Chapter-7. जीवों में विविधता Science class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
7. जीवों में विविधता
कशेरुकी (वर्टीब्रेटा) | समान्य लक्षण | वर्गीकरण | जीवों के गुण | पक्षी एवं स्तनधारी में अंतर
वर्टीब्रेटा (कशेरुकी):
इन जंतुओं में वास्तविक मेरुदंड एवं अंतःकंकाल पाया जाता है। इस कारण जंतुओं में पेशियों का
वितरण अलग होता है एवं पेशियाँ कंकाल से जुड़ी होती हैं, जो इन्हें चलने में सहायता करती हैं।
वर्टीब्रेट द्विपार्श्वसममित, त्रिकोरिक, देहगुहा वाले जंतु हैं। इनमें ऊतकों एवं अंगों का जटिल विभेदन पाया जाता है।
सभी कशेरुकी जीवों में पाए जाने वाले समान्य लक्षण :
(i) इनमें नोटोकोर्ड पाया जाता है |
(ii) इनमें पृष्ठनलीय कशेरुकी दंड एवं मेरुरज्जु होता है |
(iii) इनका त्रिकोरिक शरीर होता है |
(iv) इनमें युग्मित क्लोम थैली पाई जाती है |
(v) इनमें देह्गुहा पाया जाता है |
वर्टीब्रेटा समूह जे जंतुओं का वर्गीकरण :
वर्टीब्रेटा को पाँच वर्गों में विभाजित किया गया है :-
1. मत्स्य
2. जल-स्थलचर
3. सरीसृप
4. पक्षी
5. स्तनपायी या स्तनधारी
1. मत्स्य
मत्स्य वर्ग के जीवों के गुण:
(i) ये मछलियाँ हैं, जो समुद्र और मीठे जल दोनों जगहों पर पाई जाती हैं।
(ii) इनकी त्वचा शल्क (scales) अथवा प्लेटों से ढकी होती है तथा ये अपनी मांसल पूँछ का प्रयोग तैरने के लिए करती हैं।
(iii) इनका शरीर धारारेखीय होता है।
(iv) इनमें श्वसन क्रिया के लिए क्लोम पाए जाते हैं, जो जल में विलीन ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
(v) ये असमतापी होते हैं तथा इनका हृदय द्विकक्षीय होता है।
(vi) ये अंडे देती हैं।
(vii) कुछ मछलियों में कंकाल केवल उपास्थि का बना होता है जैसे- शार्क। अन्य प्रकार की मछलियों में कंकाल अस्थि का बना होता है जैसे - ट्युना, रोहू।
2. जल-स्थलचर (Amphibia) :
जल-स्थलचर वर्ग के जीवों के गुण :
(i) ये मत्स्यों से भिन्न होते हैं क्योंकि इनमें शल्क नहीं पाए जाते।
(ii) इनकी त्वचा पर श्लेष्म ग्रंथियाँ पाई जाती हैं |
(iii) इनका हृदय त्रिकक्षीय होता है।
(iv) इनमें बाह्य कंकाल नहीं होता है।
(v) वृक्क पाए जाते हैं।
(vi) श्वसन क्लोम अथवा फेफड़ों द्वारा होता है।
(vii) ये अंडे देने वाले जंतु हैं।
(viii) ये जल तथा स्थल दोनों पर रह सकते हैं।
उदाहरण- मेंढक, सैलामेंडर, टोड इत्यादि |
3. सरीसृप (Reptile) :
सरीसृप वर्ग के जीवों के गुण:
(i) ये असमतापी जंतु हैं।
(ii) इनका शरीर शल्कों द्वारा ढका होता है।
(iii) इनमें श्वसन पेफपफड़ों द्वारा होता है।
(iv) हृदय सामान्यतः त्रिकक्षीय होता है, लेकिन मगरमच्छ का हृदय चार कक्षीय होता है।
(v) वृक्क पाया जाता है।
(vi) ये अंडे देते हैं |
(vii) इनके अंडे कठोर कवच से ढके होते हैं तथा जल-स्थलचर की तरह इन्हें जल में अंडे देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
उदाहरण:- कछुआ, साँप, छिपकली, मगरमच्छ इत्यादि |
4. पक्षी : इस वर्ग में सभी पक्षियों को रखा गया है |
पक्षी वर्ग के जंतुओं के गुण :
(i) ये समतापी प्राणी हैं।
(ii) इनका हृदय चार कक्षीय होता है।
(iii) इनके दो जोड़ी पैर होते हैं।
(iv) इनमें आगे वाले दो पैर उड़ने के लिए पंखों में परिवर्तित हो जाते हैं।
(v) शरीर परों से ढका होता है।
(vi) श्वसन फेंफडों द्वारा होता है।
उदाहरण : कबूतर, कौवा, गौरेया, बगुला (सफ़ेद स्टोर्क), ऑस्ट्रिच (स्ट्रुथियो कैमेलस) इत्यादि |
5. स्तनपायी या स्तनधारी :
स्तनपायी वर्ग के जंतुओं के गुण :
(i) ये समतापी प्राणी हैं।
(ii) हृदय चार कक्षीय होता है।
(iii) इस वर्ग के सभी जंतुओं में नवजात के पोषण के लिए दुग्ध ग्रंथियाँ पाई जाती हैं।
(iv) इनकी त्वचा पर बाल, स्वेद और तेल ग्रंथियाँ पाई जाती हैं।
(v) इस वर्ग के जंतु शिशुओं को जन्म देने वाले होते हैं।
उदाहरण: मनुष्य, बकरी, गाय, ह्वेल, चूहा, बिल्ली और चमगादड़ आदि |
अपवाद: कुछ स्तनपायी जंतु अंडे भी देते हैं जैसे इकिड्ना, प्लेटिपस। कंगारू जैसे कुछ स्तनपायी अविकसित बच्चे को जन्म देती है जो मार्सूपियम नामक थैली में तब तक लटके रहते हैं जब तक कि उनका पूर्ण विकास नहीं हो जाता है।
पक्षी एवं स्तनधारी में अंतर :
पक्षी :
(1) इनमें नवजात के पोषण के लिए दुग्ध ग्रंथियाँ नहीं पाई जाती हैं।
(2) इनका शरीर परों से ढका रहता है |
(3) ये अंडे देते हैं |
(4) ये अपने अग्र पाद का उपयोग उड़ने के लिए करते हैं |
स्तनधारी :
(1) इनमें नवजात के पोषण के लिए दुग्ध ग्रंथियाँ पाई जाती हैं।
(2) इनके त्वचा पर बाल, स्वेद और तेल ग्रंथियाँ पाई जाती हैं।
(3) ये अपने जैसे शिशु को जन्म देते हैं |
(4) इनके अपने अग्र पाद का उपयोग चलने के लिए या भोजन पकड़ने के लिए करते हैं |
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. जीवों में विविधता | वर्गीकरण और जैव विकास | वर्गीकरण का आधार
2. प्लांटी समूह | वर्गीकरण | प्लांटी जगत के जीवों के लक्षण
4. एनिमेलिया (जन्तु जगत) | जीवों का गुण (features) | वर्गीकरण का आधार | नोटोकॉर्ड
5. कशेरुकी (वर्टीब्रेटा) | समान्य लक्षण | वर्गीकरण | जीवों के गुण | पक्षी एवं स्तनधारी में अंतर
6. द्वि-नाम पद्धति | द्वि-नाम पद्धति के लाभ | बाह्य कंकाल | अंत: कंकाल
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