Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन
ग्रहीय पवन और महासागरीय धाराएँ
अध्याय 13. पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन
ग्रहीय पवन और महासागरीय धाराएँ
पृथ्वी की सतह का असमान ऊष्मीकरण अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान और वायुदाब में अंतर उत्पन्न करता है। यही दाब-अंतर वायु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक गतिशील करता है। बड़े पैमाने पर होने वाली इस वायु गति से ग्रहीय पवनों का निर्माण होता है। इसी प्रकार पवन, तापमान, लवणता, पृथ्वी का घूर्णन और महाद्वीपों का वितरण महासागरीय धाराओं को प्रभावित करते हैं।
ग्रहीय पवन (Planetary Winds)
परिभाषा: पृथ्वी के विभिन्न अक्षांशों के बीच असमान ऊष्मीकरण के कारण उत्पन्न बड़े पैमाने की वायुदाब पट्टियों से बनने वाली नियमित पवनों को ग्रहीय पवन कहते हैं।
भूमध्य रेखा और ध्रुवों के बीच पृथ्वी के असमान ऊष्मीकरण के कारण निम्न दाब और उच्च दाब की पट्टियाँ बनती हैं। इन दाब-अंतर के कारण वायु लंबी दूरियों तक गतिशील रहती है और ग्रहीय पवनों का निर्माण होता है।
ग्रहीय पवनों का मूल कारण
असमान ऊष्मीकरण → तापमान में अंतर → वायुदाब में अंतर → वायु का संचलन → ग्रहीय पवन
भूमध्यरेखीय निम्न दाब पट्टी
भूमध्य रेखा के पास सूर्य द्वारा तीव्र ऊष्मीकरण के कारण वायु गर्म होकर ऊपर उठती है। गर्म वायु के ऊपर उठने से वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बनता है।
- भूमध्य रेखा के पास तीव्र ऊष्मीकरण होता है।
- गर्म वायु ऊपर उठती है।
- ऊपर उठती वायु के कारण निम्न दाब बनता है।
- ऊपरी वायु ध्रुवों की दिशा में गति करती है।
उपोष्ण उच्च दाब पट्टियाँ
भूमध्यरेखीय क्षेत्र से ऊपर उठी गर्म वायु ऊँचाई पर ध्रुवों की ओर गति करती है। ठंडी होने पर यह वायु अधिक सघन हो जाती है और लगभग 30° उत्तरी तथा 30° दक्षिणी अक्षांश के पास नीचे उतरती है। इससे उपोष्ण उच्च दाब पट्टियाँ बनती हैं।
इन उच्च दाब क्षेत्रों से वायु पुनः पृथ्वी की सतह के साथ भूमध्य रेखा की ओर बहती है और एक वायुमंडलीय परिसंचरण चक्र पूरा करती है।
उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टियाँ
उपोष्ण उच्च दाब पट्टियों से नीचे उतरने वाली सारी वायु भूमध्य रेखा की ओर नहीं जाती। इसका कुछ भाग सतह के साथ ध्रुवों की दिशा में बहता है और लगभग 60° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांश के पास फिर ऊपर उठता है।
यहाँ यह वायु ध्रुवीय क्षेत्रों से आने वाली ठंडी वायु से मिलती है। इससे उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टियाँ बनती हैं।
ध्रुवीय उच्च दाब पट्टियाँ
लगभग 90° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांश पर अत्यधिक निम्न तापमान के कारण वायु ठंडी और सघन हो जाती है। यह वायु नीचे उतरती है और ध्रुवीय उच्च दाब पट्टियाँ बनाती है।
इन क्षेत्रों से वायु उपध्रुवीय क्षेत्रों की ओर बहती है और एक अन्य वायुमंडलीय परिसंचरण चक्र पूरा करती है।
वायुदाब पट्टियों का क्रम
भूमध्य रेखा → निम्न दाब
लगभग 30° → उच्च दाब
लगभग 60° → निम्न दाब
लगभग 90° → उच्च दाब
यह व्यवस्था दोनों गोलार्धों में पाई जाती है।
पृथ्वी का घूर्णन और पवनों का विक्षेपण
यदि पृथ्वी स्थिर होती, तो वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर लगभग सीधी रेखा में बहती। लेकिन पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। इस घूर्णन के कारण गतिशील वायु अपने सीधे मार्ग से विचलित हो जाती है।
इस प्रभाव को कोरिऑलिस प्रभाव (Coriolis Effect) कहा जाता है।
- उत्तरी गोलार्ध: पवन अपने मार्ग से दाईं ओर विक्षेपित होती है।
- दक्षिणी गोलार्ध: पवन अपने मार्ग से बाईं ओर विक्षेपित होती है।
इस कारण ग्रहीय पवनें उच्च दाब से निम्न दाब की ओर सीधी रेखा में नहीं बहतीं, बल्कि वक्राकार मार्ग अपनाती हैं।
स्थानीय पवन और ग्रहीय पवन में अंतर
| आधार | स्थानीय पवन | ग्रहीय पवन |
|---|---|---|
| क्षेत्र | छोटे स्थानीय क्षेत्र | बहुत बड़े वैश्विक क्षेत्र |
| मुख्य कारण | स्थानीय असमान ऊष्मीकरण | अक्षांशों के बीच असमान ऊष्मीकरण और दाब-अंतर |
| उदाहरण | घाटी समीर, पर्वतीय समीर | वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण से संबंधित पवनें |
महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents)
परिभाषा: महासागरीय जल की विशाल मात्रा का किसी निश्चित दिशा में निरंतर प्रवाह महासागरीय धारा कहलाता है।
महासागरीय धाराएँ पृथ्वी के जलमंडल की महत्वपूर्ण गतिशील प्रक्रियाओं में से एक हैं। ये पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों के बीच ऊष्मा का स्थानांतरण करती हैं और जलवायु को प्रभावित करती हैं।
महासागरीय धाराओं को प्रभावित करने वाले कारक
- ग्रहीय पवन: प्रबल पवन महासागर के सतही जल पर घर्षण डालकर उसे गतिशील करती हैं।
- वायुदाब में अंतर: महासागरीय जल की गति को प्रभावित करता है।
- तापमान में अंतर: विभिन्न क्षेत्रों के जल के तापमान में अंतर जल की गति को प्रभावित करता है।
- लवणता में अंतर: जल की लवणता बदलने से उसकी सघनता बदलती है और जल के संचलन पर प्रभाव पड़ता है।
- पृथ्वी का घूर्णन: महासागरीय जल के प्रवाह को विक्षेपित करता है।
- महाद्वीपों का वितरण: महाद्वीप महासागरीय धाराओं के मार्ग को रोककर उनकी दिशा को प्रभावित करते हैं।
तापमान और महासागरीय धाराएँ
भूमध्यरेखीय और ध्रुवीय क्षेत्रों के जल के तापमान में अंतर होता है। भूमध्यरेखीय क्षेत्र का गर्म जल महासागर की सतह के साथ ध्रुवों की ओर बढ़ता है। इसके विपरीत, ठंडा और अधिक सघन जल गहरे स्तरों पर भूमध्य रेखा की ओर वापस प्रवाहित होता है।
इस प्रकार महासागरीय धाराएँ पृथ्वी के विभिन्न भागों के बीच ऊष्मा का स्थानांतरण करती हैं।
लवणता और महासागरीय जल का घनत्व
महासागरीय जल की लवणता अलग-अलग स्थानों पर अलग होती है। लवणता में अंतर जल की सघनता को प्रभावित करता है।
- कम लवणता वाला जल: अपेक्षाकृत कम सघन होता है और सतह के निकट रह सकता है।
- अधिक लवणता वाला जल: अधिक सघन होता है और महासागर के गहरे स्तरों में जा सकता है।
इस प्रकार तापमान और लवणता दोनों महासागरीय जल के संचलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महासागरीय भंवर (Ocean Gyres)
पृथ्वी के घूर्णन के कारण महासागरीय जल का प्रवाह विक्षेपित होता है। इससे महासागरों में विशाल वृत्ताकार प्रवाह पैटर्न बनते हैं, जिन्हें महासागरीय भंवर (Gyres) कहा जाता है।
- उत्तरी गोलार्ध: महासागरीय भंवर सामान्यतः घड़ी की दिशा में घूमते हैं।
- दक्षिणी गोलार्ध: महासागरीय भंवर सामान्यतः घड़ी की दिशा के विपरीत घूमते हैं।
- महाद्वीप: महासागरीय धाराओं के मार्ग को अवरुद्ध करके उनकी दिशा को प्रभावित करते हैं।
महासागरीय धाराएँ और जलवायु
महासागरीय धाराएँ पृथ्वी की जलवायु के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर ऊष्मा का स्थानांतरण करके पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों के तापमान में अंतर को कम करने में सहायता करती हैं।
गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह
गल्फ स्ट्रीम एक शक्तिशाली महासागरीय धारा है जो उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट के दक्षिणी भाग से गर्म जल को अटलांटिक महासागर के पार ले जाती है। इसका विस्तार उत्तरी अटलांटिक प्रवाह (North Atlantic Drift) के रूप में यूरोप के उत्तर-पश्चिमी तट की ओर जाता है।
इस गर्म महासागरीय धारा के कारण उच्च अक्षांश पर स्थित यूरोप के उत्तर-पश्चिमी तट के कई बंदरगाह सर्दियों में भी बर्फ से मुक्त रहते हैं।
महासागरीय धाराएँ और जीवन
महासागरीय धाराएँ केवल तापमान को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि पोषक तत्वों के परिवहन में भी सहायता करती हैं। इस कारण वे विशाल समुद्री पारितंत्रों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
महासागरीय धाराएँ → ऊष्मा का परिवहन + पोषक तत्वों का परिवहन → जलवायु और समुद्री जीवन पर प्रभाव
भारत और मानसून का अध्ययन
भारत में भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे जैसे संस्थान उन्नत कंप्यूटर मॉडलों की सहायता से वायुमंडल, महासागर, स्थल और हिम के बीच ऊर्जा के प्रवाह को एकीकृत करके भारतीय मानसून की प्रक्रिया का अध्ययन करते हैं।
इन मॉडलों में उपग्रहों, हिंद महासागर में तैरते उपकरणों (buoys) तथा अंटार्कटिका के मौसम स्टेशनों से प्राप्त आँकड़ों का उपयोग किया जाता है। इनका उपयोग मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाने तथा वैश्विक ताप वृद्धि के भारतीय मानसून और वर्षा पैटर्न पर संभावित प्रभावों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है।
Concept Builder
असमान ऊष्मीकरण → दाब-अंतर → वायु का संचलन → ग्रहीय पवन
भूमध्य रेखा → गर्म वायु ऊपर → निम्न दाब
30° अक्षांश → ठंडी वायु नीचे → उच्च दाब
60° अक्षांश → वायु ऊपर → निम्न दाब
90° अक्षांश → ठंडी सघन वायु नीचे → उच्च दाब
पृथ्वी का घूर्णन → कोरिऑलिस प्रभाव → पवन का विक्षेपण
ग्रहीय पवन + तापमान + लवणता + घूर्णन + महाद्वीप → महासागरीय धाराएँ
महासागरीय धाराएँ → ऊष्मा का स्थानांतरण → जलवायु का नियमन
Exam Booster
- ग्रहीय पवनें क्यों बनती हैं? — पृथ्वी के असमान ऊष्मीकरण से उत्पन्न बड़े पैमाने के वायुदाब अंतर के कारण।
- भूमध्य रेखा पर निम्न दाब क्यों बनता है? — तीव्र ऊष्मीकरण से गर्म वायु ऊपर उठती है।
- लगभग 30° अक्षांश पर उच्च दाब क्यों बनता है? — ऊपर उठी वायु ठंडी होकर सघन होती है और नीचे उतरती है।
- ध्रुवों पर उच्च दाब क्यों बनता है? — अत्यधिक ठंडी और सघन वायु नीचे उतरती है।
- कोरिऑलिस प्रभाव क्या है? — पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील वायु और जल का अपने सीधे मार्ग से विक्षेपित होना।
- उत्तरी गोलार्ध में पवन किस ओर विक्षेपित होती है? — दाईं ओर।
- दक्षिणी गोलार्ध में पवन किस ओर विक्षेपित होती है? — बाईं ओर।
- महासागरीय धाराएँ क्या हैं? — महासागरीय जल की विशाल मात्रा का निरंतर प्रवाह।
- महासागरीय धाराओं को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं? — पवन, वायुदाब, तापमान, लवणता, पृथ्वी का घूर्णन और महाद्वीपों का वितरण।
- महासागरीय भंवर क्या हैं? — महासागरीय धाराओं द्वारा बनाए गए विशाल वृत्ताकार प्रवाह पैटर्न।
- महासागरीय धाराएँ जलवायु को कैसे प्रभावित करती हैं? — भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर ऊष्मा का स्थानांतरण करके तापमान के अंतर को कम करती हैं।
- गल्फ स्ट्रीम का क्या महत्त्व है? — यह गर्म जल को अटलांटिक महासागर के पार ले जाती है और यूरोप के उत्तर-पश्चिमी तट की जलवायु को प्रभावित करती है।
- महासागरीय धाराएँ समुद्री जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं? — वे पोषक तत्वों के परिवहन में सहायता करती हैं और समुद्री पारितंत्रों को सहारा देती हैं।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
3. सौर विकिरण, अल्बिडो और असमान ऊष्मीकरण
4. वायुमंडल, उसकी परतें, ओजोन और हरितगृह प्रभाव
5. ग्रहीय पवन और महासागरीय धाराएँ
6. जैव-भूरासायनिक चक्र जल चक्र और कार्बन चक्र
7. नाइट्रोजन चक्र और ऑक्सीजन चक्र
Class 9, all subjects CBSE Notes in hindi medium, cbse class 9 Science Exploration notes, class 9 Science Exploration notes hindi medium, cbse 9 Science Exploration cbse notes, class 9 Science Exploration revision notes, cbse class 9 Science Exploration study material, ncert class 9 science notes pdf, class 9 science exam preparation, cbse class 9 physics chemistry biology notes
Welcome to ATP Education
ATP Education