Chapter-एक यात्रा: परमाणु के भीतर Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
एक यात्रा: परमाणु के भीतर
इलेक्ट्रॉन की खोज एवं टॉमसन का परमाणु मॉडल
अध्याय 8. एक यात्रा: परमाणु के भीतर
पिछले भाग में आपने परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति तथा जॉन डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का अध्ययन किया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने यह जानने का प्रयास किया कि क्या परमाणु वास्तव में अविभाज्य है अथवा इसके भीतर भी छोटे-छोटे कण उपस्थित हैं। अनेक प्रयोगों के परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉन की खोज हुई तथा परमाणु के प्रथम वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत किए गए। इस भाग में हम विकिरण (Radioactivity), इलेक्ट्रॉन की खोज, कैथोड किरण नलिका (Cathode Ray Discharge Tube), जे. जे. टॉमसन (J. J. Thomson) के प्रयोग तथा टॉमसन के परमाणु मॉडल का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
इलेक्ट्रॉन की खोज एवं टॉमसन का परमाणु मॉडल
विकिरण (Radioactivity)
विकिरण (Radioactivity) वह प्रक्रिया है जिसमें कुछ तत्व स्वतः अदृश्य ऊर्जा अथवा सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन करते हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक वैज्ञानिक परमाणु को पदार्थ की सबसे छोटी एवं अविभाज्य इकाई मानते थे, लेकिन रेडियोधर्मिता से संबंधित खोजों ने इस धारणा को बदल दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि परमाणु के भीतर भी सूक्ष्म कण उपस्थित होते हैं और परमाणु को पूर्णतः अविभाज्य नहीं माना जा सकता।
- कुछ तत्व स्वतः ऊर्जा एवं कणों का उत्सर्जन करते हैं।
- इस घटना को विकिरण या रेडियोधर्मिता कहा जाता है।
- इससे सिद्ध हुआ कि परमाणु अविभाज्य नहीं है।
- परमाणु के भीतर अवपरमाण्विक कण (Subatomic Particles) उपस्थित होते हैं।
- इससे वैज्ञानिकों ने परमाणु की आंतरिक संरचना का अध्ययन प्रारम्भ किया।
- इसी के बाद इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन की खोज का मार्ग खुला।
कैथोड किरण प्रयोग (Cathode Ray Experiment)
इलेक्ट्रॉन की खोज कैथोड किरण नलिका (Cathode Ray Discharge Tube) के प्रयोग द्वारा की गई। इस प्रयोग में कम दाब वाली काँच की नली में दो इलेक्ट्रोड—कैथोड (Cathode) तथा ऐनोड (Anode)—लगाए गए। जब इनके बीच उच्च विभव (High Voltage) लगाया गया, तब कैथोड से अदृश्य किरणें निकलकर ऐनोड की ओर जाने लगीं। इन्हें कैथोड किरणें (Cathode Rays) कहा गया।
टॉमसन ने इन किरणों पर विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों का प्रभाव देखा। उन्होंने पाया कि ये किरणें धनात्मक प्लेट की ओर मुड़ जाती हैं, जिससे यह सिद्ध हुआ कि इनमें उपस्थित कणों पर ऋणावेश होता है। इन्हीं कणों को बाद में इलेक्ट्रॉन नाम दिया गया।
| वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|
| जे. जे. टॉमसन | 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की। |
| खोजा गया कण | इलेक्ट्रॉन (Electron) |
| आवेश | ऋणावेशित (Negative Charge) |
कैथोड किरण प्रयोग से प्राप्त प्रमुख निष्कर्ष
- कैथोड किरणें ऋणावेशित कणों से बनी होती हैं।
- इन कणों को इलेक्ट्रॉन कहा गया।
- इलेक्ट्रॉन सभी प्रकार के परमाणुओं में पाए जाते हैं।
- परमाणु अविभाज्य नहीं है, बल्कि उसकी आंतरिक संरचना होती है।
- इलेक्ट्रॉन की खोज के आधार पर टॉमसन ने अपना परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया।
इलेक्ट्रॉन की खोज (Discovery of Electron)
वर्ष 1897 में जे. जे. टॉमसन (J. J. Thomson) ने अत्यंत निम्न दाब पर गैसों में विद्युत धारा के चालन का अध्ययन किया। उन्होंने एक विशेष काँच की निर्वात नलिका (Discharge Tube) में उच्च वोल्टता प्रवाहित की। प्रयोग के दौरान उन्होंने देखा कि कैथोड (ऋणावेशित इलेक्ट्रोड) से कुछ अदृश्य किरणें निकलकर ऐनोड (धनावेशित इलेक्ट्रोड) की ओर जाती हैं। इन्हें कैथोड किरणें (Cathode Rays) कहा गया।
विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों में इन किरणों का अध्ययन करने के बाद टॉमसन इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि ये किरणें अत्यंत सूक्ष्म ऋणावेशित कणों की धाराएँ हैं। बाद में इन कणों को इलेक्ट्रॉन (Electron) नाम दिया गया। यह परमाणु के भीतर खोजा गया पहला अवपरमाण्विक कण था।
कैथोड किरण नलिका (Cathode Ray Discharge Tube)
कैथोड किरण नलिका एक विशेष काँच की निर्वात नली होती है, जिसमें दो इलेक्ट्रोड—कैथोड एवं ऐनोड—लगे होते हैं। जब इसमें उच्च वोल्टता प्रवाहित की जाती है, तब कैथोड से अदृश्य किरणें निकलती हैं और ऐनोड की ओर गति करती हैं। इन्हीं किरणों के अध्ययन से इलेक्ट्रॉन की खोज संभव हुई।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| कैथोड (Cathode) | ऋणावेशित इलेक्ट्रोड, जहाँ से कैथोड किरणें निकलती हैं। |
| ऐनोड (Anode) | धनावेशित इलेक्ट्रोड, जिसकी ओर किरणें जाती हैं। |
| निर्वात नलिका | कम दाब वाली काँच की नली, जिसमें प्रयोग किया जाता है। |
| उच्च वोल्टता | कैथोड किरणों के निर्माण हेतु आवश्यक विद्युत विभव। |
कैथोड किरणों से प्राप्त निष्कर्ष
टॉमसन ने पाया कि कैथोड किरणों का स्वभाव कैथोड के पदार्थ तथा नली में भरी गैस पर निर्भर नहीं करता। इसका अर्थ यह था कि ये कण सभी तत्वों के परमाणुओं में समान रूप से उपस्थित होते हैं। इस प्रकार वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं के मूल घटक हैं। एक इलेक्ट्रॉन पर लगभग –1.602 × 10–19 C आवेश होता है, जिसे सुविधा के लिए –1 माना जाता है।
- कैथोड किरणें सभी गैसों में समान गुण प्रदर्शित करती हैं।
- ये कैथोड के पदार्थ पर निर्भर नहीं करतीं।
- इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं में उपस्थित होते हैं।
- इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित कण है।
टॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson's Atomic Model)
इलेक्ट्रॉन की खोज के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि यदि परमाणु विद्युत रूप से उदासीन (Neutral) है, तो उसमें धनावेश कहाँ स्थित है। इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए टॉमसन ने अपना प्रसिद्ध परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया।
टॉमसन के अनुसार परमाणु धनावेशित पदार्थ का एक ठोस गोला है, जिसके भीतर ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन समान रूप से वितरित रहते हैं। उन्होंने इसकी तुलना सूखे मेवों से भरी पुडिंग (Plum Pudding) अथवा तरबूज में फैले बीजों से की। इसमें लाल गूदा धनावेश तथा बीज इलेक्ट्रॉनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इसे प्लम पुडिंग मॉडल (Plum Pudding Model) कहा जाता है।
टॉमसन मॉडल की प्रमुख विशेषताएँ
- परमाणु धनावेशित गोले के समान होता है।
- इलेक्ट्रॉन पूरे परमाणु में समान रूप से वितरित रहते हैं।
- धनावेश एवं ऋणावेश का संतुलन परमाणु को विद्युत उदासीन बनाता है।
- यह परमाणु की आंतरिक संरचना को समझाने का पहला वैज्ञानिक मॉडल था।
टॉमसन मॉडल की सीमाएँ
यद्यपि टॉमसन का मॉडल परमाणु की संरचना को समझाने का पहला वैज्ञानिक प्रयास था, फिर भी यह सभी प्रयोगात्मक परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका। विशेष रूप से बाद में किए गए स्वर्ण पर्णिका (Gold Foil) प्रयोग के परिणाम इस मॉडल से मेल नहीं खाते थे। इसी कारण आगे चलकर रदरफोर्ड ने नया परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया।
Our Concept Builder
कल्पना कीजिए कि आपके पास एक तरबूज है। यदि आप उसके लाल गूदे को धनावेश तथा उसके भीतर फैले बीजों को इलेक्ट्रॉन मानें, तो आपको टॉमसन के परमाणु मॉडल की मूल अवधारणा समझ में आ जाएगी। इस मॉडल के अनुसार धनावेश पूरे परमाणु में फैला रहता है, जबकि इलेक्ट्रॉन उसके भीतर समान रूप से वितरित होते हैं। यद्यपि बाद में यह मॉडल पूर्णतः सही सिद्ध नहीं हुआ, फिर भी इसने पहली बार यह स्पष्ट किया कि परमाणु के भीतर ऋणावेशित कण अवश्य उपस्थित हैं।
Exam Booster
- वर्ष 1897 में जे. जे. टॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज की।
- इलेक्ट्रॉन परमाणु का प्रथम खोजा गया अवपरमाण्विक कण है।
- कैथोड किरणें कैथोड से ऐनोड की ओर गति करती हैं।
- इलेक्ट्रॉन का आपेक्षिक आवेश –1 माना जाता है।
- टॉमसन के मॉडल को प्लम पुडिंग मॉडल कहा जाता है।
- इस मॉडल में धनावेश पूरे गोले में समान रूप से फैला माना गया है।
- स्वर्ण पर्णिका प्रयोग ने टॉमसन मॉडल की सीमाओं को स्पष्ट किया।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
2. परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति
3. इलेक्ट्रॉन की खोज एवं टॉमसन का परमाणु मॉडल
4. रदरफोर्ड का स्वर्ण पर्णिका प्रयोग एवं परमाणु मॉडल
5. रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ एवं बोर का परमाणु मॉडल
6. न्यूट्रॉन की खोज एवं परमाणु का द्रव्यमान
8. परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या एवं इलेक्ट्रॉनों का वितरण
9. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, तत्वों के संकेत चिन्ह एवं संयोजकता
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