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Chapter-Chapter 3. मुद्रा और साख Economics class 10 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : July 26, 2026

CBSE Class 10 Economics Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 3. मुद्रा और साख Economics class 10 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 26 July 2026

Chapter 3. मुद्रा और साख

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औपचारिक एवं अनौपचारिक ऋण, RBI तथा स्वयं सहायता समूह

अध्याय 3. मुद्रा और साख

देश के आर्थिक विकास के लिए सभी लोगों को सस्ती एवं सुरक्षित ऋण सुविधाएँ उपलब्ध होना आवश्यक है। भारत में ऋण के दो प्रमुख स्रोत हैं—औपचारिक तथा अनौपचारिक। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बैंकिंग व्यवस्था का नियमन करता है, जबकि स्वयं सहायता समूह (SHGs) विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भाग 3 – औपचारिक एवं अनौपचारिक ऋण, RBI तथा स्वयं सहायता समूह

इस भाग में औपचारिक एवं अनौपचारिक ऋण स्रोतों, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) तथा स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका का अध्ययन किया गया है।

औपचारिक ऋण के स्रोत

औपचारिक ऋण वे ऋण हैं जो सरकार तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के नियमों के अनुसार कार्य करने वाली संस्थाओं द्वारा दिए जाते हैं।

(i) औपचारिक ऋण मुख्यतः बैंकों एवं सहकारी समितियों द्वारा दिया जाता है।

(ii) इन संस्थाओं पर भारतीय रिज़र्व बैंक का नियंत्रण होता है।

(iii) ब्याज दर सामान्यतः कम होती है।

(iv) ऋण की शर्तें स्पष्ट एवं कानूनी होती हैं।

(v) यह आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है।

अनौपचारिक ऋण के स्रोत

अनौपचारिक ऋण वे ऋण हैं जो ऐसे व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा दिए जाते हैं जो सरकारी नियमों के अंतर्गत नहीं आते।

(i) महाजन, व्यापारी, मित्र एवं रिश्तेदार इसके प्रमुख स्रोत हैं।

(ii) इन पर RBI का नियंत्रण नहीं होता।

(iii) ब्याज दर प्रायः अधिक होती है।

(iv) ऋण की शर्तें कठोर हो सकती हैं।

(v) कई बार उधार लेने वाले का आर्थिक शोषण भी होता है।

औपचारिक एवं अनौपचारिक ऋण में अंतर

(i) औपचारिक ऋण RBI द्वारा नियंत्रित संस्थाएँ देती हैं, जबकि अनौपचारिक ऋण पर RBI का नियंत्रण नहीं होता।

(ii) औपचारिक ऋण पर ब्याज दर कम होती है, जबकि अनौपचारिक ऋण पर अधिक होती है।

(iii) औपचारिक ऋण में कानूनी सुरक्षा उपलब्ध होती है।

(iv) अनौपचारिक ऋण में शोषण की संभावना अधिक रहती है।

(v) औपचारिक ऋण आर्थिक विकास के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की भूमिका

भारतीय रिज़र्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है, जो देश की बैंकिंग व्यवस्था का नियमन करता है।

(i) RBI देश में मुद्रा जारी करता है।

(ii) यह बैंकों के कार्यों की निगरानी करता है।

(iii) बैंकिंग नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।

(iv) देश में मुद्रा की आपूर्ति को नियंत्रित करता है।

(v) वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्वयं सहायता समूह (Self Help Group - SHG)

स्वयं सहायता समूह छोटे-छोटे लोगों का समूह होता है, जो नियमित बचत करता है और अपने सदस्यों को आवश्यकता पड़ने पर ऋण उपलब्ध कराता है।

(i) अधिकांश स्वयं सहायता समूह महिलाओं द्वारा संचालित होते हैं।

(ii) सदस्य नियमित रूप से छोटी-छोटी बचत जमा करते हैं।

(iii) समूह अपने सदस्यों को कम ब्याज पर ऋण देता है।

(iv) इससे महाजनों पर निर्भरता कम होती है।

(v) यह ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।

स्वयं सहायता समूहों का महत्व

स्वयं सहायता समूह ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

(i) गरीब परिवारों को आसानी से ऋण उपलब्ध होता है।

(ii) बचत की आदत विकसित होती है।

(iii) छोटे व्यवसाय एवं स्वरोजगार को बढ़ावा मिलता है।

(iv) महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

(v) ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सहायता मिलती है।

औपचारिक ऋण का विस्तार क्यों आवश्यक है?

देश के समावेशी आर्थिक विकास के लिए औपचारिक ऋण सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।

(i) इससे लोगों का शोषण कम होता है।

(ii) कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होता है।

(iii) कृषि, उद्योग एवं व्यापार को प्रोत्साहन मिलता है।

(iv) रोजगार एवं निवेश में वृद्धि होती है।

(v) आर्थिक असमानता कम करने में सहायता मिलती है।

CBSE परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

(i) औपचारिक ऋण RBI द्वारा नियंत्रित संस्थाओं द्वारा दिया जाता है।

(ii) महाजन एवं व्यापारी अनौपचारिक ऋण के प्रमुख स्रोत हैं।

(iii) RBI भारत का केंद्रीय बैंक है।

(iv) स्वयं सहायता समूह ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराते हैं।

(v) औपचारिक ऋण का विस्तार आर्थिक विकास एवं सामाजिक समानता के लिए आवश्यक है।

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