Chapter-एक यात्रा: परमाणु के भीतर Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
एक यात्रा: परमाणु के भीतर
रदरफोर्ड का स्वर्ण पर्णिका प्रयोग एवं परमाणु मॉडल
अध्याय 8. एक यात्रा: परमाणु के भीतर
पिछले भाग में आपने विकिरण (Radioactivity), इलेक्ट्रॉन की खोज तथा जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल का अध्ययन किया। यद्यपि टॉमसन का मॉडल परमाणु की संरचना को समझाने का पहला वैज्ञानिक प्रयास था, फिर भी वह सभी प्रयोगात्मक परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) ने प्रसिद्ध स्वर्ण पर्णिका प्रयोग (Gold Foil Experiment) किया। इस प्रयोग ने परमाणु की वास्तविक संरचना को समझने की दिशा में एक नया अध्याय प्रारम्भ किया।
रदरफोर्ड का स्वर्ण पर्णिका प्रयोग एवं परमाणु मॉडल
स्वर्ण पर्णिका प्रयोग (Gold Foil Experiment)
स्वर्ण पर्णिका प्रयोग (Gold Foil Experiment) परमाणु की आंतरिक संरचना का अध्ययन करने के लिए किया गया एक महत्वपूर्ण प्रयोग था। इस प्रयोग को अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) ने अपने सहयोगियों हैंस गीगर (Hans Geiger) और अर्नेस्ट मार्सडेन (Ernest Marsden) के साथ किया। इस प्रयोग का उद्देश्य यह जाँचना था कि परमाणु के भीतर धनावेश किस प्रकार वितरित है तथा टॉमसन का परमाणु मॉडल कितना सही है।
प्रयोग की व्यवस्था (Experimental Setup)
इस प्रयोग में एक रेडियोधर्मी स्रोत (Radioactive Source) से निकलने वाले तीव्र गति के अल्फा (α) कणों को अत्यंत पतली स्वर्ण पर्णिका (Thin Gold Foil) पर डाला गया। स्वर्ण पर्णिका के चारों ओर जिंक सल्फाइड (Zinc Sulphide) की प्रतिदीप्त (Fluorescent) स्क्रीन लगाई गई थी, जो α-कणों के टकराने पर चमक उत्पन्न करती थी। इस चमक के आधार पर वैज्ञानिकों ने α-कणों की दिशा एवं विचलन (Deflection) का अध्ययन किया।
| उपकरण | कार्य |
|---|---|
| रेडियोधर्मी स्रोत | α-कणों का उत्सर्जन करता है। |
| पतली स्वर्ण पर्णिका | α-कणों के प्रकीर्णन के लिए लक्ष्य। |
| जिंक सल्फाइड स्क्रीन | α-कणों के टकराने पर चमक उत्पन्न करती है। |
प्रयोग के प्रेक्षण (Observations)
रदरफोर्ड ने इस प्रयोग के दौरान तीन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रेक्षण किए। अधिकांश α-कण बिना किसी विचलन के सीधे स्वर्ण पर्णिका को पार कर गए। कुछ α-कण थोड़े कोण से मुड़ गए, जबकि बहुत कम α-कण बड़े कोण से मुड़े अथवा वापस लौट गए। यही परिणाम टॉमसन के मॉडल के विपरीत थे।
- अधिकांश α-कण बिना विचलन के सीधे निकल गए।
- कुछ α-कण छोटे कोण से विक्षेपित हुए।
- बहुत कम α-कण बड़े कोण से मुड़े या वापस लौट गए।
प्रयोग से प्राप्त निष्कर्ष (Conclusions)
इन प्रेक्षणों के आधार पर रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त (Empty Space) होता है। परमाणु का लगभग पूरा धनावेश तथा अधिकांश द्रव्यमान उसके अत्यंत छोटे एवं सघन केंद्रीय भाग में केंद्रित रहता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है। इलेक्ट्रॉन इस नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
- परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है।
- धनावेश नाभिक में केंद्रित रहता है।
- नाभिक अत्यंत छोटा तथा सघन होता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गति करते हैं।
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford's Atomic Model)
रदरफोर्ड ने अपने निष्कर्षों के आधार पर एक नया परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया, जिसे नाभिकीय मॉडल (Nuclear Model) अथवा ग्रहीय मॉडल (Planetary Model) कहा जाता है। इस मॉडल के अनुसार परमाणु के केंद्र में नाभिक होता है तथा उसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन उसी प्रकार परिक्रमा करते हैं जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं।
रदरफोर्ड मॉडल की प्रमुख विशेषताएँ
- परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है।
- नाभिक अत्यंत छोटा, सघन एवं धनावेशित होता है।
- परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित रहता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
- नाभिक परमाणु की तुलना में लगभग 105 गुना छोटा होता है।
टॉमसन एवं रदरफोर्ड मॉडल में अंतर
| टॉमसन मॉडल | रदरफोर्ड मॉडल |
|---|---|
| धनावेश पूरे परमाणु में फैला होता है। | धनावेश नाभिक में केंद्रित होता है। |
| इलेक्ट्रॉन धनावेशित गोले में समाहित रहते हैं। | इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। |
| परमाणु में रिक्त स्थान की व्याख्या नहीं करता। | परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त बताता है। |
Our Concept Builder
कल्पना कीजिए कि एक विशाल क्रिकेट मैदान परमाणु है और उसके ठीक मध्य में रखी एक छोटी-सी काली मिर्च का दाना नाभिक है। मैदान का लगभग पूरा भाग खाली है और केवल बीच का छोटा-सा भाग अत्यधिक सघन है। इसी प्रकार परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है तथा उसका लगभग पूरा द्रव्यमान अत्यंत छोटे नाभिक में केंद्रित रहता है।
Exam Booster
- रदरफोर्ड ने स्वर्ण पर्णिका (Gold Foil) प्रयोग किया।
- α-कणों का उपयोग परमाणु की संरचना के अध्ययन के लिए किया गया।
- परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान होता है।
- धनावेश एवं अधिकांश द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित रहते हैं।
- रदरफोर्ड के मॉडल को नाभिकीय या ग्रहीय मॉडल कहा जाता है।
- स्वर्ण पर्णिका प्रयोग ने टॉमसन के प्लम पुडिंग मॉडल को अस्वीकार कर दिया।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
2. परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति
3. इलेक्ट्रॉन की खोज एवं टॉमसन का परमाणु मॉडल
4. रदरफोर्ड का स्वर्ण पर्णिका प्रयोग एवं परमाणु मॉडल
5. रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ एवं बोर का परमाणु मॉडल
6. न्यूट्रॉन की खोज एवं परमाणु का द्रव्यमान
8. परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या एवं इलेक्ट्रॉनों का वितरण
9. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, तत्वों के संकेत चिन्ह एवं संयोजकता
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