Chapter-जनन: जीवन की निरंतरता Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
जनन: जीवन की निरंतरता
जनन स्वास्थ्य
अध्याय 11. जनन — जीवन की निरंतरता
जनन से संबंधित स्वास्थ्य केवल शरीर के जनन योग्य होने तक सीमित नहीं है। इसमें लैंगिक परिपक्वता, जिम्मेदार निर्णय, अनचाही गर्भावस्था से बचाव, यौन संचारित संक्रमणों से सुरक्षा तथा उचित स्वास्थ्य देखभाल भी शामिल है।
जनन स्वास्थ्य
परिभाषा: जनन से संबंधित शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बनाए रखने की स्थिति को जनन स्वास्थ्य कहा जा सकता है।
किशोरावस्था में शरीर जनन के योग्य होने लगता है, लेकिन भावनात्मक और सामाजिक परिपक्वता धीरे-धीरे विकसित होती है। इसलिए जनन से संबंधित निर्णय सोच-समझकर और जिम्मेदारी से लेना आवश्यक है।
लैंगिक परिपक्वता
परिभाषा: वह अवस्था जिसमें शरीर जनन के योग्य होने लगता है, लैंगिक परिपक्वता कहलाती है।
लैंगिक परिपक्वता किशोरावस्था के दौरान क्रमिक रूप से विकसित होती है और यह समग्र शारीरिक विकास का एक भाग है।
- लड़कों में: शुक्राणुओं का उत्पादन शुरू होना लैंगिक परिपक्वता का प्रमुख संकेत है।
- लड़कियों में: मासिक धर्म अर्थात रजोधर्म का आरंभ प्रमुख संकेत है।
- शारीरिक रूप से जनन योग्य होना और भावनात्मक रूप से पूरी तरह परिपक्व होना एक ही बात नहीं है।
- भावनात्मक परिपक्वता में भावनाओं पर नियंत्रण, स्पष्ट संवाद और सुविचारित निर्णय लेना शामिल है।
अनचाही गर्भावस्था और संक्रमण से बचाव
किशोरावस्था में शरीर जनन के योग्य हो जाता है, लेकिन केवल शारीरिक परिवर्तन किसी व्यक्ति को वयस्क जीवन से जुड़ी सभी जिम्मेदारियों के लिए तैयार नहीं करते। विवेकपूर्ण निर्णय अनियोजित गर्भावस्था तथा यौन संचारित संक्रमणों से बचाव में सहायता करते हैं।
यौन संचारित संक्रमण (STI)
परिभाषा: ऐसे संक्रमण जो यौन संपर्क के माध्यम से एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँच सकते हैं, यौन संचारित संक्रमण (Sexually Transmitted Infections – STI) कहलाते हैं।
अध्याय में STI के उदाहरण के रूप में गोनोरिया, हर्पीज, सिफिलिस, जननिक मस्से और HIV संक्रमण दिए गए हैं। HIV संक्रमण आगे चलकर AIDS से संबंधित हो सकता है।
STI से बचाव
कंडोम का उपयोग यौन संचारित संक्रमणों के संक्रमण को रोकने में सहायता कर सकता है। यह अनचाही गर्भावस्था को रोकने में भी सहायक होता है।
गर्भनिरोध (Contraception)
परिभाषा: गर्भधारण को रोकने के लिए अपनाई जाने वाली विधियों को गर्भनिरोध कहा जाता है।
अनचाही गर्भावस्था को रोकने के लिए विभिन्न गर्भनिरोधक विधियों का उपयोग किया जा सकता है। कुछ विधियाँ शुक्राणु को अंडाणु तक पहुँचने से रोकती हैं, जबकि कुछ विधियाँ अंडाणु के मोचन को प्रभावित करती हैं।
गर्भनिरोधक विधियाँ
कंडोम
परिभाषा: कंडोम एक अवरोधक गर्भनिरोधक साधन है जो शुक्राणुओं को अंडाणु तक पहुँचने से रोकने में सहायता करता है।
कंडोम अनचाही गर्भावस्था को रोकने के साथ कुछ यौन संचारित संक्रमणों के प्रसार को कम करने में भी सहायता करता है।
गर्भनिरोधक गोलियाँ
परिभाषा: मुँह से ली जाने वाली ऐसी गर्भनिरोधक दवाएँ जो हार्मोन में परिवर्तन करके अंडाणु के मोचन को प्रभावित करती हैं, गर्भनिरोधक गोलियाँ कहलाती हैं।
अध्याय के अनुसार इन गोलियों के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।
अंतर्गर्भाशयी युक्ति — कॉपर-T
परिभाषा: गर्भधारण को रोकने के लिए गर्भाशय में रखी जाने वाली अंतर्गर्भाशयी युक्ति को कॉपर-T कहते हैं।
यह गर्भनिरोध की एक विधि है। अध्याय में यह भी बताया गया है कि इसके उपयोग से कभी-कभी गर्भाशय में जलन हो सकती है।
शल्य-चिकित्सा द्वारा गर्भनिरोध
अनचाही गर्भावस्था को रोकने के लिए शल्य-चिकित्सा की विधियों का भी उपयोग किया जाता है। पुरुषों में शुक्रवाहिनी और महिलाओं में डिंबवाहिनी को अवरुद्ध किया जा सकता है, जिससे शुक्राणु और अंडाणु का संलयन न हो सके।
गर्भपात
परिभाषा: गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को शल्य-चिकित्सा द्वारा हटाने की प्रक्रिया को गर्भपात कहा जाता है।
अध्याय में बताया गया है कि अवांछित गर्भावस्था के कुछ मामलों में, विशेष परिस्थितियों में और गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में, जब भ्रूण बहुत छोटा होता है, उसे शल्य क्रिया द्वारा हटाया जा सकता है।
लिंग चयन और सामाजिक जिम्मेदारी
अध्याय में विशेष रूप से बताया गया है कि किसी विशेष लिंग को प्राथमिकता देने के कारण किया जाने वाला स्वैच्छिक गर्भपात समाज में गंभीर लिंग असंतुलन पैदा कर सकता है। भारत में प्रसव-पूर्व लिंग निर्धारण कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।
माँ और शिशु का स्वास्थ्य
गर्भावस्था के दौरान माँ के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। उचित पोषण, नियमित चिकित्सकीय जाँच और पर्याप्त विश्राम माँ तथा विकासशील शिशु दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। हानिकारक पदार्थों के सेवन से बचना भी आवश्यक है।
आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका
अध्याय में बताया गया है कि आशा (ASHA) कार्यकर्ता विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, टीकाकरण, परिवार नियोजन, मातृ देखभाल, सुरक्षित प्रसव और गर्भनिरोधक विधियों के बारे में समुदाय को जागरूक करती हैं।
प्रसव पश्चात अवसाद
परिभाषा: शिशु के जन्म के बाद कुछ माताओं में दिखाई देने वाली उदासी, बेचैनी और अत्यधिक थकान की स्थिति को प्रसव पश्चात अवसाद कहा जाता है।
यह एक मान्य स्वास्थ्य स्थिति है जिसका उपचार किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर, नर्स या आशा कार्यकर्ता जैसे स्वास्थ्यकर्मी से सहायता लेना उचित है।
विज्ञान एवं समाज
अध्याय में केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित गैर-स्टेरॉयड और गैर-हार्मोनल, मुँह से ली जाने वाली गर्भनिरोधक गोली का उदाहरण दिया गया है। यह सप्ताह में एक बार लेने वाली गोली के रूप में वर्णित है और राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।
Concept Builder
लैंगिक परिपक्वता → शरीर जनन योग्य
जिम्मेदार निर्णय → अनियोजित गर्भावस्था और STI से बचाव
कंडोम → अवरोध → शुक्राणु का अंडाणु तक पहुँचना कम
गर्भनिरोधक गोली → हार्मोन में परिवर्तन → अंडाणु के मोचन को प्रभावित करना
कॉपर-T → गर्भाशय में स्थापित अंतर्गर्भाशयी युक्ति
शल्य विधि → शुक्रवाहिनी/डिंबवाहिनी को अवरुद्ध करना → निषेचन रोकना
Exam Booster
- लैंगिक परिपक्वता क्या है? — वह अवस्था जब शरीर जनन के योग्य होने लगता है।
- STI का पूरा नाम क्या है? — Sexually Transmitted Infection.
- दो यौन संचारित संक्रमणों के नाम लिखिए। — गोनोरिया और सिफिलिस।
- कंडोम का दोहरा महत्त्व क्या है? — यह अनचाही गर्भावस्था को रोकने तथा कुछ STI के संक्रमण को कम करने में सहायता करता है।
- गर्भनिरोधक गोलियाँ कैसे कार्य करती हैं? — हार्मोन में परिवर्तन करके अंडाणु के मोचन को प्रभावित करती हैं।
- कॉपर-T क्या है? — गर्भाशय में रखी जाने वाली अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक युक्ति।
- शल्य-चिकित्सा द्वारा गर्भनिरोध कैसे किया जाता है? — पुरुषों में शुक्रवाहिनी और महिलाओं में डिंबवाहिनी को अवरुद्ध करके।
- गर्भावस्था के दौरान माँ के लिए क्या आवश्यक है? — उचित पोषण, नियमित चिकित्सकीय जाँच, पर्याप्त विश्राम और हानिकारक पदार्थों से बचाव।
- आशा कार्यकर्ता किन कार्यों में सहायता करती हैं? — स्वच्छता, टीकाकरण, परिवार नियोजन, मातृ देखभाल, सुरक्षित प्रसव और गर्भनिरोधक संबंधी जागरूकता में।
- प्रसव पश्चात अवसाद क्या है? — शिशु के जन्म के बाद कुछ माताओं में होने वाली उदासी, बेचैनी और थकान की मान्य स्वास्थ्य स्थिति।
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1. Chapter Review and Key Points
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