Chapter-जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
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जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
Chapter Review and Key Points
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
पृथ्वी पर सूक्ष्म जीवों से लेकर विशाल वृक्षों और जटिल जन्तुओं तक जीवन अनेक रूपों में पाया जाता है। जीवों की इस व्यापक विविधता को समझने के लिए वैज्ञानिक उनके समान गुणों, भिन्नताओं और विकासात्मक संबंधों के आधार पर उनका वर्गीकरण करते हैं।
Chapter Review
- जैव विविधता: पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की असीम विविधता को जैव विविधता कहते हैं।
- जैव विविधता का महत्त्व: प्रत्येक जीव पारिस्थितिक तंत्र में कोई न कोई भूमिका निभाता है और पृथ्वी पर जीवन के संतुलन में योगदान देता है।
- पौधों की भूमिका: पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं और अनेक जीवों को ऊर्जा तथा भोजन प्रदान करते हैं।
- अपघटक: कवक और जीवाणु मृत जैव पदार्थों का अपघटन करके पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं।
- परागणकारी: पक्षी, मधुमक्खियाँ और चमगादड़ जैसे जीव अनेक पुष्पीय पौधों के परागण में सहायता करते हैं।
- मानव और जैव विविधता: मनुष्य भोजन, औषधि, आवास और आजीविका के लिए जैव विविधता पर निर्भर हैं।
- फसल विविधता: फसलों की विभिन्न किस्मों का संरक्षण खाद्य सुरक्षा को मजबूत करता है और फसल के पूर्ण नष्ट होने के जोखिम को कम करता है।
- स्थानिक जातियाँ: जो जातियाँ प्राकृतिक रूप से विश्व के किसी विशेष क्षेत्र में ही पाई जाती हैं, उन्हें स्थानिक जातियाँ कहते हैं।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: ऐसे क्षेत्र जहाँ बड़ी संख्या में स्थानिक जातियाँ पाई जाती हैं और जहाँ आवासीय क्षति अधिक हुई है, जैव विविधता हॉटस्पॉट कहलाते हैं।
- भारत के हॉटस्पॉट: पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, हिमालय और सुंडालैंड भारत से संबंधित प्रमुख वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं।
- जैव विविधता का विकास: वर्तमान जैव विविधता लंबे समय तक होते रहे परिवर्तनों, अनुकूलन और जीवों तथा उनके परिवेश के बीच पारस्परिक क्रियाओं का परिणाम है।
- वर्गीकरण: जीवों को उनकी समानताओं, भिन्नताओं और विकासात्मक संबंधों के आधार पर व्यवस्थित समूहों में बाँटने की प्रक्रिया वर्गीकरण कहलाती है।
- वर्गीकरण की आवश्यकता: वर्गीकरण से जीवों की पहचान, अध्ययन, उनके पारस्परिक संबंधों और जीवन के इतिहास को समझना आसान होता है।
- वर्गीकरण के प्रमुख आधार: बाह्य संरचना, पोषण की विधि, आंतरिक संरचना, कोशिका संरचना, पारिस्थितिकीय भूमिका, जनन और आनुवंशिक समानता आदि।
- कोशिका के आधार पर: जीव एककोशिकीय या बहुकोशिकीय तथा प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक हो सकते हैं।
- पोषण के आधार पर: जीव स्वपोषी या विषमपोषी हो सकते हैं।
- पाँच-जगत वर्गीकरण: रॉबर्ट एच. व्हिटेकर की पाँच-जगत प्रणाली में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया शामिल हैं।
- मोनेरा: इसमें मुख्यतः एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव शामिल होते हैं।
- प्रोटिस्टा: इसमें मुख्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव शामिल होते हैं। इनमें कुछ स्वपोषी और कुछ विषमपोषी होते हैं।
- फंजाई: कवक सामान्यतः बहुकोशिकीय यूकैरियोटिक और विषमपोषी जीव होते हैं। उनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।
- प्लांटी: पादप सामान्यतः बहुकोशिकीय, स्वपोषी यूकैरियोटिक जीव होते हैं और उनकी कोशिका भित्ति मुख्यतः सेलुलोज की बनी होती है।
- प्लांटी के प्रमुख वर्ग: थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म।
- एंजियोस्पर्म: पुष्पीय पौधे बीजों का निर्माण करते हैं तथा फल और पुष्प बनाते हैं। ये पृथ्वी पर सबसे अधिक विविध पादप समूह हैं।
- एनिमेलिया: जन्तु बहुकोशिकीय, विषमपोषी और यूकैरियोटिक जीव होते हैं।
- नॉन-कॉर्डेटा: जिन जन्तुओं में पृष्ठरज्जु नहीं होती, उन्हें अकशेरुकी या नॉन-कॉर्डेटा समूह में रखा जाता है।
- कॉर्डेटा: जिन जन्तुओं में पृष्ठरज्जु से संबंधित विशेषताएँ पाई जाती हैं, उन्हें कॉर्डेटा में रखा जाता है।
- कशेरुकी: कशेरुकी जन्तुओं में मत्स्य, उभयचर, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी प्रमुख वर्ग हैं।
- अनुकूलन: बदलते पर्यावरण में जीवित रहने और जनन करने में सहायता करने वाले संरचनात्मक या अन्य परिवर्तन अनुकूलन से संबंधित होते हैं।
- वर्गीकरण की पदानुक्रम: वर्गीकरण बड़े और व्यापक समूहों से छोटे तथा अधिक विशिष्ट समूहों की ओर क्रमबद्ध होता है।
- जाति: वर्गीकरण की पदानुक्रम में जाति सबसे अधिक विशिष्ट प्रमुख इकाई है। एक ही जाति के सदस्य अधिक समान विशेषताएँ साझा करते हैं।
- वैज्ञानिक नामकरण: जीवों को वैज्ञानिक रूप से नाम देने से अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों के कारण उत्पन्न भ्रम को दूर किया जा सकता है।
- द्विनाम पद्धति: वैज्ञानिक नाम सामान्यतः दो भागों से मिलकर बना होता है—पहला वंश का नाम और दूसरा जाति का नाम।
- वर्गीकरण का व्यापक महत्त्व: वर्गीकरण केवल जीवों के नामकरण तक सीमित नहीं है। यह जीवों के पारस्परिक संबंध, पृथ्वी पर जीवन के इतिहास और जैव विविधता के संरक्षण को समझने में सहायता करता है।
एक नज़र में पूरा अध्याय
जैव विविधता → जीवों की विविधता → वर्गीकरण की आवश्यकता → वर्गीकरण के आधार → पाँच-जगत वर्गीकरण → मोनेरा → प्रोटिस्टा → फंजाई → प्लांटी → एनिमेलिया → अनुकूलन → वर्गीकरण की पदानुक्रम → वैज्ञानिक नामकरण
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
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