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Chapter-भारत की सांस्कृतिक जड़ें Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : September 14, 2026

CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-भारत की सांस्कृतिक जड़ें Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 14 September 2026

भारत की सांस्कृतिक जड़ें

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Chapter Review and Key Points

अध्याय 7. भारत की सांस्कृतिक जड़ें

भारत की संस्कृति की जड़ें बहुत प्राचीन हैं और इसमें वेद, वैदिक दर्शन, बौद्ध एवं जैन मत तथा लोक और जनजातीय परंपराओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन विभिन्न परंपराओं के निरंतर संपर्क और आदान-प्रदान ने भारतीय संस्कृति को विविध और समृद्ध बनाया।

भारतीय संस्कृति की जड़ें

  • भारतीय संस्कृति अनेक सहस्राब्दियों से विकसित होती आई है।
  • इसे एक प्राचीन वृक्ष के समान समझा जा सकता है, जिसकी अनेक जड़ें और शाखाएँ हैं।
  • कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, धर्म, शासन-पद्धति और युद्ध-कला इसकी प्रमुख शाखाएँ हैं।
  • भारतीय संस्कृति की कुछ प्रमुख जड़ें सिंधु या हड़प्पा अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता तक जाती हैं।

वेद क्या हैं?

  • ‘वेद’ शब्द ‘विद्’ से बना है, जिसका अर्थ है ज्ञान।
  • चार वेद हैं— ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
  • वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से हैं और विश्व के भी सबसे प्राचीन ग्रंथों में गिने जाते हैं।
  • वेदों में हजारों ऋचाएँ अर्थात् प्रार्थनाएँ, कविताएँ और गीत हैं।
  • प्रारंभ में ऋचाएँ लिखी नहीं गई थीं, बल्कि उन्हें मौखिक रूप से याद करके आगे पहुँचाया गया।
  • वैदिक पाठ की व्यवस्थित मौखिक परंपरा को 2008 में यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अनमोल कृति के रूप में मान्यता दी।

वैदिक ऋषि और ऋषिकाएँ

  • वैदिक ऋचाओं की रचना ऋषियों और ऋषिकाओं द्वारा की गई।
  • इनमें इंद्र, अग्नि, वरुण, मित्र, सरस्वती और उषा आदि देवताओं एवं देवियों का काव्यात्मक वर्णन मिलता है।
  • वैदिक विचारों में ऋत अर्थात् सत्य और व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना गया।
  • “एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति” का भाव है कि परम सत्य एक है, लेकिन विद्वान उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।

वैदिक समाज

  • प्रारंभिक वैदिक समाज विभिन्न जन अर्थात् लोगों के बड़े समूहों में संगठित था।
  • ऋग्वेद में भरत, पुरु, कुरु, यदु और तुर्वश आदि अनेक जनों का उल्लेख मिलता है।
  • राजा, सभा और समिति जैसे शब्द वैदिक शासन-व्यवस्था की जानकारी देते हैं।
  • सभा और समिति सामूहिकता से संबंधित संस्थाएँ थीं।
  • किसान, बुनकर, कुम्हार, शिल्पकार, बढ़ई, आरोग्यकर्ता, नर्तक-नर्तकी, नाई और पुजारी आदि अनेक व्यवसाय प्रचलित थे।

वैदिक दर्शन

  • वैदिक संस्कृति में विभिन्न देवताओं से संबंधित अनुष्ठान और यज्ञ विकसित हुए।
  • उपनिषद वैदिक विचारों पर आधारित हैं, लेकिन इनमें कई नई दार्शनिक अवधारणाएँ भी मिलती हैं।
  • उपनिषदों में कर्म और पुनर्जन्म जैसे विचार महत्वपूर्ण हैं।
  • वेदांत दर्शन के अनुसार मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड एक दिव्य तत्व ब्रह्म से जुड़े हैं।
  • आत्मन् प्रत्येक जीव में विद्यमान है और उसे ब्रह्म का स्वरूप माना गया है।
  • “अहम् ब्रह्मास्मि” का भाव है— “मैं ब्रह्म हूँ।”
  • “तत् त्वम् असि” का भाव है— “वह ब्रह्म आप ही हैं।”
  • “सर्वे भवन्तु सुखिनः” सभी जीवों के सुख और कल्याण की भावना व्यक्त करता है।

उपनिषदों की कथाएँ

  • श्वेतकेतु और उद्दालक आरुणि की कथा ज्ञान के साथ विनम्रता और यथार्थबोध का महत्व बताती है।
  • नचिकेता की कथा जिज्ञासा और ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा का उदाहरण है।
  • नचिकेता ने यम से मृत्यु के बाद क्या होता है, इस विषय में प्रश्न किया।
  • गार्गी और याज्ञवल्क्य का शास्त्रार्थ प्रश्न पूछने और दार्शनिक चिंतन के महत्व को दर्शाता है।

योग दर्शन

  • प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वेदों से जुड़े अन्य दर्शनों का विकास हुआ।
  • योग ने व्यक्ति की चेतना में ब्रह्म का आत्म-बोध प्राप्त करने के लिए अनेक विधियाँ विकसित कीं।
  • वेदांत और योग भारतीय दर्शन की प्रमुख धाराएँ हैं।

बौद्ध मत

  • बौद्ध मत ने वेदों के प्राधिकार को स्वीकार नहीं किया और अपनी स्वतंत्र विचार-पद्धति विकसित की।
  • सिद्धार्थ गौतम का जन्म लुंबिनी में हुआ था।
  • उन्होंने मानव जीवन में दुःख के कारणों को समझने के लिए राजसी जीवन त्याग दिया।
  • बोधगया में ध्यान के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और वे बुद्ध कहलाए।
  • बुद्ध ने अहिंसा और आंतरिक अनुशासन पर बल दिया।
  • अविद्या और मोह को मानवीय कष्ट के स्रोतों के रूप में बताया गया।
  • बुद्ध ने संघ की स्थापना की, जिसमें भिक्षु और आगे चलकर भिक्षुणियाँ भी शामिल हुईं।

जातक कथाएँ

  • जातक कथाएँ बुद्ध के पूर्व जन्मों से संबंधित कहानियाँ हैं।
  • इन कथाओं के माध्यम से बौद्ध आदर्शों को सरल रूप में समझाया गया।
  • वानर-राज की कथा निःस्वार्थ बलिदान और दूसरों की सहायता का संदेश देती है।

जैन मत

  • जैन मत भी उसी काल में लोकप्रिय हुआ, हालांकि इसे अधिक प्राचीन परंपरा माना जाता है।
  • वर्धमान का जन्म वैशाली के निकट हुआ था।
  • उन्होंने लगभग 30 वर्ष की आयु में घर त्यागकर आध्यात्मिक ज्ञान की खोज की।
  • 12 वर्ष बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त हुआ और वे महावीर कहलाए।
  • ‘जैन’ शब्द ‘जिन’ से बना है, जिसका अर्थ है विजेता। यहाँ विजय का अर्थ अविद्या और मोह पर विजय से है।

जैन मत के प्रमुख सिद्धांत

सिद्धांत अर्थ
अहिंसा किसी जीव को चोट या नुकसान न पहुँचाना।
अनेकांतवाद सत्य के अनेक पक्ष होते हैं; उसे केवल एक दृष्टिकोण से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।
अपरिग्रह भौतिक वस्तुओं के अत्यधिक संग्रह से दूर रहना और आवश्यक वस्तुओं तक सीमित रहना।

बौद्ध और जैन मत में समानताएँ

  • दोनों मत अहिंसा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर बल देते हैं।
  • दोनों में आंतरिक अनुशासन का महत्व है।
  • दोनों परंपराओं में भिक्षु और भिक्षुणियों ने यात्राएँ करके अपने विचारों का प्रचार किया।
  • दोनों में सभी जीवों के प्रति संवेदनशीलता और करुणा की भावना महत्वपूर्ण है।

विभिन्न भारतीय दर्शनों में समान विचार

  • वैदिक, बौद्ध और जैन दर्शनों में महत्वपूर्ण अंतर होने के बावजूद कुछ समान विचार भी मिलते हैं।
  • धर्म, कर्म, पुनर्जन्म, दुःख और अज्ञानता के अंत की खोज जैसे विचारों का उल्लेख मिलता है।

चार्वाक दर्शन

  • चार्वाक दर्शन को लोकायत भी कहा जाता है।
  • इसके अनुसार भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य है।
  • इस दर्शन के अनुसार मृत्यु के बाद जीवन संभव नहीं है।

लोक और जनजातीय जड़ें

  • भारत में समृद्ध मौखिक परंपराएँ भी रही हैं।
  • मौखिक परंपराओं में ज्ञान, उपदेश और प्रथाएँ लिखित ग्रंथों के बजाय अभ्यास और परंपरा द्वारा आगे पहुँचती हैं।
  • लोक परंपराएँ आम लोगों द्वारा और जनजातीय परंपराएँ जनजातीय समुदायों द्वारा आगे बढ़ाई जाती हैं।
  • लोक और जनजातीय परंपराएँ भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण जड़ें हैं।

जनजाति क्या है?

  • जनजाति सामान्य उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा साझा करने वाले परिवारों या वंशों का समुदाय हो सकती है।
  • इन समुदायों में आपसी निकट संबंध होते हैं और सामान्यतः एक मुखिया होता है।
  • प्राचीन भारत में ‘जनजाति’ के लिए आज जैसा अलग शब्द नहीं था; अलग-अलग जन विशेष परिवेशों, जैसे वन या पहाड़ों में रहते थे।
  • 2011 के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार भारत के अधिकांश राज्यों में 705 जनजातियाँ निवास करती थीं।

लोक, जनजातीय और प्रमुख परंपराओं का संपर्क

  • लोक और जनजातीय परंपराओं तथा प्रमुख विचारधाराओं के बीच लंबे समय से संपर्क रहा है।
  • देवताओं, कल्पनाओं, दंतकथाओं और रीति-रिवाजों का दोनों दिशाओं में आदान-प्रदान हुआ।
  • पुरी के भगवान जगन्नाथ के बारे में परंपरा में उन्हें मूल रूप से जनजातीय देवता माना गया है।
  • कई जनजातीय समुदायों ने हिंदू देवी-देवताओं को अपनाया और अपनी-अपनी रामायण तथा महाभारत की परंपराएँ विकसित कीं।

प्रकृति के प्रति श्रद्धा

  • लोक, जनजातीय और हिंदू विश्वासों में पर्वत, नदियाँ, पेड़, पौधे, जंतु और कुछ पत्थर पवित्र माने जाते हैं।
  • जनजातीय परंपराओं में प्राकृतिक तत्वों से जुड़े अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।
  • नीलगिरि की टोडा जनजाति के अनुसार पर्वत की अनेक चोटियाँ देवी-देवताओं का निवास स्थान हैं।
  • प्रकृति के प्रति सम्मान भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण भाग है।

लोक और जनजातीय परंपराओं का योगदान

  • लोक और जनजातीय मान्यताओं ने भारतीय संस्कृति को विविध और समृद्ध बनाया।
  • इन परंपराओं ने प्रमुख धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं को भी प्रभावित किया।
  • प्रमुख विचारधाराओं ने भी लोक और जनजातीय परंपराओं को प्रभावित किया।
  • इस लंबे पारस्परिक संपर्क का परिणाम सांस्कृतिक समृद्धि के रूप में सामने आया।

महत्वपूर्ण शब्द

  • वेद – प्राचीन भारतीय ज्ञान-ग्रंथ।
  • ऋचा – वैदिक प्रार्थना, कविता या गीत।
  • आध्यात्मिकता – स्वयं से परे किसी गहरे या उच्च आयाम की खोज।
  • साधक – सत्य या आध्यात्मिक ज्ञान की खोज करने वाला व्यक्ति।
  • ब्रह्म – उपनिषदों में वर्णित दिव्य और व्यापक तत्व।
  • आत्मन् – प्रत्येक जीव में विद्यमान आत्मस्वरूप।
  • अहिंसा – चोट या नुकसान न पहुँचाने का विचार।
  • अनेकांतवाद – सत्य के अनेक पक्षों को स्वीकार करना।
  • अपरिग्रह – अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह से दूर रहना।
  • मौखिक परंपरा – लिखित ग्रंथों के बजाय बोलकर और अभ्यास द्वारा ज्ञान को आगे पहुँचाना।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • चार वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
  • ‘वेद’ का अर्थ – ज्ञान।
  • वैदिक ऋचाएँ – मौखिक परंपरा द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित।
  • प्रमुख वैदिक दर्शन – वेदांत और योग।
  • बौद्ध मत – सिद्धार्थ गौतम/बुद्ध से संबंधित।
  • जैन मत – महावीर के उपदेशों से प्रमुख रूप से जुड़ा।
  • जैन मत के प्रमुख सिद्धांत – अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह।
  • चार्वाक – लोकायत दर्शन।
  • लोक और जनजातीय परंपराएँ – भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण जड़ें।
  • अध्याय का मुख्य संदेश – भारतीय संस्कृति अनेक परंपराओं, विचारों और विश्वासों के लंबे पारस्परिक संपर्क से विकसित हुई है।
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