Chapter-एक यात्रा: परमाणु के भीतर Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
एक यात्रा: परमाणु के भीतर
परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति
अध्याय 8. एक यात्रा: परमाणु के भीतर
इस अध्याय की शुरुआत परमाणु (Atom) की अवधारणा से होती है। प्राचीन समय से ही वैज्ञानिक और दार्शनिक यह जानने का प्रयास करते रहे कि सभी पदार्थ किन सूक्ष्म कणों से बने हैं। इस भाग में परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति, प्राचीन भारतीय एवं यूनानी विचारों तथा जॉन डाल्टन (John Dalton) द्वारा प्रस्तुत प्रथम वैज्ञानिक परमाणु सिद्धांत का अध्ययन करेंगे।
परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति
परमाणु की अवधारणा (Concept of Atom)
हमारे चारों ओर दिखाई देने वाली प्रत्येक वस्तु अत्यंत सूक्ष्म कणों से बनी होती है जिन्हें परमाणु (Atom) कहा जाता है। प्रारंभ में यह माना जाता था कि परमाणु द्रव्य की सबसे छोटी एवं अविभाज्य इकाई है। बाद में वैज्ञानिक प्रयोगों से यह स्पष्ट हुआ कि परमाणु स्वयं भी छोटे कणों से मिलकर बना होता है।
- सभी पदार्थ परमाणुओं से बने होते हैं।
- परमाणु अत्यंत सूक्ष्म होते हैं और नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते।
- प्रत्येक तत्व के परमाणुओं के अपने विशिष्ट गुण होते हैं।
- आधुनिक विज्ञान के अनुसार परमाणु अविभाज्य नहीं है।
- परमाणु पदार्थ की मूलभूत इकाई है।
प्राचीन भारतीय एवं यूनानी विचार
परमाणु की अवधारणा का उल्लेख सबसे पहले प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य कणाद (Acharya Kanad) ने किया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म एवं अविभाज्य कणों से बना है, जिन्हें उन्होंने परमाणु कहा। लगभग इसी समय यूनान के दार्शनिक ल्यूसिपस (Leucippus) तथा डेमोक्रिटस (Democritus) ने भी इसी प्रकार की अवधारणा प्रस्तुत की और इन सूक्ष्म कणों को एटोमॉस (Atomos) नाम दिया, जिसका अर्थ है—"जिसे और विभाजित न किया जा सके।" उस समय इन विचारों के समर्थन में कोई प्रयोगात्मक प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
| दार्शनिक / वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|
| आचार्य कणाद | द्रव्य के सूक्ष्म अविभाज्य कणों (परमाणुओं) की अवधारणा प्रस्तुत की। |
| ल्यूसिपस | परमाणु संबंधी यूनानी विचारधारा का प्रारम्भ किया। |
| डेमोक्रिटस | सूक्ष्म अविभाज्य कणों को "एटोमॉस" नाम दिया। |
जॉन डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (John Dalton's Atomic Theory)
वर्ष 1808 में अंग्रेज़ वैज्ञानिक जॉन डाल्टन (John Dalton) ने अनेक रासायनिक प्रयोगों के आधार पर परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया। यह परमाणु की संरचना को समझाने वाला पहला वैज्ञानिक सिद्धांत था। डाल्टन ने बताया कि सभी पदार्थ सूक्ष्म परमाणुओं से बने होते हैं तथा रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं, उनका निर्माण या विनाश नहीं होता। यद्यपि बाद में इस सिद्धांत में कुछ संशोधन किए गए, फिर भी आधुनिक परमाणु सिद्धांत का आधार यही माना जाता है।
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के मुख्य बिंदु
- सभी पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों अर्थात् परमाणुओं से बने होते हैं।
- एक ही तत्व के सभी परमाणु द्रव्यमान एवं गुणों में समान होते हैं।
- भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु द्रव्यमान एवं गुणों में भिन्न होते हैं।
- रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु न तो उत्पन्न होते हैं और न ही नष्ट होते हैं।
- यौगिक विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के निश्चित अनुपात में संयोजन से बनते हैं।
परमाणु की संरचना को लेकर नए प्रश्न
डाल्टन के सिद्धांत के बाद वैज्ञानिकों के सामने अनेक नए प्रश्न उत्पन्न हुए। क्या परमाणु वास्तव में अविभाज्य है? यदि नहीं, तो इसके भीतर कौन-कौन से कण उपस्थित हैं? परमाणु के भीतर धनावेश एवं ऋणावेश की व्यवस्था कैसी होती है? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए अनेक वैज्ञानिकों ने प्रयोग किए, जिनसे आधुनिक परमाणु मॉडल का विकास हुआ।
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कल्पना कीजिए कि आपके पास चॉक का एक टुकड़ा है। यदि उसे बार-बार छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाए, तो एक समय ऐसा आएगा जब हम अत्यंत सूक्ष्म कण की कल्पना करेंगे जिसे और विभाजित करना संभव नहीं होगा। प्राचीन दार्शनिकों ने इसी विचार के आधार पर परमाणु की अवधारणा प्रस्तुत की। बाद में वैज्ञानिक प्रयोगों ने सिद्ध किया कि यह सूक्ष्म कण भी अपने भीतर और छोटे कणों को समाहित किए होता है।
Exam Booster
- आचार्य कणाद ने भारत में परमाणु की अवधारणा प्रस्तुत की।
- डेमोक्रिटस ने अविभाज्य कणों को "एटोमॉस" कहा।
- 1808 में जॉन डाल्टन ने प्रथम वैज्ञानिक परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया।
- डाल्टन के अनुसार रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणुओं का निर्माण या विनाश नहीं होता।
- आधुनिक परमाणु सिद्धांत का आधार डाल्टन का सिद्धांत माना जाता है।
- परमाणु की आंतरिक संरचना को समझने के लिए आगे चलकर टॉमसन, रदरफोर्ड और बोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Our Concept Builder
यदि किसी ईंट को बार-बार छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाए, तो अंत में ऐसे सूक्ष्म कणों की कल्पना की जा सकती है जिन्हें और विभाजित करना संभव न हो। प्राचीन दार्शनिकों ने इन्हीं काल्पनिक सूक्ष्म कणों को परमाणु माना। बाद में वैज्ञानिक प्रयोगों ने इस विचार को और अधिक स्पष्ट एवं वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।
Exam Booster
- आचार्य कणाद ने भारत में परमाणु की अवधारणा प्रस्तुत की।
- डेमोक्रिटस ने अविभाज्य कणों को "एटोमॉस" कहा।
- जॉन डाल्टन ने 1808 में प्रथम वैज्ञानिक परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया।
- डाल्टन का सिद्धांत आधुनिक परमाणु संरचना का प्रारम्भिक आधार माना जाता है।
- परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति एवं डाल्टन का योगदान CBSE परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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1. Chapter Review and Key Points
2. परमाणु सिद्धांत की उत्पत्ति
3. इलेक्ट्रॉन की खोज एवं टॉमसन का परमाणु मॉडल
4. रदरफोर्ड का स्वर्ण पर्णिका प्रयोग एवं परमाणु मॉडल
5. रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ एवं बोर का परमाणु मॉडल
6. न्यूट्रॉन की खोज एवं परमाणु का द्रव्यमान
8. परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या एवं इलेक्ट्रॉनों का वितरण
9. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, तत्वों के संकेत चिन्ह एवं संयोजकता
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