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3. नात्सीवाद और हिटलर का उदय History class 9 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास

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3. नात्सीवाद और हिटलर का उदय History class 9 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास

3. नात्सीवाद और हिटलर का उदय History class 9 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास

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3. नात्सीवाद और हिटलर का उदय

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अभ्यास

Last Update On: 06 March 2026

 

Chapter 3. नात्सीवाद और हिटलर का उदय


Q1. वाइमर गणराज्य के सामने क्या समस्याएँ थीं?

उत्तर: वाइमर गणराज्य के सामने निम्नलिखित समस्याएँ थी | 

(i) युद्ध में पराजय और राष्ट्रिय अपमान और हर्जाने के लिए इसी को दोषी ठहराया गया | गणराज्य के समर्थकों को नवम्बर का अपराधी कहकर उनका मजाक उडाया जाता था |

(ii) रूस की बोल्वेशिक क्रांति की तरह ही जर्मनी में स्पार्टकिस्ट लीग द्वारा विद्रोह की योजना बनाई गई | इसे वाइमर गणराज्य ने विफल तो कर दिया परन्तु जर्मनी के साम्यवादी और समाजवादी एक दुसरे के कट्टर दुश्मन बन गए | 

(iii) प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब कर्ज और हर्जाना चुकाने से मना कर दिया तो फ्रांस ने उसके बहुत से आर्थिक क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया | 

(iv) 1923 में इस गणराज्य को आर्थिक संकट इस कदर झेलने पड़े कि उसके मुद्रा की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी कम हो गयी और कर्ज और महगाई मुद्रास्फीति काफी बढ़ गई | जिसे निपटने के लिए उसे अमेरिका से आर्थिक मदद कर्ज के रूप में लेनी पड़ी | 

Q2. इस बारे में चर्चा कीजिए कि 1930 तक आते-आते जर्मनी में नात्सीवाद को लोकप्रियता क्यों मिलने लगी?

उत्तर: 1929 के बाद बैंक दिवालिया हो चुके, काम-धंधे बंद होते जा रहे थे, मजदुर बेरोजगार हो रहे थे और मध्यवर्ग को लाचारी और भुखमरी का डर सता रहा था। नात्सी प्रोपेगैंडा में लोगों को एक बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई देती थी। धीरे-धीरे नात्सीवाद एक जन आन्दोलन का रूप लेता गया और जर्मनी में नात्सीवाद को लोकप्रियता मिलने लगी |

हिटलर एक जबरदस्त वक्ता था। उसका जोश और उसके शब्द लोगों को हिलाकर रख देते थे। वह अपने भाषणों में एक शक्तिशाली राष्ट्र की स्थापना, वर्साय संधि में हुई नाइंसाफी जर्मन समाज को खोई हुई प्रतिष्ठा वापस दिलाने का आश्वासन देता था। उसका वादा था कि वह बेरोजगारों को रोजगार और नौजवानों को एक सुरक्षित भविष्य देगा। उसने आश्वासन दिया कि वह देश को विदेशी प्रभाव से मुक्त कराएगा और तमाम विदेशी ‘साशिशों’ का मुँहतोड़ जवाब देगा।

Q3. नात्सी सोच के ख़ास पहलू कौन-से थे?

उत्तर: नात्सी सोच के ख़ास पहलू निम्नलिखित थे :- 

(i) सभी समाज बराबर नहीं हैं|वे नस्ली आधार पर बेहतर या कमतर हैं| इसके अंतर्गत ब्लॉन्ड, नीली आँखों वाले नार्डिक जर्मन आर्य सबसे ऊपरी और यहूदी सबसे निचलि पायदान पर आते हैं| यहूदियों को नस्लविरोधी अर्थात आर्यों का कट्टर शत्रु माना जाता था|

(ii) हिटलर की नस्ली सोच चार्ल्स डार्विन और हर्बर्ट स्पेंसर के सिद्धांतों की मनमानी व्याख्या पर आधारित थी|

(iii) नात्सियों का विचार था कि जो नस्ल सबसे ताकतवर हैं वह जिन्दा रहेंगी, कमजोर नसले खत्म हो जाएगी|

(iv) आर्य नस्ल सर्वश्रेष्ठ हैं| उसे अपनी शुद्धता बनाए रखनी हैं, ताकत हासिल करनी हैं और दुनिया पर वर्चस्व कायम करना हैं| 

(v) नात्सी शुद्ध और स्वस्थ  नार्डिक आर्यों का समाज बनाना चाहते थे| वे नस्ली कल्पनालोक की स्थापना करना चाहते थे|

Q4. नात्सियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ नफरत पैदा करने में इतना असरदार कैसे रहा?

उत्तर: नात्सियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ नफरत पैदा करने में निम्नलिखित कारणों से असरदार  रहा:-

(i) नात्सियों के अनुसार सभी समाज बराबर नहीं थे| वे बेहतर या कमतर थे| नार्डिक जर्मन आर्य सबसे ऊपरी और यहूदी सबसे निचली पायदान पर आते थे| यहूदियों को नस्ल विरोधी माना जाता था|
(ii) यहूदियों को 'अवांछित' श्रेणी में रखा गया |   
(iii) यहूदियों के प्रति नात्सियों ने ईसाई धर्म में मौजूद परंपरागत घृणा का लाभ उठाया| ईसाईयों का आरोप था कि ईसा मसीह को यहूदियों ने मारा था| ईसाईयों की नज़र में यहूदी आदतन हत्यारे और सूदखोर थे|
(iv) यहूदियों के प्रति हिटलर की घृणा नस्ल के छदम वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित थी|
(v) प्रचार फिल्मों में यहूदियों के प्रति नफ़रत फ़ैलाने पर ज़ोर दिया गया| ' द एटर्नल ज्यू ' (अक्षय यहूदी) ऐसी ही एक कुख्यात फिल्म थी|
Q5. नात्सी समाज में औरतों की क्या भूमिका थी? फ्रांसिसी क्रांति के बारे में जानने के लिए अध्याय 1 देखें फ्रांसिसी क्रांति और नात्सी शासन में औरतों की भूमिका के बीच क्या फर्क था? एक पैराग्राफ में बताएँ।

उत्तर: (i) नात्सी समाज में औरतों को मर्दों से भिन्न मन जाता था| लड़कियों का कर्तव्य एक अच्छी मां बनना और शुद्ध आर्य रक्त वाले बच्चों को जन्म देना तथा उनका पालन-पोषण करना होता था| अवांछित बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को दण्ड तथा वांछित बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को इनाम में तमगे दिए जाते थे| उनके लिए आचार संहिता का निर्माण किया गया| निर्धारित आचार संहिता का उल्लंघन करने पर दण्ड दिया जाता था|

(ii) फ्रांसीसी क्रांति और नात्सी शासन में औरतों की भूमिका में बड़ा अंतर था क्योंकि फ्रांसीसी क्रांति में औरतों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया| अपने हितो की रक्षा के लिए उन्होंने राजनीतिक क्लब शुरू किए | उनमें ' सोसाइटी ऑफ़ रेवलूशनरी एंड रिपब्लिकन विमेन ' सबसे प्रसिद्ध क्लब था| उनकी मांग थी कि उनको पुरूषों के सामान  राजनीतिक अधिकार प्राप्त होने चाहिए| उन्होंने मताधिकार, असंबेली के लिए चुने जाने तथा राजनीतिक पदों की मांगे रखी| फ्रांस में उनकी दशा को सुधारने के लिए कई कानून बनाए गये| शिक्षा अनिवार्य की गई| शादी को स्वैच्छिक अनुबंध माना गया|जबकि जर्मनी में उनकी भूमिका को सीमित कार दिया गया| 

Q6. नात्सियों ने जनता पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के लिए कौन-कौन से  तरीके अपनाए? 

उत्तर: नात्सियों ने जनता पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए :-

(i) हिटलर ने राजनीति की एक नई शैली रची थी। वह लोगों को गोलबंद करने के लिए आडंबर और प्रदर्शन की अहमियत समझता था।

(ii) हिटलर के प्रति भारी समर्थन दर्शाने और लोगों में परस्पर एकता का भाव पैदा करने के लिए नात्सियों ने बड़ी-बड़ी रैलियाँ और जनसभाएँ आयोजित कीं।

(iii) स्वस्तिक छपे लाल झंडे, नात्सी सैल्यूट और भाषणों के बाद खास अंदाज में तालियों की गड़गड़ाहटμये सारी चीजे शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा थीं।

(iv) नात्सियों ने अपने धूआँधार प्रचार के जरिये हिटलर को एक मसीहा, एक रक्षक, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया, जिसने मानो जनता को तबाही से उबारने के लिए ही अवतार लिया था।

(v) एक ऐसे समाज को यह छवि बेहद आकर्षक दिखाई देती थी जिसकी प्रतिष्ठा और गर्व का अहसास चकनाचूर हो चुका था और जो एक भीषण आर्थिक एवं राजनीतिक संकट से गुजर रहा था।

Class 9 History Chapter 3 – नात्सीवाद और हिटलर का उदय

टॉपिक वाइज क्विक नोट्स

1. वाइमर गणराज्य की स्थापना

प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1919 में जर्मनी में वाइमर गणराज्य की स्थापना हुई। यह एक लोकतांत्रिक सरकार थी लेकिन इसे शुरू से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा।

2. वर्साय संधि का प्रभाव

1919 की वर्साय संधि ने जर्मनी पर कठोर शर्तें लागू कीं। जर्मनी को भारी युद्ध क्षतिपूर्ति देनी पड़ी और उसकी सेना तथा कई क्षेत्रों को सीमित कर दिया गया।

3. आर्थिक संकट और महामंदी

1923 में जर्मनी में भयंकर मुद्रास्फीति हुई जिससे लोगों की बचत समाप्त हो गई। 1929 की महामंदी ने बेरोजगारी और गरीबी को और बढ़ा दिया।

4. हिटलर और नात्सी पार्टी का उदय

एडॉल्फ हिटलर नात्सी पार्टी का नेता था। उसने राष्ट्रवाद और जर्मनी की महानता के विचारों का प्रचार करके जनता का समर्थन प्राप्त किया।

5. नात्सी विचारधारा

नात्सी विचारधारा आर्य जाति को श्रेष्ठ मानती थी और यहूदियों को जर्मनी की समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराती थी।

6. हिटलर का सत्ता में आना

1933 में हिटलर जर्मनी का चांसलर बना। सत्ता में आने के बाद उसने लोकतंत्र को समाप्त कर तानाशाही शासन स्थापित कर दिया।

7. नात्सी शासन की नीतियाँ

नात्सी शासन ने सभी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगा दिया और केवल नात्सी पार्टी को मान्यता दी। विरोध करने वालों को गिरफ्तार कर कंसन्ट्रेशन कैंप में भेज दिया जाता था।

8. प्रचार और नियंत्रण

नात्सी शासन ने प्रचार का व्यापक उपयोग किया। शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक गतिविधियों को सरकार के नियंत्रण में रखा गया।

9. युवा और महिलाएँ

नात्सी शासन ने युवाओं को अपनी विचारधारा सिखाने के लिए हिटलर यूथ संगठन बनाया। महिलाओं को घर और परिवार तक सीमित रखने की नीति अपनाई गई।

10. यहूदियों के खिलाफ भेदभाव

1935 में न्यूरेंबर्ग कानून लागू किए गए जिनसे यहूदियों के नागरिक अधिकार छीन लिए गए और उनके साथ भेदभाव किया गया।

11. क्रिस्टलनाख्ट

1938 में क्रिस्टलनाख्ट की घटना में यहूदियों के घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों को नष्ट कर दिया गया।

12. होलोकॉस्ट

नात्सी शासन के दौरान लाखों यहूदियों और अन्य लोगों का नरसंहार किया गया जिसे होलोकॉस्ट कहा जाता है।

13. द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत

1939 में जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण किया जिससे द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया।

14. नात्सी शासन का अंत

1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के साथ नात्सी शासन समाप्त हो गया और हिटलर ने आत्महत्या कर ली।

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