्पुरुष
3. कर्मधारय समास
जिस समास में विशेषण-विशेष्य का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
उदाहरण
- महापुरुष
- नीलकमल
- चंद्रमुख
- लंबोदर
4. द्वंद्व समास
जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और ‘और’ का भाव होता है, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
उदाहरण
- माता-पिता
- सुख-दुख
- दिन-रात
- राम-श्याम
5. बहुव्रीहि समास
जिस समास में बने हुए शब्द का अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु से होता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
उदाहरण
- दशानन (रावण)
- चतुर्भुज (विष्णु)
- नीलकंठ (शिव)
6. द्विगु समास
जिस समास में पहला पद संख्या वाचक होता है और समूह का बोध कराता है, उसे द्विगु समास कहते हैं।
उदाहरण
- त्रिलोकी
- सप्तऋषि
- पंचवटी
- चतुर्दिक
समास विग्रह
समस्त पद को अलग-अलग शब्दों में विभाजित करना समास विग्रह कहलाता है।
- महापुरुष = महान पुरुष
- राजपुत्र = राजा का पुत्र
- मातापिता = माता और पिता
- नीलकंठ = नीला कंठ वाला
समास और संधि में अंतर
| आधार | समास | संधि |
| अर्थ | शब्दों का मेल | वर्णों का मेल |
| उदाहरण | राजपुत्र | देव + आलय = देवालय |
समास का महत्व
- भाषा को संक्षिप्त बनाता है
- लेखन को प्रभावशाली बनाता है
- साहित्यिक सौंदर्य बढ़ाता है
- बोर्ड परीक्षा में महत्वपूर्ण
- प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी
अभ्यास प्रश्न
- समास की परिभाषा लिखिए।
- तत्पुरुष समास के भेद लिखिए।
- निम्नलिखित का समास विग्रह कीजिए – देवालय, महात्मा, पंचवटी।
- बहुव्रीहि समास उदाहरण सहित समझाइए।
निष्कर्ष
समास हिंदी व्याकरण का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। समास के विभिन्न भेदों को समझकर विद्यार्थी न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपनी लेखन शैली को भी प्रभावशाली बना सकते हैं। तत्पुरुष, कर्मधारय, द्वंद्व, बहुव्रीहि और द्विगु समास का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: समास क्या है?
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बना संक्षिप्त शब्द समास कहलाता है।
प्रश्न 2: समास के कितने भेद हैं?
समास के छह प्रमुख भेद हैं।
प्रश्न 3: बहुव्रीहि समास क्या है?
जिसमें बना शब्द किसी तीसरे व्यक्ति का बोध कराए।