Chapter-क्रियाशील ऊतक Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
क्रियाशील ऊतक
उत्तक और उसका कार्य
अध्याय 3. क्रियाशील ऊतक (Tissues in Action)
बहुकोशिकीय (Multicellular) जीवों में सभी कोशिकाएँ एक जैसा कार्य नहीं करतीं। समान संरचना और समान कार्य करने वाली कोशिकाएँ मिलकर ऊतक (Tissue) बनाती हैं। ऊतकों के कारण कार्यों का विभाजन (Division of Labour) संभव होता है, जिससे जीवों का शरीर अधिक कुशलता से कार्य करता है। इस भाग में हम ऊतक की अवधारणा, पौधों एवं जंतुओं में ऊतकों के अंतर तथा पौधों में वृद्धि करने वाले ऊतकों का अध्ययन करेंगे।
पौधों एवं जंतुओं में ऊतक का परिचय
ऊतक (Tissue) क्या है?
ऊतक (Tissue) समान संरचना (Structure) एवं समान कार्य (Function) करने वाली कोशिकाओं का समूह है। बहुकोशिकीय जीवों में विभिन्न ऊतक मिलकर अंग (Organ) बनाते हैं, अनेक अंग मिलकर अंग तंत्र (Organ System) तथा सभी अंग तंत्र मिलकर एक पूर्ण जीव का निर्माण करते हैं।
- ऊतक समान प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं।
- प्रत्येक ऊतक का एक निश्चित कार्य होता है।
- ऊतक कार्यों का विभाजन (Division of Labour) सुनिश्चित करते हैं।
- ऊतकों के कारण शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है।
कार्यों का विभाजन (Division of Labour)
बहुकोशिकीय जीवों में प्रत्येक ऊतक केवल अपना विशेष कार्य करता है। उदाहरण के लिए, मांसपेशीय ऊतक (Muscular Tissue) शरीर को गति प्रदान करता है, जबकि तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) संदेशों का संचार करता है। पौधों में जाइलम (Xylem) जल एवं खनिजों का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम (Phloem) भोजन का परिवहन करता है। इसी व्यवस्था को कार्यों का विभाजन कहते हैं।
| ऊतक | मुख्य कार्य |
|---|---|
| मांसपेशीय ऊतक (Muscular Tissue) | शरीर को गति प्रदान करना। |
| तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) | संदेशों का संचार एवं नियंत्रण। |
| जाइलम (Xylem) | जल एवं खनिजों का परिवहन। |
| फ्लोएम (Phloem) | भोजन का परिवहन। |
पौधों एवं जंतुओं के ऊतकों में अंतर क्यों होता है?
पौधों और जंतुओं की जीवन शैली (Lifestyle) अलग-अलग होती है, इसलिए उनके ऊतकों की संरचना और कार्य भी भिन्न होते हैं। अधिकांश पौधे एक स्थान पर स्थिर रहते हैं, इसलिए उन्हें मजबूती और सहारे की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, अधिकांश जंतु एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं, इसलिए उनके ऊतक गति, नियंत्रण तथा समन्वय के लिए विशेष रूप से विकसित होते हैं।
| पादप ऊतक (Plant Tissues) | जंतु ऊतक (Animal Tissues) |
|---|---|
| पौधों को सहारा एवं मजबूती प्रदान करते हैं। | शरीर की गति एवं समन्वय में सहायता करते हैं। |
| भोजन निर्माण एवं परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। | भोजन के पाचन, गति एवं नियंत्रण में सहायता करते हैं। |
| कोशिका भित्ति (Cell Wall) के कारण अधिक कठोर होते हैं। | कोशिका भित्ति के अभाव में अधिक लचीले होते हैं। |
पौधों में वृद्धि करने वाले ऊतक (Meristematic Tissues)
पौधों की वृद्धि विशेष प्रकार के ऊतकों द्वारा होती है, जिन्हें विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) कहा जाता है। इन ऊतकों की कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती रहती हैं और नई कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। यही नई कोशिकाएँ आगे चलकर विभिन्न स्थायी ऊतकों का निर्माण करती हैं।
- इनकी कोशिकाएँ निरंतर विभाजित होती रहती हैं।
- पौधे की लंबाई और मोटाई बढ़ाने में सहायता करती हैं।
- नई कोशिकाओं एवं नए ऊतकों का निर्माण करती हैं।
- पौधों की वृद्धि का आधार होती हैं।
विभज्योतक ऊतकों के प्रमुख प्रकार
| प्रकार | स्थान | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem) | जड़ एवं तने के शीर्ष पर | पौधे की लंबाई बढ़ाना। |
| अंतरवर्ती विभज्योतक (Intercalary Meristem) | पत्तियों अथवा पर्वसंधियों (Nodes) के पास | कटने के बाद पुनः वृद्धि में सहायता करना। |
| पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem) | तने एवं जड़ों के किनारों पर | तने एवं जड़ों की मोटाई बढ़ाना। |
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किसी विद्यालय में अलग-अलग शिक्षक अलग-अलग विषय पढ़ाते हैं। यदि एक ही शिक्षक सभी विषय पढ़ाने लगे, तो कार्य कठिन हो जाएगा। इसी प्रकार बहुकोशिकीय जीवों में भी अलग-अलग ऊतक अलग-अलग कार्य करते हैं। इसे ही कार्यों का विभाजन (Division of Labour) कहते हैं, जिससे शरीर अधिक कुशलता से कार्य करता है।
Exam Booster
- ऊतक (Tissue) समान संरचना एवं समान कार्य करने वाली कोशिकाओं का समूह है।
- ऊतकों के कारण कार्यों का विभाजन (Division of Labour) होता है।
- पौधों एवं जंतुओं के ऊतकों में उनकी जीवन शैली के कारण अंतर होता है।
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) पौधों की वृद्धि के लिए उत्तरदायी होते हैं।
- शीर्षस्थ, अंतरवर्ती एवं पार्श्व विभज्योतक परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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1. Chapter Review and Key Points
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