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Chapter-जनन: जीवन की निरंतरता Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 15, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-जनन: जीवन की निरंतरता Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 14 August 2026

जनन: जीवन की निरंतरता

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मानवों में लैंगिक जनन

अध्याय 11. जनन — जीवन की निरंतरता

मानवों में जनन लैंगिक जनन द्वारा होता है। इसमें नर और मादा युग्मकों का निर्माण, उनका संलयन तथा युग्मनज से नए जीव का विकास शामिल है।

मानवों में लैंगिक जनन

परिभाषा: मनुष्यों में नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) के संलयन द्वारा नई संतान के निर्माण की प्रक्रिया को मानवों में लैंगिक जनन कहते हैं।

मानवों में नर और मादा अलग-अलग जनन तंत्र रखते हैं। नर जनन तंत्र शुक्राणुओं का निर्माण करता है, जबकि मादा जनन तंत्र अंडाणुओं के निर्माण तथा भ्रूण के विकास में सहायता करता है।

मानव जनन तंत्र

नर जनन तंत्र

  • वृषण (Testes): शुक्राणुओं तथा नर हार्मोन का निर्माण करते हैं।
  • शुक्रवाहिनी: शुक्राणुओं को आगे ले जाने वाली नलिका है।
  • शुक्राशय: जनन द्रव के निर्माण में सहायता करता है।
  • प्रोस्टेट ग्रंथि: जनन द्रव के निर्माण में योगदान देती है।
  • शुक्राणु: नर के सूक्ष्म और गतिशील युग्मक हैं।

मादा जनन तंत्र

  • अंडाशय (Ovaries): अंडाणु तथा मादा हार्मोन का निर्माण करते हैं।
  • डिंबवाहिनी (Oviduct): अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है।
  • गर्भाशय (Uterus): भ्रूण के विकास का प्रमुख स्थान है।
  • गर्भाशय ग्रीवा (Cervix): गर्भाशय को योनि से जोड़ने वाला संकरा मार्ग है।
  • योनि: जनन मार्ग का बाहरी भाग है।

युग्मकजनन (Gametogenesis)

परिभाषा: नर और मादा युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया को युग्मकजनन कहते हैं।

मानवों में युग्मकजनन वृषण और अंडाशय में होता है। युग्मक अर्धसूत्री विभाजन द्वारा बनते हैं, इसलिए उनमें गुणसूत्रों की संख्या सामान्य शरीर कोशिकाओं की आधी होती है।

  • मानव शरीर की सामान्य कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं।
  • शुक्राणु में 23 गुणसूत्र होते हैं।
  • अंडाणु में 23 गुणसूत्र होते हैं।
  • निषेचन के बाद युग्मनज में फिर से 46 गुणसूत्र हो जाते हैं।

शुक्राणु और अंडाणु

आधार शुक्राणु अंडाणु
आकार बहुत छोटा बड़ा
संख्या लाखों में कम
गतिशीलता गतिशील अचल
पोषक पदार्थ अनुपस्थित उपस्थित
निर्माण स्थान वृषण अंडाशय

निषेचन (Fertilisation)

परिभाषा: शुक्राणु और अंडाणु के संलयन को निषेचन कहते हैं।

मानवों में निषेचन के दौरान शुक्राणु अंडाणु तक पहुँचता है। एक शुक्राणु के अंडाणु से संलयन के बाद युग्मनज बनता है। युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण में विकसित होता है।

शुक्राणु + अंडाणु → निषेचन → युग्मनज → भ्रूण

अंडोत्सर्ग (Ovulation)

परिभाषा: अंडाशय से परिपक्व अंडाणु के निकलने की प्रक्रिया को अंडोत्सर्ग कहते हैं।

यौवनारंभ के बाद सामान्यतः प्रत्येक माह एक परिपक्व अंडाणु किसी एक अंडाशय से निकलता है। यह अंडाणु डिंबवाहिनी में पहुँचता है।

युग्मनज से भ्रूण तक

निषेचन के बाद बना युग्मनज लगातार समसूत्री विभाजन करता है। विभाजित होते हुए यह गर्भाशय की ओर बढ़ता है और गर्भाशय की आंतरिक परत में आरोपित हो जाता है। इसी आरोपण से गर्भावस्था का आरंभ होता है।

युग्मनज → विभाजन → भ्रूण → गर्भाशय में आरोपण → गर्भावस्था

यदि निषेचन न हो

यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता है, तो वह लगभग एक दिन तक जीवनक्षम रहता है और बाद में नष्ट हो जाता है। गर्भाशय की वह मोटी आंतरिक परत जिसकी भ्रूण के लिए आवश्यकता थी, रक्त के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।

मासिक धर्म (Menstruation)

परिभाषा: निषेचन न होने पर गर्भाशय की आंतरिक परत के रक्त के साथ शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया को मासिक धर्म या रजोधर्म कहते हैं।

मासिक धर्म सामान्यतः 3 से 7 दिनों तक चल सकता है। यह प्रक्रिया सामान्यतः लगभग 21–35 दिनों के अंतराल में दोहराती है, जिसमें लगभग 28 दिन का चक्र एक सामान्य उदाहरण है।

मासिक धर्म चक्र

  • दिन 1–5: गर्भाशय की आंतरिक परत का निष्कासन होता है।
  • दिन 6–14: गर्भाशय की परत का पुनर्निर्माण होता है और अंडाणु परिपक्व होने लगता है।
  • लगभग दिन 14: अंडोत्सर्ग हो सकता है।
  • दिन 15–28: गर्भाशय की परत और मोटी तथा रक्तवाहिकाओं से समृद्ध होती है।
  • निषेचन न होने पर: परत टूटती है और नया मासिक धर्म चक्र शुरू होता है।

शिशु के जैविक लिंग का निर्धारण

मानवों में महिलाओं में सामान्यतः XX और पुरुषों में XY लिंग गुणसूत्र होते हैं। माँ का अंडाणु हमेशा X गुणसूत्र देता है, जबकि पिता का शुक्राणु X या Y गुणसूत्र दे सकता है।

  • X + X = XX
  • X + Y = XY

इस प्रकार पिता से आने वाले शुक्राणु का X या Y गुणसूत्र शिशु के जैविक लिंग निर्धारण में निर्णायक होता है।

गर्भावस्था (Pregnancy)

परिभाषा: निषेचन के बाद भ्रूण के गर्भाशय में विकसित होने की अवस्था को गर्भावस्था कहते हैं।

मानवों में गर्भावस्था सामान्यतः लगभग नौ महीने चलती है। इसे तीन त्रिमासों में बाँटा जाता है।

  • पहला त्रिमास: भ्रूण का विकास और प्रमुख अंगों का निर्माण शुरू होता है।
  • दूसरा त्रिमास: गर्भ का आकार बढ़ता है और उसकी गतिविधियाँ महसूस हो सकती हैं।
  • तीसरा त्रिमास: शिशु तेजी से बढ़ता है और जन्म के लिए तैयार होता है।

प्रसव (Childbirth)

परिभाषा: गर्भावस्था के अंत में विकसित शिशु के गर्भाशय से बाहर आने की प्रक्रिया को प्रसव कहते हैं।

प्रसव के समय गर्भाशय की मांसपेशियों में तीव्र संकुचन होते हैं। ये संकुचन शिशु को जनन मार्ग से बाहर आने में सहायता करते हैं। कुछ परिस्थितियों में माँ या शिशु की सुरक्षा के लिए चिकित्सकीय या शल्य प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।

जन्म के बाद शिशु की देखभाल

  • माँ का दूध शिशु को आवश्यक पोषण देता है।
  • नवजात शिशु के शरीर का तापमान उचित रखना आवश्यक है।
  • शिशु का समय पर टीकाकरण कराया जाना चाहिए।
  • माँ और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है।

लैंगिक परिपक्वता

परिभाषा: वह अवस्था जिसमें शरीर जनन के योग्य होने लगता है, लैंगिक परिपक्वता कहलाती है।

यह अवस्था किशोरावस्था के दौरान धीरे-धीरे विकसित होती है। लड़कों में शुक्राणु उत्पादन और लड़कियों में मासिक धर्म का आरंभ लैंगिक परिपक्वता के प्रमुख संकेत हैं।

महत्त्वपूर्ण: लैंगिक परिपक्वता का अर्थ केवल शरीर का जनन योग्य होना है। इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति वयस्क जीवन की सभी जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है।

IVF — पात्रे निषेचन

परिभाषा: शरीर के बाहर प्रयोगशाला में शुक्राणु और अंडाणु के संलयन द्वारा निषेचन कराने की चिकित्सकीय तकनीक को IVF (In Vitro Fertilisation) कहते हैं।

IVF में अंडाणु और शुक्राणु को प्रयोगशाला में मिलाया जाता है। निषेचन के बाद बने भ्रूण को गर्भाशय में आरोपित किया जा सकता है। सामान्य भाषा में इससे जन्मे बच्चे को “टेस्ट-ट्यूब बेबी” कहा जाता है।

Concept Builder

वृषण → शुक्राणु

अंडाशय → अंडाणु

शुक्राणु + अंडाणु → निषेचन → युग्मनज

युग्मनज → समसूत्री विभाजन → भ्रूण → आरोपण → गर्भावस्था

निषेचन नहीं → अंडाणु नष्ट → गर्भाशय की परत का निष्कासन → मासिक धर्म

Exam Booster

  • मानवों में लैंगिक जनन में कौन-से युग्मक भाग लेते हैं? — शुक्राणु और अंडाणु।
  • युग्मकजनन क्या है? — युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया।
  • मानव युग्मक में कितने गुणसूत्र होते हैं? — 23।
  • निषेचन के बाद क्या बनता है? — युग्मनज।
  • अंडोत्सर्ग क्या है? — अंडाशय से परिपक्व अंडाणु का निकलना।
  • निषेचन न होने पर क्या होता है? — अंडाणु नष्ट हो जाता है और गर्भाशय की आंतरिक परत मासिक धर्म के रूप में बाहर निकलती है।
  • मासिक धर्म क्या है? — गर्भाशय की आंतरिक परत के रक्त के साथ बाहर निकलने की प्रक्रिया।
  • गर्भावस्था सामान्यतः कितने समय की होती है? — लगभग नौ महीने।
  • लैंगिक परिपक्वता क्या है? — वह अवस्था जब शरीर जनन के योग्य होने लगता है।
  • IVF क्या है? — शरीर के बाहर प्रयोगशाला में शुक्राणु और अंडाणु के निषेचन की तकनीक।
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