Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन
नाइट्रोजन चक्र और ऑक्सीजन चक्र
अध्याय 13. पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन
नाइट्रोजन चक्र और ऑक्सीजन चक्र
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक तत्व हैं। इन तत्वों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वे वायुमंडल, मिट्टी, जल और जीवित organisms के बीच लगातार चक्रित होते रहते हैं। इनका यह निरंतर संचलन पृथ्वी के जैव-भूरासायनिक चक्रों का महत्वपूर्ण भाग है।
नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
परिभाषा: वायु, मिट्टी, जल और जीवित जीवों के बीच नाइट्रोजन के निरंतर संचलन को नाइट्रोजन चक्र कहते हैं।
नाइट्रोजन सभी जीवों के लिए आवश्यक तत्व है। यह मुख्य रूप से प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों के निर्माण में उपयोग होता है। नाइट्रोजन का सबसे बड़ा भंडार पृथ्वी के वायुमंडल में है।
वायुमंडलीय नाइट्रोजन का उपयोग क्यों नहीं हो पाता?
वायुमंडल में नाइट्रोजन मुख्य रूप से N2 गैस के रूप में मौजूद है। यह गैस अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील होती है। इसलिए पौधे और जन्तु वायुमंडलीय N2 का सीधे उपयोग नहीं कर सकते।
जीवों के लिए उपयोगी बनाने के लिए वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पहले ऐसे घुलनशील नाइट्रोजन यौगिकों में बदलना आवश्यक है जिन्हें पौधे अवशोषित कर सकें।
नाइट्रोजन चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation)
- स्वांगीकरण (Assimilation)
- अमोनीकरण (Ammonification)
- नाइट्रीकरण (Nitrification)
- विनाइट्रीकरण (Denitrification)
1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation)
परिभाषा: वायुमंडलीय नाइट्रोजन गैस को ऐसे नाइट्रोजन यौगिकों में बदलने की प्रक्रिया जिन्हें जीव उपयोग कर सकें, नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहलाती है।
कुछ विशेष जीवाणु वायुमंडलीय N2 को अमोनिया (NH3) में परिवर्तित करते हैं।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु
- राइजोबियम (Rhizobium): फलीदार पौधों की जड़ों की ग्रंथियों में पाए जाते हैं।
- एजोटोबैक्टर (Azotobacter): मिट्टी में पाए जाने वाले जीवाणु हैं।
ये जीवाणु वायुमंडलीय N2 को अमोनिया में परिवर्तित करने में सहायता करते हैं।
तड़ित द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण
आकाशीय बिजली अर्थात तड़ित (Lightning) भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायता करती है। तड़ित के दौरान वायुमंडलीय नाइट्रोजन की बहुत थोड़ी मात्रा स्थिर होकर नाइट्रोजन ऑक्साइड बना सकती है।
2. नाइट्रीकरण (Nitrification)
परिभाषा: अमोनिया को नाइट्राइट और फिर नाइट्रेट में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को नाइट्रीकरण कहते हैं।
- नाइट्रोसोमोनास: अमोनिया को नाइट्राइट (NO2−) में परिवर्तित करता है।
- नाइट्रोबैक्टर: नाइट्राइट को नाइट्रेट (NO3−) में परिवर्तित करता है।
अमोनिया → नाइट्राइट → नाइट्रेट
3. स्वांगीकरण (Assimilation)
परिभाषा: पौधों द्वारा मिट्टी में उपस्थित उपयोगी नाइट्रोजन यौगिकों को अवशोषित करके अपने शरीर में शामिल करने की प्रक्रिया को स्वांगीकरण कहते हैं।
पौधे मिट्टी से नाइट्रोजन यौगिकों को ग्रहण करते हैं। जन्तु सीधे मिट्टी से नाइट्रोजन प्राप्त नहीं करते बल्कि पौधों या अन्य जन्तुओं का सेवन करके नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं।
मिट्टी → पौधे → जन्तु
4. अमोनीकरण (Ammonification)
परिभाषा: मृत पौधों, मृत जन्तुओं और उनके अपशिष्ट पदार्थों में उपस्थित कार्बनिक नाइट्रोजन को अपघटक द्वारा अमोनिया या अमोनियम यौगिकों में बदलने की प्रक्रिया को अमोनीकरण कहते हैं।
बैक्टीरिया और कवक जैसे अपघटक इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे नाइट्रोजन फिर से मिट्टी में लौट आती है।
5. विनाइट्रीकरण (Denitrification)
परिभाषा: नाइट्रेट को वापस नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को विनाइट्रीकरण कहते हैं।
कुछ जीवाणु नाइट्रेट की एक मात्रा को फिर से नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित कर देते हैं। इससे नाइट्रोजन वायुमंडल में वापस पहुँचती है और नाइट्रोजन चक्र पूरा होता है।
नाइट्रेट → नाइट्रोजन गैस (N2) → वायुमंडल
नाइट्रोजन चक्र का सरल क्रम
वायुमंडलीय N2 → नाइट्रोजन स्थिरीकरण → अमोनिया → नाइट्रीकरण → नाइट्राइट → नाइट्रेट → पौधों द्वारा स्वांगीकरण → जन्तु → मृत्यु/अपशिष्ट → अमोनीकरण → अमोनिया → नाइट्रीकरण → नाइट्रेट → विनाइट्रीकरण → N2
हैबर-बॉश प्रक्रिया (Haber-Bosch Process)
वर्तमान समय में नाइट्रोजन का एक बड़ा भाग कृत्रिम रूप से हैबर-बॉश प्रक्रिया द्वारा स्थिर किया जाता है। इस प्रक्रिया में वायुमंडलीय नाइट्रोजन से अमोनिया बनाई जाती है।
यह प्रक्रिया मुख्य रूप से उर्वरकों के निर्माण का आधार है और आधुनिक कृषि में इसका बहुत बड़ा महत्व है। इस प्रक्रिया ने कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने में योगदान दिया है।
हैबर-बॉश प्रक्रिया की सीमाएँ
- इस प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- पाठ के अनुसार, यह वैश्विक ऊर्जा उपयोग का लगभग 1–2% उपयोग करती है।
- उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और जल को नुकसान पहुँच सकता है।
नाइट्रोजन चक्र का महत्त्व
- जीवों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है।
- प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों के निर्माण में सहायता करता है।
- पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है।
- मिट्टी की उर्वरता से जुड़ा हुआ है।
- वायुमंडल और जीवमंडल के बीच नाइट्रोजन का संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है।
- पारितंत्रों में नाइट्रोजन के पुनर्चक्रण को बनाए रखता है।
ऑक्सीजन चक्र (Oxygen Cycle)
परिभाषा: पृथ्वी के वायुमंडल, जीवों, महासागरों और स्थल के बीच ऑक्सीजन के निरंतर संचलन को ऑक्सीजन चक्र कहते हैं।
ऑक्सीजन पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले तत्वों में से एक है। वायुमंडल का लगभग 21% भाग मुक्त ऑक्सीजन गैस (O2) से बना है।
ऑक्सीजन का महत्त्व
ऑक्सीजन अनेक जैविक अणुओं के लिए आवश्यक है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल और वसा जैसे महत्वपूर्ण जैविक पदार्थों में ऑक्सीजन विभिन्न रूपों में उपस्थित हो सकती है।
ऑक्सीजन पृथ्वी की पर्पटी में धातु ऑक्साइड और विभिन्न खनिजों के रूप में भी पाई जाती है। वायुमंडल में यह मुख्य रूप से O2 तथा CO2 जैसे यौगिकों के रूप में संबंधित होती है।
ऑक्सीजन चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ
1. प्रकाश संश्लेषण
हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके जल और CO2 से ग्लूकोस बनाते हैं और ऑक्सीजन को वायुमंडल में छोड़ते हैं।
प्रकाश संश्लेषण → O2 का उत्पादन
इस प्रकार प्रकाश संश्लेषण वायुमंडल में ऑक्सीजन की पुनःपूर्ति का प्रमुख माध्यम है।
2. श्वसन
पौधे और जन्तु ऊर्जा प्राप्त करने के लिए श्वसन में ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है।
O2 का उपयोग → CO2 का उत्सर्जन
3. दहन
ईंधनों के दहन में भी ऑक्सीजन का उपयोग होता है और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है।
ईंधन + O2 → दहन → CO2
ऑक्सीजन चक्र में संतुलन
प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन का उत्पादन तथा श्वसन और दहन द्वारा ऑक्सीजन का उपयोग लगातार चलता रहता है। इन प्रक्रियाओं के बीच संतुलन वायुमंडल में ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने में सहायता करता है।
प्रकाश संश्लेषण → O2 उत्पादन
श्वसन + दहन → O2 उपयोग
इन प्रक्रियाओं के बीच का संतुलन वायुमंडल, स्थल, महासागरों और जीवित जीवों के बीच ऑक्सीजन के परिसंचरण को बनाए रखता है। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन चक्र का संबंध
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन चक्र दोनों पृथ्वी के विभिन्न मंडलों को आपस में जोड़ते हैं। इन चक्रों में वायुमंडल, मिट्टी, जल और जीवित जीव लगातार भाग लेते हैं।
- नाइट्रोजन चक्र: मुख्य रूप से प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों के लिए आवश्यक नाइट्रोजन की उपलब्धता बनाए रखता है।
- ऑक्सीजन चक्र: श्वसन और अन्य जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक ऑक्सीजन के संतुलन को बनाए रखता है।
- सूक्ष्मजीव: नाइट्रोजन चक्र की अनेक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- पौधे: दोनों चक्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि जैव-भूरासायनिक चक्र बाधित हो जाए
जैव-भूरासायनिक चक्र पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक पदार्थों की निरंतर उपलब्धता बनाए रखते हैं। यदि इनमें से कोई चक्र गंभीर रूप से बाधित हो जाए, तो पौधों और जन्तुओं के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
उदाहरण के लिए, नाइट्रोजन चक्र बाधित होने पर पौधों को आवश्यक नाइट्रोजन यौगिक पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाएँगे। इससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होगी और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जन्तुओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
Concept Builder
वायुमंडलीय N2 → नाइट्रोजन स्थिरीकरण → NH3
NH3 → नाइट्रीकरण → NO2− → NO3−
नाइट्रेट → पौधे → जन्तु → अपघटन → अमोनीकरण → NH3
नाइट्रेट → विनाइट्रीकरण → N2 → वायुमंडल
प्रकाश संश्लेषण → O2 उत्पादन
श्वसन + दहन → O2 का उपयोग + CO2 का उत्पादन
प्रकाश संश्लेषण ↔ श्वसन/दहन → ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन
Exam Booster
- नाइट्रोजन चक्र क्या है? — वायु, मिट्टी, जल और जीवों के बीच नाइट्रोजन के निरंतर संचलन को नाइट्रोजन चक्र कहते हैं।
- नाइट्रोजन जीवों के लिए क्यों आवश्यक है? — यह प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों के निर्माण के लिए आवश्यक है।
- वायुमंडलीय N2 का पौधे सीधे उपयोग क्यों नहीं कर सकते? — N2 गैस अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील होती है और इसे पहले उपयोगी नाइट्रोजन यौगिकों में बदलना आवश्यक होता है।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्या है? — वायुमंडलीय N2 को उपयोगी नाइट्रोजन यौगिकों में बदलने की प्रक्रिया।
- राइजोबियम की क्या भूमिका है? — यह फलीदार पौधों की जड़ों की ग्रंथियों में रहकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायता करता है।
- नाइट्रीकरण क्या है? — अमोनिया को नाइट्राइट और फिर नाइट्रेट में बदलने की प्रक्रिया।
- नाइट्रोसोमोनास क्या करता है? — अमोनिया को नाइट्राइट में बदलता है।
- नाइट्रोबैक्टर क्या करता है? — नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलता है।
- स्वांगीकरण क्या है? — पौधों द्वारा मिट्टी से उपयोगी नाइट्रोजन यौगिकों को अवशोषित करके अपने शरीर में शामिल करना।
- अमोनीकरण क्या है? — मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों के कार्बनिक नाइट्रोजन को अपघटकों द्वारा अमोनिया या अमोनियम यौगिकों में बदलना।
- विनाइट्रीकरण क्या है? — नाइट्रेट को नाइट्रोजन गैस में बदलने की प्रक्रिया।
- हैबर-बॉश प्रक्रिया का क्या महत्त्व है? — यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन से अमोनिया बनाने और उर्वरकों के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है।
- ऑक्सीजन चक्र क्या है? — पृथ्वी के विभिन्न मंडलों के बीच ऑक्सीजन के निरंतर संचलन को ऑक्सीजन चक्र कहते हैं।
- वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा कितनी है? — लगभग 21%।
- ऑक्सीजन का प्रमुख जैविक स्रोत क्या है? — प्रकाश संश्लेषण।
- श्वसन में ऑक्सीजन की क्या भूमिका है? — जीव ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और CO2 छोड़ते हैं।
- दहन का ऑक्सीजन चक्र पर क्या प्रभाव है? — दहन में ऑक्सीजन का उपयोग होता है और CO2 उत्पन्न होती है।
- प्रकाश संश्लेषण और श्वसन ऑक्सीजन चक्र को कैसे संतुलित करते हैं? — प्रकाश संश्लेषण O2 उत्पन्न करता है, जबकि श्वसन उसका उपयोग करता है।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
3. सौर विकिरण, अल्बिडो और असमान ऊष्मीकरण
4. वायुमंडल, उसकी परतें, ओजोन और हरितगृह प्रभाव
5. ग्रहीय पवन और महासागरीय धाराएँ
6. जैव-भूरासायनिक चक्र जल चक्र और कार्बन चक्र
7. नाइट्रोजन चक्र और ऑक्सीजन चक्र
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