ATP Logo Welcome to ATP Education
Advertisement
Advertisement

Chapter-एक यात्रा: परमाणु के भीतर Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 6, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-एक यात्रा: परमाणु के भीतर Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 06 August 2026

एक यात्रा: परमाणु के भीतर

Page 5 of 11

रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ एवं बोर का परमाणु मॉडल

अध्याय 8. एक यात्रा: परमाणु के भीतर

पिछले भाग में आपने रदरफोर्ड के स्वर्ण पर्णिका प्रयोग तथा नाभिकीय मॉडल का अध्ययन किया। रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु की संरचना को समझाने में टॉमसन के मॉडल से अधिक सफल था, लेकिन यह परमाणु के स्थायित्व (Stability of Atom) की व्याख्या नहीं कर सका। इस समस्या के समाधान की खोज के दौरान प्रोटॉन की खोज हुई तथा बाद में नील्स बोर (Niels Bohr) ने ऐसा परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया जिसने इलेक्ट्रॉनों की स्थिरता को स्पष्ट किया।

रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ एवं बोर का परमाणु मॉडल

रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ (Limitations of Rutherford's Model)

रदरफोर्ड के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर ग्रहों की भाँति निरंतर परिक्रमा करते हैं। भौतिकी के सिद्धांतों के अनुसार कोई भी आवेशित कण यदि वृत्ताकार पथ में गति करता है, तो उसकी ऊर्जा लगातार कम होती रहती है। यदि ऐसा वास्तव में होता, तो इलेक्ट्रॉन धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर जाता और परमाणु नष्ट हो जाता। लेकिन वास्तविकता में परमाणु स्थायी होते हैं। इसलिए रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु के स्थायित्व की संतोषजनक व्याख्या नहीं कर सका। 

  • इलेक्ट्रॉन की स्थिरता को नहीं समझा सका।
  • परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर पाया।
  • ऊर्जा ह्रास (Loss of Energy) की समस्या का समाधान नहीं दिया।
  • एक नए परमाणु मॉडल की आवश्यकता महसूस हुई।

प्रोटॉन की खोज (Discovery of Proton)

प्रोटॉन (Proton) परमाणु के नाभिक में स्थित धनावेशित अवपरमाण्विक कण है। रदरफोर्ड ने यह स्पष्ट किया कि नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों के कारण ही परमाणु के केंद्र पर धनावेश होता है। प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन की तुलना में बहुत अधिक होता है तथा इसका आवेश इलेक्ट्रॉन के बराबर लेकिन विपरीत (+1) होता है। 

अवपरमाण्विक कण आवेश स्थिति
इलेक्ट्रॉन (Electron) -1 नाभिक के बाहर
प्रोटॉन (Proton) +1 नाभिक के भीतर

किसी भी परमाणु के विद्युत उदासीन (Electrically Neutral) होने के लिए उसमें उपस्थित प्रोटॉनों एवं इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। उदाहरण के लिए, हीलियम परमाणु में 2 प्रोटॉन एवं 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि सोडियम परमाणु में 11 प्रोटॉन एवं 11 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसी कारण परमाणु का कुल धनावेश एवं कुल ऋणावेश बराबर हो जाता है। 

बोर का परमाणु मॉडल (Bohr's Atomic Model)

वर्ष 1913 में डेनमार्क के वैज्ञानिक नील्स बोर (Niels Bohr) ने परमाणु का नया मॉडल प्रस्तुत किया। इस मॉडल ने पहली बार यह समझाया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरते। बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी पथ में नहीं घूमते, बल्कि वे केवल कुछ निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं (Shells or Energy Levels) में ही गति कर सकते हैं। इन कक्षाओं में गति करते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते, इसलिए परमाणु स्थायी बना रहता है। 

बोर मॉडल की मुख्य विशेषताएँ

  • इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित कक्षाओं (Shells) में ही गति करते हैं।
  • प्रत्येक कक्षा की ऊर्जा निश्चित होती है।
  • इन कक्षाओं को K, L, M, N आदि नाम दिए गए हैं।
  • नाभिक के सबसे निकट K-कोश (n = 1) होता है।
  • नाभिक से दूरी बढ़ने पर ऊर्जा स्तर भी बढ़ते जाते हैं।
  • स्थिर कक्षा में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते।
कोश (Shell) क्वांटम संख्या (n) स्थिति
K 1 नाभिक के सबसे निकट
L 2 K के बाहर
M 3 L के बाहर
N 4 M के बाहर

ऊर्जा स्तरों के बीच इलेक्ट्रॉनों का संक्रमण

बोर के अनुसार यदि कोई इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर पर जाता है, तो वह निश्चित मात्रा में ऊर्जा का अवशोषण करता है। इसी प्रकार जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर पर लौटता है, तो उतनी ही निश्चित मात्रा में ऊर्जा का उत्सर्जन करता है। यही सिद्धांत परमाणुओं के उत्सर्जन एवं अवशोषण स्पेक्ट्रम की व्याख्या करता है। 

Our Concept Builder

कल्पना कीजिए कि किसी बहुमंज़िला इमारत में केवल कुछ निश्चित मंज़िलों पर ही खड़ा हुआ जा सकता है। बीच की हवा में खड़ा होना संभव नहीं है। इसी प्रकार इलेक्ट्रॉन भी परमाणु में केवल निश्चित ऊर्जा स्तरों (K, L, M, N) में ही रह सकते हैं। एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाने के लिए उन्हें निश्चित मात्रा में ऊर्जा ग्रहण या त्यागनी पड़ती है।

Exam Booster

  • रदरफोर्ड मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका।
  • प्रोटॉन नाभिक में स्थित धनावेशित कण है।
  • परमाणु में प्रोटॉनों एवं इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होने पर वह विद्युत उदासीन होता है।
  • 1913 में नील्स बोर ने नया परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया।
  • इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा स्तरों (K, L, M, N) में ही गति करते हैं।
  • K-कोश नाभिक के सबसे निकट तथा सबसे कम ऊर्जा वाला स्तर है।
  • ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण के समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन करते हैं।
Page 5 of 11

Class 9, all subjects CBSE Notes in hindi medium, cbse class 9 Science Exploration notes, class 9 Science Exploration notes hindi medium, cbse 9 Science Exploration cbse notes, class 9 Science Exploration revision notes, cbse class 9 Science Exploration study material, ncert class 9 science notes pdf, class 9 science exam preparation, cbse class 9 physics chemistry biology notes

Quick Access: | NCERT Solutions | New Syllabus

Quick Access: | CBSE Notes | New Syllabus

Quick link for study materials

×

Search ATP Education

क्या आप इस वेबसाइट पर कुछ खोज रहे हैं? अपना keyword लिखें और हम आपको सीधे आपके target page तक GOOGLE SEARCH के द्वारा पहुँचा देंगे।