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Chapter-इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : September 12, 2026

CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 12 September 2026

इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत

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Chapter Review and Key Points

अध्याय 4. इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत

इतिहास हमें अतीत की घटनाओं, मानव जीवन और समाज के विकास को समझने में सहायता करता है। समय-रेखा और विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों की सहायता से हम अतीत की घटनाओं का क्रम तथा मानव जीवन में हुए परिवर्तनों को समझ सकते हैं।

इतिहास क्या है?

  • इतिहास – मानव के अतीत का अध्ययन है।
  • इतिहास हमें वर्तमान समाज को समझने में सहायता करता है।
  • इतिहास अतीत और वर्तमान के बीच संबंध स्थापित करता है।
  • मानव इतिहास पृथ्वी के बहुत लंबे इतिहास का केवल एक छोटा भाग है।

अतीत का अध्ययन कौन करते हैं?

विशेषज्ञ अध्ययन का क्षेत्र
भू-विज्ञानी पृथ्वी के भौतिक स्वरूप, मिट्टी, पत्थर, पर्वत, नदियाँ और महासागर आदि का अध्ययन
जीवाश्म विज्ञानी प्राचीन पौधों, पशुओं और मानवों के जीवाश्मों का अध्ययन
मानव विज्ञानी मानव समाजों और संस्कृतियों का अतीत से वर्तमान तक अध्ययन
पुरातत्त्व विज्ञानी मानव, पौधों और पशुओं द्वारा छोड़े गए भौतिक अवशेषों का अध्ययन

जीवाश्म

  • जीवाश्म – प्राचीन जीव-जंतुओं या पौधों के अवशेष अथवा उनके पदचिह्न, जो मिट्टी या शिलाओं की परतों के बीच सुरक्षित पाए जाते हैं।
  • जीवाश्म हमें बहुत पुराने जीवों और उनके जीवन के बारे में जानकारी देते हैं।

इतिहास में समय की गणना

  • अलग-अलग समाजों और संस्कृतियों में समय की गणना की अलग-अलग प्रणालियाँ रही हैं।
  • आज विश्वभर में सामान्यतः ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग किया जाता है।
  • भारत में धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसरों के लिए विभिन्न पारंपरिक तिथिपत्रों का भी उपयोग होता है।

सा.सं. और सा.सं.पू.

  • सा.सं. – सामान्य संवत; अंग्रेजी में इसे Common Era (CE) कहा जाता है।
  • सा.सं.पू. – सामान्य संवत पूर्व; अंग्रेजी में इसे Before Common Era (BCE) कहा जाता है।
  • सा.सं. की तिथियाँ आगे की दिशा में बढ़ती हैं।
  • सा.सं.पू. की तिथियाँ अतीत की ओर जाते हुए घटती जाती हैं।

ग्रेगोरियन कैलेंडर

  • ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग आज विश्वभर में होता है।
  • एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं।
  • एक वर्ष में 12 महीने होते हैं।
  • सामान्यतः प्रत्येक चार वर्ष में एक अधिवर्ष होता है।
  • शताब्दी वर्ष तभी अधिवर्ष होता है जब वह 400 से विभाजित हो सके।
  • उदाहरण – 2000 अधिवर्ष था, जबकि 1800 और 1900 अधिवर्ष नहीं थे।

समय-रेखा

  • समय-रेखा – ऐसी रेखा जिस पर ऐतिहासिक घटनाओं को उनकी तिथियों और क्रम के अनुसार दर्शाया जाता है।
  • समय-रेखा से घटनाओं का कालक्रम समझना आसान होता है।
  • समय-रेखा की सहायता से यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सी घटना पहले और कौन-सी बाद में हुई।
  • पाठ की समय-रेखा में मानव सभ्यता के आरंभ से वर्तमान तक की यात्रा को दर्शाया गया है।

वर्ष, दशक, शताब्दी और सहस्राब्दी

समय की इकाई अर्थ
वर्ष 12 महीनों का समय
दशक 10 वर्षों का कालखंड
शताब्दी 100 वर्षों का कालखंड
सहस्राब्दी 1000 वर्षों का कालखंड

शताब्दी

  • शताब्दी – 100 वर्षों का कालखंड।
  • 21वीं शताब्दी 2001 से 2100 तक है।
  • ईसा पूर्व की शताब्दियों की गणना समय में पीछे की ओर की जाती है।

सहस्राब्दी

  • सहस्राब्दी – 1000 वर्षों का कालखंड।
  • तीसरी सहस्राब्दी 2001 से 3000 तक है।
  • ईसा पूर्व की सहस्राब्दियों की गणना भी समय में पीछे की ओर की जाती है।

ईसा पूर्व और सामान्य संवत के बीच वर्षों की गणना

  • ग्रेगोरियन कैलेंडर में वर्ष 0 नहीं है।
  • सा.सं.पू. और सा.सं. के बीच वर्षों की गणना करते समय दोनों संख्याओं को जोड़कर 1 घटाया जाता है।
  • सूत्र – सा.सं.पू. की तिथि + सा.सं. की तिथि − 1
  • उदाहरण – 2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. तक = 2 + 2 − 1 = 3 वर्ष।

पंचांग

  • पंचांग भारतीय पारंपरिक तिथिपत्रों में से एक है।
  • यह सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से संबंधित खगोलीय आँकड़ों को दर्शाता है।
  • पंचांग का उपयोग त्योहारों की तिथियों, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, सूर्योदय और सूर्यास्त आदि के निर्धारण में किया जाता है।

इतिहास के स्रोत

  • इतिहास का स्रोत – कोई स्थान, व्यक्ति, लेख या वस्तु जिसके माध्यम से अतीत की घटना या कालखंड की जानकारी प्राप्त की जा सके।
  • इतिहासकार अतीत को समझने के लिए अनेक प्रकार के स्रोतों का उपयोग करते हैं।
  • कभी-कभी अलग-अलग स्रोत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
  • कभी-कभी स्रोतों में विरोधी जानकारी भी मिल सकती है।
  • ऐसी स्थिति में इतिहासकार यह तय करते हैं कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए।

पुरातात्त्विक स्रोत

  • टीले और पुरास्थल
  • मानव, पशु तथा पौधों के अवशेष
  • उपकरण और हथियार
  • मूर्तियाँ और आभूषण
  • स्मारक
  • सिक्के
  • ताम्रपत्र
  • मिट्टी के बर्तन और खिलौने
  • निवास स्थान और शवाधान
  • शिलालेख
  • उत्खनन से प्राप्त वस्तुएँ

साहित्यिक स्रोत

  • पांडुलिपियाँ
  • लोक साहित्य
  • वेद और इतिहास
  • कविता और नाटक
  • ऐतिहासिक लेख
  • कहानियों के संग्रह
  • यात्रा-वृत्तांत
  • ऐतिहासिक वृत्तांत
  • वंशावली
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेख
  • भारतीय साहित्य और विदेशी विवरण

कलात्मक स्रोत

  • चित्रकला
  • मूर्ति कला
  • शिल्प और अन्य कलात्मक वस्तुएँ

आधुनिक इतिहास के स्रोत

  • आधुनिक इतिहास के अध्ययन में समाचार-पत्र महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं।
  • हाल के दशकों की घटनाओं के अध्ययन में टेलीविजन और इंटरनेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग किया जा सकता है।

इतिहासकार की भूमिका

  • इतिहासकार अतीत का अध्ययन करता है और उसके विषय में लिखता है।
  • इतिहासकार विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्र करता है।
  • वह अलग-अलग स्रोतों की तुलना करके अतीत का पुनर्निर्माण करने का प्रयास करता है।
  • इतिहास के पुनर्निर्माण में पुरातत्त्व विज्ञानी, मानव विज्ञानी, परालेखशास्त्री, साहित्य एवं भाषा विशेषज्ञ तथा वैज्ञानिक भी योगदान देते हैं।

मानव इतिहास का प्रारंभ

  • आधुनिक मानव अर्थात होमो सेपियंस लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व पृथ्वी पर रह रहे हैं।
  • मानव इतिहास पृथ्वी के इतिहास की तुलना में बहुत छोटा है।
  • प्रारंभिक मानव को प्रकृति से अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

आदिमानव का जीवन

  • आदिमानव सामान्यतः समूहों या टोलियों में रहते थे।
  • वे मुख्यतः आखेटक और खाद्य संग्राहक थे।
  • वे खाने योग्य पौधों और फलों का संग्रह करते तथा पशुओं का आखेट करते थे।
  • वे भोजन और आश्रय की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते थे।
  • वे अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों और गुफाओं में रहते थे।

आदिमानव और अग्नि

  • आदिमानव ने अग्नि का उपयोग करना सीखा।
  • अग्नि ने उनके जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया।

प्रारंभिक उपकरण

  • आदिमानव पत्थर से विभिन्न उपकरण बनाते थे।
  • पत्थर की कुल्हाड़ियाँ, ब्लेड और नुकीले तीर उनके उपकरणों में शामिल थे।
  • उन्नत उपकरणों ने आखेट और दैनिक जीवन को सरल बनाया।

शैल-चित्र

  • गुफाओं और शैलाश्रयों में पाए गए चित्र आदिमानव के जीवन की जानकारी देते हैं।
  • इन चित्रों में पशुओं और मानवों के विभिन्न दृश्य दिखाई देते हैं।
  • कुछ शैल-चित्रों में सरल आकृतियाँ और प्रतीक भी पाए जाते हैं।

आदिमानव के आभूषण

  • समय के साथ आदिमानव ने पत्थर और मनकों की मालाएँ बनानी शुरू कीं।
  • पशुओं के दाँतों से पेंडेंट जैसे आभूषण भी बनाए जाते थे।
  • कभी-कभी इन वस्तुओं का दूसरे समूहों के साथ आदान-प्रदान भी किया जाता था।

हिम युग

  • पृथ्वी की जलवायु में लंबे समय में अनेक परिवर्तन हुए हैं।
  • एक समय पृथ्वी का बहुत बड़ा भाग बर्फ से ढका हुआ था, जिसे हिम युग कहा गया।
  • पाठ के अनुसार हिम युग लगभग 1,00,000 वर्ष पूर्व से 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा।
  • जलवायु गर्म होने पर बर्फ का कुछ भाग पिघला और नदियों में जल की मात्रा बढ़ी।

कृषि और स्थायी निवास की शुरुआत

  • जलवायु में सुधार के बाद कई क्षेत्रों में मनुष्यों ने एक स्थान पर बसना शुरू किया।
  • उन्होंने अनाज उगाना आरंभ किया।
  • गाय और बकरी जैसे जानवरों का घरेलकरण शुरू हुआ।
  • भोजन की उपलब्धता बढ़ने से मानव समूहों का आकार भी बढ़ा।
  • लोग प्रायः नदियों के किनारे बसने लगे।
  • नदियों के किनारे जल के साथ-साथ उपजाऊ मिट्टी भी उपलब्ध थी।

गाँवों और समुदायों का विकास

  • समय के साथ मानव समुदाय अधिक जटिल होते गए।
  • सरदार या मुखिया सामुदायिक कल्याण के लिए उत्तरदायी होते थे।
  • प्रारंभिक समुदायों में भूमि पर सामुदायिक रूप से कृषि की जाती थी।
  • छोटी बस्तियाँ धीरे-धीरे बड़े गाँवों में बदलने लगीं।
  • गाँवों में भोजन, वस्त्र और उपकरणों जैसी वस्तुओं का आदान-प्रदान होने लगा।
  • कुछ गाँव आगे चलकर छोटे कस्बों में परिवर्तित हुए।

तकनीकी विकास

  • मृद्भांड और मिट्टी की वस्तुएँ बनाने की तकनीक विकसित हुई।
  • धातुओं के उपयोग की शुरुआत हुई।
  • पहले तांबे और बाद में लोहे का उपयोग किया गया।
  • धातुओं के उपयोग से टिकाऊ उपकरण, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और आभूषण बनाना आसान हुआ।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

शब्द अर्थ
इतिहास मानव के अतीत का अध्ययन।
जीवाश्म प्राचीन जीव-जंतुओं या पौधों के सुरक्षित अवशेष अथवा पदचिह्न।
समय-रेखा ऐसी रेखा जिस पर घटनाओं को तिथियों और क्रम के अनुसार दर्शाया जाता है।
दशक 10 वर्षों का कालखंड।
शताब्दी 100 वर्षों का कालखंड।
सहस्राब्दी 1000 वर्षों का कालखंड।
इतिहास का स्रोत अतीत की जानकारी प्राप्त करने वाला स्थान, व्यक्ति, लेख या वस्तु।
इतिहासकार अतीत का अध्ययन करने और उसके विषय में लिखने वाला व्यक्ति।
पल्ली छोटी बस्ती अथवा छोटा गाँव।

महत्वपूर्ण अंतर

आधार सा.सं. सा.सं.पू.
अर्थ सामान्य संवत सामान्य संवत पूर्व
समय की दिशा आगे की ओर अतीत की ओर

त्वरित पुनरावृत्ति

  • इतिहास मानव के अतीत का अध्ययन है।
  • समय-रेखा ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को समझने में सहायता करती है।
  • दशक = 10 वर्ष, शताब्दी = 100 वर्ष और सहस्राब्दी = 1000 वर्ष।
  • ग्रेगोरियन कैलेंडर में वर्ष 0 नहीं है।
  • इतिहास के स्रोत पुरातात्त्विक, साहित्यिक, कलात्मक, मौखिक तथा आधुनिक स्रोत हो सकते हैं।
  • इतिहासकार अनेक स्रोतों की तुलना करके अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं।
  • आदिमानव मुख्यतः आखेटक और खाद्य संग्राहक थे।
  • आदिमानव समूहों, शैलाश्रयों और गुफाओं में रहते थे।
  • अग्नि और पत्थर के उपकरणों ने आदिमानव के जीवन को सरल बनाया।
  • शैल-चित्र आदिमानव के जीवन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
  • बाद में मानव ने कृषि, पशुपालन और स्थायी निवास की शुरुआत की।
  • छोटी बस्तियाँ विकसित होकर गाँव और कुछ गाँव आगे चलकर कस्बों में परिवर्तित हुए।
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