Chapter-ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
सोनार के अनुप्रयोग
Chapter 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि केवल सुनने और संचार का माध्यम ही नहीं है, बल्कि आधुनिक विज्ञान में इसका उपयोग छिपी हुई वस्तुओं, प्राकृतिक घटनाओं, जीव-जंतुओं और दूर स्थित स्थानों का अध्ययन करने के लिए भी किया जाता है। पराश्रव्य तरंगों तथा विशेष ध्वनि-संवेदकों की सहायता से उन चीजों का भी अध्ययन किया जा सकता है जिन्हें सीधे देखना या सुनना संभव नहीं होता।
सोनार के अनुप्रयोग
सोनार में पराश्रव्य तरंगों को जल के भीतर भेजा जाता है। ये तरंगें किसी वस्तु से टकराकर वापस लौटती हैं। संकेत के जाने और वापस आने में लगे समय तथा जल में ध्वनि की चाल की सहायता से वस्तु की दूरी ज्ञात की जाती है।
सोनार का उपयोग समुद्र की गहराई मापने, पनडुब्बियों का पता लगाने तथा जल के भीतर स्थित वस्तुओं का पता लगाने में किया जाता है। पुस्तक में सोनार द्वारा भेजे गए पराश्रव्य संकेत के पनडुब्बी से परावर्तित होकर वापस आने की प्रक्रिया को उदाहरण के रूप में दिखाया गया है।
समुद्र की गहराई ज्ञात करना
उदाहरण: किसी समुद्री स्थान पर सोनार संकेत भेजने के 4 सेकंड बाद वापस प्राप्त होता है। समुद्री जल में ध्वनि की चाल 1500 m/s है। उस स्थान पर समुद्र की गहराई ज्ञात कीजिए।
दिया गया:
ध्वनि की चाल, v = 1500 m/s
कुल समय, t = 4 s
सोनार संकेत समुद्र की सतह से नीचे जाकर वापस आता है। इसलिए 4 सेकंड में तय की गई कुल दूरी समुद्र की गहराई की दोगुनी होगी।
कुल दूरी = चाल × समय
= 1500 × 4 = 6000 m
अतः समुद्र की गहराई:
गहराई = 6000/2 = 3000 m
उत्तर: समुद्र की गहराई 3000 m या 3 km है।
ध्वनि आधारित चौकसी
परिभाषा: विशिष्ट ध्वनियों को ध्वनि संवेदकों की सहायता से पहचानकर किसी वस्तु या गतिविधि की निगरानी करने की विधि को ध्वनि आधारित चौकसी कहा जाता है।
ड्रोन और विमान अपने मोटरों तथा इंजनों से विशेष प्रकार की ध्वनियाँ उत्पन्न करते हैं। जब कोई ड्रोन या विमान दिखाई नहीं देता, तब भी उसके द्वारा उत्पन्न विशिष्ट ध्वनि को संवेदकों की सहायता से पहचाना जा सकता है।
इस विधि का उपयोग रक्षा और बचाव के लिए वायु क्षेत्र के पर्यवेक्षण में किया जा सकता है।
ध्वनि द्वारा छिपी दुनिया का अध्ययन
आधुनिक तकनीक ने ध्वनि को मानव श्रवण सीमा से आगे जाकर विभिन्न स्थानों और प्राकृतिक घटनाओं की जानकारी प्राप्त करने का साधन बना दिया है। वैज्ञानिक विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न ध्वनियों और कंपन का अध्ययन करके ऐसी घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं जिन्हें सीधे देखना कठिन है।
मंगल ग्रह की ध्वनियाँ
अंतरिक्ष अन्वेषी यंत्रों द्वारा मंगल ग्रह पर उत्पन्न ध्वनियों को रिकॉर्ड किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्नत उपकरणों की सहायता से पृथ्वी से बहुत दूर स्थित ग्रहों पर होने वाली ध्वनि-संबंधी घटनाओं का भी अध्ययन किया जा सकता है।
दूरस्थ भूकंपों का अध्ययन
वैज्ञानिक दूरस्थ भूकंपों से संबंधित ध्वनियों के समय का अध्ययन करके महासागर के तापमान में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को मापने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे अध्ययन पृथ्वी की बदलती जलवायु को समझने में सहायता कर सकते हैं।
मच्छरों की पहचान
जीवविज्ञानी मच्छरों की भनभनाहट का अध्ययन करके रोग फैलाने वाले मच्छरों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। विभिन्न मच्छरों की उड़ान और पंखों की गति से उत्पन्न ध्वनि में अंतर हो सकता है, जिसका उपयोग उनकी पहचान में किया जा सकता है।
मिट्टी के स्वास्थ्य का अध्ययन
शोधकर्ता सूक्ष्म जीवों द्वारा मिट्टी में उत्पन्न बहुत हल्की ध्वनियों का अध्ययन कर रहे हैं। इन ध्वनियों से मिट्टी के स्वास्थ्य और जैव विविधता के बारे में जानकारी प्राप्त करने की संभावना है।
ध्वनि एक वैज्ञानिक अन्वेषण का साधन
ध्वनि का उपयोग अब केवल मनुष्य के श्रवण अनुभव तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक उपकरण ध्वनि और कंपन को रिकॉर्ड तथा विश्लेषित करके ग्रहों, समुद्रों, जीव-जंतुओं और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है, ध्वनि ग्रहों, जीवित प्राणियों और प्रकृति की छिपी गतिविधियों के अध्ययन का अधिक शक्तिशाली साधन बनती जा रही है।
ध्वनि के प्रमुख अनुप्रयोग
- SONAR: जल के भीतर वस्तुओं की स्थिति और दूरी ज्ञात करने के लिए।
- समुद्र की गहराई: पराश्रव्य तरंगों के परावर्तन से समुद्र की गहराई ज्ञात करने के लिए।
- पनडुब्बी का पता लगाना: परावर्तित पराश्रव्य तरंगों की सहायता से।
- ध्वनि आधारित चौकसी: ड्रोन और विमानों की विशिष्ट ध्वनियों की पहचान के लिए।
- ग्रहों का अध्ययन: अंतरिक्ष यानों द्वारा रिकॉर्ड की गई ध्वनियों के अध्ययन के लिए।
- भूकंपीय अध्ययन: दूरस्थ भूकंपों से संबंधित ध्वनियों के अध्ययन के लिए।
- मच्छरों की पहचान: उनकी भनभनाहट के आधार पर पहचान में सहायता के लिए।
- मिट्टी का अध्ययन: सूक्ष्म जीवों द्वारा उत्पन्न ध्वनियों से मिट्टी के स्वास्थ्य और जैव विविधता का अध्ययन।
Concept Builder
SONAR → पराश्रव्य तरंग → वस्तु से परावर्तन → समय का मापन → दूरी/गहराई का पता
ध्वनि आधारित चौकसी → विशिष्ट ध्वनि → सेंसर → पहचान → निगरानी
आधुनिक ध्वनि विज्ञान → ध्वनि रिकॉर्डिंग → ध्वनि विश्लेषण → छिपी जानकारी का अध्ययन
इसलिए ध्वनि को केवल सुनाई देने वाली घटना समझना पर्याप्त नहीं है। इसकी सहायता से समुद्र की गहराई से लेकर ग्रहों, जीव-जंतुओं और मिट्टी की गतिविधियों तक का अध्ययन किया जा सकता है।
Exam Booster
- प्रश्न: सोनार का उपयोग किस लिए किया जाता है?
उत्तर: समुद्र की गहराई तथा जल के भीतर स्थित वस्तुओं की दूरी और स्थिति ज्ञात करने के लिए। - प्रश्न: सोनार में किस प्रकार की तरंगों का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: पराश्रव्य तरंगों का। - प्रश्न: सोनार संकेत द्वारा तय कुल दूरी को दो से क्यों भाग दिया जाता है?
उत्तर: क्योंकि संकेत वस्तु तक जाकर वापस आता है, इसलिए मापी गई कुल दूरी वास्तविक दूरी की दोगुनी होती है। - प्रश्न: ध्वनि आधारित चौकसी क्या है?
उत्तर: विशिष्ट ध्वनियों को ध्वनि संवेदकों द्वारा पहचानकर निगरानी करने की विधि। - प्रश्न: ड्रोन की पहचान ध्वनि से कैसे की जा सकती है?
उत्तर: उसके मोटर से उत्पन्न विशिष्ट ध्वनि को ध्वनि संवेदकों की सहायता से पहचानकर। - प्रश्न: ध्वनि का उपयोग ग्रहों के अध्ययन में कैसे हो रहा है?
उत्तर: अंतरिक्ष अन्वेषी यंत्रों द्वारा ग्रहों पर उत्पन्न ध्वनियों को रिकॉर्ड और उनका अध्ययन किया जा रहा है। - प्रश्न: मच्छरों की भनभनाहट का वैज्ञानिक उपयोग क्या है?
उत्तर: उनकी ध्वनि का अध्ययन करके रोग फैलाने वाले मच्छरों की पहचान में सहायता ली जा सकती है। - प्रश्न: मिट्टी की ध्वनियों से क्या जानकारी प्राप्त की जा सकती है?
उत्तर: सूक्ष्म जीवों द्वारा उत्पन्न हल्की ध्वनियों के अध्ययन से मिट्टी के स्वास्थ्य और जैव विविधता के बारे में जानकारी मिल सकती है। - प्रश्न: यदि सोनार संकेत 4 s में वापस आता है और जल में ध्वनि की चाल 1500 m/s है, तो समुद्र की गहराई कितनी होगी?
उत्तर: 3000 m या 3 km।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
6. ध्वनि तरंगों के प्रमुख अभिलक्षण
Class 9, all subjects CBSE Notes in hindi medium, cbse class 9 Science Exploration notes, class 9 Science Exploration notes hindi medium, cbse 9 Science Exploration cbse notes, class 9 Science Exploration revision notes, cbse class 9 Science Exploration study material, ncert class 9 science notes pdf, class 9 science exam preparation, cbse class 9 physics chemistry biology notes
Welcome to ATP Education
ATP Education