ATP Logo Welcome to ATP Education
Advertisement
Advertisement

Chapter-भारत की सांस्कृतिक जड़ें Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : September 14, 2026

CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-भारत की सांस्कृतिक जड़ें Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 14 September 2026

भारत की सांस्कृतिक जड़ें

Page 3 of 4

बौद्ध एवं जैन मत

अध्याय 7. भारत की सांस्कृतिक जड़ें 

इस भाग में बौद्ध और जैन मत, चार्वाक दर्शन तथा लोक और जनजातीय परंपराओं की सांस्कृतिक भूमिका को समझेंगे।

बौद्ध मत

  • सिद्धार्थ गौतम का जन्म लुंबिनी में हुआ था, जो वर्तमान नेपाल में है।
  • लगभग 29 वर्ष की आयु में उन्होंने वृद्धावस्था, बीमारी, मृत्यु और एक शांत संन्यासी को देखा।
  • इन अनुभवों से प्रभावित होकर उन्होंने राजसी जीवन और परिवार का त्याग किया।
  • उन्होंने दुख के कारणों को समझने के लिए साधना और ध्यान किया।
  • बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई।
  • ज्ञान प्राप्त करने के बाद उन्हें बुद्ध कहा गया।

बुद्ध की प्रमुख शिक्षाएँ

  • अहिंसा – किसी जीव को हानि न पहुँचाना।
  • आंतरिक अनुशासन – अपने विचारों और कार्यों पर नियंत्रण रखना।
  • अविद्या और मोह को दुख के प्रमुख कारणों में माना गया।
  • मनुष्य को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
  • अपने ऊपर विजय प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।

बौद्ध संघ

  • बुद्ध ने अपने अनुयायियों के लिए संघ की स्थापना की।
  • संघ में प्रारंभ में भिक्षु शामिल हुए और बाद में भिक्षुणियाँ भी शामिल हुईं।
  • भिक्षु और भिक्षुणियाँ विभिन्न स्थानों पर घूमकर शिक्षाओं का प्रसार करते थे।
  • उन्होंने विहारों तथा चट्टानों में बनी गुफाओं में निवास किया।

जातक कथाएँ

  • जातक कथाएँ बुद्ध से संबंधित प्राचीन कथाओं का समूह हैं।
  • इन कथाओं में नैतिक मूल्यों और अच्छे आचरण पर जोर दिया जाता है।
  • बंदर-राजा की कथा में राजा अपने समूह के बंदरों को बचाने के लिए स्वयं का बलिदान करता है।
  • इस कथा का मुख्य संदेश निःस्वार्थ त्याग और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी है।

जैन मत

  • जैन मत भी लगभग उसी समय एक महत्वपूर्ण दर्शन के रूप में लोकप्रिय हुआ।
  • जैन परंपरा इसे बौद्ध मत से पुराना मानती है।
  • वर्धमान का जन्म वैशाली के निकट बिहार क्षेत्र में हुआ था।
  • उन्होंने 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग किया।
  • लगभग 12 वर्षों की साधना के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • इसके बाद उन्हें महावीर कहा गया।
  • जिन का अर्थ है – विजेता; अर्थात जिसने अज्ञान और आसक्ति पर विजय प्राप्त की हो।

जैन मत के प्रमुख सिद्धांत

सिद्धांत अर्थ
अहिंसा सभी जीवित और संवेदनशील प्राणियों को नुकसान न पहुँचाना।
अनेकांतवाद सत्य के अनेक पक्ष हो सकते हैं; केवल एक दृष्टिकोण से सत्य को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।
अपरिग्रह अनावश्यक वस्तुओं का संचय न करना और आवश्यक वस्तुओं तक स्वयं को सीमित रखना।

अहिंसा का व्यापक अर्थ

  • अहिंसा का अर्थ केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं है।
  • हानिकारक विचारों और कार्यों से बचना भी अहिंसा का हिस्सा है।
  • बौद्ध और जैन दोनों परंपराओं में सभी जीवों के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व पर बल दिया गया।

जैन कथा – रोहिणेय

  • रोहिणेय एक चोर था जिसने महावीर की शिक्षाएँ सुनीं।
  • बाद में उसे अपने गलत कार्यों पर पछतावा हुआ।
  • उसने चोरी की वस्तुएँ वापस कीं और क्षमा माँगी।
  • बाद में उसने साधु का जीवन अपनाया।
  • कथा का संदेश है कि सही विचार और सही कर्म अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में परिवर्तन ला सकता है।

वैदिक, बौद्ध और जैन दर्शनों में समानताएँ

समान विचार मुख्य भाव
धर्म उचित आचरण और कर्तव्य का महत्व।
कर्म कर्मों के परिणाम पर विश्वास।
पुनर्जन्म जीवन और जन्म के चक्र की धारणा।
दुख का अंत दुख और अज्ञान से मुक्ति की खोज।
नैतिक मूल्य अच्छे आचरण और आत्म-अनुशासन पर बल।

चार्वाक या लोकायत दर्शन

  • चार्वाक या लोकायत एक भौतिकवादी दर्शन था।
  • इस दर्शन के अनुसार भौतिक संसार ही वास्तविक सत्य है।
  • यह परलोक के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता था।
  • यह दर्शन लंबे समय तक लोकप्रिय नहीं रहा और धीरे-धीरे समाप्त हो गया।

दर्शन और धर्म

  • पाठ में इन परंपराओं के लिए केवल धर्म शब्द का प्रयोग करना पर्याप्त नहीं माना गया है।
  • भारतीय परंपराओं में दर्शन, विचार, विश्वास, आचरण और जीवन-पद्धति के अनेक पक्ष शामिल रहे हैं।
  • लोग विभिन्न बौद्धिक और आध्यात्मिक विचारों को अपनी पसंद के अनुसार अपनाने के लिए स्वतंत्र थे।

लोक और जनजातीय जड़ें

  • भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ केवल शास्त्रों और लिखित ग्रंथों तक सीमित नहीं हैं।
  • भारत में समृद्ध मौखिक परंपराएँ भी रही हैं।
  • इन परंपराओं में ज्ञान, कहानियाँ, गीत, विश्वास और रीति-रिवाज पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ते रहे।
  • लोक परंपराएँ सामान्य लोगों के बीच विकसित और प्रसारित हुईं।
  • जनजातीय परंपराएँ विभिन्न जनजातीय समुदायों की जीवन-पद्धतियों और विश्वासों से जुड़ी रही हैं।

जनजाति का अर्थ

  • आधुनिक मानवशास्त्र में जनजाति ऐसे परिवारों या वंश-समूहों का समुदाय हो सकती है जिनमें समान उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा की भावना होती है।
  • जनजातीय समुदायों में आपसी संबंध और सामुदायिक जीवन का विशेष महत्व होता है।
  • प्राचीन भारत में आज के अर्थ में जनजाति के लिए कोई अलग शब्द नहीं था।
  • विभिन्न जन अलग-अलग क्षेत्रों, जैसे जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों में रहते थे।
  • भारतीय संविधान में अंग्रेजी में Tribe/Tribal Community और हिंदी में जनजाति शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  • 2011 के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार भारत के अधिकांश राज्यों में कुल 705 जनजातियाँ दर्ज की गई थीं।

लोक और जनजातीय परंपराओं का योगदान

  • लोक और जनजातीय परंपराओं ने भारतीय संस्कृति को विविध और समृद्ध बनाया।
  • इन परंपराओं में लोककथाएँ, गीत, नृत्य, रीति-रिवाज और विभिन्न जीवन-पद्धतियाँ शामिल हैं।
  • मौखिक परंपराओं ने ज्ञान और सांस्कृतिक अनुभवों को पीढ़ियों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इन परंपराओं का भारतीय दर्शन और अन्य सांस्कृतिक परंपराओं के साथ लंबे समय तक संपर्क रहा।

विभिन्न परंपराओं का पारस्परिक प्रभाव

  • भारतीय संस्कृति की विभिन्न परंपराएँ एक-दूसरे से अलग-थलग नहीं रहीं।
  • लोक और जनजातीय विश्वासों तथा हिंदू दर्शन के बीच लंबे समय तक संपर्क और आदान-प्रदान हुआ।
  • इस पारस्परिक संपर्क से दोनों पक्षों की परंपराएँ समृद्ध हुईं।
  • भारतीय संस्कृति में विविध विचारों और परंपराओं के सह-अस्तित्व की विशेषता दिखाई देती है।

वटवृक्ष – भारतीय संस्कृति का प्रतीक

  • वटवृक्ष अध्याय 7 और 8 की विषयवस्तु के लिए एक उपयुक्त उदाहरण माना गया है।
  • इसकी गहरी जड़ें भारतीय संस्कृति की प्राचीनता और निरंतरता को दर्शाती हैं।
  • इसकी अनेक शाखाएँ संस्कृति की विविध परंपराओं का प्रतीक हैं।
  • नई जड़ें बनाने वाली शाखाएँ संस्कृति में नए विचारों और परंपराओं के जुड़ने को दर्शाती हैं।
  • वटवृक्ष हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं में पवित्र माना जाता है।

महत्वपूर्ण शब्द

शब्द अर्थ
बुद्ध ज्ञान प्राप्त या जाग्रत व्यक्ति।
संघ बुद्ध के अनुयायियों का समुदाय।
विहार भिक्षुओं के निवास का स्थान।
जिन अज्ञान और आसक्ति पर विजय प्राप्त करने वाला।
अहिंसा किसी जीव को हानि न पहुँचाना।
अनेकांतवाद सत्य के अनेक पक्ष होने की मान्यता।
अपरिग्रह अनावश्यक वस्तुओं का संचय न करना।
चार्वाक भौतिकवादी दर्शन, जो भौतिक संसार को ही वास्तविक मानता था।
लोक परंपरा सामान्य लोगों के बीच विकसित सांस्कृतिक परंपरा।
जनजाति समान उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा वाले समुदायों का समूह।

महत्वपूर्ण अंतर

आधार बौद्ध मत जैन मत
प्रमुख व्यक्ति सिद्धार्थ गौतम (बुद्ध) वर्धमान (महावीर)
मुख्य जोर दुख, अज्ञान और आंतरिक अनुशासन अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह
संगठन संघ साधु-साध्वी परंपरा

 

आधार लोक परंपरा जनजातीय परंपरा
आधार सामान्य लोगों का जीवन और अनुभव विशिष्ट जनजातीय समुदाय का जीवन
प्रसार मुख्यतः मौखिक और सामाजिक व्यवहार द्वारा समुदाय के भीतर पीढ़ी-दर-पीढ़ी
मुख्य विशेषता लोकगीत, कथाएँ, रीति-रिवाज आदि विशिष्ट संस्कृति, भाषा, विश्वास और सामुदायिक परंपराएँ

 

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • सिद्धार्थ गौतम को ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध कहा गया।
  • बुद्ध को ज्ञान बोधगया में प्राप्त हुआ।
  • बुद्ध की शिक्षाओं के प्रसार के लिए संघ की स्थापना हुई।
  • महावीर का मूल नाम वर्धमान था।
  • जिन का अर्थ विजेता है।
  • जैन मत के प्रमुख सिद्धांतों में अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह शामिल हैं।
  • चार्वाक को लोकायत भी कहा जाता है।
  • चार्वाक दर्शन भौतिक संसार को ही वास्तविक मानता था।
  • भारतीय संस्कृति में लिखित शास्त्रीय परंपराओं के साथ समृद्ध मौखिक परंपराएँ भी रही हैं।
  • लोक और जनजातीय परंपराएँ भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक जड़ें हैं।
  • 2011 के आधिकारिक आँकड़ों में भारत में 705 जनजातियाँ दर्ज की गई थीं।

Quick Revision

  • बुद्ध → सिद्धार्थ गौतम → बोधगया में ज्ञान → बौद्ध मत।
  • बौद्ध मत → अहिंसा, आंतरिक अनुशासन, अज्ञान और मोह से मुक्ति।
  • महावीर → वर्धमान → जैन मत के प्रमुख शिक्षक।
  • जैन मत → अहिंसा + अनेकांतवाद + अपरिग्रह।
  • चार्वाक → भौतिकवादी दर्शन + परलोक को स्वीकार नहीं करता।
  • लोक परंपरा → सामान्य लोगों की मौखिक और सांस्कृतिक परंपराएँ।
  • जनजातीय परंपरा → जनजातीय समुदायों की संस्कृति और जीवन-पद्धति।
  • भारतीय संस्कृति → अनेक परंपराओं और विचारों के सह-अस्तित्व से समृद्ध हुई।
Page 3 of 4

Class 6, all subjects CBSE Notes in hindi medium, cbse class 6 Social Science notes, class 6 Social Science notes hindi medium, cbse 6 Social Science cbse notes, class 6 Social Science revision notes, cbse class 6 Social Science study material, ncert class 6 science notes pdf, class 6 science exam preparation, cbse class 6 physics chemistry biology notes

Quick Access: | NCERT Solutions | New Syllabus

Quick Access: | CBSE Notes | New Syllabus

Quick link for study materials

×

Search ATP Education

क्या आप इस वेबसाइट पर कुछ खोज रहे हैं? अपना keyword लिखें और हम आपको सीधे आपके target page तक GOOGLE SEARCH के द्वारा पहुँचा देंगे।