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Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 18, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 18 August 2026

पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

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Final Revision Notes

अध्याय 13. पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

Final Revision Notes और Chapter Synthesis

पृथ्वी एक परस्पर जुड़ा हुआ तंत्र है जिसमें ऊर्जा का प्रवाह और पदार्थों का चक्रण लगातार होता रहता है। सूर्य पृथ्वी के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है, जबकि वायुमंडल, जलमंडल, भूमंडल, हिममंडल और जैवमंडल एक-दूसरे के साथ लगातार अंतःक्रिया करते हैं।

1. पृथ्वी पर ऊर्जा का मूल स्रोत

पृथ्वी पर ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सूर्य से प्राप्त विद्युतचुंबकीय विकिरण है। सूर्य से आने वाली ऊर्जा पृथ्वी की सतह को गर्म करती है और पृथ्वी के विभिन्न भागों में असमान ऊष्मीकरण उत्पन्न करती है।

सूर्य → सौर विकिरण → पृथ्वी की सतह → ऊष्मीकरण

2. पृथ्वी का असमान ऊष्मीकरण

पृथ्वी के गोलाकार आकार, विभिन्न अक्षांशों और पृथ्वी की धुरी के झुकाव के कारण सूर्य का ताप सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्राप्त नहीं होता। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी की सतह का असमान ऊष्मीकरण होता है।

असमान ऊष्मीकरण → तापमान में अंतर → वायुदाब में अंतर → पवन

इसी असमान ऊष्मीकरण के कारण पवनों और महासागरीय धाराओं के निर्माण में सहायता मिलती है। 

3. वायुमंडल की भूमिका

वायुमंडल पृथ्वी को घेरने वाला गैसीय आवरण है। यह मौसम, जलवायु और पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित करता है। अधिकांश मौसमी प्रक्रियाएँ, जैसे वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण, क्षोभमंडल में होती हैं।

क्षोभमंडल → मौसम संबंधी घटनाएँ

4. ओजोन का दोहरा महत्त्व

समतापमंडल में उपस्थित ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोककर पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है। इसके विपरीत, निचले वायुमंडल में बनने वाली ओजोन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वायु प्रदूषक हो सकती है।

समतापमंडलीय O3 → जीवन रक्षक

निचली वायुमंडलीय O3 → वायु प्रदूषक

5. जल चक्र — पृथ्वी पर जल का निरंतर संचलन

जल वायुमंडल, महासागरों, नदियों, झीलों, मिट्टी, भूजल, हिम और जीवित जीवों के बीच लगातार चक्रित होता रहता है।

वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → अपवाह/भूजल → जल स्रोत → पुनः वाष्पीकरण

पौधों का वाष्पोत्सर्जन भी जल चक्र का महत्वपूर्ण भाग है।

6. जलवायु परिवर्तन और जल चक्र

जलवायु परिवर्तन जल चक्र को प्रभावित कर सकता है। गर्म वायुमंडल अधिक नमी धारण कर सकता है। इसके कारण कुछ क्षेत्रों में अधिक तीव्र वर्षा और कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। हिमनदों के पिघलने तथा वर्षा के बदलते पैटर्न का प्रभाव जल उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।

7. जैव-भूरासायनिक चक्र

पृथ्वी के जैविक और अजैविक घटकों के बीच द्रव्य और ऊर्जा का निरंतर चक्रण होता रहता है। जल, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे महत्वपूर्ण पदार्थ वायुमंडल, महासागरों, स्थल और जीवित जीवों के बीच लगातार चक्रित होते रहते हैं। 

8. कार्बन चक्र — मुख्य बातें

कार्बन वायुमंडल, जीवों, मिट्टी, चट्टानों और महासागरों के बीच चक्रित होता है। पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा CO2 का उपयोग करते हैं। श्वसन और अपघटन के द्वारा CO2 वापस वायुमंडल में पहुँचती है।

लंबे समय में मृत जीवों के अवशेष जीवाश्म ईंधनों में परिवर्तित हो सकते हैं। इन ईंधनों के दहन से संचित कार्बन बहुत कम समय में CO2 के रूप में वायुमंडल में पहुँचता है।

CO2 → प्रकाश संश्लेषण → जीव → श्वसन/अपघटन → CO2

9. नाइट्रोजन चक्र — मुख्य बातें

नाइट्रोजन जीवों के लिए आवश्यक तत्व है और प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्लों के निर्माण में महत्वपूर्ण है। वायुमंडलीय N2 का अधिकांश भाग सीधे पौधों और जन्तुओं द्वारा उपयोग नहीं किया जा सकता।

नाइट्रोजन स्थिरीकरण, नाइट्रीकरण, स्वांगीकरण, अमोनीकरण और विनाइट्रीकरण के माध्यम से नाइट्रोजन विभिन्न रूपों में चक्रित होती रहती है।

N2 → स्थिरीकरण → NH3 → नाइट्राइट → नाइट्रेट → पौधे → जन्तु → अपघटन → नाइट्रोजन चक्र

10. ऑक्सीजन चक्र — मुख्य बातें

वायुमंडल में लगभग 21% मुक्त ऑक्सीजन गैस पाई जाती है। पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा O2 छोड़ते हैं, जबकि जीव श्वसन और ईंधनों के दहन में ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।

प्रकाश संश्लेषण → O2 उत्पादन

श्वसन + दहन → O2 का उपयोग + CO2 का उत्सर्जन

उत्पादन और उपयोग के बीच संतुलन वायुमंडल, स्थल, महासागरों और जीवों के बीच ऑक्सीजन के चक्रण को बनाए रखने में सहायता करता है।

11. मानवीय गतिविधियाँ और पृथ्वी तंत्र

मानवीय गतिविधियाँ पृथ्वी के सभी मंडलों को प्रभावित कर सकती हैं। जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग, वनोन्मूलन और उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग प्राकृतिक चक्रों में परिवर्तन ला सकते हैं।

जीवाश्म ईंधन

जीवाश्म ईंधन का दहन → CO2 में वृद्धि → हरितगृह प्रभाव में वृद्धि → वैश्विक तापन

उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग

अतिरिक्त नाइट्रेट → नदियों/झीलों में पहुँचना → शैवाल की अत्यधिक वृद्धि → ऑक्सीजन की कमी → जलीय जीवों की मृत्यु

इस प्रक्रिया को सुपोषण (Eutrophication) कहते हैं।

वनोन्मूलन

वनोन्मूलन से प्रकाश संश्लेषण और वाष्पोत्सर्जन कम हो सकते हैं, स्थानीय वर्षा प्रभावित हो सकती है, मिट्टी का अपरदन बढ़ सकता है और जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो सकते हैं।

12. पृथ्वी के विभिन्न मंडलों का पारस्परिक संबंध

पृथ्वी के विभिन्न मंडल स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करते। एक मंडल में होने वाला परिवर्तन दूसरे मंडलों को प्रभावित कर सकता है।

मंडल मुख्य संबंध
वायुमंडल गैसें, मौसम, जलवायु और ऊर्जा संतुलन
जलमंडल महासागर, नदियाँ, झीलें और जल चक्र
भूमंडल मिट्टी, चट्टानें और पोषक तत्वों का भंडार
हिममंडल हिम और बर्फ के रूप में जल का भंडारण
जैवमंडल पौधे, जन्तु और अन्य जीव

13. पृथ्वी तंत्र को समझने का सबसे महत्वपूर्ण सूत्र

सूर्य की ऊर्जा → असमान ऊष्मीकरण → वायुदाब अंतर → पवन → महासागरीय धाराएँ → जलवायु

सूर्य की ऊर्जा → वाष्पीकरण → जल चक्र → वर्षा → जीवन

जीव + वायु + जल + मिट्टी → जैव-भूरासायनिक चक्र → पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण

मानवीय गतिविधियाँ → प्राकृतिक चक्रों में परिवर्तन → पर्यावरणीय प्रभाव

संरक्षण + सतत जीवनशैली + वैश्विक सहयोग → पृथ्वी के संतुलन की रक्षा

14. पृथ्वी तंत्र में ऊर्जा और पदार्थ का अंतर

ऊर्जा: पृथ्वी पर ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सूर्य है। ऊर्जा विभिन्न प्रक्रियाओं को संचालित करती है और पृथ्वी के तंत्र में प्रवाहित होती है।

पदार्थ: जल, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे पदार्थ विभिन्न जैविक और अजैविक घटकों के बीच चक्रित होते रहते हैं।

याद रखें: पृथ्वी पर ऊर्जा का प्रवाह और पदार्थों का चक्रण पृथ्वी तंत्र की कार्यप्रणाली का आधार है। 

15. पृथ्वी के संतुलन को बनाए रखने के उपाय

  • ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना।
  • वृक्षारोपण और वनों का संरक्षण करना।
  • जल का संरक्षण करना।
  • सतत कृषि पद्धतियाँ अपनाना।
  • अपशिष्ट पदार्थों को कम करना।
  • वस्तुओं का पुनः उपयोग करना।
  • पुनर्चक्रण को अपनाना।
  • प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
  • पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाना।

16. Mission LiFE — Final Concept

Mission LiFE (Lifestyle for Environment) लोगों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इसका मुख्य विचार यह है कि व्यक्तिगत और सामुदायिक व्यवहार में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन मिलकर सतत भविष्य के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

कम उपभोग → कम अपशिष्ट → संसाधन संरक्षण → कम पर्यावरणीय दबाव → सतत भविष्य

Final Chapter Revision

  • सूर्य: पृथ्वी के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत।
  • असमान ऊष्मीकरण: पवन और महासागरीय धाराओं के निर्माण में महत्वपूर्ण।
  • वायुमंडल: मौसम, जलवायु और ऊर्जा संतुलन को प्रभावित करता है।
  • जल चक्र: पृथ्वी पर जल का निरंतर संचलन।
  • कार्बन चक्र: वायुमंडल, जीवों, महासागरों और भूमंडल के बीच कार्बन का चक्रण।
  • नाइट्रोजन चक्र: जीवों के लिए आवश्यक नाइट्रोजन का पुनर्चक्रण।
  • ऑक्सीजन चक्र: प्रकाश संश्लेषण, श्वसन और दहन से जुड़ा ऑक्सीजन का संचलन।
  • मानवीय प्रभाव: प्राकृतिक चक्रों और पृथ्वी के विभिन्न मंडलों को प्रभावित कर सकता है।
  • सुपोषण: अत्यधिक पोषक तत्वों के कारण जल में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि और ऑक्सीजन की कमी।
  • वनोन्मूलन: कार्बन, ऑक्सीजन, जल चक्र, मिट्टी और जैव विविधता पर प्रभाव डालता है।
  • संरक्षण: ऊर्जा और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग पृथ्वी के संतुलन के लिए आवश्यक है।
  • Mission LiFE: पर्यावरण-अनुकूल और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देता है।

One-Line Chapter Summary

पृथ्वी एक परस्पर जुड़ा हुआ तंत्र है जिसमें सूर्य से ऊर्जा का प्रवाह तथा जल, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे पदार्थों का निरंतर चक्रण जीवन, जलवायु और पारितंत्रों को बनाए रखता है, जबकि मानवीय गतिविधियाँ इन प्राकृतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती हैं।

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