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Chapter-विविधता में एकता या ‘एक में अनेक’ Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : September 15, 2026

CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-विविधता में एकता या ‘एक में अनेक’ Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 15 September 2026

विविधता में एकता या ‘एक में अनेक’

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विविधता में एकता

अध्याय 8. विविधता में एकता या ‘एक में अनेक’

भारत में भाषा, भोजन, वस्त्र, त्योहार और परंपराओं में बहुत विविधता है। फिर भी इन विविधताओं के बीच एक गहरी सांस्कृतिक एकता दिखाई देती है।

विविधता में एकता

  • विविधता का अर्थ अलग-अलग रूपों, भाषाओं, परंपराओं, खान-पान और जीवन-पद्धतियों का होना है।
  • एकता का अर्थ इन विविधताओं के बीच मौजूद साझा संबंध और सांस्कृतिक जुड़ाव है।
  • भारत में विविधता के बावजूद लोगों के बीच अनेक सांस्कृतिक समानताएँ पाई जाती हैं।
  • ‘एक में अनेक’ का भाव बताता है कि एक ही सांस्कृतिक आधार के अनेक क्षेत्रीय रूप हो सकते हैं।

भारत की समृद्ध विविधता

  • भारत की यात्रा करने पर अलग-अलग दृश्य, परिधान, भोजन, भाषाएँ, लिपियाँ, रीति-रिवाज और परंपराएँ दिखाई देती हैं।
  • भारत की विशाल जनसंख्या और विभिन्न समुदाय इसकी सामाजिक विविधता को बढ़ाते हैं।
  • भारत के अनेक लोग अपने जन्मस्थान या मूल समुदाय से दूर रहते हैं; ऐसे लोगों को प्रवासी कहा जा सकता है।
  • ‘भारत के लोग परियोजना’ के अंतर्गत देश के सभी राज्यों में 4,635 समुदायों का सर्वेक्षण किया गया।
  • इस सर्वेक्षण में 325 भाषाएँ और 25 लिपियाँ दर्ज की गई थीं।

भोजन में विविधता

  • भारत में हजारों प्रकार के व्यंजन और पकवान बनाए जाते हैं।
  • अलग-अलग क्षेत्रों में भोजन बनाने की विधियाँ और स्वाद अलग हो सकते हैं।
  • फिर भी कुछ प्रमुख अनाज और दालें पूरे भारत में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।

मुख्य अनाज और दालें

मुख्य अनाज दालें
चावल अरहर दाल
गेहूँ मूँग दाल
जौ चना दाल
बाजरा मसूर दाल
ज्वार लोबिया
रागी राजमा

भोजन में एकता और विविधता

  • चावल, गेहूँ, जौ, बाजरा, ज्वार, रागी और विभिन्न दालों का उपयोग भारत के अधिकांश भागों में होता है।
  • हल्दी, जीरा, इलायची और अदरक जैसे मसालों का उपयोग भी पूरे देश में व्यापक है।
  • एक ही सामग्री से अलग-अलग क्षेत्रों में अनेक प्रकार के व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
  • इस प्रकार भोजन में एकता सामग्री में और विविधता व्यंजनों में दिखाई देती है।

वस्त्र एवं परिधान

  • भारत के प्रत्येक क्षेत्र ने वस्त्र और परिधान की अपनी विशेष शैली विकसित की है।
  • अलग-अलग क्षेत्रों में पहनावे के तरीके अलग हो सकते हैं।
  • इसके बावजूद कुछ पारंपरिक परिधान पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में दिखाई देते हैं।
  • साड़ी इसका प्रमुख उदाहरण है।

साड़ी – एकता में विविधता का उदाहरण

  • साड़ी एक लंबा, सामान्यतः बिना सिला हुआ पारंपरिक परिधान है।
  • इसे मुख्यतः कपास या रेशम के धागे से बनाया जाता है।
  • आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) कपड़ों से भी साड़ियाँ बनाई जाती हैं।
  • साड़ी के सैकड़ों प्रकार और डिजाइन मिलते हैं।
  • इसे पहनने और बाँधने के तरीके क्षेत्र और समुदाय के अनुसार अलग-अलग होते हैं।
  • फिर भी ये सभी रूप एक ही मूल परिधान – साड़ी – से जुड़े हैं।

प्रसिद्ध रेशमी साड़ियाँ

साड़ी का प्रकार क्षेत्र/परंपरा
बनारसी बनारस
कांजीवरम तमिलनाडु
पैठनी महाराष्ट्र
पाटन पटोला गुजरात
मूगा असम
मैसूरू कर्नाटक

साड़ी का ऐतिहासिक महत्व

  • साड़ी का इतिहास बहुत पुराना है।
  • वैशाली, वर्तमान बिहार, से प्राप्त एक पत्थर की उकेरी गई आकृति में साड़ी पहने महिला दिखाई गई है।
  • साड़ी का उपयोग केवल परिधान के रूप में ही नहीं, बल्कि अन्य रचनात्मक कार्यों में भी किया जाता रहा है।

उकेरी गई आकृति

  • उकेरी गई आकृति वह डिजाइन या चित्र है जिसे किसी समतल सतह पर काटकर या खोदकर बनाया जाता है।
  • यह पत्थर, लकड़ी, मिट्टी या अन्य सामग्री पर बनाई जा सकती है।

भारतीय सूती वस्त्र और व्यापार

  • भारत लंबे समय तक विश्व में महीन सूती वस्त्रों के प्रमुख उत्पादकों में रहा।
  • भारतीय सूती कपड़ों का यूरोप जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में निर्यात किया जाता था।
  • छींट नामक छपे हुए सूती कपड़े 17वीं शताब्दी में यूरोप में बहुत लोकप्रिय हुए।
  • भारतीय कपड़ों की लोकप्रियता के कारण इंग्लैंड और फ्रांस ने अपने उत्पादों के संरक्षण के लिए भारत से ‘छींट’ के आयात पर प्रतिबंध लगाया।

त्योहारों की विविधता

  • भारत में त्योहारों की बहुत अधिक विविधता है।
  • एक ही त्योहार अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम और स्थानीय रूपों में मनाया जा सकता है।
  • इसके बावजूद त्योहार के पीछे जुड़ा सांस्कृतिक भाव समान हो सकता है।

मकर संक्रांति – एक त्योहार, अनेक नाम

  • मकर संक्रांति लगभग 14 जनवरी के आसपास मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है।
  • यह भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
  • कई क्षेत्रों में यह फसल की कटाई से जुड़ा हुआ पर्व है।

मकर संक्रांति के क्षेत्रीय नाम

क्षेत्र पर्व का नाम
गुजरात उत्तरायण
तमिलनाडु पोंगल
असम माघ बिहू
पंजाब माघी/लोहड़ी
उत्तर भारत के कुछ क्षेत्र खिचड़ी पर्व

एक त्योहार – अनेक रूप

  • एक ही पर्व अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नाम से जाना जा सकता है।
  • स्थानीय भोजन, रीति-रिवाज और उत्सव मनाने के तरीके अलग हो सकते हैं।
  • इस प्रकार त्योहारों में नाम और रूप की विविधता तथा सांस्कृतिक भाव की एकता दिखाई देती है।

महत्वपूर्ण शब्द

शब्द अर्थ
विविधता अलग-अलग रूपों, भाषाओं, भोजन, परिधान और परंपराओं का होना।
एकता विभिन्नताओं के बीच मौजूद साझा संबंध और जुड़ाव।
प्रवासी अपने जन्मस्थान या मूल समुदाय से दूर रहने वाला व्यक्ति।
परिधान पहनने के लिए उपयोग किए जाने वाले वस्त्र।
उकेरी गई आकृति किसी सतह पर काटकर या खोदकर बनाई गई आकृति।
छींट छपे हुए डिजाइन वाला सूती कपड़ा।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत की विविधता भाषा, लिपि, भोजन, वस्त्र, त्योहार और परंपराओं में दिखाई देती है।
  • ‘भारत के लोग परियोजना’ में 4,635 समुदाय दर्ज किए गए।
  • इस सर्वेक्षण में 325 भाषाएँ और 25 लिपियाँ दर्ज की गई थीं।
  • चावल, गेहूँ, जौ, बाजरा, ज्वार और रागी जैसे अनाज भारत के विभिन्न भागों में उपयोग किए जाते हैं।
  • साड़ी एक ही परिधान होते हुए भी अनेक क्षेत्रीय रूपों में पहनी जाती है।
  • बनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा और मैसूरू प्रसिद्ध रेशमी साड़ियाँ हैं।
  • मकर संक्रांति लगभग 14 जनवरी के आसपास मनाई जाती है।
  • मकर संक्रांति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है।

Quick Revision

  • भारत → अनेक भाषाएँ + भोजन + वस्त्र + त्योहार + परंपराएँ।
  • विविधता → अलग-अलग क्षेत्रीय रूप।
  • एकता → विविध रूपों के बीच साझा सांस्कृतिक संबंध।
  • भोजन → अलग-अलग व्यंजन, लेकिन कई समान अनाज और मसाले।
  • साड़ी → एक परिधान, अनेक पहनने के तरीके।
  • त्योहार → एक पर्व, अनेक क्षेत्रीय नाम और रूप।
  • मुख्य संदेश → विविधता भारत की समृद्धि है और इसके भीतर एकता मौजूद है।
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