Chapter-जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
जीवों का वर्गीकरण केवल उन्हें अलग-अलग समूहों में बाँटने तक सीमित नहीं है। यह एक क्रमबद्ध व्यवस्था है, जिसमें बड़े समूहों से छोटे और अधिक विशिष्ट समूहों की ओर बढ़ा जाता है। वैज्ञानिक नामकरण इस व्यवस्था को विश्वभर में समान रूप से समझने और जीवों की सही पहचान करने में सहायता करता है।
वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
परिभाषा: जीवों को बड़े और व्यापक समूहों से क्रमशः छोटे तथा अधिक विशिष्ट समूहों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति कहते हैं।
वर्गीकरण में सबसे बड़े समूह से शुरुआत करके धीरे-धीरे अधिक छोटे समूहों की ओर बढ़ा जाता है। प्रत्येक छोटे समूह में शामिल जीवों में आपस में अधिक समान विशेषताएँ होती हैं। इस प्रकार नीचे की ओर जाते-जाते समूह अधिक विशिष्ट होता जाता है।
वर्गीकरण के प्रमुख स्तर
जगत → संघ → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति
- जगत (Kingdom): व्यापक स्तर का वर्गीकरण समूह।
- संघ (Phylum): समान प्रमुख संरचनात्मक विशेषताओं वाले जीवों का समूह।
- वर्ग (Class): संघ के अंतर्गत अधिक समान विशेषताओं वाले जीवों का समूह।
- गण (Order): समानताओं के आधार पर वर्ग के भीतर बनाया गया समूह।
- कुल (Family): निकट संबंध रखने वाले वंशों का समूह।
- वंश (Genus): निकट रूप से संबंधित जातियों का समूह।
- जाति (Species): वर्गीकरण की अधिक विशिष्ट इकाई, जिसमें समान प्रकार के जीव शामिल होते हैं।
वर्गीकरण एक पते की तरह
वर्गीकरण की पदानुक्रमिक व्यवस्था को किसी पते की तरह समझा जा सकता है। जिस प्रकार किसी व्यक्ति का पूरा पता किसी निश्चित स्थान को पहचानने में सहायता करता है, उसी प्रकार वर्गीकरण के विभिन्न स्तर किसी जीव की पहचान और उसके संबंधों को समझने में सहायता करते हैं।
जैसे-जैसे हम जगत से जाति की ओर बढ़ते हैं, समूह का आकार छोटा और जीवों के बीच समानता अधिक होती जाती है।
उदाहरण — बाघ का वर्गीकरण
बाघ का वैज्ञानिक वर्गीकरण निम्न प्रकार है:
- जगत: एनिमेलिया
- संघ: कॉर्डेटा
- उपसंघ: वर्टिब्रेटा
- वर्ग: मैमेलिया
- गण: कार्निवोरा
- कुल: फेलिडी
- वंश: पेंथेरा
- जाति: पेंथेरा टाइग्रिस
इस उदाहरण से स्पष्ट है कि किसी जीव को बड़े समूह से अधिक विशिष्ट समूह की ओर क्रमशः वर्गीकृत किया जाता है।
वैज्ञानिक नामकरण
परिभाषा: जीवों को एक सार्वभौमिक वैज्ञानिक नाम देने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक नामकरण कहते हैं।
विभिन्न क्षेत्रों और भाषाओं में एक ही जीव के अलग-अलग सामान्य नाम हो सकते हैं। इससे वैज्ञानिक संचार में भ्रम उत्पन्न हो सकता है। इस समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिक नामकरण की एक सार्वभौमिक प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature)
परिभाषा: ऐसी वैज्ञानिक नामकरण प्रणाली जिसमें प्रत्येक जीव का वैज्ञानिक नाम दो शब्दों से मिलकर बना होता है, द्विनाम पद्धति कहलाती है।
द्विनाम पद्धति कैरोलस लिनियस द्वारा 18वीं शताब्दी में प्रस्तुत की गई थी। इसके अनुसार प्रत्येक जीव के वैज्ञानिक नाम में दो भाग होते हैं। वैज्ञानिक नाम लैटिन भाषा या उसके लैटिनकृत रूप में लिखे जाते हैं।
वैज्ञानिक नाम के दो भाग
पहला भाग — वंश (Genus)
वैज्ञानिक नाम का पहला शब्द वंश का नाम होता है। यह उन निकट संबंधी जातियों के समूह को दर्शाता है जिनमें कई समान विशेषताएँ पाई जाती हैं।
दूसरा भाग — जाति (Species)
वैज्ञानिक नाम का दूसरा शब्द जाति का नाम होता है। यह जीव की विशिष्ट पहचान बताता है।
उदाहरण — बाघ का वैज्ञानिक नाम
Panthera tigris
- Panthera — वंश का नाम।
- tigris — जाति का नाम।
सिंह का वैज्ञानिक नाम Panthera leo है। बाघ और सिंह दोनों Panthera वंश के अंतर्गत आते हैं और उनमें कई समान विशेषताएँ पाई जाती हैं।
जाति (Species) की अवधारणा
परिभाषा: ऐसे समान प्रकार के जीवों का समूह जो आपस में जनन करके संतति उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं, जाति कहलाता है।
जाति वर्गीकरण की अत्यंत विशिष्ट इकाई है। एक ही जाति के जीवों में कई समान विशेषताएँ पाई जाती हैं और वे सामान्यतः आपस में प्रजनन करके संतति उत्पन्न कर सकते हैं।
वैज्ञानिक नाम लिखने के नियम
- प्रत्येक वैज्ञानिक नाम के दो भाग होते हैं—वंश और जाति।
- वंश का नाम पहले लिखा जाता है।
- वंश के नाम का पहला अक्षर Capital Letter में लिखा जाता है।
- जाति का नाम Small Letters में लिखा जाता है।
- वैज्ञानिक नाम सामान्यतः Italic अक्षरों में लिखा जाता है।
- यदि वैज्ञानिक नाम हाथ से लिखा जाए तो दोनों शब्दों को अलग-अलग रेखांकित किया जाता है।
सामान्य नाम और वैज्ञानिक नाम में अंतर
| आधार | सामान्य नाम | वैज्ञानिक नाम |
|---|---|---|
| भाषा | अलग-अलग भाषाओं में अलग हो सकता है | लैटिन या लैटिनकृत रूप |
| क्षेत्र | क्षेत्र के अनुसार बदल सकता है | विश्वभर में समान |
| शब्दों की संख्या | निश्चित नहीं | दो भाग |
| उद्देश्य | सामान्य पहचान | वैज्ञानिक और सार्वभौमिक पहचान |
वैज्ञानिक नामकरण का महत्त्व
- भ्रम समाप्त करता है: अलग-अलग भाषाओं में अलग नाम होने से उत्पन्न भ्रम को दूर करता है।
- सार्वभौमिक पहचान: किसी जीव की पहचान पूरी दुनिया में एक समान रहती है।
- वैज्ञानिक संचार: विभिन्न देशों के वैज्ञानिक एक ही नाम का उपयोग कर सकते हैं।
- वर्गीकरण से संबंध: वैज्ञानिक नाम जीव के वंश और जाति की पहचान में सहायता करता है।
- संबंध समझने में सहायता: समान वंश के जीवों के बीच निकट संबंधों को समझने में सहायता मिलती है।
Concept Builder
बड़ा समूह → छोटा समूह → अधिक समानता → अधिक विशिष्ट पहचान
जगत → संघ → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति
द्विनाम पद्धति → वंश + जाति
Panthera → वंश
tigris → जाति
Panthera tigris → बाघ का वैज्ञानिक नाम
Exam Booster
- वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति क्या है? — बड़े समूहों से छोटे और अधिक विशिष्ट समूहों की ओर क्रमबद्ध रूप से जाने की व्यवस्था।
- वर्गीकरण के प्रमुख स्तरों का क्रम लिखिए। — जगत → संघ → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति।
- वर्गीकरण को पते के समान क्यों कहा जाता है? — क्योंकि यह किसी जीव की सही पहचान, तुलना और उसके संबंधों को समझने में सहायता करता है।
- द्विनाम पद्धति क्या है? — ऐसी वैज्ञानिक नामकरण प्रणाली जिसमें प्रत्येक जीव का नाम दो शब्दों से बना होता है।
- द्विनाम पद्धति किसने प्रस्तुत की? — कैरोलस लिनियस ने।
- वैज्ञानिक नाम के दो भाग कौन-से हैं? — वंश और जाति।
- Panthera tigris में Panthera क्या है? — वंश का नाम।
- Panthera tigris में tigris क्या है? — जाति का नाम।
- वैज्ञानिक नाम में वंश का पहला अक्षर कैसा लिखा जाता है? — Capital Letter में।
- वैज्ञानिक नाम में जाति का नाम कैसे लिखा जाता है? — Small Letters में।
- वैज्ञानिक नाम Italic में क्यों लिखा जाता है? — वैज्ञानिक नाम को सामान्य पाठ से अलग और मानकीकृत रूप में प्रदर्शित करने के लिए।
- वैज्ञानिक नामकरण की आवश्यकता क्यों है? — अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में जीवों के अलग-अलग सामान्य नाम होने से उत्पन्न भ्रम को दूर करने के लिए।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
Class 9, all subjects CBSE Notes in hindi medium, cbse class 9 Science Exploration notes, class 9 Science Exploration notes hindi medium, cbse 9 Science Exploration cbse notes, class 9 Science Exploration revision notes, cbse class 9 Science Exploration study material, ncert class 9 science notes pdf, class 9 science exam preparation, cbse class 9 physics chemistry biology notes
Welcome to ATP Education
ATP Education