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Chapter-आधारभूत लोकतंत्र भाग 1: शासन Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
Last Updated : September 17, 2026
CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Updated on: 15 September 2026
आधारभूत लोकतंत्र भाग 1: शासन
समाज में नियमों की आवश्यकता
अध्याय 10. आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन
इस भाग में शासन और सरकार की आवश्यकता, नियम-कानून तथा सरकार के तीन अंगों की भूमिका को समझाया गया है।
समाज में नियमों की आवश्यकता
- जब बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तो असहमति और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
- समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम आवश्यक होते हैं।
- घर, विद्यालय, सड़क और कार्यस्थल आदि सभी जगह कुछ नियम होते हैं।
- नियमों का पालन न होने पर सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
शासन का अर्थ
- शासन – निर्णय लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना शासन कहलाता है।
- शासन का मुख्य उद्देश्य समाज में व्यवस्था बनाए रखना है।
- शासन में नियम बनाना, निर्णय लेना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना शामिल है।
नियम और कानून
- समाज को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग प्रकार के नियम बनाए जाते हैं।
- कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है।
- नियम और कानून हमेशा के लिए अपरिवर्तनीय नहीं होते।
- आवश्यकता के अनुसार नियमों और कानूनों में बदलाव किया जा सकता है।
- नागरिक भी नियमों और कानूनों में बदलाव के लिए अपनी बात रख सकते हैं।
सरकार क्या है?
- सरकार – उन व्यक्तियों के समूह या तंत्र को सरकार कहते हैं जो नियम बनाते हैं और इन नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं।
- सरकार समाज को व्यवस्थित ढंग से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- सरकार कानून बनाती है और उन्हें लागू करवाती है।
- सरकार नागरिकों के लिए विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और व्यवस्थाओं से संबंधित कार्य करती है।
सरकार के तीन अंग
| अंग | मुख्य कार्य |
|---|---|
| विधायिका | कानून बनाना तथा पुराने कानूनों में संशोधन या उन्हें निरस्त करना। |
| कार्यपालिका | कानूनों को लागू करना। |
| न्यायपालिका | कानून के उल्लंघन पर निर्णय करना और न्याय प्रदान करना। |
विधायिका
- विधायिका सरकार का वह अंग है जो कानून बनाता है।
- जनता के प्रतिनिधियों की सभा में कानूनों पर चर्चा की जाती है।
- विधायिका पुराने कानूनों में संशोधन कर सकती है।
- आवश्यकता पड़ने पर किसी कानून को निरस्त भी किया जा सकता है।
- राष्ट्रीय स्तर पर भारत की विधायिका में लोक सभा और राज्य सभा शामिल हैं।
कार्यपालिका
- कार्यपालिका का मुख्य कार्य कानूनों को लागू करना है।
- कानूनों को लागू करने के लिए विभिन्न विभाग और अभिकरण कार्य करते हैं।
- राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं।
- राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं।
- साइबर पुलिस जैसी एजेंसियाँ भी कानूनों को लागू करने में भूमिका निभाती हैं।
न्यायपालिका
- न्यायपालिका न्यायालयों की प्रणाली है।
- यह निर्णय करती है कि किसी व्यक्ति ने कानून तोड़ा है या नहीं।
- कानून तोड़ने पर क्या कार्रवाई या दंड होना चाहिए, इसका निर्णय न्यायपालिका कर सकती है।
- न्यायपालिका कार्यपालिका के किसी निर्णय की भी समीक्षा कर सकती है।
- यह विधायिका द्वारा बनाए गए कानून की भी जाँच कर सकती है कि वह सभी के हित में है या नहीं।
साइबर अपराध और सरकार के तीन अंग
- डिजिटल तकनीक के विकास के साथ साइबर अपराध जैसी नई आपराधिक गतिविधियाँ सामने आई हैं।
- साइबर अपराधों को रोकने के लिए सरकार नए कानून बना सकती है।
- विधायिका नए कानून बनाती है।
- कार्यपालिका कानूनों को लागू करती है और अपराधियों पर कार्रवाई करती है।
- न्यायपालिका अपराध से संबंधित मामलों पर निर्णय करती है।
शक्तियों का पृथक्करण
- सरकार के तीनों अंगों को निश्चित रूप से पृथक रखा जाता है।
- तीनों अंग एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और आवश्यकतानुसार साथ मिलकर कार्य करते हैं।
- सरकार की शक्तियों को अलग-अलग अंगों में बाँटने की व्यवस्था को शक्तियों का पृथक्करण कहा जाता है।
- इसका उद्देश्य शासन व्यवस्था में नियंत्रण और संतुलन बनाए रखना है।
- प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है।
- यदि कोई अंग अपनी निर्धारित भूमिका से आगे जाता है, तो संतुलन पुनः स्थापित किया जा सकता है।
सरकार के तीन अंग — एक नजर में
| सरकार का अंग | मुख्य कार्य | याद रखने का तरीका |
|---|---|---|
| विधायिका | कानून बनाना | कानून बनाए |
| कार्यपालिका | कानून लागू करना | कानून चलाए |
| न्यायपालिका | न्याय करना और कानून के उल्लंघन पर निर्णय देना | न्याय करे |
महत्वपूर्ण शब्द
- शासन: नियमों और निर्णयों के माध्यम से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना।
- सरकार: नियम बनाने और उनके पालन को सुनिश्चित करने वाला तंत्र।
- कानून: समाज के लिए बनाए गए महत्वपूर्ण नियम।
- विधायिका: कानून बनाने वाला अंग।
- कार्यपालिका: कानून लागू करने वाला अंग।
- न्यायपालिका: न्यायालयों की प्रणाली।
- शक्तियों का पृथक्करण: सरकार के तीन अंगों के बीच शक्तियों का विभाजन।
- नियंत्रण और संतुलन: सरकार के अंगों द्वारा एक-दूसरे के कार्यों की निगरानी और संतुलन बनाए रखना।
महत्वपूर्ण अंतर
| विधायिका | कार्यपालिका | न्यायपालिका |
|---|---|---|
| कानून बनाती है। | कानून लागू करती है। | कानून के उल्लंघन पर निर्णय करती है। |
| कानूनों में संशोधन या निरस्तीकरण कर सकती है। | कानूनों के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी निभाती है। | कानूनों और सरकारी निर्णयों की समीक्षा कर सकती है। |
Exam Facts
- समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम आवश्यक हैं।
- कुछ महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है।
- सरकार नियम बनाती है और उनका पालन सुनिश्चित करती है।
- सरकार के तीन अंग हैं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।
- विधायिका का मुख्य कार्य कानून बनाना है।
- कार्यपालिका का मुख्य कार्य कानून लागू करना है।
- न्यायपालिका कानून के उल्लंघन पर निर्णय करती है।
- शक्तियों का पृथक्करण शासन में नियंत्रण और संतुलन बनाए रखता है।
Quick Revision
- नियम → व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक।
- शासन → नियमों और निर्णयों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना।
- सरकार → नियम बनाती है और उनका पालन सुनिश्चित करती है।
- विधायिका → कानून बनाती है।
- कार्यपालिका → कानून लागू करती है।
- न्यायपालिका → कानून के उल्लंघन पर न्याय करती है।
- शक्तियों का पृथक्करण → तीनों अंगों के बीच शक्तियों का विभाजन।
- नियंत्रण और संतुलन → तीनों अंग एक-दूसरे के कार्यों की निगरानी करते हैं।
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