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Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 18, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 18 August 2026

पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

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पृथ्वी की प्रक्रियाओं पर मानवीय प्रभाव और सतत जीवनशैली

अध्याय 13. पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

पृथ्वी की प्रक्रियाओं पर मानवीय प्रभाव और सतत जीवनशैली

पृथ्वी के विभिन्न मंडल—वायुमंडल, जलमंडल, भूमंडल, हिममंडल और जैवमंडल—एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए मनुष्य द्वारा किसी एक मंडल में किया गया परिवर्तन दूसरे मंडलों को भी प्रभावित कर सकता है। जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग, वनोन्मूलन, रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग और प्रदूषण पृथ्वी के प्राकृतिक चक्रों तथा पारितंत्रों को प्रभावित कर रहे हैं।

मानवीय गतिविधियाँ और जैव-भूरासायनिक चक्र

मानवीय गतिविधियाँ पृथ्वी पर होने वाले जल, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे जैव-भूरासायनिक चक्रों को प्रभावित कर सकती हैं। प्राकृतिक चक्रों में होने वाले बड़े परिवर्तन पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करते हैं।

  • जीवाश्म ईंधनों का दहन: वायुमंडल में CO2 की मात्रा बढ़ाता है।
  • वनोन्मूलन: कार्बन अवशोषण और प्रकाश संश्लेषण को कम करता है।
  • उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग: अतिरिक्त नाइट्रोजन को जल निकायों तक पहुँचा सकता है।
  • औद्योगिक एवं वाहन उत्सर्जन: वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न कर सकते हैं।
  • असतत उपभोग: प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाता है और पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करता है।

जीवाश्म ईंधन और बढ़ता CO2

कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक दहन से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में पहुँचती है। इससे कार्बन चक्र का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है।

वायुमंडलीय CO2 की अधिकता हरितगृह प्रभाव को बढ़ाती है, जिससे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। 

महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification)

वायुमंडल में CO2 की मात्रा बढ़ने पर महासागर अधिक CO2 अवशोषित करते हैं। इसके कारण समुद्री जल की अम्लीयता बढ़ सकती है। इस प्रक्रिया को महासागरीय अम्लीकरण कहते हैं।

महासागरीय अम्लीकरण के प्रभाव

  • समुद्री जल के रासायनिक संतुलन में परिवर्तन होता है।
  • सूक्ष्म प्लवक प्रभावित हो सकते हैं।
  • प्रवाल भित्तियों को खतरा हो सकता है।
  • समुद्री पारितंत्र प्रभावित हो सकते हैं।
  • समुद्री जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

गर्म महासागर और CO2

गर्म महासागरीय जल की CO2 को अवशोषित करने की क्षमता कम हो सकती है। इससे महासागर की प्राकृतिक कार्बन भंडारण क्षमता प्रभावित हो सकती है। 

प्राकृतिक कार्बन अवशोषक (Carbon Sinks)

परिभाषा: वे प्राकृतिक तंत्र जो वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके कार्बन को लंबे समय तक संचित करते हैं, प्राकृतिक कार्बन अवशोषक कहलाते हैं।

मुख्य उदाहरण: वन और महासागर।

वन प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से CO2 को अवशोषित करते हैं, जबकि महासागर बड़ी मात्रा में CO2 को अपने भीतर अवशोषित कर सकते हैं।

जीवाश्म ईंधनों के दहन और वनोन्मूलन के कारण ये प्राकृतिक कार्बन अवशोषक दबाव में आ रहे हैं। 

कृषि और नाइट्रोजन चक्र पर प्रभाव

कृषि में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग पौधों को आवश्यक नाइट्रोजन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। लेकिन उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण के लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है।

अतिरिक्त नाइट्रोजन नाइट्रेट के रूप में नदियों और झीलों में पहुँच सकती है। इससे जल में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है और शैवाल की अत्यधिक वृद्धि हो सकती है।

सुपोषण (Eutrophication)

परिभाषा: जल निकाय में नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों की अत्यधिक मात्रा पहुँचने के कारण शैवाल की अत्यधिक वृद्धि और उसके परिणामस्वरूप जल में ऑक्सीजन की कमी होने की प्रक्रिया को सुपोषण (Eutrophication) कहते हैं।

सुपोषण की प्रक्रिया

अत्यधिक उर्वरक → नाइट्रेट जल में पहुँचना → पोषक तत्वों की अधिकता → शैवाल की अत्यधिक वृद्धि → शैवाल प्रस्फुटन → जल में O2 की कमी → मछलियों की मृत्यु

सुपोषण के प्रभाव

  • जल में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि होती है।
  • जल में घुली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है।
  • मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु हो सकती है।
  • जल निकायों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  • तटीय मत्स्य संसाधनों को भी खतरा हो सकता है।

इस प्रकार कृषि में उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग नाइट्रोजन चक्र को प्रभावित करके जलमंडल और जैवमंडल दोनों पर प्रभाव डाल सकता है। 

वनोन्मूलन (Deforestation)

परिभाषा: वनों को बड़े पैमाने पर काटकर वन क्षेत्र को कम करने की प्रक्रिया को वनोन्मूलन कहते हैं।

वन पृथ्वी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे कार्बन का भंडारण करते हैं, प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जल चक्र में योगदान देते हैं, मिट्टी को बाँधकर रखते हैं और अनेक जीवों को आवास प्रदान करते हैं।

वनोन्मूलन का ऑक्सीजन चक्र पर प्रभाव

वनों की कटाई से प्रकाश संश्लेषण की मात्रा कम होती है। इससे वातावरण में ऑक्सीजन की पुनःपूर्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। साथ ही CO2 को अवशोषित करने की क्षमता भी कम होती है।

वनोन्मूलन → कम प्रकाश संश्लेषण → कम CO2 अवशोषण + कम O2 उत्पादन

वनोन्मूलन का कार्बन चक्र पर प्रभाव

वनों में बड़ी मात्रा में कार्बन संचित रहता है। पेड़ों की कटाई से इस कार्बन भंडारण क्षमता में कमी आती है। यदि काटे गए पेड़ों को जलाया जाए या उनका अपघटन हो, तो संचित कार्बन CO2 के रूप में वायुमंडल में पहुँच सकता है।

इस प्रकार वनोन्मूलन कार्बन चक्र के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

वनोन्मूलन का जल चक्र पर प्रभाव

पेड़ वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से वायुमंडल में जलवाष्प पहुँचाते हैं। वनों की कटाई से वाष्पोत्सर्जन कम हो सकता है और स्थानीय वर्षा प्रभावित हो सकती है।

वनोन्मूलन → वाष्पोत्सर्जन में कमी → वायुमंडल में कम जलवाष्प → स्थानीय वर्षा में कमी की संभावना

वनोन्मूलन और मिट्टी का अपरदन

पेड़ों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से बाँधकर रखती हैं। जब पेड़ों को काट दिया जाता है, तो मिट्टी का प्राकृतिक संरक्षण कम हो जाता है और वर्षा या बहते जल के कारण मिट्टी का अपरदन बढ़ सकता है।

वनोन्मूलन → जड़ों की कमी → मिट्टी का बंधन कम → मिट्टी का अपरदन बढ़ना

वनोन्मूलन और जैव विविधता

वन अनेक पौधों, जन्तुओं और अन्य जीवों के प्राकृतिक आवास होते हैं। वनों की कटाई से इन जीवों के पर्यावास नष्ट या छोटे हो सकते हैं। परिणामस्वरूप अनेक प्रजातियाँ अपना प्राकृतिक आवास खो सकती हैं और जैव विविधता में कमी आ सकती है। 

वनोन्मूलन के प्रमुख प्रभाव — एक नजर में

  • कार्बन चक्र: CO2 अवशोषण की क्षमता में कमी।
  • ऑक्सीजन चक्र: प्रकाश संश्लेषण में कमी।
  • जल चक्र: वाष्पोत्सर्जन में कमी और स्थानीय वर्षा पर प्रभाव।
  • भूमंडल: मिट्टी का अपरदन बढ़ना।
  • जैवमंडल: जीवों के पर्यावास का नुकसान।
  • जैव विविधता: प्रजातियों की संख्या और विविधता में कमी।

वाहनों का उत्सर्जन और वायु प्रदूषण

वाहनों से निकलने वाला धुआँ विभिन्न प्रदूषकों को वायुमंडल में छोड़ता है। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ये प्रदूषक रासायनिक अभिक्रियाएँ कर सकते हैं और वायुमंडल की निचली परत में धूम-कुहरा (smog) बना सकते हैं।

निचले वायुमंडल में बनने वाली ओजोन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। यहाँ ओजोन की ऊँचाई और स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है—समतापमंडल की ओजोन UV किरणों से रक्षा करती है, जबकि निचले वायुमंडल की ओजोन प्रदूषक के रूप में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। 

ऊपरी और निचली वायुमंडलीय ओजोन में अंतर

आधार समतापमंडलीय ओजोन निचले वायुमंडल की ओजोन
स्थान समतापमंडल वायुमंडल की निचली परत
भूमिका UV किरणों को रोककर जीवन की रक्षा वायु प्रदूषक
प्रभाव जीवन के लिए लाभकारी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

मानवीय गतिविधियों के व्यापक प्रभाव

मानवीय गतिविधियों का प्रभाव पृथ्वी के किसी एक मंडल तक सीमित नहीं रहता। एक परिवर्तन कई मंडलों में प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

जीवाश्म ईंधन → CO2 वृद्धि → हरितगृह प्रभाव → जलवायु परिवर्तन

अधिक CO2 → महासागरीय CO2 अवशोषण → महासागरीय अम्लीकरण → समुद्री पारितंत्र पर प्रभाव

अधिक उर्वरक → नाइट्रेट का जल में प्रवेश → सुपोषण → O2 की कमी → जलीय जीवों की मृत्यु

वनोन्मूलन → कम प्रकाश संश्लेषण + कम वाष्पोत्सर्जन + अधिक अपरदन + आवास का नुकसान

पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन की पुनर्स्थापना

मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न पर्यावरणीय दबाव को कम करने के लिए स्थानीय प्रयासों के साथ-साथ वैश्विक सहयोग भी आवश्यक है। प्राकृतिक प्रणालियों की रक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास है जिसने ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैश्विक सहयोग के माध्यम से ओजोन परत के सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 

ऊर्जा और संसाधन संरक्षण

पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  • ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग।
  • सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना।
  • वृक्षारोपण और वनों का संरक्षण।
  • जल का संरक्षण।
  • सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना।
  • अनावश्यक अपशिष्ट को कम करना।
  • वस्तुओं का पुनः उपयोग करना।
  • पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा देना।

पाठ में भारत द्वारा वृक्षारोपण, सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने जैसे प्रयासों का उल्लेख किया गया है।

Mission LiFE

Mission LiFE का पूरा नाम Lifestyle for Environment है। यह भारत के नेतृत्व में चलने वाली एक वैश्विक पहल है, जिसे 2021 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। 

Mission LiFE के प्रमुख विचार

  • ऊर्जा की बचत: आवश्यकता के अनुसार ऊर्जा का उपयोग करना।
  • संसाधनों का संरक्षण: जल, भोजन और ऊर्जा जैसे संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
  • कम अपशिष्ट: अनावश्यक कचरे को कम करना।
  • पुनः उपयोग: वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनका दोबारा उपयोग करना।
  • पुनर्चक्रण: उपयोग की गई सामग्री को पुनर्चक्रित करना।
  • पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली: दैनिक जीवन में ऐसे विकल्प अपनाना जिनसे पर्यावरण पर कम दबाव पड़े।

व्यक्ति की भूमिका

पृथ्वी की रक्षा केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे परिवर्तन करके पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में योगदान दे सकता है।

  • बिजली और ईंधन की अनावश्यक खपत कम करना।
  • जल को व्यर्थ न बहाना।
  • भोजन की बर्बादी कम करना।
  • एकल-उपयोग वाली वस्तुओं का कम उपयोग करना।
  • वस्तुओं का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण करना।
  • पेड़-पौधों का संरक्षण करना।
  • सार्वजनिक परिवहन या साझा परिवहन को प्राथमिकता देना।
  • संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।

पृथ्वी तंत्र में व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास

पृथ्वी एक परस्पर संबद्ध तंत्र है। इसलिए व्यक्तिगत व्यवहार में परिवर्तन का सामूहिक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है। संसाधनों की बचत, प्रदूषण में कमी, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और सतत जीवनशैली अपनाने जैसे प्रयास मिलकर पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में सहायता करते हैं। 

पूरे Chapter का Final Concept Map

सूर्य → ऊर्जा → पृथ्वी का असमान ऊष्मीकरण → तापमान अंतर → वायुदाब अंतर → पवन → महासागरीय धाराएँ → जलवायु

जल → वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → अपवाह/भूजल → महासागर → जल चक्र

CO2 → प्रकाश संश्लेषण → पौधे → जन्तु → श्वसन/अपघटन → CO2

N2 → स्थिरीकरण → अमोनिया → नाइट्रीकरण → नाइट्रेट → पौधे → जन्तु → अपघटन → विनाइट्रीकरण → N2

प्रकाश संश्लेषण → O2 उत्पादन ↔ श्वसन/दहन → O2 उपयोग

मानवीय गतिविधियाँ → प्राकृतिक चक्रों में परिवर्तन → पर्यावरणीय समस्याएँ → संरक्षण + सतत जीवनशैली → संतुलन की पुनर्स्थापना

Exam Booster

  • मानवीय गतिविधियाँ कार्बन चक्र को कैसे प्रभावित करती हैं? — जीवाश्म ईंधनों के दहन और वनोन्मूलन से वायुमंडलीय CO2 बढ़ सकती है।
  • महासागरीय अम्लीकरण क्या है? — महासागर द्वारा अधिक CO2 अवशोषित करने के कारण समुद्री जल की अम्लीयता बढ़ने की प्रक्रिया।
  • प्राकृतिक कार्बन अवशोषक कौन-से हैं? — मुख्यतः वन और महासागर।
  • सुपोषण क्या है? — जल में पोषक तत्वों की अत्यधिक मात्रा के कारण शैवाल की अत्यधिक वृद्धि और ऑक्सीजन की कमी होने की प्रक्रिया।
  • सुपोषण का जलीय जीवों पर क्या प्रभाव पड़ता है? — जल में ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु हो सकती है।
  • वनोन्मूलन से कार्बन चक्र कैसे प्रभावित होता है? — CO2 को अवशोषित करने और कार्बन को संचित करने की वन की क्षमता घट जाती है।
  • वनोन्मूलन जल चक्र को कैसे प्रभावित करता है? — वाष्पोत्सर्जन कम होने से स्थानीय वर्षा प्रभावित हो सकती है।
  • वनोन्मूलन से मिट्टी का अपरदन क्यों बढ़ता है? — पेड़ों की जड़ों द्वारा मिट्टी को बाँधकर रखने की क्षमता कम हो जाती है।
  • वनोन्मूलन जैव विविधता को कैसे प्रभावित करता है? — अनेक जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाते हैं, जिससे जैव विविधता घट सकती है।
  • निचली वायुमंडलीय ओजोन हानिकारक क्यों है? — यह वायु प्रदूषक है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
  • समतापमंडलीय ओजोन और निचली वायुमंडलीय ओजोन में क्या अंतर है? — समतापमंडलीय ओजोन UV किरणों से रक्षा करती है, जबकि निचली वायुमंडलीय ओजोन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्रदूषक हो सकती है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का क्या महत्त्व है? — इसने ओजोन परत के संरक्षण और सुधार की दिशा में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दिया।
  • पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए कौन-से उपाय आवश्यक हैं? — ऊर्जा और संसाधनों का संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, सतत कृषि, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण।
  • Mission LiFE क्या है? — Lifestyle for Environment; पर्यावरण-अनुकूल और संसाधन-संरक्षण वाली जीवनशैली को बढ़ावा देने वाली वैश्विक पहल।
  • व्यक्ति पृथ्वी के संरक्षण में कैसे योगदान दे सकता है? — ऊर्जा, जल और भोजन की बचत करके तथा अपशिष्ट कम करके, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण अपनाकर।
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