Chapter-ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि का परावर्तन
अध्याय 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि तरंगें विभिन्न सतहों से टकराकर वापस लौट सकती हैं। ध्वनि के इस परावर्तन के कारण प्रतिध्वनि और अनुरणन जैसी घटनाएँ उत्पन्न होती हैं। इस भाग में हम ध्वनि के परावर्तन, प्रतिध्वनि तथा अनुरणन को समझेंगे और यह जानेंगे कि अलग-अलग सतहें ध्वनि को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।
ध्वनि का परावर्तन
परिभाषा: जब ध्वनि तरंगें किसी ठोस या द्रव जैसी बाधा से टकराकर वापस लौटती हैं, तो इस घटना को ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) कहते हैं।
ध्वनि तरंगें किसी परावर्तक सतह से टकराने के बाद वापस उसी माध्यम में लौट सकती हैं। ध्वनि का परावर्तन प्रकाश के परावर्तन के समान नियमों का पालन करता है।
ध्वनि के परावर्तन के नियम
ध्वनि के परावर्तन में आपतित ध्वनि और परावर्तित ध्वनि की दिशाएँ परावर्तक सतह के अभिलंब के साथ समान कोण बनाती हैं।
- आपतित ध्वनि, अभिलंब और परावर्तित ध्वनि एक ही तल में स्थित होते हैं।
- आपतन कोण = परावर्तन कोण।
- आपतन कोण और परावर्तन कोण दोनों को अभिलंब के सापेक्ष मापा जाता है।
- ध्वनि का परावर्तन किसी उपयुक्त कठोर सतह से स्पष्ट रूप से देखा और सुना जा सकता है।
परावर्तक सतह का प्रभाव
सभी सतहें ध्वनि को समान प्रकार से परावर्तित नहीं करतीं। सतह की प्रकृति के अनुसार ध्वनि का परावर्तन, अवशोषण या प्रकीर्णन अलग-अलग हो सकता है।
- कठोर और चिकनी सतहें: ध्वनि को अच्छी तरह परावर्तित करती हैं।
- मुलायम सतहें: ध्वनि को अधिक मात्रा में अवशोषित कर सकती हैं।
- खुरदरी सतहें: ध्वनि को विभिन्न दिशाओं में प्रकीर्णित कर सकती हैं।
इसी कारण कठोर और चिकनी सतहों से उत्पन्न परावर्तित ध्वनि अधिक स्पष्ट सुनाई देती है, जबकि मोटे कपड़े के पर्दे जैसी मुलायम सतहें ध्वनि को अवशोषित कर लेती हैं।
प्रतिध्वनि (Echo)
परिभाषा: किसी दूर स्थित वस्तु की कठोर सतह से परावर्तित होकर वापस आने वाली ध्वनि, जो मूल ध्वनि से अलग सुनाई देती है, प्रतिध्वनि (Echo) कहलाती है।
जब हम किसी पर्वत, खड़ी चट्टान या लंबे मार्ग के पास चिल्लाते हैं, तो कुछ समय बाद अपनी आवाज फिर सुनाई दे सकती है। यह परावर्तित ध्वनि प्रतिध्वनि कहलाती है।
प्रतिध्वनि हर जगह क्यों नहीं सुनाई देती?
प्रतिध्वनि तभी स्पष्ट रूप से सुनाई देती है जब मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के कान तक पहुँचने के बीच पर्याप्त समयांतर हो। यदि परावर्तित ध्वनि बहुत जल्दी वापस आ जाए, तो मस्तिष्क उसे मूल ध्वनि से अलग नहीं कर पाता।
मनुष्य सामान्यतः दो ध्वनियों को अलग-अलग तभी सुन सकता है जब उनके बीच का समयांतर कम-से-कम 0.1 सेकंड हो। यदि समयांतर 0.1 सेकंड से कम हो, तो दोनों ध्वनियाँ स्पष्ट रूप से अलग नहीं पहचानी जातीं।
प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी
यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s हो और प्रतिध्वनि सुनने के लिए न्यूनतम समयांतर 0.1 s हो, तो इस समय में ध्वनि द्वारा तय कुल दूरी होगी:
दूरी = चाल × समय
= 340 × 0.1
= 34 m
यह 34 m ध्वनि द्वारा परावर्तक सतह तक जाने और वापस आने की कुल दूरी है। इसलिए परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी:
न्यूनतम दूरी = 34 ÷ 2 = 17 m
अतः वायु में 340 m/s की ध्वनि की चाल मानने पर स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह लगभग 17 m या उससे अधिक दूर होनी चाहिए।
प्रतिध्वनि से दूरी ज्ञात करने का सूत्र
ध्वनि परावर्तक सतह तक जाकर वापस आती है, इसलिए ध्वनि द्वारा तय कुल दूरी वास्तविक दूरी की दोगुनी होती है।
परावर्तक सतह से दूरी = (ध्वनि की चाल × समय) ÷ 2
d = vt/2
जहाँ:
- d = परावर्तक सतह की दूरी
- v = ध्वनि की चाल
- t = प्रतिध्वनि सुनाई देने में लगा कुल समय
उदाहरण
एक खाली गलियारे में ताली बजाने के 0.5 सेकंड बाद प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s है, तो दीवार से दूरी ज्ञात कीजिए।
दिया गया:
v = 340 m/s
t = 0.5 s
सूत्र:
d = vt/2
हल:
d = (340 × 0.5)/2
d = 170/2
d = 85 m
अतः दीवार की दूरी 85 m है।
प्रतिध्वनि और सतह की प्रकृति
कठोर और चिकनी सतहें ध्वनि को अधिक प्रभावी ढंग से परावर्तित करती हैं। इसलिए ऐसी सतहों से परावर्तित ध्वनि स्पष्ट सुनाई देती है। इसके विपरीत मोटे कपड़े के पर्दे जैसी मुलायम सतहें ध्वनि को अवशोषित कर लेती हैं, इसलिए स्पष्ट प्रतिध्वनि कम सुनाई देती है। खुरदरी सतहें ध्वनि को कई दिशाओं में प्रकीर्णित कर सकती हैं।
अनुरणन (Reverberation)
परिभाषा: किसी बड़े हॉल या सभागार में ध्वनि के दीवारों और अन्य सतहों से अनेक बार परावर्तित होने के कारण स्रोत के बंद हो जाने के बाद भी कुछ समय तक ध्वनि सुनाई देती रहती है। इस घटना को अनुरणन (Reverberation) कहते हैं।
अनुरणन में अलग-अलग सतहों से परावर्तित ध्वनियाँ बहुत कम समयांतर में हमारे कानों तक पहुँचती हैं। यदि इन परावर्तित ध्वनियों के बीच का समयांतर लगभग 0.05 सेकंड से कम हो, तो वे अलग-अलग प्रतिध्वनियों के रूप में स्पष्ट सुनाई नहीं देतीं, बल्कि ध्वनि कुछ समय तक बनी हुई महसूस होती है।
प्रतिध्वनि और अनुरणन में अंतर
| आधार | प्रतिध्वनि | अनुरणन |
|---|---|---|
| ध्वनि | परावर्तित ध्वनि अलग से सुनाई देती है। | परावर्तित ध्वनियाँ लगातार बनी हुई प्रतीत होती हैं। |
| समयांतर | लगभग 0.1 s या अधिक | परावर्तित ध्वनियों के बीच बहुत कम समयांतर |
| मुख्य कारण | दूर स्थित परावर्तक सतह से ध्वनि का लौटना | कई सतहों से ध्वनि का बार-बार परावर्तन |
| उदाहरण | पर्वत के पास चिल्लाने पर आवाज का वापस सुनाई देना | बड़े हॉल में ध्वनि का कुछ समय तक बने रहना |
अनुरणन का प्रभाव
उचित मात्रा में अनुरणन सभागार में संगीत और भाषण को प्रभावी बना सकता है। लेकिन यदि अनुरणन बहुत अधिक हो जाए, तो अलग-अलग ध्वनियाँ आपस में मिल जाती हैं और भाषण या संगीत अस्पष्ट तथा विकृत सुनाई दे सकता है।
सभागारों में अनुरणन को नियंत्रित करना
आधुनिक सभागारों और बड़े कॉन्सर्ट हॉलों को वास्तुकला के अनुसार इस प्रकार बनाया जाता है कि उनमें उपयुक्त ध्वनि-परावर्तन और अनुरणन बना रहे। इससे श्रोता विभिन्न स्थानों से भाषण, संगीत तथा अन्य ध्वनियों को स्पष्ट रूप से सुन सकते हैं।
अनावश्यक अनुरणन को कम करने के लिए निम्नलिखित वस्तुओं का उपयोग किया जाता है:
- ध्वनि-अवशोषक पैनल
- गद्देदार कुर्सियाँ
- मोटे पर्दे
- मुलायम सतहें
- छिद्रयुक्त ध्वनि-अवशोषक सामग्री
ये वस्तुएँ अनावश्यक परावर्तन को कम करके ध्वनि को अधिक स्पष्ट बनाने में सहायता करती हैं।
वास्तुकला और ध्वनि
सभागारों और संगीत कक्षों की संरचना ध्वनि की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। दीवारों और छतों की उचित बनावट तथा ध्वनि-अवशोषक सामग्री का उपयोग करके ध्वनि को इस प्रकार नियंत्रित किया जाता है कि श्रोताओं तक स्पष्ट और संतुलित ध्वनि पहुँच सके।
गोल गुम्बद और ध्वनि
भारत सहित विश्व के कई पुराने वास्तुकारों ने ध्वनि के परावर्तन और अनुरणन को ध्यान में रखकर भवनों का निर्माण किया। कर्नाटक के बीजापुर स्थित गोल गुम्बज की मरमर श्रावी गैलरी इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। इसकी विशेष संरचना के कारण धीमी फुसफुसाहट भी विशाल गुंबद में कई बार सुनाई दे सकती है।
ध्वनि परावर्तन के दैनिक जीवन में उपयोग
- पर्वतों और बड़ी चट्टानों से आने वाली प्रतिध्वनि ध्वनि परावर्तन का उदाहरण है।
- बड़े सभागारों में ध्वनि की गुणवत्ता नियंत्रित करने के लिए परावर्तन और अनुरणन का उपयोग किया जाता है।
- ध्वनि के परावर्तन के सिद्धांत का उपयोग वस्तुओं का स्थान ज्ञात करने में किया जाता है।
- परावर्तित ध्वनि का उपयोग आगे चलकर प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण और सोनार जैसी तकनीकों में किया जाता है।
Concept Builder
ध्वनि का परावर्तन → परावर्तक सतह → ध्वनि का वापस लौटना → प्रतिध्वनि या अनुरणन।
यदि परावर्तित ध्वनि पर्याप्त समय बाद अलग से सुनाई दे, तो प्रतिध्वनि होती है। यदि अनेक परावर्तित ध्वनियाँ बहुत कम समयांतर में कान तक पहुँचती रहें, तो अनुरणन का अनुभव होता है।
Exam Booster
- ध्वनि का परावर्तन क्या है? — ध्वनि तरंगों का किसी बाधा से टकराकर वापस लौटना।
- ध्वनि परावर्तन के नियम क्या हैं? — आपतित ध्वनि, अभिलंब और परावर्तित ध्वनि एक ही तल में होते हैं तथा आपतन कोण और परावर्तन कोण समान होते हैं।
- प्रतिध्वनि क्या है? — परावर्तित ध्वनि का मूल ध्वनि से अलग सुनाई देना।
- प्रतिध्वनि सुनने के लिए न्यूनतम समयांतर कितना होना चाहिए? — लगभग 0.1 सेकंड।
- 340 m/s की चाल पर प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी कितनी होगी? — लगभग 17 m।
- प्रतिध्वनि से दूरी का सूत्र क्या है? — d = vt/2
- कठोर और चिकनी सतहें कैसी होती हैं? — वे ध्वनि को अच्छी तरह परावर्तित करती हैं।
- मुलायम सतहों का क्या प्रभाव होता है? — वे ध्वनि को अवशोषित कर सकती हैं।
- अनुरणन क्या है? — अनेक परावर्तनों के कारण स्रोत बंद होने के बाद भी कुछ समय तक ध्वनि का सुनाई देते रहना।
- अनुरणन कब होता है? — जब विभिन्न सतहों से परावर्तित ध्वनियाँ बहुत कम समयांतर में कान तक पहुँचती हैं।
- अत्यधिक अनुरणन का क्या प्रभाव होता है? — ध्वनि अस्पष्ट और विकृत सुनाई दे सकती है।
- सभागारों में ध्वनि-अवशोषक पैनल क्यों लगाए जाते हैं? — अनावश्यक ध्वनि परावर्तन और अनुरणन को कम करने के लिए।
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1. Chapter Review and Key Points
6. ध्वनि तरंगों के प्रमुख अभिलक्षण
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