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Chapter-Chapter 7. निर्देशन Business Study class 12 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 12 Business Study Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 7. निर्देशन Business Study class 12 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 05 March 2026

Chapter 7. निर्देशन

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अभिप्रेरणा - अभिप्रेरणा से अभिप्राय निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए लोगो को प्रेरित करने की प्रक्रिया से है |

अभिप्रेरणा की विशेषताएँ-

1. अभिप्रेरणा एक आंतरिक अनुभव है |

2. लक्ष्य निर्धारित व्यवहार |

3. सकारात्मक अथवा नकारात्मक |

4. जटिल प्रक्रिया |

5. सतत प्रक्रिया |

अभिप्रेरणा का महत्व -

1. अभिप्रेरणा कर्मचारियों के निष्पादन स्तर में सुधार के साथ-साथ संगठन के सफल निष्पादन में सहायक है |

2. अभिप्रेरणा कर्मचारियों के नकारात्मक दृष्टिकोण को सकारात्मक दृष्टिकोण में बदलने में सहायक है |

3. अभिप्रेरणा कर्मचारियों के संस्था को छोड़कर जाने की दर को कम करता है |

4. अभिप्रेरणा संगठन में कर्मचारियों की अनुपस्तिथि दर को कम करती है |

5. अभिप्रेरणा प्रबंधको को नए परिवर्तनों को लागू करने में सहायता देती है | 

मास्लो की विचारधारा - क्रम अभिप्रेरणा का सिद्धांत 

1. शारीरिक आवश्कताएँ - इस क्रम में वे आवश्यकताएं शामिल की गई है जिसको मनुष्य के जीवित रहने के लिए सबसे पहले पूरा किया जाता है | इसमे भोजन,मकान,वस्त्र, हवा,पानी,की अन्य आवश्कताए शामिल है |

2. सुरक्षा की आवश्यकताए - शारीरिक आव्शाक्तएं पूरी होने के बाद मनुष्य अपनी सुरक्षा चाहता है |  वह अपने आप को भौतिक तथा आर्थिक दोनों तरह से सुरक्षित रखना चाहता है | इसमे नौकरी, सुरक्षा, पेंशन योजनाएं इत्यादि शामिल है |

3. सामाजिक आवश्यकताएँ - भौतिक तथा आर्थिक दोनों तरह से सुरक्षित होने के बाद मनीषी का ध्यान सामाजिक आवश्यकताओं पर जाता है | इसमे लगाव, स्नेह, समाज से जुड़े होने का अहसास, मित्रता आदि शामिल है |

4. सम्मान की आवश्यकताएँ - कोई भी मनुष्य लोगो से, अपने वरिष्ठो से सम्मान की आशा रखता है | इस क्रम में आत्मसम्मान, पद, पहचान, व ध्यान शामिल है |

5. स्वयं संतुष्टि - स्वयं संतुष्टि का अर्थ अपने आप को उचाई तक ले जाने की चाह से है | जैसे एक लेखक लिखने का विशेषज्ञ बनना चाहता है |

मौद्रिक तथा गैर मौद्रिक प्रोत्साहन -

मौद्रिक प्रोत्साहन -

1. वेतन तथा भता - वेतन महंगाई भता आदि |

2. लाभ में भागीदारी - संस्था के लाभों में कर्मचारियों का हिस्सा |

3. बोनस - वेतन के अतिरिक्त |

4. उत्पादकता सम्बंधित परिप्रमित - कार्य के अनुसार पारिश्रमिक |

5. अनुलाभ - कार भता, घर |

6. सहभागीदारी या स्टॉक - बाजार से कम कीमत पर अंश |

7. सेवा निवृति लाभ - पेंशन आदि |

गैर मौद्रिक प्रोत्साहन -

1. पद प्रतिष्ठा - उच्च पद देना ताकि सामाजिक व मान - सम्मान आवश्यकता पूरी हो |

2. संगठनिक वातावरण - अच्छा कार्य वातावरण |

3. जीवनवृति विकास के सुअवसर - कौशल में वृद्धि |

4. पद संवर्धन - कार्य को और अधिक रुचिकर बनाना |

5. कर्मचारियों को मान - सम्मान देने सम्बंधित कार्यक्रम |

6. पद सुरक्षा - स्थायी नौकरी |

7. कर्मचारियों की भागीदारी - निर्णय लेने में भागीदारी |

नेतृत्व - नेतृत्व वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा लोगो को इस प्रकार प्रभावित किया जाता है की वे स्वंय ही अपनी इच्छा से संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते है |  

नेतृत्व की विशेषताएँ -

1. नेतृत्व किसी व्यक्ति की दूसरो को प्रभावित करने की योग्यता को दर्शाता है |

2. नेतृत्व, दूसरो के व्यवहार में परिवर्तन लाने का प्रयास करता है |

3. नेतृत्व नेता तथा अनुयायियों के मध्य उनके पारस्परिक समबंधो को दर्शाता है |

4. नेतृत्व संस्था के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किए जाते है |

5. नेतृत्व एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है |

नेतृत्व की शैलियाँ-

1. निरंकुशवादी नेतृत्व - इस शैली में प्रबंधक सारे अधिकार अपने पास रखता है | सारे आदेश वह देता है तथा इस बात पर जोर देता है की उसके आदेशो को बीना किसी सुझाव तथा विरोध के पालन किया जाए | वह बिना विचार - विमर्श कर नीतियाँ तैयार करता है |

2. जनतांत्रिक या सहभागी नेतृत्व - जनतांत्रिक शैली नेतृत्व की वह शैली है जिसमे प्रबंधक अंतिम निर्णय अधिनस्थो से विचार - विमर्श करने के बाद ही लेता है | यह नेतृत्व शैली विकेंद्रीकरण पर आधारित है | यह शैली कर्मचारियों को उनके कार्य के प्रति अभिप्रेरित करती है |

3. अहस्तक्षेप नेतृत्व - इस शैली में प्रबंधक अपने अधिनस्थो को पूरी स्वतंत्रता प्रदान करते है | इसमे प्रबंधक अपने अधिकारों का कम प्रयोग करता है तथा कार्यो में कम रूचि लेता है | अधीनस्थ अपनी इच्छा तथा क्षमता के अनुसार कार्य करते है |

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