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Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 18, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 18 August 2026

पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

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जैव-भूरासायनिक चक्र जल चक्र और कार्बन चक्र

अध्याय 13. पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

जैव-भूरासायनिक चक्र, जल चक्र और कार्बन चक्र

पृथ्वी पर जीवन केवल ऊर्जा के प्रवाह पर निर्भर नहीं है, बल्कि आवश्यक तत्वों और पदार्थों के निरंतर पुनर्चक्रण पर भी निर्भर करता है। जीव अपने आसपास की वायु, जल, मिट्टी और चट्टानों के साथ लगातार द्रव्य तथा ऊर्जा का आदान-प्रदान करते हैं। इसी कारण पृथ्वी के जैविक और अजैविक घटक एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।

जैव-भूरासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycles)

परिभाषा: जैविक और अजैविक घटकों के बीच आवश्यक पदार्थों तथा तत्वों के चक्रीय संचलन को जैव-भूरासायनिक चक्र कहते हैं।

इन चक्रों के माध्यम से कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे आवश्यक तत्व लगातार पुनर्चक्रित होते रहते हैं और पृथ्वी पर जीवन के लिए उपलब्ध बने रहते हैं। 

जैव-भूरासायनिक चक्रों की प्रमुख विशेषताएँ

  • जैविक घटक: पौधे, जन्तु और अन्य जीव इन चक्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • अजैविक घटक: वायु, जल, मिट्टी और चट्टानें आवश्यक पदार्थों के भंडार और संचरण के माध्यम बनते हैं।
  • निरंतर चक्रण: तत्व एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रहते बल्कि विभिन्न घटकों के बीच स्थानांतरित होते रहते हैं।
  • जीवन का आधार: इन चक्रों के कारण आवश्यक पोषक तत्व बार-बार जीवों के लिए उपलब्ध होते रहते हैं।
  • पारिस्थितिक संतुलन: विभिन्न चक्रों का संतुलन पारितंत्रों को स्थिर बनाए रखने में सहायता करता है।

प्रमुख जैव-भूरासायनिक चक्र

  • जल चक्र — पृथ्वी पर जल का निरंतर संचलन।
  • कार्बन चक्र — कार्बन का वायुमंडल, जीवमंडल, भूमंडल और जलमंडल के बीच संचलन।
  • नाइट्रोजन चक्र — नाइट्रोजन का विभिन्न जैविक और अजैविक घटकों के बीच चक्रण।
  • ऑक्सीजन चक्र — ऑक्सीजन का विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से संचलन।

जल चक्र (Water Cycle)

परिभाषा: पृथ्वी की सतह, वायुमंडल और भूमिगत भागों के बीच जल के निरंतर संचलन को जल चक्र कहते हैं।

जल चक्र में महासागर, नदियाँ, झीलें, वायुमंडल, हिमनद, मिट्टी, भूजल और जीवित जीव सभी किसी न किसी रूप में भाग लेते हैं।

जल चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ

1. वाष्पीकरण (Evaporation)

सूर्य की ऊष्मा के कारण नदियों, झीलों और महासागरों जैसे जल स्रोतों से जल वाष्प के रूप में वायुमंडल में पहुँचता है। इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।

2. वाष्पोत्सर्जन (Transpiration)

पौधे अपनी पत्तियों तथा अन्य भागों से जलवाष्प वायुमंडल में छोड़ते हैं। इस प्रक्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।

वाष्पीकरण + वाष्पोत्सर्जन = वायुमंडल में जलवाष्प की आपूर्ति

3. संघनन (Condensation)

वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प ठंडी होकर छोटी-छोटी जल बूंदों में बदलती है। इस प्रक्रिया को संघनन कहते हैं। इससे बादलों का निर्माण होता है।

4. वर्षण (Precipitation)

बादलों में जल की बूंदें या हिमकण पर्याप्त बड़े और भारी होने पर वर्षा, ओले या हिम के रूप में पृथ्वी की सतह पर वापस गिरते हैं। इस प्रक्रिया को वर्षण कहते हैं।

5. सतही अपवाह (Runoff)

वर्षा या हिम के पिघलने से प्राप्त जल का कुछ भाग पृथ्वी की सतह पर बहते हुए नदियों, झीलों और अंततः महासागरों तक पहुँचता है। इसे सतही अपवाह कहते हैं।

6. अंतःस्यंदन / जल का भूमि में रिसना

वर्षा का कुछ जल मिट्टी और चट्टानों के बीच से नीचे की ओर रिसता है। इससे भूजल का निर्माण और पुनर्भरण होता है।

जल चक्र का सरल क्रम

महासागर/नदियाँ/झीलें → वाष्पीकरण → जलवाष्प → संघनन → बादल → वर्षण → सतही अपवाह + भूजल → नदियाँ/महासागर

पौधे → वाष्पोत्सर्जन → जलवाष्प → बादल

जल और खनिजों का संचलन

जब जल मिट्टी और चट्टानों से होकर रिसता है, तो उनमें उपस्थित कुछ खनिज जल में घुल जाते हैं। ये पोषक तत्व स्थलीय जीवों के लिए उपयोगी होते हैं। जल के प्रवाह के साथ ये पोषक तत्व महासागरों तक पहुँचते हैं और समुद्री जीवन को भी सहारा देते हैं। 

जल चक्र और जलवायु परिवर्तन

जल चक्र जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहा है। अधिक गर्म वायुमंडल अधिक नमी धारण कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा हो सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

  • अधिक गर्म वायुमंडल: अधिक नमी धारण कर सकता है।
  • तीव्र मानसून: कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा हो सकती है।
  • सूखा: कुछ अन्य क्षेत्रों में जल की कमी बढ़ सकती है।
  • हिमनदों का पिघलना: नदियों में जल की मात्रा अस्थायी रूप से बढ़ सकती है।
  • समुद्र का जल स्तर: लंबे समय में बढ़ सकता है और तटीय शहरों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है।
  • अचानक तेज वर्षा: सतही अपवाह और मिट्टी का अपरदन बढ़ा सकती है।
  • कम जल रिसाव: भूजल के पुनर्भरण को कम कर सकता है।
  • कृषि पर प्रभाव: विशेष रूप से शुष्क महीनों में कृषि को बनाए रखना कठिन हो सकता है।

जल चक्र और पृथ्वी के मंडल

जल चक्र पृथ्वी के विभिन्न मंडलों को आपस में जोड़ता है।

  • हिममंडल: हिमनद और बर्फ जल के ठोस भंडार हैं।
  • जलमंडल: नदियाँ, झीलें और महासागर जल के प्रमुख स्रोत हैं।
  • वायुमंडल: जलवाष्प और बादल जल चक्र का महत्वपूर्ण भाग हैं।
  • भूमंडल: मिट्टी, चट्टान और भूजल जल के संचलन से जुड़े हैं।
  • जैवमंडल: पौधे, फसलें, जन्तु और समुद्री जीव जल चक्र से प्रभावित होते हैं।

इस प्रकार जल चक्र एक ऐसा प्राकृतिक तंत्र है जो पृथ्वी के लगभग सभी मंडलों को आपस में जोड़ता है। 

कार्बन चक्र (Carbon Cycle)

परिभाषा: पृथ्वी के वायुमंडल, जैवमंडल, भूमंडल और जलमंडल के बीच कार्बन के निरंतर संचलन को कार्बन चक्र कहते हैं।

कार्बन जीवन का एक प्रमुख आधार है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और DNA जैसे महत्वपूर्ण जैविक पदार्थों में कार्बन पाया जाता है। 

कार्बन के प्रमुख भंडार

  • वायुमंडल: मुख्य रूप से CO2 के रूप में।
  • जैवमंडल: पौधों और जन्तुओं के शरीर में कार्बनिक यौगिकों के रूप में।
  • भूमंडल: कार्बोनेट चट्टानों तथा जीवाश्म ईंधनों जैसे कोयला, तेल और गैस में।
  • जलमंडल: घुली हुई CO2 तथा समुद्री खोल और अन्य कार्बोनेट पदार्थों में।

कार्बन चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ

1. प्रकाश संश्लेषण

पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके वायुमंडल की CO2 को कार्बनिक पदार्थ, जैसे ग्लूकोस, में परिवर्तित करते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

CO2 + प्रकाश ऊर्जा → पौधों में कार्बनिक पदार्थ

2. श्वसन

पौधे और जन्तु श्वसन के दौरान कार्बनिक पदार्थों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं और CO2 को वापस वायुमंडल में छोड़ते हैं।

3. आहार ग्रहण

जन्तु पौधों तथा अन्य जीवों को खाते हैं। इस प्रकार पौधों में संचित कार्बन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जन्तुओं तक पहुँचता है।

4. अपघटन

जीवों की मृत्यु के बाद अपघटक उनके जैविक पदार्थों का अपघटन करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान कार्बन का एक भाग CO2 के रूप में वापस वायुमंडल में पहुँचता है।

5. जीवाश्म ईंधनों का निर्माण

लाखों वर्षों तक मिट्टी में दबे पौधों और जन्तुओं के अवशेष धीरे-धीरे कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों में परिवर्तित हो सकते हैं।

6. जीवाश्म ईंधनों का दहन

जब कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधन जलाए जाते हैं, तो लंबे समय से संचित कार्बन बहुत कम समय में CO2 के रूप में वायुमंडल में पहुँच जाता है।

कार्बन चक्र में महासागरों की भूमिका

वायुमंडल और महासागरों के बीच CO2 का लगातार आदान-प्रदान होता रहता है। महासागरीय जल वायुमंडल की CO2 को अवशोषित करके उसे कार्बोनेट और हाइड्रोजन कार्बोनेट आयनों में परिवर्तित कर सकता है।

समुद्री पादप प्लवक (Phytoplankton) इन पदार्थों का उपयोग प्रकाश संश्लेषण में करते हैं। कुछ समुद्री जीव इनका उपयोग अपने खोल बनाने में भी करते हैं। जीवों की मृत्यु के बाद उनके अवशेष समुद्र के तल पर जमा हो सकते हैं और लंबे समय तक कार्बन का भंडार बने रहते हैं। 

मानवीय गतिविधियाँ और कार्बन चक्र

मानवीय गतिविधियाँ कार्बन चक्र के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। विशेष रूप से जीवाश्म ईंधनों का दहन और वनोन्मूलन वायुमंडलीय CO2 की मात्रा बढ़ाने में योगदान करते हैं।

पाठ के अनुसार, 1960 से वायुमंडलीय CO2 की मात्रा लगभग 35% बढ़ी है—लगभग 315 ppm से 420 ppm तक। 

अधिक CO2 के प्रभाव

  • हरितगृह प्रभाव में वृद्धि
  • वैश्विक तापन
  • हिमनदों का पिघलना
  • आर्कटिक समुद्री बर्फ का पिघलना
  • समुद्र के जल स्तर में वृद्धि
  • अधिक चरम मौसम की परिस्थितियाँ
  • मानसून और वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन
  • कृषि पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव

भारत में गर्म वायु द्वारा अधिक नमी धारण करने के कारण मानसून अधिक प्रचंड हो सकता है और बदलते वर्षा पैटर्न कृषि के लिए चुनौती बन सकते हैं।

कार्बन चक्र — एक नजर में

वायुमंडलीय CO2 → प्रकाश संश्लेषण → पौधे → जन्तु → श्वसन → CO2

मृत जीव → अपघटन → CO2

दबे हुए जैविक अवशेष → लाखों वर्ष → जीवाश्म ईंधन

जीवाश्म ईंधन → दहन → CO2 → वायुमंडल

वायुमंडलीय CO2 ↔ महासागर → कार्बोनेट/हाइड्रोजन कार्बोनेट → समुद्री जीव

Concept Builder

जैव-भूरासायनिक चक्र → जैविक + अजैविक घटकों के बीच पदार्थों का चक्रीय संचलन

जल चक्र → वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → अपवाह/भूजल → महासागर

वाष्पोत्सर्जन → पौधे → जलवाष्प

कार्बन चक्र → CO2 ↔ पौधे ↔ जन्तु ↔ अपघटक ↔ जीवाश्म ईंधन

प्रकाश संश्लेषण → CO2 का अवशोषण

श्वसन + अपघटन + जीवाश्म ईंधन का दहन → CO2 का उत्सर्जन

अधिक CO2 → अधिक हरितगृह प्रभाव → वैश्विक तापन

Exam Booster

  • जैव-भूरासायनिक चक्र क्या है? — जैविक और अजैविक घटकों के बीच पदार्थों और आवश्यक तत्वों का चक्रीय संचलन।
  • जल चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ कौन-सी हैं? — वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, संघनन, वर्षण, अपवाह और भूजल का संचलन।
  • जल चक्र में सूर्य की क्या भूमिका है? — सूर्य की ऊर्जा जल के वाष्पीकरण को संचालित करती है।
  • जल चक्र जलवायु परिवर्तन से कैसे प्रभावित होता है? — गर्म वायुमंडल अधिक नमी धारण कर सकता है, जिससे वर्षा के पैटर्न, सूखा और बाढ़ जैसी परिस्थितियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
  • कार्बन जीवन के लिए क्यों आवश्यक है? — यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और DNA जैसे महत्वपूर्ण जैविक पदार्थों का घटक है।
  • कार्बन के प्रमुख भंडार कौन-से हैं? — वायुमंडल, जैवमंडल, भूमंडल और जलमंडल।
  • प्रकाश संश्लेषण कार्बन चक्र में क्या भूमिका निभाता है? — पौधे CO2 को ग्रहण करके उसे कार्बनिक पदार्थ में परिवर्तित करते हैं।
  • श्वसन कार्बन चक्र में क्या भूमिका निभाता है? — CO2 को वापस वायुमंडल में पहुँचाता है।
  • अपघटन कार्बन चक्र में क्यों महत्वपूर्ण है? — मृत जीवों के कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करके कार्बन को पर्यावरण में वापस पहुँचाता है।
  • जीवाश्म ईंधन कैसे बनते हैं? — पौधों और जन्तुओं के अवशेष लंबे समय तक मिट्टी में दबे रहने पर कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधनों में परिवर्तित हो सकते हैं।
  • जीवाश्म ईंधनों के दहन से क्या होता है? — लंबे समय से संचित कार्बन कम समय में CO2 के रूप में वायुमंडल में पहुँचता है।
  • महासागर कार्बन चक्र में क्यों महत्वपूर्ण हैं? — वे वायुमंडलीय CO2 को अवशोषित करते हैं और कार्बन का एक बड़ा भंडार बने रहते हैं।
  • मानवीय गतिविधियाँ कार्बन चक्र को कैसे प्रभावित करती हैं? — जीवाश्म ईंधनों के दहन और वनोन्मूलन से वायुमंडलीय CO2 बढ़ सकता है।
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