Chapter-जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
जीवों की विशाल विविधता को व्यवस्थित करने के लिए वैज्ञानिकों ने समय-समय पर अलग-अलग वर्गीकरण प्रणालियाँ विकसित कीं। नई वैज्ञानिक जानकारी और सूक्ष्मदर्शी तकनीक में सुधार के साथ इन प्रणालियों में भी परिवर्तन होता गया।
जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
जीवों के वर्गीकरण की प्रारंभिक प्रणालियाँ मुख्यतः उनके बाहरी रूप, आवास और दिखाई देने वाले गुणों पर आधारित थीं। बाद में कोशिका संरचना, पोषण तथा अन्य वैज्ञानिक विशेषताओं को भी वर्गीकरण का आधार बनाया गया।
अरस्तू की वर्गीकरण प्रणाली
परिभाषा: जीवों को उनके आवास और बाहरी स्वरूप के आधार पर समूहों में बाँटने वाली प्रारंभिक प्रणाली को अरस्तू की वर्गीकरण प्रणाली कहा जाता है।
लगभग चौथी शताब्दी सामान्य संवत् पूर्व में अरस्तू ने जीवों को मुख्यतः उनके आवास के आधार पर स्थल, जल और वायु के समूहों में बाँटा। उन्होंने जीवों के बाहरी स्वरूप को भी ध्यान में रखा।
इस प्रणाली की मुख्य सीमा यह थी कि यह मुख्यतः आसानी से दिखाई देने वाली बाहरी विशेषताओं पर आधारित थी। इसलिए यह जीवों की वास्तविक जैविक समानताओं और अंतर को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाती थी।
द्विजगत प्रणाली (Two-Kingdom Classification)
परिभाषा: सभी जीवों को प्लांटी और एनिमेलिया दो जगतों में बाँटने वाली वर्गीकरण प्रणाली को द्विजगत प्रणाली कहते हैं।
18वीं शताब्दी में जीवों को दो प्रमुख समूहों में बाँटने की प्रणाली प्रस्तुत की गई। इसमें सभी जीवों को प्लांटी (पादप जगत) और एनिमेलिया (जंतु जगत) में रखा गया।
प्लांटी
इस समूह में ऐसे जीव रखे गए जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान्यतः गमन नहीं करते और अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
एनिमेलिया
इस समूह में ऐसे जीव रखे गए जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन करते हैं और भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
द्विजगत प्रणाली की सीमाएँ
द्विजगत प्रणाली के सामने कई समस्याएँ थीं। अमीबा, पैरामीशियम और जीवाणु जैसे जीवों को केवल पौधे या जन्तु के रूप में रखना कठिन था।
अमीबा और पैरामीशियम गतिशील होते हैं, लेकिन वे एककोशिकीय और विषमपोषी होते हैं। दूसरी ओर पौधे और अधिकांश जन्तु बहुकोशिकीय होते हैं। इसलिए केवल गमन और पोषण के आधार पर इन सभी जीवों का सही वर्गीकरण संभव नहीं था।
प्रोटिस्टा जगत का समावेश
परिभाषा: मुख्यतः एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को रखने के लिए जोड़ा गया तीसरा जगत प्रोटिस्टा कहलाया।
द्विजगत प्रणाली की सीमाओं को दूर करने के लिए एक नया जगत प्रोटिस्टा जोड़ा गया। इसमें मुख्यतः एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को रखा गया। इससे अमीबा और पैरामीशियम जैसे जीवों को पौधों और जन्तुओं से अलग समूह में रखने की सुविधा मिली।
मोनेरा जगत का समावेश
परिभाषा: ऐसे एककोशिकीय जीव जिनमें झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं होता, उन्हें मोनेरा जगत में रखा गया।
सूक्ष्मदर्शी तकनीक में सुधार होने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि अमीबा जैसे जीवों में झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक होता है, जबकि जीवाणुओं में ऐसा केंद्रक नहीं होता। इसलिए दोनों प्रकार के एककोशिकीय जीवों में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया।
इस अंतर के आधार पर जीवाणुओं को मोनेरा नामक अलग जगत में रखा गया। इससे चार-जगत वर्गीकरण प्रणाली अस्तित्व में आई—मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लांटी और एनिमेलिया।
फंजाई को अलग जगत का दर्जा
परिभाषा: कवक जैसे विषमपोषी जीवों को अलग समूह में रखने वाली वर्गीकरण व्यवस्था में फंजाई एक स्वतंत्र जगत है।
मशरूम जैसे कवक पौधों की तरह सामान्यतः एक स्थान पर रहते हैं, लेकिन वे पौधों की तरह अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते। वे विषमपोषी होते हैं और अवशोषण द्वारा पोषक पदार्थ प्राप्त करते हैं। कुछ कवक मृत और सड़े-गले पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं, जबकि कुछ सहजीवी या परजीवी होते हैं।
इन विशेषताओं के कारण कवकों को पौधों से अलग करके एक स्वतंत्र जगत फंजाई में रखा गया।
पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली
परिभाषा: जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया पाँच जगतों में बाँटने वाली प्रणाली को पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली कहते हैं।
कवकों को अलग जगत में रखने के बाद पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली अस्तित्व में आई। इसमें जीवों को उनकी कोशिका संरचना, पोषण और अन्य विशेषताओं के आधार पर पाँच प्रमुख जगतों में व्यवस्थित किया गया।
- मोनेरा — मुख्यतः एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव।
- प्रोटिस्टा — मुख्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव।
- फंजाई — मुख्यतः विषमपोषी कवक।
- प्लांटी — मुख्यतः स्वपोषी पादप।
- एनिमेलिया — मुख्यतः बहुकोशिकीय विषमपोषी जन्तु।
अध्याय के अनुसार रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने वर्ष 1969 में पाँच-जगत प्रणाली में जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया में समूहित किया।
वर्गीकरण प्रणालियों का क्रम
| वर्गीकरण प्रणाली | मुख्य विशेषता | वर्ष |
|---|---|---|
| अरस्तू की प्रणाली | आवास और बाहरी स्वरूप के आधार पर वर्गीकरण | लगभग चौथी शताब्दी सामान्य संवत् पूर्व |
| द्विजगत प्रणाली | प्लांटी और एनिमेलिया | 1758 |
| तीन-जगत प्रणाली | प्रोटिस्टा को शामिल किया गया | 1866 |
| चार-जगत प्रणाली | मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लांटी और एनिमेलिया | 1938 |
| पाँच-जगत प्रणाली | मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया | 1969 |
वर्गीकरण प्रणालियों का यह विकास दर्शाता है कि नई वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त होने पर जीवों को समझने और वर्गीकृत करने के तरीके भी अधिक विकसित होते गए।
Concept Builder
अरस्तू → आवास और बाहरी स्वरूप
द्विजगत → प्लांटी + एनिमेलिया
तीन जगत → प्लांटी + एनिमेलिया + प्रोटिस्टा
चार जगत → मोनेरा + प्रोटिस्टा + प्लांटी + एनिमेलिया
पाँच जगत → मोनेरा + प्रोटिस्टा + फंजाई + प्लांटी + एनिमेलिया
Exam Booster
- अरस्तू ने जीवों का वर्गीकरण किस आधार पर किया? — मुख्यतः आवास और बाहरी स्वरूप के आधार पर।
- द्विजगत प्रणाली में कौन-कौन से जगत थे? — प्लांटी और एनिमेलिया।
- द्विजगत प्रणाली की एक प्रमुख सीमा क्या थी? — अमीबा, पैरामीशियम और जीवाणु जैसे एककोशिकीय जीवों को उचित समूह में रखना कठिन था।
- प्रोटिस्टा जगत क्यों जोड़ा गया? — मुख्यतः एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को अलग समूह में रखने के लिए।
- जीवाणुओं को मोनेरा में क्यों रखा गया? — उनमें झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं पाया जाता।
- कवकों को अलग जगत क्यों बनाया गया? — वे पौधों की तरह अचल हो सकते हैं, लेकिन विषमपोषी होते हैं और अवशोषण द्वारा पोषण प्राप्त करते हैं।
- पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली में कितने जगत हैं? — पाँच।
- पाँच-जगत के नाम लिखिए। — मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया।
- पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली किसने और कब प्रस्तुत की? — रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने 1969 में।
- वर्गीकरण प्रणालियों में समय के साथ परिवर्तन क्यों हुए? — नई वैज्ञानिक जानकारी और जीवों की कोशिका संरचना तथा अन्य विशेषताओं की बेहतर समझ विकसित होने के कारण।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
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