Chapter-हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
तृतीयक गतिविधियाँ
अध्याय 14. हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
इस भाग में तृतीयक क्षेत्रक, तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता, डेयरी सहकारिता तथा कागज और पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया को समझेंगे।
तृतीयक गतिविधियाँ
तृतीयक गतिविधियाँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों में कार्य करने वाले लोगों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान करती हैं।
- तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।
- इस क्षेत्रक में वस्तुओं के बजाय मुख्य रूप से सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
- परिवहन, बैंकिंग, व्यापार और व्यवसाय प्रबंधन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- शिक्षक, चिकित्सक, नर्स, अधिवक्ता और विमान चालक भी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- तकनीशियन, मैकेनिक और बिजली मिस्त्री भी तृतीयक क्षेत्रक की सेवाओं में योगदान करते हैं।
तृतीयक क्षेत्रक के प्रमुख उदाहरण
| गतिविधि | उदाहरण |
|---|---|
| परिवहन | ट्रक, रेल, विमान आदि द्वारा सामान पहुँचाना |
| बैंकिंग | बैंक द्वारा वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना |
| स्वास्थ्य | चिकित्सक और नर्स की सेवाएँ |
| शिक्षा | शिक्षक द्वारा शिक्षा प्रदान करना |
| व्यापार | वस्तुओं की खरीद-बिक्री |
| संचार | मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से संचार सेवाएँ |
| मरम्मत | मोबाइल, टेलीविजन, कार और ट्रैक्टर की मरम्मत |
| होटल और रेस्तरां | भोजन और आतिथ्य सेवाएँ |
तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक अलग-अलग दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
- प्राथमिक क्षेत्रक कच्चा माल उपलब्ध कराता है।
- द्वितीयक क्षेत्रक कच्चे माल को उपयोगी या तैयार वस्तुओं में बदलता है।
- तृतीयक क्षेत्रक परिवहन, विपणन, बिक्री और अन्य सेवाओं के माध्यम से दोनों क्षेत्रकों की सहायता करता है।
उदाहरण: किसान अनाज पैदा करता है → मिल में अनाज से आटा बनाया जाता है → परिवहन द्वारा आटा बाजार तक पहुँचता है → दुकानदार उसे उपभोक्ताओं को बेचता है।
डेयरी सहकारिता — खेत से थाली तक
- गुजरात के किसान गायों और भैंसों से दूध प्राप्त करते हैं।
- किसान दूध को अपने आसपास की डेयरी में बेचते हैं।
- दूध की गुणवत्ता और मात्रा के आधार पर किसानों को भुगतान किया जाता है।
- दूध के उत्पादन की गतिविधि प्राथमिक क्षेत्रक से संबंधित है।
- दूध को विभिन्न खाद्य उत्पादों में बदलना द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधि है।
- परिवहन, विपणन और खुदरा बिक्री तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं।
अमूल सहकारी संगठन
- आनंद जिले के किसान पहले अपना दूध आसपास के गाँवों में बेचते थे।
- दूध जल्दी खराब होने के कारण किसानों को कम कीमत पर दूध बेचने की कठिनाई होती थी।
- कई किसान बिचौलियों पर निर्भर थे।
- किसानों ने सामूहिक रूप से सहकारी संगठन बनाने का निर्णय लिया।
- अमूल की स्थापना 1946 में श्री त्रिभुवनदास पटेल और डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में हुई।
- सहकारी संगठन के माध्यम से किसानों ने दूध के उत्पादन और बिक्री पर अपना नियंत्रण बढ़ाया।
- किसान दूध के उत्पादन, पाश्चरीकरण और बिक्री से जुड़े निर्णय सामूहिक रूप से लेने लगे।
- बाद में दूध से मक्खन और दूध पाउडर जैसे उत्पाद भी बनाए जाने लगे।
सहकारी संगठन
सहकारी संगठन व्यक्तियों का ऐसा समूह है जो स्वेच्छा से एक साथ आकर अपनी आर्थिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करता है।
- सभी सदस्य सहकारी संगठन के स्वामी होते हैं।
- निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
- सदस्य अपने कार्यों को आपस में साझा करते हैं।
- सहकारिता से सदस्य अपनी आर्थिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित ढंग से कर सकते हैं।
बिचौलिया
बिचौलिया वह व्यक्ति है जो उत्पादकों से सामान खरीदकर उपभोक्ताओं को बेचता है।
- बिचौलिया उत्पादक और उपभोक्ता के बीच कार्य करता है।
- वह अपनी सेवा के लिए शुल्क लेता है।
- अमूल की सहकारी व्यवस्था ने किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में सहायता की।
दूध से विभिन्न उत्पाद
| चरण | कार्य | क्षेत्रक |
|---|---|---|
| 1 | गाय या भैंस से दूध प्राप्त करना | प्राथमिक |
| 2 | दूध का प्रसंस्करण | द्वितीयक |
| 3 | दूध से घी, पनीर, मक्खन और दूध पाउडर बनाना | द्वितीयक |
| 4 | उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना | तृतीयक |
| 5 | विपणन और खुदरा बिक्री | तृतीयक |
पाश्चरीकरण
पाश्चरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें दूध को एक निश्चित तापमान तक गर्म किया जाता है ताकि हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट किए जा सकें और दूध को सुरक्षित रखा जा सके।
खुदरा
खुदरा माल की थोड़ी मात्रा को अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुँचाकर बेचने की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य माल का पुनर्विक्रय नहीं होता।
निर्यात
निर्यात किसी देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को दूसरे देश के खरीदारों या उपभोक्ताओं को बेचना है।
अध्याय के अनुसार अमूल जैसे सहकारी संगठन अपने उत्पादों का विपणन भारत के विभिन्न भागों में करते हैं और कई देशों में उनका निर्यात भी किया जाता है।
पाठ्यपुस्तक बनने की प्रक्रिया
पाठ्यपुस्तक बनाने की प्रक्रिया में तीनों आर्थिक क्षेत्रकों की भूमिका होती है। पेड़ से लकड़ी प्राप्त करने से लेकर कागज बनाने और उस पर मुद्रण करके पाठ्यपुस्तक तैयार करने तक विभिन्न गतिविधियाँ होती हैं।
सरल क्रम:
पेड़ → लकड़ी/काष्ठीय रेशे → लगदी → कागज → मुद्रण → पाठ्यपुस्तक
पाठ्यपुस्तक निर्माण में क्षेत्रकों की भूमिका
| क्षेत्रक | भूमिका |
|---|---|
| प्राथमिक | प्रकृति से आवश्यक कच्चा माल प्राप्त करना |
| द्वितीयक | कच्चे माल से लगदी और कागज बनाना तथा मुद्रण द्वारा पुस्तक तैयार करना |
| तृतीयक | परिवहन, वितरण और अन्य सेवाओं के माध्यम से उत्पाद को आगे पहुँचाना |
कागज का पुनर्चक्रण
- प्रयोग किए गए कागज का पुनर्चक्रण करके नया कागज बनाया जा सकता है।
- एक टन कागज के पुनर्चक्रण से 17 पेड़ों और 2.5 घन मीटर लैंडफिल स्थान की बचत की जा सकती है।
- पुनर्चक्रित कागज का उपयोग करने से लगभग 70 प्रतिशत ऊर्जा और पानी की बचत हो सकती है।
- कागज का विवेकपूर्ण उपयोग और पुनर्चक्रण प्राकृतिक संसाधनों की बचत में सहायता करता है।
क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता — प्रमुख उदाहरण
| प्राथमिक | द्वितीयक | तृतीयक |
|---|---|---|
| दूध का उत्पादन | दूध से मक्खन/पनीर आदि बनाना | परिवहन और बिक्री |
| पेड़ों से कच्चा माल | कागज का निर्माण | वितरण और परिवहन |
| कृषि से अनाज | अनाज से आटा बनाना | आटे का परिवहन और खुदरा बिक्री |
प्रमुख शब्द
- तृतीयक क्षेत्रक: प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों को सेवाएँ प्रदान करने वाला क्षेत्रक।
- सेवा क्षेत्रक: तृतीयक क्षेत्रक का दूसरा नाम।
- सहकारी संगठन: आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्वेच्छा से एक साथ आए व्यक्तियों का समूह।
- बिचौलिया: उत्पादक से सामान खरीदकर उपभोक्ता को बेचने वाला व्यक्ति।
- पाश्चरीकरण: दूध को निश्चित तापमान तक गर्म करके हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की प्रक्रिया।
- खुदरा: अंतिम उपभोक्ता को थोड़ी मात्रा में माल बेचने की प्रक्रिया।
- निर्यात: एक देश में उत्पादित वस्तुओं या सेवाओं को दूसरे देश में बेचना।
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक का एक साथ उदाहरण
दूध का उदाहरण:
गाय/भैंस → दूध उत्पादन → प्राथमिक क्षेत्रक
दूध → प्रसंस्करण → घी/पनीर/मक्खन/दूध पाउडर → द्वितीयक क्षेत्रक
उत्पाद → परिवहन → विपणन → खुदरा बिक्री → तृतीयक क्षेत्रक
Exam Booster
- तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।
- परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार तृतीयक गतिविधियों के उदाहरण हैं।
- तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
- दूध का उत्पादन प्राथमिक गतिविधि है।
- दूध को घी, पनीर, मक्खन या दूध पाउडर में बदलना द्वितीयक गतिविधि है।
- दूध के उत्पादों का परिवहन, विपणन और खुदरा बिक्री तृतीयक गतिविधियाँ हैं।
- सहकारी संगठन में सदस्य सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं।
- अमूल एक दुग्ध सहकारी संगठन का उदाहरण है।
- अमूल की स्थापना 1946 में हुई।
- पाश्चरीकरण में दूध को निश्चित तापमान तक गर्म किया जाता है।
- खुदरा बिक्री अंतिम उपभोक्ता तक माल की थोड़ी मात्रा पहुँचाने से संबंधित है।
- कागज के पुनर्चक्रण से पेड़ों, ऊर्जा, पानी और लैंडफिल स्थान की बचत होती है।
Quick Revision
प्राथमिक → प्रकृति से कच्चा माल
द्वितीयक → कच्चे माल का रूपांतरण
तृतीयक → सेवाएँ, परिवहन, विपणन और बिक्री
डेयरी उदाहरण:
दूध उत्पादन → प्राथमिक → प्रसंस्करण → द्वितीयक → परिवहन/विपणन/खुदरा → तृतीयक
मुख्य बात: तीनों आर्थिक क्षेत्रक अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े और परस्पर निर्भर हैं।
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