Chapter-पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
मानचित्र और ग्लोब
अध्याय 1 – पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
मानचित्र
मानचित्र किसी क्षेत्र का प्रतीकों की सहायता से बनाया गया चित्र या रेखांकन है। इसका उपयोग किसी स्थान की स्थिति, दिशा, दूरी तथा विभिन्न भौगोलिक विशेषताओं को समझने के लिए किया जाता है।
मानचित्र का उपयोग
- किसी स्थान का पता लगाने के लिए।
- एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का मार्ग जानने के लिए।
- दो स्थानों के बीच की दूरी जानने के लिए।
- विभिन्न दिशाओं को समझने के लिए।
- प्राकृतिक तथा मानव निर्मित विशेषताओं को दर्शाने के लिए।
मानचित्रावली
मानचित्रावली मानचित्रों का संग्रह होती है, जो सामान्यतः एक पुस्तक के रूप में होती है।
मानचित्र के मुख्य घटक
किसी मानचित्र के तीन प्रमुख घटक होते हैं:
- दूरी – दो स्थानों के बीच की दूरी को दर्शाती है।
- दिशा – किसी स्थान की स्थिति को दूसरी जगह के संबंध में बताती है।
- प्रतीक चिह्न – मानचित्र पर विभिन्न वस्तुओं और स्थानों को दर्शाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
मुख्य दिशाएँ
चार मुख्य दिशाएँ हैं:
- उत्तर
- दक्षिण
- पूर्व
- पश्चिम
मध्यवर्ती दिशाएँ
दो मुख्य दिशाओं के बीच की दिशाओं को मध्यवर्ती दिशाएँ कहते हैं।
- उत्तर-पूर्व
- दक्षिण-पूर्व
- दक्षिण-पश्चिम
- उत्तर-पश्चिम
दिशाओं द्वारा स्थान बताना
किसी स्थान की स्थिति को किसी दूसरे स्थान के संबंध में दिशा बताकर स्पष्ट किया जा सकता है। जैसे – विद्यालय बाजार के उत्तर में स्थित है।
पैमाना
पैमाना मानचित्र पर दिखाई गई दूरी और धरातल पर वास्तविक दूरी के बीच का संबंध बताता है।
उदाहरण: यदि मानचित्र पर 1 सेंटीमीटर वास्तविक धरातल पर 500 मीटर को दर्शाता है, तो पैमाना 1 सेमी = 500 मीटर होगा।
मानचित्र में प्रतीक चिह्न
मानचित्र में वास्तविक वस्तुओं को उनके वास्तविक आकार में दिखाना संभव नहीं होता। इसलिए विभिन्न वस्तुओं को दर्शाने के लिए निश्चित प्रतीक चिह्नों का प्रयोग किया जाता है।
मानचित्र में सामान्य प्रतीक चिह्न
| वस्तु या स्थान | मानचित्र पर प्रतीक का उपयोग |
|---|---|
| रेलवे स्टेशन | विशेष प्रतीक द्वारा |
| सड़क | रेखा द्वारा |
| रेलवे लाइन | रेखा द्वारा |
| नदी | प्रतीक या रेखा द्वारा |
| कुआँ | विशेष प्रतीक द्वारा |
| तालाब | विशेष प्रतीक द्वारा |
| डाकघर | विशेष प्रतीक द्वारा |
| पुलिस स्टेशन | विशेष प्रतीक द्वारा |
परंपरागत प्रतीक चिह्न
परंपरागत प्रतीक चिह्न वे निश्चित संकेत होते हैं जिनका प्रयोग मानचित्रों में विभिन्न वस्तुओं और स्थानों को दर्शाने के लिए किया जाता है।
ग्लोब
ग्लोब पृथ्वी का गोलाकार मॉडल है। यह पृथ्वी के वास्तविक आकार और विभिन्न स्थानों की स्थिति को समझने में हमारी सहायता करता है।
पृथ्वी पर स्थानों का पता लगाना
पृथ्वी पर किसी स्थान की सही स्थिति बताने के लिए अक्षांश और देशांतर का प्रयोग किया जाता है। दोनों को मिलाकर किसी स्थान के निर्देशांक प्राप्त होते हैं।
निर्देशांक
निर्देशांक ऐसी माप हैं जिनकी सहायता से पृथ्वी पर किसी स्थान की सटीक स्थिति निर्धारित की जाती है। किसी स्थान के निर्देशांक के लिए उसके अक्षांश और देशांतर का प्रयोग किया जाता है।
अक्षांश
अक्षांश भूमध्य रेखा से किसी स्थान की उत्तर या दक्षिण दिशा में कोणीय दूरी का माप है। अक्षांश को डिग्री में मापा जाता है।
भूमध्य रेखा
भूमध्य रेखा पृथ्वी के बीचों-बीच खींची गई एक काल्पनिक रेखा है। इसका अक्षांश 0° है और यह पृथ्वी को उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाँटती है।
महत्वपूर्ण अक्षांश
| स्थान | अक्षांश |
|---|---|
| भूमध्य रेखा | 0° |
| उत्तरी ध्रुव | 90° उत्तर |
| दक्षिणी ध्रुव | 90° दक्षिण |
उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध
| उत्तरी गोलार्ध | दक्षिणी गोलार्ध |
|---|---|
| भूमध्य रेखा के उत्तर का भाग। | भूमध्य रेखा के दक्षिण का भाग। |
| अक्षांश को उत्तर के रूप में लिखा जाता है। | अक्षांश को दक्षिण के रूप में लिखा जाता है। |
अक्षांश और जलवायु
अक्षांश और जलवायु में संबंध होता है। भूमध्य रेखा के आसपास जलवायु सामान्यतः गर्म होती है। भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की ओर जाने पर अक्षांश बढ़ता जाता है और जलवायु सामान्यतः ठंडी होती जाती है।
महत्वपूर्ण शब्द
- मानचित्र – किसी क्षेत्र का प्रतीकों द्वारा बनाया गया चित्र।
- मानचित्रावली – मानचित्रों का संग्रह।
- पैमाना – मानचित्र की दूरी और वास्तविक दूरी के बीच संबंध।
- ग्लोब – पृथ्वी का गोलाकार मॉडल।
- अक्षांश – भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की कोणीय दूरी।
- भूमध्य रेखा – 0° अक्षांश की काल्पनिक रेखा।
- निर्देशांक – किसी स्थान की स्थिति निर्धारित करने के लिए अक्षांश और देशांतर का प्रयोग।
त्वरित पुनरावृत्ति
- मानचित्र किसी क्षेत्र को समझने और स्थानों का पता लगाने में सहायक होता है।
- मानचित्र के मुख्य घटक – दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।
- चार मुख्य दिशाएँ – उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम।
- चार मध्यवर्ती दिशाएँ – उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम।
- पैमाना मानचित्र की दूरी और वास्तविक दूरी का संबंध बताता है।
- ग्लोब पृथ्वी का गोलाकार मॉडल है।
- भूमध्य रेखा 0° अक्षांश पर स्थित है।
- अक्षांश से भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में किसी स्थान की स्थिति ज्ञात होती है।
- अक्षांश और देशांतर मिलकर किसी स्थान के निर्देशांक बनाते हैं।
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