मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता था | वह भारतीय फील्ड हॉकी के एक महान खिलाडी थे | विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाडियों में इनकी गिनती होती है|
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मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता था | वह भारतीय फील्ड हॉकी के एक महान खिलाडी थे | विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाडियों में इनकी गिनती होती है| उनकी अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम ने तीन बार ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता | उनके जन्म दिवस को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है |

उन्होंने अपने खेल जीवन में 1000 से अधिक गोल किये | उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें भारत सरकार ने उन्हें 1956 में पदमश्री से सम्मानित किया | उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत भारतीय सेना में सेवा के साथ की | उन्हें 1927 में लांस नायक बनाया गया | 1937 में वह जब भारतीय हॉकी टीम के कप्तान बनाये गए तभी उन्हें सेना में सूबेदार के पद पर नियुक्त कर दिया गया |
मेजर साहब का खेल जीवन :
ध्यानचंद जी के खेल के पूरे विश्व में दीवाने है | जब वो खेलते थे तो मानो बॉल उनकी स्टिक से चिपक जाती थी | एक बार हॉलैंड के खिलाडियों ने उन पर आरोप लगाया की उनकी स्टिक में चुम्बक लगा है और इसी जाच होनी चाहिए इसी भ्रम में उनकी स्टिक को तोड़कर चेक किया गया और उनका ये आरोप गलत साबित हुआ | इसी तरह की घटना जापान में भी हुई थी | जहा उनकी स्टिक में गोंद लगा होने की बात कही गयी थी | ऐसे तमाम किस्से हे जो इस खिलाडी की महानता के बारे में बताते है |
मेजर साहब ने हॉकी खेलना सेना की ब्राह्मण रेजिमेंट के तत्कालीन मेजर बले तिवारी जी से सीखा | 1922 से 1926 तक वो सेना की ही प्रतियोगताओ में खेलते रहे | उन्होंने अपना पहला मैच 13 मई 1926 को अपना पहला मैच न्यूजीलैंड के विरूद्ध खेला | उन्होंने अपने अंतर्राष्ट्रीय कैरियर में 400 से अधिक गोल किये | 1949 में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय हॉकी से सन्यास ले लिया |
ओलिंपिक खेल में मेजर साहब का प्रदर्शन:
एम्सटर्डम ओलम्पिक खेलों 1928 में भारतीय हॉकी टीम ने फाइनल में हॉलैंड को 3 - 0 से हराकर स्वर्ण पदक प्राप्त किया | फाइनल में ध्यानचंद जी ने दो गोल किये | एम्सटर्डम ओलम्पिक खेलों में भारतीय टीम ने अपने सभी मैच जीते |
लास एंजिल्स में हुई ओलम्पिक प्रतियोगिताओं 1932 में मेजर ध्यानचंद जी सेंटर फॉरवर्ड के खिलाडी के तौर पर काफी सफलता प्राप्त कर चुके थे | इस प्रतियोगिता में दागे गए 262 गोल में से 101 गोल ध्यानचंद जी द्वारा किये गए | फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने अमेरिका को 24 - 1 से हरा दिया |
बर्लिन ओलपिक खेलों में मेजर ध्यानचंद जी को भारतीय टीम का कप्तान चुना गया | भारतीय टीम को पहले ही अभ्यास मैच में जर्मनी से 4 - 0 से हार का सामना करना पड़ा जिससे सभी खिलाडियों को काफी दुःख पंहुचा | उसके बाद मेजर साहब ने टीम को एक जुट किया और पूरी प्रतियोगता में टीम ने कमाल का प्रदर्शन किया |