Chapter-कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
शून्य, धनात्मक एवं ऋणात्मक कार्य
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
पिछले भाग में आपने कार्य (Work), उसके SI मात्रक तथा नियत बल द्वारा किए गए कार्य का अध्ययन किया। अब हम समझेंगे कि कार्य कब शून्य, धनात्मक अथवा ऋणात्मक होता है। साथ ही बल-विस्थापन ग्राफ (Force–Displacement Graph) की सहायता से कार्य ज्ञात करना भी सीखेंगे। ये अवधारणाएँ कार्य-ऊर्जा प्रमेय को समझने का आधार बनाती हैं।
शून्य, धनात्मक एवं ऋणात्मक कार्य
बल-विस्थापन ग्राफ (Force–Displacement Graph)
यदि किसी वस्तु पर नियत बल लगाया जाए, तो बल-विस्थापन (Force–Displacement) ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल उस वस्तु पर किए गए कार्य के बराबर होता है। यदि बल नियत न हो, तब भी प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल कार्य का मान बताता है।
- ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = किया गया कार्य
- नियत बल के लिए क्षेत्रफल आयत के बराबर होता है।
- परिवर्ती बल के लिए भी क्षेत्रफल द्वारा कार्य ज्ञात किया जा सकता है।
कार्य शून्य कब होता है?
कार्य शून्य (Zero Work) दो स्थितियों में होता है। पहली, जब वस्तु पर कोई बल न लगाया जाए। दूसरी, जब बल लगाने के बाद भी वस्तु का विस्थापन न हो। उदाहरण के लिए, किसी मजबूत दीवार को पूरी शक्ति से धक्का देने पर भी यदि दीवार नहीं हिलती, तो वैज्ञानिक दृष्टि से उस पर किया गया कार्य शून्य माना जाता है।
| स्थिति | कार्य |
|---|---|
| बल = 0 | कार्य = 0 |
| विस्थापन = 0 | कार्य = 0 |
धनात्मक कार्य (Positive Work)
जब लगाया गया बल तथा वस्तु का विस्थापन एक ही दिशा में होते हैं, तब किया गया कार्य धनात्मक (Positive Work) कहलाता है। उदाहरण के लिए, किसी पहिएदार कुर्सी को आगे की ओर धक्का देने पर लगाया गया बल तथा कुर्सी का विस्थापन दोनों एक ही दिशा में होते हैं, इसलिए कार्य धनात्मक होता है।
- बल एवं विस्थापन एक ही दिशा में होते हैं।
- कार्य का मान धनात्मक होता है।
- वस्तु को ऊर्जा प्राप्त होती है।
ऋणात्मक कार्य (Negative Work)
जब लगाया गया बल वस्तु के विस्थापन की दिशा के विपरीत होता है, तब किया गया कार्य ऋणात्मक (Negative Work) कहलाता है। जैसे, गोलरक्षक (Goalkeeper) फुटबॉल को रोकते समय उसकी गति के विपरीत दिशा में बल लगाता है। इस स्थिति में फुटबॉल पर किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
- बल एवं विस्थापन विपरीत दिशाओं में होते हैं।
- कार्य का मान ऋणात्मक होता है।
- वस्तु की ऊर्जा कम होती है।
धनात्मक, ऋणात्मक एवं शून्य कार्य में अंतर
| धनात्मक कार्य | ऋणात्मक कार्य | शून्य कार्य |
|---|---|---|
| बल एवं विस्थापन समान दिशा में | बल एवं विस्थापन विपरीत दिशा में | बल या विस्थापन शून्य |
| ऊर्जा बढ़ती है। | ऊर्जा घटती है। | ऊर्जा में परिवर्तन नहीं होता। |
| उदाहरण: कुर्सी को धक्का देना | उदाहरण: फुटबॉल को रोकना | उदाहरण: दीवार को धक्का देना |
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मान लीजिए आप किसी ट्रॉली को आगे की ओर धक्का देते हैं। यदि ट्रॉली आगे बढ़ती है, तो आपके द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा। यदि कोई व्यक्ति उसी ट्रॉली को पीछे की ओर रोकने का प्रयास करता है, तो उसका कार्य ऋणात्मक होगा। लेकिन यदि ट्रॉली बिल्कुल नहीं हिलती, तो वैज्ञानिक दृष्टि से कार्य शून्य माना जाएगा।
Exam Booster
- बल-विस्थापन ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल कार्य के बराबर होता है।
- बल या विस्थापन शून्य होने पर कार्य शून्य होता है।
- बल एवं विस्थापन एक ही दिशा में होने पर कार्य धनात्मक होता है।
- बल एवं विस्थापन विपरीत दिशा में होने पर कार्य ऋणात्मक होता है।
- दीवार को धक्का देना, पहिएदार कुर्सी को धक्का देना तथा फुटबॉल को रोकना CBSE के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
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1. Chapter Review and Key Points
3. शून्य, धनात्मक एवं ऋणात्मक कार्य
4. कार्य-ऊर्जा प्रमेय एवं ऊर्जा के रूप
5. यांत्रिक ऊर्जा एवं गतिज ऊर्जा
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