Chapter-ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि का उत्पादन
अध्याय 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण संवेदी अनुभव है। हम मनुष्य की वाणी, पक्षियों की चहचहाहट, वाहनों के हॉर्न, संगीत, पत्तियों की सरसराहट और बादलों की गड़गड़ाहट जैसी अनेक ध्वनियाँ सुनते हैं। इस अध्याय में हम समझेंगे कि ध्वनि उत्पन्न कैसे होती है और इसके पीछे कंपन की क्या भूमिका है।
ध्वनि का उत्पादन
हमारे आसपास अनेक प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। इनके स्रोत अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तुओं में एक सामान्य विशेषता होती है—वे कंपन करती हैं। किसी वस्तु के कंपन करने पर उससे ध्वनि उत्पन्न हो सकती है।
ध्वनि और कंपन
परिभाषा:
किसी वस्तु की आगे-पीछे होने वाली आवर्ती गति या दोलन को कंपन (Vibration) कहते हैं।
व्याख्या:
जब कोई वस्तु अपनी माध्य या सामान्य स्थिति के आसपास बार-बार आगे-पीछे गति करती है, तो वह कंपन कर रही होती है। ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु में इस प्रकार का कंपन ध्वनि के उत्पादन का कारण बनता है।
कंपन से ध्वनि का उत्पादन
परिभाषा:
किसी कंपन करने वाली वस्तु से उत्पन्न ऊर्जा के कारण सुनाई देने वाली संवेदना को ध्वनि कहते हैं।
व्याख्या:
जब कोई वस्तु कंपन करती है तो उससे ध्वनि उत्पन्न होती है। जैसे ही उस वस्तु का कंपन रुक जाता है, उससे उत्पन्न ध्वनि भी बंद हो जाती है। इस प्रकार ध्वनि और कंपन के बीच सीधा संबंध है।
मुख्य निष्कर्ष: कंपन करने वाली वस्तु → ध्वनि उत्पन्न करती है। कंपन समाप्त → ध्वनि समाप्त।
ध्वनि के विभिन्न स्रोत
ध्वनि विभिन्न प्रकार की कंपन करने वाली वस्तुओं से उत्पन्न हो सकती है। किसी तनी हुई डोरी को खींचकर छोड़ने पर उसमें कंपन उत्पन्न होते हैं और ध्वनि सुनाई देती है। किसी धातु की वस्तु पर प्रहार करने से उसमें कंपन उत्पन्न होकर ध्वनि पैदा होती है। बाँसुरी में फूँक मारने पर उसके भीतर की वायु कंपन करती है और ध्वनि उत्पन्न होती है।
ध्वनि उत्पन्न करने वाले कंपनशील भाग अलग-अलग हो सकते हैं। इनमें मुख्यतः तार, पतले पटल, वायु-स्तंभ तथा अन्य कंपन करने वाली वस्तुएँ शामिल हैं। कई संगीत वाद्ययंत्रों में ध्वनि उत्पन्न करने के लिए एक से अधिक कंपन करने वाले भाग भी होते हैं।
ध्वनि का स्रोत
परिभाषा:
जो वस्तु ध्वनि उत्पन्न करती है, उसे ध्वनि का स्रोत कहते हैं।
उदाहरण:
- कंपन करता हुआ तार — ध्वनि का स्रोत।
- कंपन करता हुआ धातु का भाग — ध्वनि का स्रोत।
- बाँसुरी में कंपन करती वायु — ध्वनि उत्पन्न करने वाला स्रोत।
- स्वरित्र द्विभुज की कंपन करती भुजाएँ — ध्वनि का स्रोत।
क्रियाकलाप — कंपन करती रबड़ बैंड से ध्वनि
क्रियाकलाप: एक तरफ से खुले गत्ते के डिब्बे और रबड़ बैंड को लीजिए। रबड़ बैंड को डिब्बे के खुले भाग पर तानकर लगाइए। अब उसे खींचकर छोड़िए और ध्वनि को सुनिए। रबड़ बैंड को ध्यान से देखने पर उसके कंपन दिखाई देंगे।
अब रबड़ बैंड को कंपन करते हुए देखें और उसके कंपन रुकने तक प्रतीक्षा करें। जैसे-जैसे कंपन समाप्त होते हैं, ध्वनि भी समाप्त हो जाती है। रबड़ बैंड का तनाव बदलने पर उत्पन्न ध्वनि में भी परिवर्तन अनुभव किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
इस क्रियाकलाप से स्पष्ट होता है कि ध्वनि कंपन द्वारा उत्पन्न होती है।
मानव में ध्वनि का उत्पादन
मनुष्य बोलते या गाते समय अपने गले में कंपन अनुभव कर सकता है। मनुष्य में ध्वनि मुख्यतः वाक्-तंतुओं (Vocal Cords) के कंपन से उत्पन्न होती है। वाक्-तंतु गले में स्थित वाक् यंत्र (Voice Box) या कंठ (Larynx) में कसकर खिंची हुई पेशीय पट्टियों के समान होते हैं।
जब वाक्-तंतु कंपन करते हैं, तो ध्वनि उत्पन्न होती है। मनुष्य के जीभ, होंठ, मुँह और नासा-गुहा जैसे अंग इस ध्वनि को वाणी या गीत के रूप में बदलने में सहायता करते हैं।
जंतुओं में ध्वनि का उत्पादन
कुछ जंतुओं में भी ध्वनि कंपन के कारण उत्पन्न होती है। कुछ जंतु अपने शरीर के अंगों को आपस में टकराकर या रगड़कर ध्वनि उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए, टिड्डे और झींगुर अपने पंखों या टाँगों को रगड़कर ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
परिभाषा:
स्वरित्र द्विभुज (Tuning Fork) ध्वनि से संबंधित प्रयोगों में प्रयुक्त एक ऐसा उपकरण है जिसमें आधार-स्तंभ से जुड़ी U-आकार की धात्विक छड़ होती है। इसकी दोनों शाखाएँ कंपन करके ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
संरचना:
स्वरित्र द्विभुज सामान्यतः स्टील या एल्युमिनियम से बनाया जाता है। इसके U-आकार के दोनों पार्श्व भागों को इसकी भुजाएँ कहा जाता है। इसे कंपन कराने के लिए इसकी भुजा को रबड़ पैड से टकराया जाता है।
स्वरित्र द्विभुज से ध्वनि का प्रदर्शन
जब स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा को रबड़ पैड से टकराया जाता है, तो उसकी भुजाएँ कंपन करने लगती हैं और ध्वनि उत्पन्न होती है। कंपन करता हुआ स्वरित्र द्विभुज कान के पास लाने पर ध्वनि सुनाई देती है।
जब कंपन करती हुई स्वरित्र द्विभुज की भुजा को जल की सतह से धीरे से स्पर्श कराया जाता है, तो जल की सतह पर तरंगें दिखाई देती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वरित्र द्विभुज की भुजाएँ वास्तव में कंपन कर रही हैं।
निष्कर्ष:
स्वरित्र द्विभुज का प्रयोग यह प्रदर्शित करता है कि ध्वनि कंपन करने वाली वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है।
ध्वनि उत्पादन के प्रमुख उदाहरण
| ध्वनि स्रोत | कंपन करने वाला भाग |
|---|---|
| तनी हुई डोरी | डोरी |
| धातु की वस्तु | धातु का कंपन करता भाग |
| बाँसुरी | वायु-स्तंभ |
| मानव वाणी | वाक्-तंतु |
| स्वरित्र द्विभुज | धातु की भुजाएँ |
| टिड्डा/झींगुर | शरीर के रगड़ने वाले अंग |
ध्वनि उत्पादन के बारे में मुख्य बातें
- ध्वनि कंपन करने वाली वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है।
- कंपन किसी वस्तु की आगे-पीछे होने वाली आवर्ती गति है।
- कंपन रुकने पर ध्वनि भी रुक जाती है।
- तार, पतले पटल, वायु-स्तंभ और अन्य कंपनशील वस्तुएँ ध्वनि उत्पन्न कर सकती हैं।
- ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु को ध्वनि का स्रोत कहते हैं।
- मनुष्य में ध्वनि वाक्-तंतुओं के कंपन से उत्पन्न होती है।
- जीभ, होंठ, मुँह और नासा-गुहा ध्वनि को वाणी या गीत में बदलने में सहायता करते हैं।
- स्वरित्र द्विभुज ध्वनि से संबंधित प्रयोगों में प्रयुक्त महत्वपूर्ण उपकरण है।
- स्वरित्र द्विभुज की कंपन करती भुजाएँ ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
Our Concept Builder
इस पूरे Topic को एक सरल क्रम से समझिए—किसी वस्तु में कंपन → कंपन से ध्वनि का उत्पादन → कंपन करने वाली वस्तु ध्वनि का स्रोत। यदि कंपन बंद हो जाए, तो ध्वनि भी बंद हो जाती है। रबड़ बैंड और स्वरित्र द्विभुज के प्रयोग इस संबंध को प्रत्यक्ष रूप से समझाते हैं।
Exam Booster
- ध्वनि किससे उत्पन्न होती है? — कंपन करने वाली वस्तुओं से।
- कंपन क्या है? — वस्तु की आगे-पीछे होने वाली आवर्ती गति।
- ध्वनि का स्रोत क्या है? — ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु।
- मनुष्य में ध्वनि किसके कंपन से उत्पन्न होती है? — वाक्-तंतुओं के कंपन से।
- स्वरित्र द्विभुज क्या है? — U-आकार की धात्विक छड़ वाला उपकरण, जिसका प्रयोग ध्वनि संबंधी प्रयोगों में किया जाता है।
- स्वरित्र द्विभुज की भुजाएँ क्यों महत्वपूर्ण हैं? — वे कंपन करके ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
- कंपन रुकने पर क्या होता है? — ध्वनि भी रुक जाती है।
- बाँसुरी में कौन कंपन करता है? — बाँसुरी के भीतर का वायु-स्तंभ।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
6. ध्वनि तरंगों के प्रमुख अभिलक्षण
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