Chapter-2. क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध है Science class 9 in hindi Medium CBSE Notes
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2. क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध है
मिश्रण के घटकों का पृथक्करण
मिश्रण के घटकों का पृथक्करण
(The Seperation of components of Mixture):
मिश्रण के घटकों को पृथक करने के लिए विभिन्न प्रकार की विधियां प्रयोग में लाई जाती है |
विषमांगी मिश्रण को साधारण भौतिक क्रिया द्वारा पृथक किया जा सकता है, जैसे हाथ से चुनकर या छन्नी से छानकर आदि | परन्तु कभी-कभी इन घटकों को अलग करने के लिए विशेष तकनीकों का भी प्रयोग किया जाता है |
मिश्रण के घटकों को पृथक करने की निम्न विधियाँ है :
(1) वाष्पीकरण विधि
(2) अपकेन्द्रण विधि
(3) पृथक्करण विधि
(4) उर्ध्वपातन विधि
(5) क्रोमैटोग्राफी विधि
(6) आसवन विधि या प्रभाजी असवान विधि
(7) क्रिस्टलीकरण विधि
1. वाष्पीकरण विधि : इस विधि में द्रवीय पदार्थ को गर्म करके वाष्पीकृत कर दिया जाता है और मिश्रण के बाकी कण शेष रह जाते है |
अनुप्रयोग :
(i) समुद्री जल से नमक प्राप्त करने में |
(ii) जल से काले रंग की स्याही को अलग करने में |
2. अपकेन्द्रण विधि : यह वह विधि है जिसमे एक अपकेन्द्रिय यन्त्र का प्रयोग किया जाता है जोकि एक प्रकार की मथनी या मिक्सी होती है जिसे मिश्रण में इसे तेजी से घुमाया जाता है तो भारी कण निचे बैठ जाते है और हलके कण ऊपर ही रह जाते है |
अनुप्रयोग :
(i) जाँच प्रयोगशाला में रक्त और मूत्र के जाँच में |
(ii) डेयरी तथा क्रीम से मक्खन निकालने की प्रक्रिया में |
(iii) कपडे धोने की मशीन में |
3. पृथक्करण विधि : इस विधि के द्वारा दो अघुलनशील द्रवों के मिश्रण को अलग किया जाता है | पृथक्करण के सिद्धांत के अनुसार, आपस में नहीं मिलाने वाले द्रव अपने घनत्व के अनुसार विभिन्न परतों में पृथक हो जाते है |
अनुप्रयोग: '
(i) तेल तथा जल के अघुलनशील मिश्रण को पृथक करने में |
(ii) धातुशोधन के दौरान लोहे को पृथक करने में |
4. उर्ध्वपातन विधि : इस विधि के द्वारा उर्ध्वापतित होने वाले पदार्थों को उर्ध्वापतित ना होने वाले अशुद्धियों से अलग करने के लिए उपयोग किया जाता है | कुछ उर्ध्वापतित होने वाले पदार्थ जैसे अमोनिया क्लोराइड, कपूर, नेफ्थालिन और एन्थ्रासीन इसके उदहारण है |
अनुप्रयोग :
(i) अमोनियम क्लोराइड और नमक के मिश्रण को अलग करने में |
(ii) कपूर और लोहे के बुरादे को अलग करने में |
5. क्रोमाटोग्राफी विधि : इस विधि का प्रयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक करने में किया जाता है जो एक ही प्रकार के विलायक में घुले रहते है | मिश्रण से घटकों के पृथक करने की उस विधि को क्रोमाटोग्राफी कहते है |
अनुप्रयोग :
(i) डाई में रंगों को अलग करने में |
(ii) प्राकृतिक रंगों से पिगमेंट को पृथक करने में |
(iii) रक्त से नशीले पदार्थों को अलग करने में |
6. प्रभाजी आसवन विधि :
आसवन विधि का उपयोग वैसे मिश्रण को पृथक करने में किया जाता है जो विघटित हुए बिना उबलते हैं तथा जिनके घटकों के क्वथनांकों के मध्य अधिक अन्तराल होता है |
दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों जिनके क्वथनांक का अंतर 25 K से कम होता है, के मिश्रण को अलग करने में इस विधि का प्रयोग किया जाता है |
प्रभाजी स्तंभ : प्रभाजी जी स्तंभ एक नली होती है जो कि शीशे के गुटकों से भरी होती है | ये गुटके वाष्प को ठंडा और संघनित होने के लिए सतह प्रदान करते हैं |
वायु के घटकों का पृथक्करण : जब हमें वायु से ऑक्सीजन गैस को प्राप्त करना चाहते हैं तो हमें वायु में उपस्थित दूसरी गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड एवं नाइट्रोजन को पृथक करना होता है | द्रव वायु प्राप्त करने के लिए पहले वायु पर दबाव बढाया जाता है और फिर ताप को घटाकर उसे ठंडा कर संपीडित किया जाता है और इस द्रवित गैस को प्रभाजी आसवन स्तंभ में धीरे=धीरे गर्म किया जाता है, जहाँ सभी गैसे विभिन्न ऊँचाइयों पर अपने क्वथनांक के अनुसार पृथक हो जाती है |
- इस विधि में जब वायु को ठंडा किया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड जो वायु का एक प्रमुख घटक है शुष्क बर्फ़ के रूप में निर्गत होता है |
अनुप्रयोग :
(i) वायु से विभिन्न गैसों का पृथक्करण |
(ii) पेट्रोलियम उत्पादों को उनके विभिन्न घटकों का पृथक्करण |
7. क्रिस्टलीकरण विधि : क्रिस्टलीकरण वह विधि है जिसके द्वारा क्रिस्टल के रूप में शुद्ध ठोस को विलयन से पृथक किया जाता है |
इस विधि का प्रयोग ठोस पदर्थों को शुद्ध करने में किया जाता है | उदहारण : समुद्री जल से प्राप्त नमक की अशुद्धियों को अलग करने में |
अनुप्रयोग :
(i) समुद्री जल से प्राप्त नमक को शुद्ध करने में |
(ii) अशुद्ध नमूने से फिटकिरी को पृथक करने में |
- क्रिस्टलीकरण विधि साधारण वाष्पीकरण विधि से उत्तम होती है | जिसके निम्न कारण हैं |
(1) कुछ ठोस विघटित हो जाते हैं या कुछ चीनी के सामान गर्म करने पर झुलस जाते हैं |
(2) छानने के पश्चात् भी अशुद्ध विलेय पदार्थ को विलायक में घोलने पर विलयन में कुछ अशुद्धियाँ रह सकती हैं | वाष्पीकरण होने पर ये अशुद्धियाँ ठोस को दूषित कर सकती हैं |
भौतिक गुण :
ऐसे गुण जिनका हम अवलोकन एवं वर्णन कर सकते हैं, भौतिक गुण कहलाते है |
जैसे - रंग, कठोरता, दृढ़ता, बहाव, घनत्व, द्रवनांक तथा क्वथनांक आदि |
भौतिक परिवर्तन और रासायनिक परिवर्तन में अंतर:

भौतिक परिवर्तनों का उदाहरण :
पेड़ों को काटना, बर्फ़ का पिघलना, जल का साधारण नमक में घुलना, फलों से सलाद बनाना आदि |
रासायनिक परिवर्तनों का उदाहरण :
भोजन का पचना, भोजन का पकना, लोहे पर जंग लगना, सब्जियां काटने से चाकू का रंग बदलना लकड़ी एवं कागज का जलना आदि |
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