ATP Logo Welcome to ATP Education
Advertisement
Advertisement

Chapter-ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 12, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 10 August 2026

ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग

Page 6 of 12

ध्वनि तरंगों के प्रमुख अभिलक्षण

अध्याय 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग

इस भाग में ध्वनि तरंग के प्रमुख अभिलक्षणों—तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, आवर्तकाल, आयाम, तीव्रता और ध्वनि की चाल—को समझेंगे। इनके बीच के संबंधों को सूत्रों और उदाहरणों की सहायता से समझना परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। 

ध्वनि तरंगों के प्रमुख अभिलक्षण

ध्वनि तरंग का वर्णन करने के लिए कुछ भौतिक राशियों का उपयोग किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, आवर्तकाल, आयाम और चाल शामिल हैं।

तरंगदैर्ध्य (Wavelength)

परिभाषा: दो क्रमागत संपीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी को ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य कहते हैं।

  • तरंगदैर्ध्य को λ (लैम्ब्डा) से दर्शाया जाता है।
  • इसका SI मात्रक मीटर (m) है।
  • अधिक तरंगदैर्ध्य वाली तरंग में संपीडन और विरलन एक-दूसरे से अधिक दूरी पर होते हैं।
  • कम तरंगदैर्ध्य वाली तरंग में संपीडन और विरलन पास-पास होते हैं।

आवृत्ति (Frequency)

परिभाषा: किसी निश्चित बिंदु पर एक इकाई समय में होने वाले पूर्ण घनत्व दोलनों की संख्या को ध्वनि तरंग की आवृत्ति कहते हैं।

  • आवृत्ति को सामान्यतः ν (न्यू) से दर्शाया जाता है।
  • इसका SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) है।
  • 1 Hz का अर्थ है—प्रति सेकंड 1 पूर्ण दोलन।
  • आवृत्ति अधिक होने पर प्रति सेकंड अधिक दोलन होते हैं। 

आवर्तकाल (Time Period)

परिभाषा: किसी निश्चित बिंदु पर घनत्व के एक पूर्ण दोलन को पूरा करने में लगने वाले समय को आवर्तकाल कहते हैं।

  • आवर्तकाल को T से दर्शाया जाता है।
  • इसका SI मात्रक सेकंड (s) है।
  • आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं।

सूत्र:

T = 1/ν

अर्थात आवृत्ति अधिक होने पर आवर्तकाल कम होता है और आवृत्ति कम होने पर आवर्तकाल अधिक होता है। 

आवृत्ति और आवर्तकाल का संबंध

आवृत्ति आवर्तकाल
अधिक कम
कम अधिक

उदाहरण: आवृत्ति और आवर्तकाल

यदि किसी निश्चित स्थान पर 2 सेकंड में 10 घनत्व दोलन होते हैं, तो:

आवृत्ति = दोलनों की संख्या / समय

ν = 10/2 = 5 Hz

अब,

T = 1/ν = 1/5 = 0.2 s

अतः ध्वनि तरंग की आवृत्ति 5 Hz और आवर्तकाल 0.2 s है। 

ध्वनि तरंग का आयाम और तीव्रता

आयाम (Amplitude)

परिभाषा: ध्वनि तरंग के संपीडन या विरलन में वायु के औसत घनत्व की तुलना में होने वाला अधिकतम घनत्व परिवर्तन आयाम कहलाता है।

  • घनत्व में परिवर्तन अधिक होने पर तरंग का आयाम अधिक होता है।
  • घनत्व में परिवर्तन कम होने पर आयाम कम होता है।
  • अधिक आयाम वाली ध्वनि तरंग अधिक ऊर्जा वहन करती है।
  • ध्वनि स्रोत को अधिक बल से कंपन कराने पर सामान्यतः आयाम बढ़ता है। 

तीव्रता (Intensity)

परिभाषा: ध्वनि के संचरण की दिशा के लंबवत प्रति इकाई क्षेत्रफल से प्रति इकाई समय में संचारित होने वाली ध्वनि ऊर्जा की मात्रा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं।

अधिक आयाम वाली ध्वनि तरंग अधिक ऊर्जा वहन करती है, इसलिए सामान्यतः उसका ऊर्जा-संचरण भी अधिक होता है। 

दूरी बढ़ने पर ध्वनि की तीव्रता

ध्वनि स्रोत से दूर जाने पर ध्वनि तरंग अधिक बड़े क्षेत्रफल में फैलती जाती है। ऊर्जा संरक्षित रहने के कारण समान ऊर्जा बड़े क्षेत्र में वितरित हो जाती है। इसलिए स्रोत से दूरी बढ़ने पर ध्वनि की तीव्रता कम होती जाती है। 

ध्वनि की चाल

परिभाषा: ध्वनि तरंग का कोई बिंदु, जैसे शिखर या गर्त, एकांक समय में जितनी दूरी तय करता है, उसे ध्वनि की चाल कहते हैं।

ध्वनि की चाल यह बताती है कि ध्वनि तरंग या उसमें उत्पन्न घनत्व-विक्षोभ माध्यम में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है। 

ध्वनि की चाल, तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति का संबंध

एक आवर्तकाल में ध्वनि तरंग द्वारा तय दूरी एक तरंगदैर्ध्य के बराबर होती है। इसलिए:

चाल = दूरी / समय

v = λ/T

क्योंकि:

T = 1/ν

अतः:

v = λν

महत्वपूर्ण सूत्र: v = λν

अर्थात ध्वनि की चाल = तरंगदैर्ध्य × आवृत्ति। 

माध्यम के अनुसार ध्वनि की चाल

ध्वनि की चाल उस माध्यम पर निर्भर करती है जिसमें वह संचरित हो रही है। सामान्यतः ध्वनि ठोसों में सबसे तेज, द्रवों में उससे कम और गैसों में सबसे धीमी गति से चलती है।

माध्यम लगभग ध्वनि की चाल
स्टील 5000 m/s
जल 1500 m/s
वायु 340 m/s

उदाहरण के लिए, जल में ध्वनि की चाल वायु की तुलना में लगभग 4 से 5 गुनी अधिक तथा ठोसों में सामान्यतः वायु की तुलना में 15 से 20 गुनी अधिक हो सकती है। 

तापमान और आर्द्रता का प्रभाव

वायु में ध्वनि की चाल तापमान और आर्द्रता पर भी निर्भर करती है। तापमान या आर्द्रता बढ़ने पर वायु में ध्वनि की चाल सामान्यतः बढ़ती है।

उदाहरण:

  • 0°C पर शुष्क वायु में ध्वनि की चाल लगभग 331 m/s होती है।
  • 22°C पर ध्वनि की चाल लगभग 344 m/s होती है।

अधिकांश सामान्य माध्यमों में ध्वनि की चाल स्रोत की आवृत्ति पर निर्भर नहीं करती। यदि स्रोत की आवृत्ति बदली जाए, तो उसी माध्यम में तरंगदैर्ध्य बदलता है, जबकि ध्वनि की चाल नियत रह सकती है। 

श्रव्य सीमा और तरंगदैर्ध्य का संबंध

वायु में ध्वनि की चाल 344 m/s लेते हुए मनुष्य की लगभग 20 Hz से 20 kHz की श्रवण सीमा के लिए तरंगदैर्ध्य ज्ञात किया जा सकता है।

20 Hz की ध्वनि

λ = v/ν

λ = 344/20 = 17.2 m

अतः 20 Hz की ध्वनि का तरंगदैर्ध्य लगभग 17.2 m है।

20 kHz की ध्वनि

20 kHz = 20,000 Hz

λ = 344/20,000 = 0.0172 m = 1.72 cm

अतः 20 kHz की ध्वनि का तरंगदैर्ध्य लगभग 1.72 cm है। 

तड़ित और गर्जन में समयांतर

बिजली चमकने के बाद गर्जन की ध्वनि कुछ समय बाद सुनाई देती है क्योंकि प्रकाश की चाल ध्वनि की चाल से बहुत अधिक होती है। इसलिए प्रकाश लगभग तुरंत दिखाई देता है, जबकि ध्वनि को हमारे कानों तक पहुँचने में समय लगता है।

यदि बिजली की चमक और गर्जन के बीच समयांतर 5 s हो और वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s हो, तो:

दूरी = चाल × समय

= 340 × 5 = 1700 m = 1.7 km

अतः तड़ित-पात का स्थान लगभग 1.7 km दूर है। 

ध्वनि की चाल और तरंगदैर्ध्य से आवृत्ति ज्ञात करना

यदि किसी माध्यम में ध्वनि की चाल और तरंगदैर्ध्य ज्ञात हो, तो आवृत्ति ज्ञात करने के लिए:

ν = v/λ

और आवर्तकाल:

T = 1/ν

उदाहरण

यदि स्टील में ध्वनि की चाल 5000 m/s और तरंगदैर्ध्य 50 m है, तो:

ν = 5000/50 = 100 Hz

अब:

T = 1/100 = 0.01 s

अतः आवृत्ति 100 Hz और आवर्तकाल 0.01 s है। 

Concept Builder

  • तरंगदैर्ध्य: दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी।
  • आवृत्ति: प्रति सेकंड होने वाले पूर्ण दोलनों की संख्या।
  • आवर्तकाल: एक पूर्ण दोलन में लगने वाला समय।
  • आयाम: औसत घनत्व की तुलना में अधिकतम घनत्व परिवर्तन।
  • तीव्रता: प्रति इकाई क्षेत्रफल और प्रति इकाई समय संचारित ध्वनि ऊर्जा।
  • चाल: तरंग द्वारा एकांक समय में तय की गई दूरी।
  • आवृत्ति और आवर्तकाल: एक-दूसरे के व्युत्क्रम हैं।
  • मुख्य संबंध: v = λν
  • आवर्तकाल का संबंध: T = 1/ν
  • आवृत्ति का संबंध: ν = v/λ
  • तरंगदैर्ध्य का संबंध: λ = v/ν

Exam Booster

  • प्रश्न: आवृत्ति बढ़ने पर आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
    उत्तर: आवर्तकाल घटेगा।
  • प्रश्न: ध्वनि की चाल किस माध्यम में सबसे अधिक होती है?
    उत्तर: सामान्यतः ठोसों में।
  • प्रश्न: ध्वनि की चाल का मुख्य सूत्र क्या है?
    उत्तर: v = λν
  • प्रश्न: 1 Hz का क्या अर्थ है?
    उत्तर: प्रति सेकंड एक पूर्ण दोलन।
  • प्रश्न: ध्वनि स्रोत से दूर जाने पर तीव्रता क्यों घटती है?
    उत्तर: ध्वनि ऊर्जा अधिक बड़े क्षेत्रफल में फैल जाती है।
  • प्रश्न: क्या माध्यम के कण ध्वनि तरंग के साथ आगे बढ़ते हैं?
    उत्तर: नहीं। वे अपनी माध्य स्थिति के आसपास कंपन करते हैं; ऊर्जा और विक्षोभ आगे बढ़ते हैं। :contentReference[oaicite:15]{index=15}
  • प्रश्न: 20 Hz की ध्वनि का 344 m/s की चाल पर तरंगदैर्ध्य कितना होगा?
    उत्तर: 17.2 m
  • प्रश्न: 20 kHz की ध्वनि का उसी चाल पर तरंगदैर्ध्य कितना होगा?
    उत्तर: 1.72 cm
Page 6 of 12

Class 9, all subjects CBSE Notes in hindi medium, cbse class 9 Science Exploration notes, class 9 Science Exploration notes hindi medium, cbse 9 Science Exploration cbse notes, class 9 Science Exploration revision notes, cbse class 9 Science Exploration study material, ncert class 9 science notes pdf, class 9 science exam preparation, cbse class 9 physics chemistry biology notes

Quick Access: | NCERT Solutions | New Syllabus

Quick Access: | CBSE Notes | New Syllabus

Quick link for study materials

×

Search ATP Education

क्या आप इस वेबसाइट पर कुछ खोज रहे हैं? अपना keyword लिखें और हम आपको सीधे आपके target page तक GOOGLE SEARCH के द्वारा पहुँचा देंगे।