Chapter-जनन: जीवन की निरंतरता Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
जनन: जीवन की निरंतरता
जंतुओं में लैंगिक जनन
अध्याय 11. जनन — जीवन की निरंतरता
लैंगिक जनन केवल पौधों तक सीमित नहीं है। जंतुओं में भी नर और मादा जनन कोशिकाओं के निर्माण तथा उनके संलयन से नई संतति उत्पन्न होती है। जंतुओं में निषेचन शरीर के बाहर या भीतर हो सकता है।
जंतुओं में लैंगिक जनन
परिभाषा: जंतुओं में वह जनन प्रक्रिया जिसमें नर और मादा युग्मकों के संलयन से नई संतति का निर्माण होता है, लैंगिक जनन कहलाती है।
जंतुओं में नर जनन कोशिका को शुक्राणु और मादा जनन कोशिका को अंडाणु कहते हैं। दोनों युग्मकों के मिलने से युग्मनज बनता है, जो आगे विकसित होकर नया जीव बनाता है।
जंतुओं में निषेचन
जंतुओं में निषेचन मुख्यतः दो प्रकार का होता है—
- बाह्य निषेचन (External Fertilisation)
- आंतरिक निषेचन (Internal Fertilisation)
बाह्य निषेचन
परिभाषा: जब नर और मादा युग्मकों का संलयन मादा के शरीर के बाहर होता है, तो इसे बाह्य निषेचन कहते हैं।
इस प्रकार के निषेचन में नर और मादा युग्मक सामान्यतः जल में छोड़े जाते हैं। जल का माध्यम दोनों युग्मकों को मिलने में सहायता करता है।
उदाहरण: मेंढक और कई मछलियों में बाह्य निषेचन पाया जाता है।
बाह्य निषेचन की विशेषताएँ
- निषेचन शरीर के बाहर होता है।
- नर और मादा युग्मक बाहरी वातावरण में मिलते हैं।
- जल इस प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।
- अंडों और भ्रूण के बाहरी वातावरण के संपर्क में रहने के कारण उनकी सुरक्षा एक चुनौती हो सकती है।
आंतरिक निषेचन
परिभाषा: जब नर और मादा युग्मकों का संलयन मादा के शरीर के भीतर होता है, तो इसे आंतरिक निषेचन कहते हैं।
इसमें नर जनक के शुक्राणु मादा जनक के शरीर में पहुँचते हैं और वहाँ अंडाणु के साथ संलयन करते हैं। निषेचन के बाद बनने वाला युग्मनज मादा के शरीर में आगे विकसित हो सकता है।
उदाहरण: मनुष्य तथा अनेक स्थलीय जंतुओं में आंतरिक निषेचन पाया जाता है।
आंतरिक निषेचन की विशेषताएँ
- निषेचन मादा के शरीर के भीतर होता है।
- शुक्राणु और अंडाणु के मिलने की संभावना अधिक प्रभावी ढंग से बनी रहती है।
- प्रारंभिक भ्रूण को बाहरी परिस्थितियों से अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षा मिल सकती है।
- यह स्थलीय जीवन जीने वाले अनेक जंतुओं में पाया जाता है।
बाह्य और आंतरिक निषेचन में अंतर
| आधार | बाह्य निषेचन | आंतरिक निषेचन |
|---|---|---|
| निषेचन का स्थान | मादा के शरीर के बाहर | मादा के शरीर के भीतर |
| माध्यम | जल महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है | मादा का जनन तंत्र |
| उदाहरण | मेंढक, कई मछलियाँ | मनुष्य तथा अनेक स्थलीय जंतु |
| युग्मकों की सुरक्षा | बाहरी वातावरण के संपर्क में अधिक | शरीर के भीतर अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षा |
निषेचन के बाद विकास
निषेचन के बाद नर और मादा युग्मकों के संलयन से युग्मनज बनता है। युग्मनज लगातार विभाजित होकर कोशिकाओं की संख्या बढ़ाता है और धीरे-धीरे एक विकसित भ्रूण का रूप लेने लगता है।
भ्रूण के विकास का तरीका अलग-अलग जंतुओं में अलग हो सकता है। कुछ जंतु अंडे देते हैं, जबकि कुछ जंतु अपने शरीर के भीतर भ्रूण का विकास होने के बाद बच्चे को जन्म देते हैं।
अंडज जंतु
परिभाषा: वे जंतु जो अंडे देते हैं और जिनमें भ्रूण का प्रारंभिक विकास अंडे के भीतर होता है, अंडज जंतु (Oviparous Animals) कहलाते हैं।
अंडज जंतुओं में निषेचन आंतरिक या बाह्य हो सकता है, लेकिन भ्रूण का आगे का विकास अंडे के भीतर होता है।
उदाहरण: मुर्गी और अनेक अन्य पक्षी।
जरायुज जंतु
परिभाषा: वे जंतु जिनमें भ्रूण का विकास मादा के शरीर के भीतर होता है और जो सामान्यतः बच्चे को जन्म देते हैं, जरायुज जंतु (Viviparous Animals) कहलाते हैं।
इन जंतुओं में भ्रूण को मादा के शरीर के भीतर आवश्यक पोषण और सुरक्षा मिलती है।
उदाहरण: मनुष्य तथा अधिकांश स्तनधारी।
अंडज और जरायुज जंतुओं में अंतर
| आधार | अंडज जंतु | जरायुज जंतु |
|---|---|---|
| संतान का जन्म | अंडे दिए जाते हैं | बच्चे को जन्म दिया जाता है |
| भ्रूण का विकास | अंडे के भीतर | मादा के शरीर के भीतर |
| उदाहरण | मुर्गी | मनुष्य |
जंतुओं में अलैंगिक जनन
यद्यपि जंतुओं में लैंगिक जनन सामान्य रूप से अधिक पाया जाता है, कुछ सरल जंतुओं में अलैंगिक जनन भी होता है। हाइड्रा इसका एक उदाहरण है, जिसमें मुकुलन द्वारा नया जीव विकसित होता है।
हाइड्रा में शरीर की सतह पर कोशिका विभाजन के कारण एक छोटा उभार बनता है। यह उभार बढ़कर नया हाइड्रा बन जाता है और बाद में जनक से अलग होकर स्वतंत्र जीवन जी सकता है।
जंतुओं में जनन की मुख्य प्रक्रिया
नर जनक → शुक्राणु → मादा जनक → अंडाणु → निषेचन → युग्मनज → भ्रूण → नया जीव
यदि निषेचन शरीर के बाहर होता है, तो उसे बाह्य निषेचन और यदि मादा के शरीर के भीतर होता है, तो उसे आंतरिक निषेचन कहते हैं।
Concept Builder
शुक्राणु + अंडाणु → निषेचन → युग्मनज → भ्रूण → नया जीव
शरीर के बाहर निषेचन = बाह्य निषेचन
मादा के शरीर के भीतर निषेचन = आंतरिक निषेचन
अंडे देने वाला जंतु = अंडज
बच्चे को जन्म देने वाला जंतु = जरायुज
Exam Booster
- जंतुओं में लैंगिक जनन क्या है? — नर और मादा युग्मकों के संलयन द्वारा नई संतति का निर्माण।
- बाह्य निषेचन क्या है? — शरीर के बाहर नर और मादा युग्मकों का संलयन।
- बाह्य निषेचन का एक उदाहरण दीजिए। — मेंढक।
- आंतरिक निषेचन क्या है? — मादा के शरीर के भीतर नर और मादा युग्मकों का संलयन।
- आंतरिक निषेचन का एक उदाहरण दीजिए। — मनुष्य।
- निषेचन के बाद सबसे पहले क्या बनता है? — युग्मनज।
- अंडज जंतु किसे कहते हैं? — वे जंतु जो अंडे देते हैं और जिनमें भ्रूण का विकास अंडे के भीतर होता है।
- जरायुज जंतु किसे कहते हैं? — वे जंतु जिनमें भ्रूण का विकास मादा के शरीर के भीतर होता है और जो सामान्यतः बच्चे को जन्म देते हैं।
- हाइड्रा में कौन-सा अलैंगिक जनन पाया जाता है? — मुकुलन।
- बाह्य और आंतरिक निषेचन में मुख्य अंतर क्या है? — बाह्य निषेचन शरीर के बाहर और आंतरिक निषेचन मादा के शरीर के भीतर होता है।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
8. पुष्पीय पादपों में लैंगिक जनन
9. पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व
10. जन्तुओं में निषेचन की विधियाँ
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