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Chapter-Chapter 7. निर्देशन Business Study class 12 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 12 Business Study Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 7. निर्देशन Business Study class 12 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 05 March 2026

Chapter 7. निर्देशन

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संदेश्वाहन : अवधारणा 

संदेशवहन का अग्रेज़ी रूपांतरण कम्युनिकेशन हैं जो की कॉमन से बना है जिसका अर्थ दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच में समान रूप के विचारों का संवहन से हैं | अर्थात जिस अर्थ में सन्देश दिया जा रहा हैं उसी अर्थ में सन्देश को समझाना |

संदेशवाहन की विशेषताएं 

(i) कोई भी सन्देशवाहन एक व्यक्ति द्वारा संपन्न नहीं होता हैं | इसके लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों की आवश्यकता होती हैं | एक सन्देश प्राप्तकर्ता की और सन्देश  भेजने वाले व्यक्ति की |

(ii) संदेश्वाहन में एक व्यक्ति से दूसरें व्यक्ति को सन्देश, विचार व भावनाओं का विनिमय होता हैं |

(iii) संदेशवाहन से लोगों में आपसी समझा बनी रहती हैं | क्योंकि व्यक्ति इसके द्वारा अपने विचार दूसरों तक पंहुचा सकता हैं |

(iv) संदेश्वाहन की प्रक्रिया लगातार चलती रहती हैं | क्योंकि व्यवसाय में सन्देश प्रबंधक से कर्मचारियों को और कर्मचारियों की समस्या प्रबंधक को संवाहित होता हैं |

(v) सन्देश का प्रवाह या तो शब्दों में, या फिर संकेतों में किया जाता हैं |

संदेशवहन की प्रक्रिया 

(1) प्रेषक/ सन्देश भेजने वाला प्रेषक वह व्यक्ति है जो अपने विचारों को दूसरों को संवाहित करता हैं | जैसे:-  प्रबंधक कर्मचारियों को नई योजनाओं को के बारे में सूचना का संवाहन करता हैं |

(2) सन्देश यह वह विषय वस्तु हैं जो प्रेषक किसी अन्य व्यक्ति को संवाहित करना चाहता हैं | जैसे :- भावनाएं, विचार, दृष्टिकोण,और आदेश आदि |

(3) संदेशबद्धता : इसके अंतर्गत प्रेषित सन्देश को सन्देश चिन्हों में बदला जाता हैं | जैसे :- इशारों, शब्दों, चित्रों व ग्राफ आदि में |

(4) माध्यम/संचारण : कोई भी सन्देश बिना माध्यम के संवाहित नहीं किया जा सकता हैं | सन्देश कई माध्यमों के द्वारा संवाहित किया जा सकता हैं | जैसे :- पत्र लिखकर, टेलीविजन के द्वारा, i-मेल, संकेतों द्वारा और वार्तालाप द्वारा |

(5) प्राप्तकर्ता जो सन्देश प्राप्त करता हैं |

(6) संदेशवाचक : इसके अंतर्गत सन्देश को संक्षेप में किया जाता हैं | जो कि सन्देश प्राप्तकर्ता द्वारा समझा जा सकें |

(7) वापस जानकारी अथवा प्रतिपुष्टि : यह सन्देश प्रक्रिया की सबसे अन्तिम क्रिया हैं | जिसमें सन्देश प्राप्तकर्ता से प्रतिपुष्टि पाई जाती हैं जो यह निर्धारित करती हैं कि सन्देश, सन्देश प्राप्तकर्ता को उसी रूप में मिल गया हैं जिस रूप में प्रेषक भेजना चाहता था |

संदेश्वाहन के प्रकार 

(i) औपचारिक संदेशवाहन

(ii) अनौपचारिक संदेश्वाहन 

(1) औपचारिक संदेश्वाहन  : औपचारिक संदेश्वाहन से अभिप्राय सन्देश प्रवाह की उस व्यवस्था से हैं जिसमें सन्देश का प्रवाह सोपनिक श्रंखला में या प्रबंध द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार किया जाता हैं |

विशेषताएं 

(i) लिखित व मौखिक औपचारिक सन्देशवाहन लिखित या मौखिक में किया जाता हैं |

(ii) औपचारिक सम्बन्ध : औपचारिक सन्देश का प्रवाह प्रबंध के द्वारा स्थापित औपचारिक सम्बन्ध में ही किया जाता हैं |

(iii) निश्चित पथ : औपचारिक सन्देश का प्रवाह एक निश्चित पथ में किया जाता हैं; जैसे:- प्रबंधक द्वारा कर्मचारियों को योजन की जानकारी देना |

(iv) संगठनात्मक सन्देश : इसके अंतर्गत केवल   संगठनात्मक संदेशों का ही प्रवाह  जा सकता   हैं |कोई भी कर्मचारी किसी  भी तरह का सन्देश को प्रषित नहीं कर सकता हैं |

औपचारिक संदेशवाहन के लाभ 

(i) औपचारिक संदेशवाहन की प्रक्रिया में अधिकारीयों के पद की गरिमा की सुरक्षा होती हैं | क्योंकि औपचारिक संदेशवहन प्रक्रिया में सन्देश का प्रवाह अधिकारीयों व अधीनस्थों के बीच एक व्यवस्थित क्रम में होता हैं |

(ii) औपचारिक संदेशाप्रवाह में सन्देश स्पष्ट व प्रभावपूर्ण होते हैं |

(iii) अधिकारीयों से अधीनस्थ के बीच सूचनाओं का व्यवस्थित प्रवाह |

औपचारिक संदेशवहन की सीमाएं 

(i) औपचारिक संदेशवहन में कई सूचनाओं जैसे:- सन्देश, योजनायें आदि का प्रवाह एक निश्चित क्रम में करना होता हैं जिससें कर्मचारियों व अधिकारीयों पर कार्य का अधिक बोझ रहता हैं |

(ii) औपचारिक संदेशवाहन में सूचनाओं का स्वरूप भी बदलने की संभावना होती हैं क्योंकि इसमें सन्देश भेजने का मार्ग अधिक लम्बा होता हैं |

(iii) औपचारिक संदेशवाहन में कर्मचारियों के सुझावों को अनदेखा किया जाता हैं |

औपचारिक संदेशवाहन के प्रकार

(i) लम्बवत संदेशवाहन

 (a) नीचे की और अथवा अधिमुखी संदेशवाहन : इसमें आदेश, नियम, सूचनाओं, नीतियों व निर्देश का संवाहन किया जाता हैं | अधिकारीयों से अधीनस्थों की ओर |

 (b) ऊपर की ओर अथवा उध्र्वमुखी संदेशवाहन : इसमें प्रतिक्रियाएं, प्रतिवेदन, शिकायतें आदि का प्रवाह | अधीनस्थों से अधिकारीयों की ओर |

(ii) समतल संदेशवाहन : जो की एक ही स्तर के दो व्यक्तियों में होता हैं |

औपचारिक संदेशवाहन जाल

(i) श्रंखला संदेशवाहन : इसमें सन्देश का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर होती हैं |

(ii) चक्रीय संदेशवाहन : इसमें एक केंद्र से सन्देश का प्रवाह सभी को किया जाता हैं |

(iii) घूमता हुआ संदेशवाहन इसमें एक समूह में एक व्यक्ति अपने से निकट के व्यक्तियों को सन्देश का प्रवाह करता हैं |

(iv) मुक्त प्रवाह संदेशवाहन इस सन्देश जाल में एक समूह के विभिन्न सदस्य एक-दूसरें से सन्देश का प्रवाह किया जा सकता हैं |

(v) अधोमुखी 'वी' संदेशवाहन : इस सन्देश प्रवाह में एक अधीनस्थ को अपने बॉस के बॉस से प्रत्यक्ष बात करने की अनुमति होती है |  

(2) अनौपचारिक संदेशवाहन यह सन्देश व्यवस्था किसी अधिकारी द्वारा नहीं अपितु किसी संस्था के सदस्यों में आपसी मित्रता, विवेक, सुझाव आदि के कारण स्थापित होती हैं |

अनौपचारिक संदेशवाहन की विशेषताएं

(i) यह व्यवस्था किसी संस्था में उसके सदस्यों के बीच सामाजिक संबंधों के कारण स्थापित होती हैं | जैसे :- मित्रता, सहयोग, सहेजभाव के कारण |

(ii) अनौपचारिक संदेशवाहन में कार्य व व्यक्ति दोनों से संबंधित सन्देश का प्रवाह होता हैं |

(iii) इसमें अपवाह व गलतफहमियों की संभावना होती हैं | क्योंकि इसके अंतर्गत व्यक्तियों का दायित्व का निर्धारण नहीं किया जा सकता हैं |

(iv) इसमें सुचना शीघ्र प्रवाहित होती हैं |

अनौपचारिक संदेशवाहन के लाभ

(i) सन्देश का शीघ्र प्रवाह तथ प्रभावपूर्ण सन्देशवाहन |

(ii) इसकें अंतर्गत सभी को अपनी बात कहने की लिए खुला वातावरण उपलब्ध होता हैं |

(iii) अनौपचारिक संदेशवाहन से सभी अधिकारीयों व अधीनस्थों में अच्छे सम्बन्ध बने रहते हैं |

(iv) इसके अंतर्गत समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाता हैं क्योंकि सन्देश का प्रवाह जितनी शीघ्रता से होगा उतनी ही शीघ्रता से निर्णय भी लिये जाएगे |

(v) कर्मचारियों की सामाजिक आवश्यकता की पूर्ति करता हैं क्योंकि अनौपचारिक संदेशवाहन में कर्मचारी अधिकरियों से विचार-विमर्श कर पाते हैं |

अनौपचारिक संदेशवाहन की सीमाएं

(i) क्योंकि अनौपचारिक संदेशवाहन में सन्देश का प्रवाह एक निश्चित क्रम में नहीं होता हैं इसलिए सन्देश वव्यवस्थित क्रम में उपलब्ध नहीं होता हैं |

(ii) इसकें अंतर्गत दायित्व का निर्धारण नहीं करना कठिन होता हैं |

(ii) अनौपचारिक संदेशवाहन में सन्देश कम विश्वनीय होते हैं |

अन्गूरीलता जाल

इससें अभिप्राय उन प्रकारों से है जिसकें द्वारा अनौपचारिक संदेशवाहन का कार्य किया जाता हैं |

अन्गूरीलता के प्रारूप

(i) एकल रीति : इसमें एक व्यक्ति अपने किसी विश्वनीय जानकार को सन्देश का प्रवाह करता हैं और इसी प्रकार सन्देश देने की क्रिया की जाती हैं |

(ii) गपशप श्रंखला :  इसकें अंतर्गत सदस्य एक-दूसरें से गपशप करते हुए बातें करते हैं |

(iii)प्रायिकता इसमें एक व्यक्ति अपने विचारों को दूसरों को संवाह करने की लिए तटस्थ रहता हैं | अर्थात वह अपने विचारों को उसकें पास स्थिति किसी भी व्यक्ति को दे सकता हैं |

(iv) गुच्छा/भीड़-भाड़ : इसकें अंतर्गत एक व्यक्ति अपने अनुसार किसी भी चनयित व्यक्ति को अपने संदेशों का प्रवाह करता हैं | 

संदेशवाहन के माध्यम 

(i) मौखिक, (ii) लिखित, (iii) सांकेतिक |

 प्रभावी संदेशवाहन की बाधाएँ

(1) भाषा सम्बंधित बाधाएँ संदेशवाहन में सन्देश भेजते समय जब सन्देश के चित्रों, चिन्हों व शब्दों का गलत अर्थ, व्याख्य, अनुमान व विपरीत अर्थ से समझ जाता है तो वह भाषा सम्बंधित बांधाएं कहलाती हैं |

भाषा सम्बंधित बाधाएं निम्नलिखित है;

(i) संदेशों की गलत व्याख्या : भाषा के अस्पष्ट होने पर सन्देश सम्बंधित बाधाएं आती हैं | जैसे:- शब्दों का गलत चुनाव, अभ्रद शब्द, वाक्यों का गलत क्रम आदि |

(ii) भिन्न अर्थों वाले चिन्ह अथवा शब्द : कई बार एक ही शब्द के कई अर्थ होते हैं जिससें सनेश प्राप्तकर्ता को सन्देश को समझने में कठिनाई होती हैं | जैसे :- मूल्य शब्द ; जिसके कई अर्थ है (a) आज कंप्यूटर शिक्षा का अधिक मूल्य हैं (महत्व), (b) मोबाईल का क्या मूल्य हैं (कीमत)

(iii) त्रुटिपूर्ण अनुवाद : जब अधिकारिओं द्वारा भेजे गए सन्देश का अधीनस्थों द्वारा गलत अनुवाद में समझा जाता हैं तो वह त्रुटिपूर्ण अनुवाद सम्बंधित बाधाएं कहलाती हैं |

(iv) अस्पष्ट मान्यातएं : कई बार सन्देश भेजने वाला यह मान कर चलता हैं कि सन्देश प्राप्तकर्ता को आधारभूत बातें पता ही होगी जिसके कारण वह कुछ जानकारियाँ प्राप्तकर्ता को संवाद ही नहीं करता हैं | जिससें सन्देश में बाधाएं उत्पन्न होती हैं |

(v) अर्थहीन तकनीकी भाषा: कई बार सन्देश में तकनीकी भाषाओँ का उपयोग करने से भी संदेशावाहन में बाधाएं आती हैं क्योंकि कई व्यक्तियों को इसका ज्ञान नहीं होता हैं |

 

(2) मनोवैज्ञानिक बाधाएं : किसी भी संदेशवाहन की प्रक्रिया में दोनों पक्ष के पक्षकारों की मानसिक स्थिति भी सन्देश में बाधा ला सकती हैं इसलिए संदेशवाहन कि प्रक्रिया में दोनों पक्षकारों की मानसिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए |

(i) समय से पूर्व मूल्यांकन : कई बार सन्देश प्राप्तकर्ता सूचना के पूरा हुए बगैर ही उस सन्देश का अर्थ निकालने लगता हैं | जिसके कारण सूचना भेजने वाले के उत्साह में भी कमी आती हैं और सन्देश का भी गलत प्रवाह होता है |

(ii) ध्यान की कमी : संदेशवाहन की प्रक्रिया में कभी-कभार सन्देश प्राप्तकर्ता संदेश भेजने वाले की बातों पर ध्यान नहीं देता है | वह कुछ ओर ही सोच-विचार में लगा रहता हैं | जिससें संदेशवाहन में मनोवैज्ञानिक बाधाएं उत्पन्न होती हैं |

(iii) अविश्वास : कई बार देखा जाता हैं कि प्रेषक व प्राप्तकर्ता में विश्वास की कमी होती है जिसकें कारण भी वह एक-दूसरें की बातों को महत्व नहीं देते हैं |

(3) संगठनात्मक बाधाएं : यह बाधाएं संगठन के ढांचे से सम्बंधित हैं | जैसे;

(i) संगठनात्मक नीतियाँ : संगठनात्मक नीतियों के द्वारा भी सन्देश में बाधाएं उत्पन्न होती हैं | जैसे :- किसी संगठन की यह नीति है कि संगठन में सभी सन्देश लिखित रूप में प्रवाह किये जाएगे, इससें संगठन में सन्देश का प्रवाह भी धीमी गति से होगा और प्रत्येक सूचना देने के लिए सन्देश का लिखित रूप का ही उपयोग करना पड़ेगा |

(ii) नियम व अधिनियम : संदेशवाहन की विषय सामग्री व माध्यम को निश्चित करके भी संगठन सन्देश में बाधा उत्पन्न करता हैं | जैसे:- संगठन के नियम अनुसार किसी भी सन्देश को भेजने के लिए कंप्यूटर का ही उपयोग करना होगा | इससें छोटे-से छोटे सन्देश को भेजने के लिए कंप्यूटर का ही उपयोग करना पड़ेगा |

(iii) संगठनात्मक ढांचे में जटिलता किसी संगठन के संदेशवाहन की कुशलता उसके संगठनात्मक ढांचे पर भी निर्भर करती हैं | यदि किसी संगठन में अधिक प्रबंधकीय स्तर होगे तो सन्देश पहुँचाने में भी अधिक समय लगेगा और सूचना के प्राप्तकर्ता तक पहुँचाने तक उसका अर्थ भी बदल जाने की संभावना रहेगी |

(iv) संगठनात्मक सुविधाएँ : कई बार संगठन में पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध न होने के कारण भी संदेशवाहन में समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं | जैसे :- कर्मचारियों के लिए किसी भी शिकायत बाक्स का न होना, कर्मचारियों व अधिकारीयों के सन्देश में असमंजस की स्थिति ला सकता हैं |

(4) व्यक्तिगत बाधाएं : जब संदेशवाहन में बाधाएँ किसी पक्ष के पक्षकार द्वारा उसके किसी व्यक्तिगत कारण की वजह से होती है तो उन बाधाओं को व्यक्तिगत बाधाएं कहलाती हैं | इसके उदहारण ;

(i) अधिकारीयों को चुनौतियों का भय : संगठन में प्रत्येक व्यक्ति ऊंचे पद पर बने रहने के लिए अपनी कमजोरियों को छिपता रहना हैं और अपने विचारों को खुल कर दूसरों के सामने नहीं रखता हैं | जिसके कारण भी सन्देश में बाधा होती हैं |

(ii) अधीनस्थों में विश्वास की कमी : संगठन में उच्च अधिकारीयों की यह मान्यता रहती है कि अधीनस्थों में कम योग्यता होती है जिसकें कारण वे कई बार सूचनाओं का प्रवाह अधीनस्थों को करते ही नहीं हैं फलस्वरूप कर्मचारियों के उत्साह में भी कमी आती हैं |

(iii) विचारा विनिमय कि अनिच्छा : कई बार कर्मचारियों द्वारा ही सन्देश का प्रवाह अधिकारीयों को नहीं किया जाता हैं इसके कई कारण होते हैं जैसे :- कर्मचारियों में कम आत्मविश्वास, सूचना की स्पष्टता की जानकारी न होना आदि |

(iv) उपयुक्त प्रोत्साहन की कमी : संदेशवाहन में अधीनस्थों की भी अहम् भूमिका होती हैं परन्तु यदि अधीनस्थों में प्रोत्साहन की कमी होती हैं तो वे किसी भी सन्देश को भेजने में हिचकिचाते हैं | जिससें संदेशवाहन की प्रक्रिया अप्रभावी हो होती हैं |

संदेशवाहन की बाधाएं को दूर करने के उपाय

(i) प्राप्तकर्ता की आवश्यकता के अनुसार संदेशवाहन : संदेशवाहन में बाधाओं को दूर करने के लिए सर्वप्रथम यह निश्चित करना चाहिए कि संदेशवाहन प्राप्तकर्ता के अनुसार हो | जैसे:- जो व्यक्ति तकनीकी शब्दों से अपरिचित है उससें संवाद करते समय तकनीकी शब्दों का उपयोग कम करें |

(ii) संदेशवाहन से पूर्व विचारों को स्पष्ट करना : संदेशवाहन में प्रेषक को अपने सन्देश भेजने का उद्येश्य मालूम होना चाहिए | ताकि सन्देश भेजने में कोई समस्या न हो |

(iii) सन्देश की भाषा, शब्द व विषय-वस्तु के प्रति सचेत रहना : सन्देश भेजने वाले को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे जिस भाषा व शब्द का उपयोग कर रहा हैं उससें सन्देश प्राप्तकर्ता को कोई ठेस न पहुंचे और वह अधिक तकनीकी शब्दों का उपयोग न करें |

(iv) वर्तमान तथा भविष्य के लिए संदेशवाहन : संदेशवाहन में सन्देश से सम्बंधित बाधाओं को दूर करने के लिए सन्देश में वर्तमान व भविष्य से सम्बंधित जानकारियों को भी दे देना चाहिए, ताकि संदेश में समानता बनी रहें |

(v) एक अच्छा श्रोता बनाना एक संदेशवाहन प्रक्रिया में प्रेषक व प्राप्तकर्ता को अच्छा श्रोता बना चाहिए, ताकि सन्देश की सभी आवश्यक जानकारियों को याद रखा जा सकें |       

      

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