Chapter-द्रव्य का परमाण्विक आधार Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
द्रव्य का परमाण्विक आधार
परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
पिछले अध्याय ‘एक यात्रा – परमाणु के भीतर’ में हमने परमाणु की संरचना, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा संयोजकता के बारे में अध्ययन किया था। हमने यह भी जाना कि परमाणु अपनी बाह्यतम कोश को स्थिर बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनों का त्याग, ग्रहण अथवा साझाकरण करते हैं। इन्हीं प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप विभिन्न तत्व परस्पर संयोजित होकर नए पदार्थों अर्थात् यौगिकों का निर्माण करते हैं। इस अध्याय में हम समझेंगे कि तत्व किस नियम के अनुसार निश्चित अनुपात में संयोजित होते हैं तथा रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान द्रव्यमान क्यों संरक्षित रहता है।
परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
अध्याय का परिचय
प्रकृति में पाए जाने वाले अधिकांश पदार्थ एक से अधिक तत्वों के रासायनिक संयोजन से बने होते हैं। जब दो या दो से अधिक तत्व मिलकर नया पदार्थ बनाते हैं, तब उस नए पदार्थ के गुण मूल तत्वों से पूर्णतः भिन्न हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन एक ज्वलनशील गैस है तथा ऑक्सीजन दहन में सहायक गैस है, जबकि इन दोनों के संयोजन से बनने वाला जल न तो स्वयं जलता है और न ही दहन में सहायता करता है, बल्कि आग बुझाने का कार्य करता है। इससे स्पष्ट होता है कि रासायनिक संयोजन के बाद पदार्थों के गुणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकता है।
परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
परमाणु निश्चित नियमों के अनुसार परस्पर संयोजित होकर यौगिकों का निर्माण करते हैं। प्रत्येक यौगिक का अपना निश्चित संघटन तथा विशिष्ट गुण होता है। जल, कार्बन डाइऑक्साइड, सोडियम क्लोराइड तथा अमोनिया जैसे पदार्थ इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन यौगिकों के गुण उनके अवयव तत्वों से भिन्न होते हैं, क्योंकि परमाणु एक निश्चित अनुपात में जुड़कर नई रासायनिक संरचना बनाते हैं।
भौतिक परिवर्तन (Physical Change)
भौतिक परिवर्तन वह परिवर्तन है जिसमें किसी पदार्थ के आकार, अवस्था, रूप अथवा भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है, परंतु उसकी रासायनिक संरचना नहीं बदलती। ऐसे परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता तथा मूल पदार्थ को सामान्यतः पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
पुस्तक में दिए गए क्रियाकलाप 9.1 में जल में साधारण नमक घोलकर यह दर्शाया गया है कि नमक का विलयन बनने पर भी कुल द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता। इससे स्पष्ट होता है कि भौतिक परिवर्तन के दौरान द्रव्यमान व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तित रहता है।
भौतिक परिवर्तन की प्रमुख विशेषताएँ
- कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
- पदार्थ की रासायनिक संरचना अपरिवर्तित रहती है।
- परिवर्तन सामान्यतः प्रतिवर्ती (Reversible) होता है।
- कुल द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता।
रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)
रासायनिक परिवर्तन वह परिवर्तन है जिसमें एक या अधिक पदार्थ परस्पर अभिक्रिया करके नए पदार्थों का निर्माण करते हैं। इस परिवर्तन के बाद बने पदार्थों के गुण मूल पदार्थों से भिन्न होते हैं। रासायनिक परिवर्तन सामान्यतः स्थायी होता है तथा मूल पदार्थों को पुनः प्राप्त करना सरल नहीं होता।
अध्याय में सिरका तथा बेकिंग सोडा की अभिक्रिया का उदाहरण दिया गया है। इस अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है तथा नए पदार्थ बनते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि रासायनिक परिवर्तन के दौरान पदार्थों की प्रकृति बदल जाती है।
रासायनिक परिवर्तन की प्रमुख विशेषताएँ
- नए पदार्थों का निर्माण होता है।
- रासायनिक संरचना बदल जाती है।
- नए पदार्थों के गुण मूल पदार्थों से भिन्न होते हैं।
- गैस का उत्सर्जन, अवक्षेप का निर्माण अथवा रंग एवं ताप में परिवर्तन देखा जा सकता है।
भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में द्रव्यमान
अध्याय की प्रारम्भिक गतिविधियाँ यह जाँचने के लिए कराई गई हैं कि क्या परिवर्तन के दौरान द्रव्यमान बदलता है। भौतिक परिवर्तन में नमक और जल का कुल द्रव्यमान विलयन बनने के बाद भी समान रहता है। इसी प्रकार रासायनिक परिवर्तन में भी यदि सभी अभिकारक एवं उत्पाद बंद निकाय में सुरक्षित रहें, तो कुल द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है। यही अवलोकन आगे चलकर द्रव्यमान संरक्षण के नियम का आधार बनता है।
रासायनिक संयोजन के नियम की आवश्यकता
वैज्ञानिकों ने यह पाया कि तत्व किसी भी अनुपात में संयोजित होकर यौगिक नहीं बनाते। प्रत्येक यौगिक का संघटन निश्चित होता है तथा रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान कुल द्रव्यमान भी संरक्षित रहता है। इन प्रायोगिक तथ्यों के आधार पर रासायनिक संयोजन के नियम प्रतिपादित किए गए, जिनका अध्ययन अगले भाग में किया जाएगा।
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यदि एक गिलास जल में चीनी घोल दी जाए, तो चीनी दिखाई नहीं देती, परंतु उसका द्रव्यमान समाप्त नहीं होता। इसी प्रकार जब दो पदार्थ रासायनिक अभिक्रिया करते हैं, तब भी उनका कुल द्रव्यमान नष्ट नहीं होता, बल्कि नए पदार्थों के रूप में सुरक्षित रहता है। यही विचार आगे द्रव्यमान संरक्षण के नियम को समझने की आधारशिला बनता है।
Exam Booster
- भौतिक परिवर्तन में नया पदार्थ नहीं बनता।
- रासायनिक परिवर्तन में नए पदार्थों का निर्माण होता है।
- जल के गुण हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन दोनों से भिन्न होते हैं।
- भौतिक तथा रासायनिक दोनों प्रकार के परिवर्तनों में कुल द्रव्यमान का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
- इन्हीं अवलोकनों के आधार पर रासायनिक संयोजन के नियम प्रतिपादित किए गए।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
2. परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
9. आण्विक द्रव्यमान और सूत्र इकाई द्रव्यमान
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