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Chapter-जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 16, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 15 August 2026

जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण

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जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण

अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण

पृथ्वी पर वर्तमान जैव विविधता लंबे समय में हुए परिवर्तनों और जीवों तथा उनके परिवेश के बीच हुई पारस्परिक क्रियाओं का परिणाम है। इतनी विशाल विविधता को व्यवस्थित रूप से समझने के लिए वैज्ञानिक वर्गीकरण का उपयोग करते हैं।

जैव विविधता का विकास

परिभाषा: जीवों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी होने वाले छोटे-छोटे परिवर्तन, जो उनकी उत्तरजीविता और जनन को प्रभावित करते हैं, लंबे समय में जैव विविधता के विकास में योगदान देते हैं।

परिस्थितियाँ समय के साथ बदलती रहती हैं। जीवों में पाए जाने वाले कुछ छोटे अंतर उन्हें बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होने में सहायता कर सकते हैं। ऐसे अंतर अनेक पीढ़ियों में संचित होते जाते हैं और जीवन के नए रूपों के विकास में योगदान देते हैं।

इस प्रकार आज दिखाई देने वाली जैव विविधता लंबे समय तक लगातार होते रहे परिवर्तनों का परिणाम है। जीवों और उनके परिवेश के बीच पारस्परिक क्रियाएँ भी इस विविधता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 

जीवों का वर्गीकरण

परिभाषा: जीवों को उनकी समानताओं, भिन्नताओं और अन्य वैज्ञानिक विशेषताओं के आधार पर व्यवस्थित समूहों में बाँटने की प्रक्रिया को जैविक वर्गीकरण कहते हैं।

पृथ्वी पर करोड़ों जीव पाए जाते हैं। यदि प्रत्येक जीव का अलग-अलग अध्ययन किया जाए तो यह कार्य बहुत कठिन होगा। इसलिए वैज्ञानिक समान विशेषताओं वाले जीवों को समूहों में रखते हैं। इससे जीवों की विशाल विविधता का अध्ययन व्यवस्थित और सरल हो जाता है। 

जीवों का वर्गीकरण कैसे करें?

किसी जीव को किसी समूह में रखने के लिए उसकी विभिन्न विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। वैज्ञानिक पहले व्यापक और आसानी से दिखाई देने वाली विशेषताओं को देखते हैं और फिर अधिक विस्तृत विशेषताओं का अध्ययन करते हैं।

एक ही जीव को अलग-अलग मानदंडों के आधार पर अलग-अलग समूहों में रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी जीव को उसके भोजन, रहने के स्थान या सक्रिय रहने के समय के आधार पर अलग-अलग समूहों में रखा जा सकता है। 

वर्गीकरण के प्रमुख मानदंड

बाह्य विशेषताएँ

परिभाषा: जीव के शरीर की दिखाई देने वाली विशेषताओं को बाह्य विशेषताएँ कहते हैं।

इनमें शरीर का आकार, आमाप और बाहरी शारीरिक संगठन जैसी विशेषताएँ शामिल होती हैं।

पोषण की विधि

परिभाषा: जीव द्वारा भोजन प्राप्त करने के तरीके को उसकी पोषण की विधि कहते हैं।

पोषण के आधार पर जीव स्वपोषी या विषमपोषी हो सकते हैं।

आंतरिक संरचना

परिभाषा: जीव के शरीर के अंदर पाए जाने वाले अंगों, ऊतकों और अन्य संरचनाओं की बनावट को आंतरिक संरचना कहते हैं।

इसमें कंकाल का प्रतिरूप, अंगों की उपस्थिति या अनुपस्थिति तथा विभिन्न प्रकार के ऊतक जैसी विशेषताएँ शामिल होती हैं।

कोशिका संरचना

परिभाषा: जीव की कोशिकाओं की संख्या और उनकी संरचना से संबंधित विशेषताओं को कोशिका संरचना कहते हैं।

  • एककोशिकीय या बहुकोशिकीय
  • प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक
  • कोशिका भित्ति की उपस्थिति या अनुपस्थिति

पारिस्थितिकीय भूमिका

परिभाषा: पारिस्थितिक तंत्र में जीव द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका को उसकी पारिस्थितिकीय भूमिका कहते हैं।

जीव पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक, उपभोक्ता या अपघटक की भूमिका निभा सकते हैं।

जनन

परिभाषा: नई संतति उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया को जनन कहते हैं।

जीवों के वर्गीकरण में उनकी जनन विधियों को भी ध्यान में रखा जा सकता है। इसमें अलैंगिक और लैंगिक जनन जैसी विशेषताएँ शामिल हैं।

आनुवंशिक समानता

परिभाषा: जीवों में पाए जाने वाले वंशागत गुणों की समानता को आनुवंशिक समानता कहा जाता है।

वैज्ञानिक DNA का अध्ययन करके जीवों के बीच आनुवंशिक समानताओं और संबंधों को अधिक विस्तार से समझ सकते हैं। 

समानताएँ और विकासात्मक संबंध

जीवों में पाई जाने वाली समान विशेषताएँ उनके विकासात्मक संबंधों के बारे में जानकारी दे सकती हैं। जिन जीवों में कई समान विशेषताएँ होती हैं, उनके किसी समान पूर्वज से विकसित होने की संभावना का अध्ययन किया जा सकता है। 

वर्गीकरण की आवश्यकता

परिभाषा: जीवों की विशाल विविधता को व्यवस्थित करके उनके अध्ययन, पहचान और पारस्परिक संबंधों को समझने के लिए जीवों को समूहों में बाँटना वर्गीकरण की आवश्यकता को स्पष्ट करता है।

जिस प्रकार हजारों पुस्तकों वाले पुस्तकालय में पुस्तकों को विषय, लेखक या अलग-अलग अनुभागों के आधार पर व्यवस्थित करने से किसी पुस्तक को ढूँढना आसान होता है, उसी प्रकार जीवों का क्रमबद्ध वर्गीकरण उनके अध्ययन को सरल बनाता है। 

जैविक वर्गीकरण के लाभ

  • व्यवस्थित अध्ययन: जीवों के अध्ययन को क्रमबद्ध और सरल बनाता है।
  • समानता और भिन्नता: विभिन्न जीवों के बीच समानताओं और असमानताओं को समझने में सहायता करता है।
  • पारस्परिक संबंध: जीव एक-दूसरे से किस प्रकार संबंधित हैं, यह समझने में सहायता करता है।
  • पहचान और नामकरण: नए खोजे गए जीवों की पहचान और नामकरण में सहायता करता है।
  • संरक्षण: विलुप्त होने के खतरे वाले जीवों की पहचान करके जैव विविधता संरक्षण में सहायता करता है।
  • वैज्ञानिक संचार: पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए जीवों के बारे में एक समान प्रणाली में चर्चा करना संभव बनाता है। 

Concept Builder

पर्यावरण में परिवर्तन → जीवों में छोटे अंतर → अनुकूलन में सहायता → पीढ़ियों में परिवर्तन → जैव विविधता

जीवों की विशाल विविधता → समानता/भिन्नता का अध्ययन → समूह बनाना → वर्गीकरण

वर्गीकरण के आधार → बाह्य विशेषताएँ + पोषण + आंतरिक संरचना + कोशिका संरचना + पारिस्थितिकीय भूमिका + जनन + आनुवंशिक समानता

वर्गीकरण → पहचान + अध्ययन + संबंधों की समझ + संरक्षण

Exam Booster

  • जैव विविधता का विकास किस प्रकार हुआ? — लंबे समय में हुए परिवर्तनों तथा जीवों और उनके परिवेश के बीच पारस्परिक क्रियाओं के कारण जैव विविधता विकसित हुई।
  • जैविक वर्गीकरण क्या है? — समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर जीवों को व्यवस्थित समूहों में बाँटना जैविक वर्गीकरण है।
  • वर्गीकरण के कोई चार आधार लिखिए। — बाह्य विशेषताएँ, पोषण की विधि, कोशिका संरचना और जनन।
  • कोशिका संरचना वर्गीकरण में क्यों महत्वपूर्ण है? — इससे एककोशिकीय/बहुकोशिकीय तथा प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक जैसे महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट होते हैं।
  • आनुवंशिक समानता कैसे ज्ञात की जाती है? — DNA में पाए जाने वाले वंशागत गुणों का अध्ययन करके।
  • वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों है? — पृथ्वी पर पाए जाने वाले करोड़ों जीवों के व्यवस्थित और सरल अध्ययन के लिए।
  • वर्गीकरण से संरक्षण में कैसे सहायता मिलती है? — इससे विलुप्त होने के खतरे वाले जीवों की पहचान करने और उनके संरक्षण में सहायता मिलती है।
  • क्या एक जीव को एक से अधिक समूहों में रखा जा सकता है? — हाँ, अलग-अलग वर्गीकरण मानदंडों का उपयोग करने पर एक ही जीव अलग-अलग समूहों में रखा जा सकता है।
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