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Chapter-आधारभूत लोकतंत्र भाग 3: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : September 19, 2026

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Chapter-आधारभूत लोकतंत्र भाग 3: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 19 September 2026

आधारभूत लोकतंत्र भाग 3: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार

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Chapter Review and Key Points

अध्याय 12. आधारभूत लोकतंत्र — भाग 3: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार

इस अध्याय में नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार, नगरीय स्थानीय निकायों की संरचना, वार्ड समितियों, उनके कार्यों तथा नागरिकों की भूमिका का अध्ययन किया गया है।

नगरीय स्थानीय निकाय

नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार की संस्थाओं को नगरीय स्थानीय निकाय कहा जाता है। इन निकायों को अपने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और आवश्यकताओं के प्रबंधन में स्वायत्तता प्राप्त होती है।

  • नगरीय स्थानीय निकाय स्थानीय स्तर पर शासन करते हैं।
  • इनका उद्देश्य नागरिकों से संबंधित स्थानीय समस्याओं का समाधान करना है।
  • इनमें स्थानीय नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले निर्वाचित सदस्य होते हैं।
  • ये स्थानीय स्तर पर सहभागी लोकतंत्र को मजबूत करते हैं।

स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर तक शासन

भारतीय शासन व्यवस्था को स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक एक पिरामिड के रूप में समझा जा सकता है। इसका आधार स्थानीय सरकार है, जो जनता के सबसे निकट होती है।

स्तर शासन की संस्था
राष्ट्रीय स्तर संघ सरकार
राज्य स्तर राज्य सरकार
स्थानीय स्तर स्थानीय सरकार
ग्रामीण क्षेत्र पंचायती राज संस्थाएँ
नगरीय क्षेत्र नगरीय स्थानीय निकाय

नगरों और कस्बों की विविधता

गाँवों की तुलना में बड़े नगर सामान्यतः अधिक जटिल और विविध होते हैं। नगरों में अलग-अलग क्षेत्रों, व्यवसायों और समुदायों के लोग रहते हैं तथा यहाँ जनसंख्या और गतिविधियाँ अधिक होती हैं। इसलिए नगरीय शासन भी कई प्रकार की आवश्यकताओं और समस्याओं से संबंधित होता है।

नगरीय स्थानीय निकायों के प्रकार

नगरों और कस्बों की जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग प्रकार के नगरीय स्थानीय निकाय होते हैं।

जनसंख्या नगरीय स्थानीय निकाय
10 लाख से अधिक नगर निगम / महानगर निगम
1 लाख से 10 लाख के बीच नगरपालिका
1 लाख से कम नगर पंचायत

नगर निगम

नगर निगम बड़े नगरों में नगरीय स्थानीय निकाय का सर्वोच्च स्तर का निकाय होता है। अध्याय के अनुसार 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों में नगर निगम होते हैं।

उदाहरण के रूप में अध्याय में चेन्नई और इंदौर के नगर निगमों का उल्लेख किया गया है।

नगरपालिका

1 लाख से 10 लाख के बीच जनसंख्या वाले नगरों में नगरपालिका सर्वोच्च नगरीय स्थानीय निकाय होती है। इसे अंग्रेजी में Municipal Council भी कहा जाता है।

नगर पंचायत

1 लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों और कस्बों में नगर पंचायत होती है।

वार्ड

नगरों और कस्बों को छोटी-छोटी प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें वार्ड कहा जाता है।

  • वार्ड स्थानीय प्रशासन की छोटी इकाई है।
  • प्रत्येक वार्ड में रहने वाले लोगों की स्थानीय समस्याओं पर ध्यान दिया जाता है।
  • वार्ड के लोग स्थानीय प्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी समस्याएँ सामने रखते हैं।

वार्ड समिति

वार्ड समितियाँ वार्ड से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और समस्याओं पर ध्यान देती हैं। इनके कार्यों की निश्चित कार्यप्रणाली अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकती है।

वार्ड समितियाँ निम्नलिखित कार्यों में सहायता कर सकती हैं:

  • स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में सहायता।
  • एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान।
  • जल रिसाव की जानकारी अधिकारियों तक पहुँचाना।
  • नाली जाम होने की समस्या की सूचना देना।
  • टूटी हुई सड़क जैसी समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराना।

नगरीय स्थानीय निकायों के प्रमुख कार्य

नगरीय स्थानीय निकाय नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े अनेक कार्य करते हैं।

  • आधारभूत ढाँचे की देखभाल।
  • अपशिष्ट का संग्रहण एवं निपटान।
  • कब्रगाहों का रख-रखाव।
  • सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर ध्यान देना।
  • स्थानीय कर एवं अर्थदंड प्राप्त करना।
  • क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की योजना में योगदान देना।
  • नागरिकों को विभिन्न स्थानीय सेवाएँ उपलब्ध कराना।

इंदौर नगर निगम की सेवाएँ

अध्याय में इंदौर नगर निगम की सेवाओं के उदाहरण दिए गए हैं। इनमें संपत्ति कर, जल शुल्क, सूखा कूड़ा प्रबंधन, व्यवसाय एवं व्यापार लाइसेंस, विवाह प्रमाणपत्र, अग्निशमन सेवाएँ, विभिन्न लाइसेंस, जल टैंकर, मलबा हटाना, शिकायतें तथा सेवा के लिए अनुरोध जैसी सेवाएँ शामिल हैं।

नगरीय स्थानीय निकायों के संसाधन

नगरीय स्थानीय निकायों को अपने कार्यों के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है। अध्याय में स्थानीय कर, अर्थदंड तथा विभिन्न सेवाओं से संबंधित भुगतान को संसाधन जुटाने के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

नागरिकों के कर्तव्य

नगरीय स्थानीय निकायों को प्रभावी ढंग से कार्य करने में नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र सहभागी होने के कारण नागरिकों को अपने क्षेत्र की देखभाल में सहयोग करना चाहिए।

  • कूड़े के पृथक्करण के निर्देशों का पालन करना।
  • जल का अनावश्यक अपव्यय रोकना।
  • जल रिसाव की तुरंत सूचना देना।
  • अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखना।
  • स्थानीय समस्याओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाना।
  • स्थानीय निकायों के कार्यों में सहयोग करना।

मद्रास कॉरपोरेशन का इतिहास

29 सितंबर 1688 को मद्रास कॉरपोरेशन की स्थापना हुई, जिसे अब ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन कहा जाता है। अध्याय के अनुसार यह भारत की सबसे प्राचीन नगर निगम संस्था है।

1792 के एक संसदीय अधिनियम ने मद्रास कॉरपोरेशन को नगर में स्थानीय कर लगाने की शक्ति प्रदान की। इससे स्थानीय नगरीय स्वशासन को आगे बढ़ने में सहायता मिली।

नगरीय स्थानीय शासन और लोकतंत्र

नगरीय स्थानीय शासन सहभागी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य निर्वाचित होते हैं और वे स्थानीय समस्याओं तथा आवश्यकताओं को प्रशासन के सामने रखते हैं।

  • नागरिकों की भागीदारी बढ़ती है।
  • स्थानीय समस्याओं पर ध्यान दिया जाता है।
  • लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी बात रखते हैं।
  • स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होती है।

ग्रामीण और नगरीय स्थानीय शासन

आधार ग्रामीण स्थानीय शासन नगरीय स्थानीय शासन
क्षेत्र गाँव और ग्रामीण क्षेत्र नगर और कस्बे
मुख्य संस्थाएँ ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद नगर पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम
प्रतिनिधित्व स्थानीय लोगों द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि स्थानीय लोगों द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि
मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास एवं स्थानीय समस्याओं का समाधान नगरीय विकास एवं स्थानीय समस्याओं का समाधान

लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति के मत का महत्व

अध्याय में गाँव और शहर के बीच संवाद के माध्यम से बताया गया है कि ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों की परिस्थितियाँ अलग हो सकती हैं, लेकिन लोकतंत्र का मूल विचार समान रहता है—प्रत्येक व्यक्ति का मत महत्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • नगरीय स्थानीय निकाय: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय शासन करने वाली संस्थाएँ।
  • वार्ड: नगर या कस्बे की छोटी प्रशासनिक इकाई।
  • वार्ड समिति: वार्ड की स्थानीय समस्याओं और गतिविधियों पर ध्यान देने वाली समिति।
  • नगर निगम: बड़े नगरों का सर्वोच्च नगरीय स्थानीय निकाय।
  • नगरपालिका: 1 लाख से 10 लाख के बीच जनसंख्या वाले नगरों की स्थानीय संस्था।
  • नगर पंचायत: 1 लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों और कस्बों की स्थानीय संस्था।
  • सहभागी लोकतंत्र: ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था जिसमें नागरिक शासन और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भाग लेते हैं।

महत्वपूर्ण अंतर

नगर निगम नगरपालिका
10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों में 1 लाख से 10 लाख के बीच जनसंख्या वाले नगरों में
बड़े नगरों के लिए मध्यम आकार के नगरों के लिए

Exam Booster

  • अध्याय संख्या — 12
  • अध्याय — आधारभूत लोकतंत्र — भाग 3: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार
  • नगरीय स्थानीय सरकार की संस्थाएँ — नगरीय स्थानीय निकाय
  • नगरों की छोटी प्रशासनिक इकाई — वार्ड
  • 10 लाख से अधिक जनसंख्या — नगर निगम
  • 1 लाख से 10 लाख जनसंख्या — नगरपालिका
  • 1 लाख से कम जनसंख्या — नगर पंचायत
  • भारत की सबसे प्राचीन नगर निगम संस्था — मद्रास कॉरपोरेशन
  • मद्रास कॉरपोरेशन की स्थापना — 29 सितंबर 1688
  • 1792 — मद्रास कॉरपोरेशन को स्थानीय कर लगाने की शक्ति मिली।
  • नगरीय स्थानीय निकायों में स्थानीय नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य निर्वाचित होते हैं।
  • नागरिकों की सक्रिय भागीदारी नगरीय स्थानीय शासन को प्रभावी बनाने में सहायक होती है।

Quick Revision

  • नगरीय क्षेत्र → नगरीय स्थानीय निकाय
  • नगर/कस्बा → वार्डों में विभाजित
  • वार्ड → वार्ड समिति
  • 10 लाख से अधिक → नगर निगम
  • 1–10 लाख → नगरपालिका
  • 1 लाख से कम → नगर पंचायत
  • नगरीय निकाय → स्थानीय समस्याओं का समाधान और सेवाएँ
  • नागरिक → स्थानीय निकायों के कार्यों में सहयोग
  • स्थानीय शासन → सहभागी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार
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