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Chapter-द्रव्य का परमाण्विक आधार Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : August 8, 2026

CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-द्रव्य का परमाण्विक आधार Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 08 August 2026

द्रव्य का परमाण्विक आधार

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रासायनिक आबंध

अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार

पिछले भाग में आपने डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का अध्ययन किया। अब हम समझेंगे कि परमाणु आपस में किस प्रकार संयोजित होकर अणु एवं यौगिक बनाते हैं तथा रासायनिक आबंध (Chemical Bond) का निर्माण कैसे होता है।

परमाणु किस प्रकार संयोजन करते हैं?

परिचय

एक ही तत्व के परमाणु परस्पर संयोजित होकर उस तत्व का अणु बना सकते हैं, जबकि विभिन्न तत्वों के परमाणु संयोजित होकर किसी यौगिक का अणु बनाते हैं। उदाहरण के लिए, दो हाइड्रोजन परमाणु मिलकर हाइड्रोजन (H₂) का अणु बनाते हैं, जबकि एक हाइड्रोजन तथा एक क्लोरीन परमाणु मिलकर हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) का अणु बनाते हैं। 

अणु (Molecule)

परिभाषा:
अणु वह विद्युत उदासीन कण है जिसमें एक या एक से अधिक परमाणु रासायनिक आबंध द्वारा जुड़े होते हैं। यह स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है तथा उस पदार्थ के सभी रासायनिक गुणों को प्रदर्शित करता है। 

परमाणु संयोजन क्यों करते हैं?

परमाणु अपनी बाह्यतम (संयोजकता) कोश को पूर्ण करके अधिक स्थायी बनने के लिए संयोजन करते हैं। जिन परमाणुओं की संयोजकता कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (या K कोश के लिए 2 इलेक्ट्रॉन) होते हैं, वे सामान्यतः स्थायी होते हैं। इसलिए अन्य परमाणु इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण, ग्रहण अथवा त्याग करके स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करते हैं। 

परमाणुओं के संयोजन के तरीके

परमाणु मुख्यतः दो प्रकार से संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं। 

  • इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing of Electrons): इसमें दो परमाणु अपने एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण (Transfer of Electrons): इसमें एक परमाणु अपने एक या अधिक संयोजकता इलेक्ट्रॉन दूसरे परमाणु को दे देता है अथवा उससे ग्रहण कर लेता है।

रासायनिक आबंध (Chemical Bond)

परिचय:
जब दो या दो से अधिक परमाणु परस्पर संयोजित होकर अणु अथवा यौगिक का निर्माण करते हैं, तब उन्हें एक साथ बाँधे रखने वाला आकर्षण बल रासायनिक आबंध (Chemical Bond) कहलाता है। परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए रासायनिक आबंध बनाते हैं। 

परिभाषा:
दो या दो से अधिक परमाणुओं के बीच कार्य करने वाला वह आकर्षण बल, जो उन्हें एक साथ बाँधकर अणु या यौगिक का निर्माण करता है, रासायनिक आबंध कहलाता है। 

रासायनिक आबंध की आवश्यकता

अधिकांश परमाणुओं की संयोजकता कोश अपूर्ण होती है, इसलिए वे स्थिरता प्राप्त करने के लिए अन्य परमाणुओं से जुड़ते हैं। इस प्रक्रिया में परमाणु अक्रिय गैसों जैसा स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करते हैं, जिससे उनका ऊर्जा स्तर कम हो जाता है और वे अधिक स्थायी बन जाते हैं। 

रासायनिक आबंध के प्रकार

परमाणु मुख्यतः दो प्रकार के रासायनिक आबंध बनाते हैं।

  • सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)
  • आयनिक आबंध (Ionic Bond)

1. सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)

परिभाषा:
जब दो परमाणु अपनी संयोजकता कोश के एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके आबंध बनाते हैं, तो उसे सहसंयोजी आबंध कहते हैं।

यह कैसे बनता है?
दोनों परमाणु अपने-अपने इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं। इस साझेदारी से दोनों परमाणुओं की बाहरी कोश पूर्ण हो जाती है और वे स्थायी हो जाते हैं। उदाहरण के लिए H₂, O₂, Cl₂ तथा H₂O जैसे अणुओं में सहसंयोजी आबंध पाया जाता है।

सहसंयोजी आबंध के गुणधर्म

  • इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा बनता है।
  • सामान्यतः अधातुओं के बीच बनता है।
  • सहसंयोजी यौगिकों का गलनांक एवं क्वथनांक अपेक्षाकृत कम होता है।
  • अधिकांश सहसंयोजी यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं।
  • ये प्रायः जल में कम तथा कार्बनिक विलायकों में अधिक घुलनशील होते हैं।

महत्त्व:
जल, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन तथा अधिकांश कार्बनिक यौगिकों का निर्माण सहसंयोजी आबंध द्वारा होता है। जीव-जगत में पाए जाने वाले अधिकांश यौगिक इसी प्रकार के आबंध से बने होते हैं।

2. आयनिक आबंध (Ionic Bond)

परिभाषा:
जब एक परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन दूसरे परमाणु को स्थानांतरित कर देता है और उनके बीच बने धनायन तथा ऋणायन के आकर्षण से आबंध बनता है, तो उसे आयनिक आबंध कहते हैं।

यह कैसे बनता है?
धातु परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाता है, जबकि अधातु परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाता है। विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच आकर्षण बल उत्पन्न होता है, जिससे आयनिक आबंध बन जाता है। सोडियम क्लोराइड (NaCl) इसका प्रमुख उदाहरण है।

आयनिक आबंध के गुणधर्म

  • इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा बनता है।
  • सामान्यतः धातु एवं अधातु के बीच बनता है।
  • आयनिक यौगिकों का गलनांक एवं क्वथनांक अधिक होता है।
  • पिघली हुई अथवा जलीय अवस्था में विद्युत का संचालन करते हैं।
  • अधिकांश आयनिक यौगिक जल में घुलनशील होते हैं।

महत्त्व:
सामान्य नमक (NaCl), कैल्सियम क्लोराइड, मैग्नीशियम ऑक्साइड जैसे अनेक महत्वपूर्ण यौगिक आयनिक आबंध द्वारा बनते हैं। ये उद्योग, कृषि तथा दैनिक जीवन में अत्यंत उपयोगी हैं।

Our Concept Builder

रासायनिक आबंध का मुख्य उद्देश्य परमाणुओं को अधिक स्थिर बनाना है। यदि परमाणु इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं तो सहसंयोजी आबंध बनता है, जबकि इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होने पर आयनिक आबंध बनता है। इसी कारण विभिन्न पदार्थों के गुणधर्म अलग-अलग होते हैं।

Exam Booster

  • रासायनिक आबंध दो प्रकार के होते हैं— सहसंयोजी एवं आयनिक।
  • सहसंयोजी आबंध इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है।
  • आयनिक आबंध इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनता है।
  • NaCl आयनिक आबंध का तथा H₂, O₂, Cl₂ सहसंयोजी आबंध के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए रासायनिक आबंध बनाते हैं।
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