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Chapter-Chapter 3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना History class 10 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : July 19, 2026

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Chapter-Chapter 3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना History class 10 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 19 July 2026

Chapter 3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना

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भूमंडलीकरण की शुरुआत और प्रारम्भिक वैश्विक संपर्क

Chapter 3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना

भूमंडलीकरण (Globalisation) कोई नई प्रक्रिया नहीं है। प्राचीन काल से ही विभिन्न देशों के बीच व्यापार, यात्रा, संस्कृति और विचारों का आदान-प्रदान होता रहा है। समय के साथ परिवहन, संचार और उद्योगों के विकास ने विश्व के देशों को एक-दूसरे के और अधिक निकट ला दिया। इस भाग में भूमंडलीकरण की शुरुआत, सिल्क रूट तथा खाद्य, संस्कृति और बीमारियों के वैश्विक प्रसार का अध्ययन करेंगे।

Part 1 – भूमंडलीकरण की शुरुआत और प्रारम्भिक वैश्विक संपर्क

इस भाग में विश्व के प्रारम्भिक व्यापारिक संबंधों तथा विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं, लोगों और विचारों के आदान-प्रदान को समझेंगे।

भूमंडलीकरण का अर्थ

भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध विकसित होते हैं।

  1. यह देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देता है।
  2. लोगों, वस्तुओं और सेवाओं का आवागमन आसान बनाता है।
  3. नई तकनीकों का तेजी से प्रसार होता है।
  4. विश्व की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे पर निर्भर हो जाती हैं।
  5. आज का आधुनिक वैश्विक बाजार इसी प्रक्रिया का परिणाम है।

प्रारम्भिक वैश्वीकरण (Early Globalisation)

प्राचीन काल से ही विभिन्न सभ्यताओं के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संबंध स्थापित थे।

  1. एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच व्यापारिक संपर्क मौजूद थे।
  2. व्यापारी समुद्री तथा स्थल मार्गों का उपयोग करते थे।
  3. मसाले, रेशम, सोना, चाँदी और कीमती वस्तुओं का व्यापार होता था।
  4. व्यापार के साथ-साथ ज्ञान, धर्म और संस्कृति का भी प्रसार हुआ।
  5. यही प्रारम्भिक वैश्वीकरण का आधार बना।

सिल्क रूट (Silk Route)

सिल्क रूट प्राचीन विश्व का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग था।

  1. यह मार्ग एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ता था।
  2. इसका विकास लगभग दो हजार वर्ष पहले हुआ।
  3. रेशम, मसाले, वस्त्र, धातुएँ और कीमती पत्थरों का व्यापार होता था।
  4. चीन का रेशम यूरोप में अत्यधिक लोकप्रिय था।
  5. व्यापार के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विचारों का भी प्रसार हुआ।
  6. बौद्ध धर्म भारत से मध्य एशिया और पूर्वी एशिया तक पहुँचा।

भोजन का वैश्विक आदान-प्रदान

व्यापार के माध्यम से अनेक खाद्य पदार्थ एक देश से दूसरे देश तक पहुँचे।

  1. आलू, मक्का, टमाटर और मिर्च अमेरिका से एशिया एवं यूरोप पहुँचे।
  2. चाय और कॉफी का व्यापार विश्वभर में बढ़ा।
  3. गन्ना, चावल और गेहूँ का उत्पादन कई क्षेत्रों में फैल गया।
  4. नई फसलों से कृषि और भोजन की आदतों में परिवर्तन आया।
  5. विश्व के विभिन्न देशों की खाद्य संस्कृति पर इसका प्रभाव पड़ा।

रोगों का प्रसार

व्यापार और यात्राओं के साथ अनेक बीमारियाँ भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचीं।

  1. यात्रियों और व्यापारियों के माध्यम से रोग फैलते थे।
  2. 14वीं शताब्दी में प्लेग (Black Death) यूरोप में फैल गया।
  3. इस महामारी से लाखों लोगों की मृत्यु हुई।
  4. रोगों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या को प्रभावित किया।
  5. इससे लोगों को स्वास्थ्य और स्वच्छता का महत्व समझ में आया।

यात्रा और प्रवासन (Migration)

रोजगार, व्यापार और बेहतर जीवन की खोज में लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहे।

  1. व्यापारी नए बाजारों की खोज में दूर-दूर तक यात्रा करते थे।
  2. कारीगर और मजदूर रोजगार के लिए अन्य क्षेत्रों में जाते थे।
  3. धार्मिक प्रचारक अपने विचारों का प्रसार करते थे।
  4. प्रवास के कारण विभिन्न संस्कृतियों का मेल हुआ।
  5. विश्व के अनेक समाज बहुसांस्कृतिक बन गए।

संस्कृति और विचारों का आदान-प्रदान

वैश्विक संपर्कों ने विभिन्न देशों की संस्कृति और परंपराओं को प्रभावित किया।

  1. नई भाषाओं और साहित्य का प्रसार हुआ।
  2. धर्म और दर्शन के विचार विभिन्न देशों तक पहुँचे।
  3. कला और स्थापत्य शैली में परिवर्तन आया।
  4. नई तकनीकों और वैज्ञानिक ज्ञान का विकास हुआ।
  5. विश्व की सभ्यताओं के बीच आपसी सहयोग बढ़ा।

प्रारम्भिक भूमंडलीकरण का महत्व

प्रारम्भिक वैश्विक संपर्कों ने आधुनिक भूमंडलीकरण की नींव रखी।

  1. अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार हुआ।
  2. देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हुए।
  3. सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिला।
  4. नई खोजों और आविष्कारों को प्रोत्साहन मिला।
  5. आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

Chapter 3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना

15वीं और 16वीं शताब्दी में समुद्री मार्गों की खोज तथा यूरोपीय देशों के विस्तार ने विश्व व्यापार को नई दिशा दी। नई खोजों, उपनिवेशों की स्थापना तथा व्यापारिक प्रतिस्पर्धा ने आधुनिक भूमंडलीकरण की नींव को और मजबूत बनाया।

Part 1B – समुद्री खोजें और विश्व व्यापार का विस्तार

इस भाग में यूरोपीय समुद्री खोजों, अमेरिका की खोज, उपनिवेशवाद तथा विश्व व्यापार के विस्तार का अध्ययन करेंगे।

समुद्री मार्गों की खोज

यूरोपीय देशों ने एशिया तक पहुँचने के लिए नए समुद्री मार्गों की खोज शुरू की।

  1. मसालों और रेशम की बढ़ती मांग इसका प्रमुख कारण थी।
  2. पुराने स्थल मार्ग असुरक्षित और महंगे हो गए थे।
  3. पुर्तगाल और स्पेन समुद्री खोजों में सबसे आगे थे।
  4. नई नौवहन तकनीकों ने लंबी समुद्री यात्राएँ संभव बनाईं।
  5. इन खोजों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार हुआ।

क्रिस्टोफर कोलंबस की अमेरिका यात्रा

1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस पश्चिमी समुद्री मार्ग से भारत पहुँचने निकला, लेकिन अमेरिका पहुँच गया।

  1. कोलंबस स्पेन के संरक्षण में यात्रा पर निकला था।
  2. उसे लगा कि वह भारत पहुँच गया है।
  3. इस खोज के बाद यूरोपीय देशों का अमेरिका में प्रवेश बढ़ा।
  4. अमेरिका में उपनिवेश स्थापित किए गए।
  5. विश्व व्यापार का नया युग प्रारम्भ हुआ।

वास्को-दा-गामा का भारत आगमन

1498 में वास्को-दा-गामा समुद्री मार्ग से भारत पहुँचा।

  1. वह पुर्तगाल का प्रसिद्ध नाविक था।
  2. वह कालीकट (वर्तमान कोझिकोड) पहुँचा।
  3. भारत और यूरोप के बीच सीधा समुद्री व्यापार शुरू हुआ।
  4. पुर्तगाल ने भारत में व्यापारिक केंद्र स्थापित किए।
  5. अन्य यूरोपीय देशों ने भी भारत आने का प्रयास किया।

विश्व व्यापार का विस्तार

समुद्री खोजों के बाद विभिन्न देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ने लगा।

  1. एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के बीच व्यापार बढ़ा।
  2. मसाले, कपड़ा, चाय, कॉफी और चीनी का व्यापार हुआ।
  3. सोना, चाँदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का आदान-प्रदान बढ़ा।
  4. नए व्यापारिक बंदरगाहों का विकास हुआ।
  5. अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक कंपनियों की स्थापना हुई।

उपनिवेशवाद (Colonialism)

यूरोपीय देशों ने व्यापार के साथ-साथ अनेक देशों पर अपना राजनीतिक नियंत्रण स्थापित किया।

  1. स्पेन, पुर्तगाल, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड प्रमुख औपनिवेशिक शक्तियाँ थीं।
  2. एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में उपनिवेश स्थापित किए गए।
  3. उपनिवेशों से कच्चा माल यूरोप भेजा जाता था।
  4. तैयार वस्तुएँ उपनिवेशों में बेची जाती थीं।
  5. इससे यूरोपीय देशों की आर्थिक शक्ति बढ़ी।

दास व्यापार (Slave Trade)

वैश्विक व्यापार के साथ दास प्रथा का भी विस्तार हुआ।

  1. अफ्रीका से लाखों लोगों को दास बनाकर अमेरिका ले जाया गया।
  2. दासों से खेतों और खानों में कठोर श्रम कराया जाता था।
  3. दास व्यापार से यूरोपीय व्यापारियों को भारी लाभ हुआ।
  4. इससे अफ्रीका की सामाजिक और आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई।
  5. बाद में अनेक देशों में दास प्रथा का विरोध शुरू हुआ।

नई फसलों और संसाधनों का प्रसार

महाद्वीपों के बीच व्यापार से कृषि और संसाधनों का विस्तार हुआ।

  1. आलू, मक्का और टमाटर यूरोप तथा एशिया पहुँचे।
  2. गन्ना, कपास और तंबाकू की खेती बढ़ी।
  3. कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।
  4. विश्व के अनेक देशों की भोजन शैली में परिवर्तन आया।
  5. वैश्विक कृषि व्यापार को बढ़ावा मिला।

प्रारम्भिक वैश्विक व्यापार का प्रभाव

समुद्री खोजों और उपनिवेशवाद ने विश्व अर्थव्यवस्था में बड़े परिवर्तन किए।

  1. अंतरराष्ट्रीय व्यापार का तेजी से विस्तार हुआ।
  2. यूरोपीय देशों की आर्थिक शक्ति बढ़ी।
  3. उपनिवेशों का आर्थिक शोषण हुआ।
  4. विश्व के विभिन्न देशों के बीच संपर्क बढ़ा।
  5. आधुनिक भूमंडलीकरण की मजबूत नींव तैयार हुई।
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