Chapter-पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन
सौर विकिरण, अल्बिडो और असमान ऊष्मीकरण
अध्याय 13. पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन
सौर विकिरण, अल्बिडो और असमान ऊष्मीकरण
पृथ्वी की सतह तक पहुँचने वाला सौर विकिरण विभिन्न पदार्थों द्वारा अलग-अलग मात्रा में अवशोषित और परावर्तित किया जाता है। इसी कारण पृथ्वी की अलग-अलग सतहें अलग-अलग दर से गर्म होती हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी के तापमान, वायुमंडलीय परिस्थितियों और जलवायु को प्रभावित करती है।
सौर विकिरण और पृथ्वी की सतह की अंतःक्रिया
सूर्य से आने वाला विकिरण जब पृथ्वी की सतह तक पहुँचता है, तो उसका कुछ भाग सतह द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है और कुछ भाग परावर्तित हो जाता है। अलग-अलग पदार्थों की सौर विकिरण को अवशोषित करने और परावर्तित करने की क्षमता अलग-अलग होती है।
- अधिक अवशोषण: सतह अधिक ऊर्जा ग्रहण करती है और अधिक गर्म होती है।
- अधिक परावर्तन: सतह कम ऊर्जा अवशोषित करती है और अपेक्षाकृत ठंडी रहती है।
- गहरे रंग की सतह: सौर प्रकाश का अधिक अवशोषण करती है।
- हल्के रंग की सतह: सौर प्रकाश का अधिक परावर्तन करती है।
उदाहरण के लिए, गहरे रंग की सड़कें जल्दी गर्म हो जाती हैं, जबकि हल्के रंग की सतहें अपेक्षाकृत कम गर्म होती हैं। इसी प्रकार गर्मियों में गहरे रंग के कपड़े अधिक गर्म महसूस होते हैं, जबकि सफेद या हल्के रंग के कपड़े अपेक्षाकृत कम गर्म होते हैं। :contentReference[oaicite:2]{index=2}
अल्बिडो (Albedo)
परिभाषा: किसी सतह द्वारा प्राप्त सौर विकिरण के परावर्तित किए गए भाग को अल्बिडो कहते हैं।
अल्बिडो शब्द लैटिन भाषा के शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ धवलता या whiteness है।
उच्च अल्बिडो
जिन सतहों का अल्बिडो अधिक होता है, वे आने वाले सौर विकिरण का बड़ा भाग परावर्तित करती हैं। इसलिए वे अपेक्षाकृत कम गर्म होती हैं।
उदाहरण: हिम और बर्फ की सतहों का अल्बिडो अधिक होता है।
निम्न अल्बिडो
जिन सतहों का अल्बिडो कम होता है, वे कम विकिरण परावर्तित करती हैं और अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित करती हैं। इसलिए वे अपेक्षाकृत अधिक गर्म होती हैं।
उदाहरण: काली मिट्टी और महासागरीय जल का अल्बिडो अपेक्षाकृत कम होता है। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
कुछ सतहों का अल्बिडो
| सतह | अल्बिडो | परिणाम |
|---|---|---|
| हिम | 0.80–0.90 | अधिक परावर्तन, कम ऊष्मीकरण |
| बर्फ | 0.50–0.70 | अधिक परावर्तन |
| संदलित चट्टानें | 0.25–0.30 | मध्यम परावर्तन |
| हल्के रंग की मिट्टी | अपेक्षाकृत अधिक | अधिक परावर्तन |
| काली मिट्टी | अपेक्षाकृत कम | अधिक अवशोषण |
| महासागरीय जल | अपेक्षाकृत कम | अधिक अवशोषण |
हिम और बर्फ का अल्बिडो
हिम और बर्फ का अल्बिडो अधिक होने के कारण वे सूर्य से आने वाले विकिरण का बड़ा भाग वापस परावर्तित कर देते हैं। इसलिए ध्रुवीय प्रदेश बहुत ठंडे रहते हैं।
इसके विपरीत, काली मिट्टी और महासागरीय जल का अल्बिडो कम होने के कारण वे अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित करते हैं और अपेक्षाकृत अधिक गर्म रहते हैं। :contentReference[oaicite:4]{index=4}
पृथ्वी की सतह द्वारा ऊष्मा का विकिरण
सभी वस्तुएँ ऊष्मा का विकिरण करती हैं। पृथ्वी की सतह भी सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को अवशोषित करने के बाद ऊष्मा के रूप में ऊर्जा को वापस विकिरित करती है।
इमारतों में उपयोग होने वाली अलग-अलग सामग्रियाँ ऊष्मा को अलग-अलग मात्रा में अवशोषित और पुनः विकिरित करती हैं। कंक्रीट जैसी सतहें ऊष्मा को अधिक समय तक संचित रख सकती हैं, जबकि मिट्टी और लकड़ी से बने पारंपरिक घर अपेक्षाकृत कम ऊष्मा पुनः विकिरित करते हैं। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव
परिभाषा: शहरों का अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म होना शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) कहलाता है।
शहर अधिक गर्म क्यों होते हैं?
- कंक्रीट और डामर: ये सतहें सौर विकिरण को अवशोषित करके ऊष्मा संचित करती हैं।
- इमारतें: इस्पात, कंक्रीट और ईंटों से बनी इमारतें ऊष्मा को अवशोषित और पुनः विकिरित करती हैं।
- सड़कें: डामर और कंक्रीट से बनी सड़कें शहर में ऊष्मा बढ़ाने में योगदान करती हैं।
- वनस्पति की कमी: शहरों में पेड़-पौधों की कमी के कारण प्राकृतिक शीतलन कम हो जाता है।
- पादप वाष्पोत्सर्जन: ग्रामीण क्षेत्रों और वनों में वनस्पति वाष्पोत्सर्जन तथा छाया के माध्यम से वातावरण को अपेक्षाकृत ठंडा रखने में सहायता करती है।
शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव यह दिखाता है कि मनुष्यों द्वारा भूमि के उपयोग में परिवर्तन स्थानीय जलवायु को प्रभावित कर सकता है। इससे वातानुकूलन की आवश्यकता बढ़ती है और शहरी पारितंत्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। :contentReference[oaicite:6]{index=6}
अक्षांश और पृथ्वी का आकार
पृथ्वी गोलाकार है। इसके कारण सूर्य की किरणें पृथ्वी के विभिन्न अक्षांशों पर अलग-अलग कोणों से पड़ती हैं। इससे पृथ्वी की सतह पर सौर ऊर्जा का वितरण समान नहीं रहता।
भूमध्यरेखीय क्षेत्र
भूमध्य रेखा के निकट सूर्य का विकिरण अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र में केंद्रित रहता है। इसलिए वहाँ प्रति इकाई क्षेत्र अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त होती है और ये क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक गर्म रहते हैं।
ध्रुवीय क्षेत्र
ध्रुवों की ओर सूर्य की किरणें बड़े क्षेत्र में फैल जाती हैं। इसलिए प्रति इकाई क्षेत्र प्राप्त सौर ऊर्जा कम होती है और ध्रुवीय प्रदेश अपेक्षाकृत ठंडे रहते हैं। :contentReference[oaicite:7]{index=7}
असमान ऊष्मीकरण
परिभाषा: पृथ्वी की सतह के विभिन्न भागों को सौर ऊर्जा समान मात्रा में प्राप्त न होने के कारण उत्पन्न तापमान के अंतर को असमान ऊष्मीकरण कहते हैं।
पृथ्वी के गोलाकार आकार के कारण सूर्य की किरणें विभिन्न अक्षांशों पर अलग-अलग कोणों से पड़ती हैं। इसी कारण भूमध्यरेखीय क्षेत्रों और ध्रुवीय क्षेत्रों के तापमान में अंतर पाया जाता है।
पृथ्वी का अक्षीय झुकाव और ऋतुएँ
पृथ्वी अपनी घूर्णन धुरी पर झुकी हुई है और सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है। पृथ्वी की गोलाकार आकृति, उसकी धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा ऋतुओं में परिवर्तन उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी कारण वर्ष के अलग-अलग समय में पृथ्वी के विभिन्न भागों को मिलने वाली सौर ऊर्जा की मात्रा और दिन की अवधि में परिवर्तन होता है। :contentReference[oaicite:8]{index=8}
असमान ऊष्मीकरण का महत्त्व
पृथ्वी की सतह का असमान ऊष्मीकरण केवल तापमान के अंतर तक सीमित नहीं है। इससे वायुमंडलीय परिस्थितियाँ प्रभावित होती हैं और आगे चलकर वैश्विक पवन तथा महासागरीय धाराओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
असमान ऊष्मीकरण → तापमान में अंतर → वायुमंडलीय परिसंचरण → पवन → महासागरीय धाराएँ
Concept Builder
सौर विकिरण → सतह पर पड़ता है → कुछ अवशोषित + कुछ परावर्तित
गहरा रंग → अधिक अवशोषण → अधिक गर्म
हल्का रंग → अधिक परावर्तन → अपेक्षाकृत ठंडा
उच्च अल्बिडो → अधिक परावर्तन → कम ऊष्मीकरण
निम्न अल्बिडो → अधिक अवशोषण → अधिक ऊष्मीकरण
भूमध्य रेखा → ऊर्जा छोटे क्षेत्र में केंद्रित → अधिक गर्म
ध्रुव → ऊर्जा बड़े क्षेत्र में फैली → अधिक ठंडे
असमान ऊष्मीकरण → तापमान अंतर → पवन और महासागरीय धाराएँ
शहर → कंक्रीट + डामर + कम वनस्पति → अधिक ऊष्मा → Urban Heat Island
Exam Booster
- अल्बिडो क्या है? — किसी सतह द्वारा प्राप्त सौर विकिरण के परावर्तित भाग को अल्बिडो कहते हैं।
- उच्च अल्बिडो वाली सतह कैसी होती है? — वह अधिक सौर विकिरण परावर्तित करती है और अपेक्षाकृत कम गर्म होती है।
- निम्न अल्बिडो वाली सतह कैसी होती है? — वह अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित करती है और अपेक्षाकृत अधिक गर्म होती है।
- हिम और बर्फ ठंडे क्यों रहते हैं? — उनका अल्बिडो अधिक होता है, इसलिए वे सौर विकिरण का बड़ा भाग परावर्तित कर देते हैं।
- काली मिट्टी और महासागरीय जल अपेक्षाकृत अधिक गर्म क्यों होते हैं? — उनका अल्बिडो कम होने के कारण वे अधिक सौर विकिरण अवशोषित करते हैं।
- शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव क्या है? — शहरों का आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म होना।
- शहरों में ऊष्मा द्वीप प्रभाव के प्रमुख कारण क्या हैं? — कंक्रीट, इस्पात, ईंट, डामर जैसी सतहों का अधिक ऊष्मा अवशोषण तथा वनस्पति की कमी।
- भूमध्यरेखीय प्रदेश ध्रुवीय प्रदेशों से अधिक गर्म क्यों रहते हैं? — भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा छोटे क्षेत्र में केंद्रित होती है, जबकि ध्रुवीय क्षेत्रों में वही ऊर्जा बड़े क्षेत्र में फैल जाती है।
- पृथ्वी का गोलाकार आकार असमान ऊष्मीकरण में कैसे योगदान देता है? — सूर्य की किरणें अलग-अलग अक्षांशों पर अलग-अलग कोणों से पड़ती हैं।
- असमान ऊष्मीकरण का एक प्रमुख प्रभाव क्या है? — यह पृथ्वी पर तापमान में अंतर उत्पन्न करता है, जो वैश्विक पवन और महासागरीय धाराओं को संचालित करने में योगदान देता है।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
3. सौर विकिरण, अल्बिडो और असमान ऊष्मीकरण
4. वायुमंडल, उसकी परतें, ओजोन और हरितगृह प्रभाव
5. ग्रहीय पवन और महासागरीय धाराएँ
6. जैव-भूरासायनिक चक्र जल चक्र और कार्बन चक्र
7. नाइट्रोजन चक्र और ऑक्सीजन चक्र
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