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Chapter-Chapter 3. व्यावसायिक पर्यावरण Business Study class 12 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 12 Business Study Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 3. व्यावसायिक पर्यावरण Business Study class 12 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 05 March 2026

Chapter 3. व्यावसायिक पर्यावरण

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सरकारी नीति में परिवर्तन का व्यवसाय एवं उद्योग पर प्रभाव

(i) बढ़ाती प्रतियोगिता : सरकार के द्वारा लाई गई उदारीकरण की नीति से घरेलू बाज़ार में प्रतियोगिता का स्तर बढ़ गया | जिससे छोटे उद्योग धंधे या तो बंद हो गए या घाटे में चले गए |

(ii) अधिक आपेक्ष रखने वाले ग्राहक : प्रतियोगित के बढ़ाने से उपभोक्ताओं को कम मूल्य में अधिक गुणवत्ता वाली वस्तुएं उपलब्ध हो जाती है | जिसकें कारण लोगों की इच्छाएं भी बढ़ाती जा रही हैं और वे अधिक अच्छी वस्तुओं की माँग करते जा रहें हैं |

(iii) तकनीकी वातावरण में तीव्र बदलाव : व्यावसायिक वातावरण में प्रतियोगिता के बढ़ने के कारण विभिन्न व्यवसाय इसका सामना करने के लिए अपनी वस्तुओं में विभिन्न सुधार कराती है जिसके लिए वे नवीनतम तकनीकी का उपयोग करती हैं | जिससें प्रभावित होकर अन्य फर्में भी नई-नई तकनीकी का प्रयोग करने हैं और इसके द्वारा तकनीकी वातावरण में तीव्र बदलाव आते हैं |

(iv) परिवर्तन की आवश्यकता : नई आर्थिक नीतियों के द्वारा घरेलू बाज़ार में नई फर्में के प्रवेश से प्रतियोगिता का स्तर बढ़ गया | जिसका सामना करने के लिए अन्य फर्में को भी अपनी वस्तुओं में बदलाव करने की आवश्यकता पड़ी | क्योंकि अब बाज़ार में एक से एक अच्छी व सस्ती वस्तुएं उपभोक्ताओं को उपलब्ध होने लगी थी |

(v) बाज़ार प्रधान : 1991 के आर्थिक सुधार के पहले बाज़ार में दो दृष्टिकोण को अपनाया जाता था - उत्पादन प्रधान और बाज़ार प्रधान | उत्पादन प्रधान से अभिप्राय है पहले उत्पादन करना और फिर उसे बाज़ार में बेचना | जबकि बाज़ार प्रधान से अभिप्राय है पहले बाज़ार का संर्वेक्षण करना फिर उसके अनुसार वस्तुओं का उत्पादन करना | क्योंकि आज के समय में ग्राहक का महत्व बढ़ चुका हैं इस लिए आज दूसरें दृष्टिकोण को अधिक महत्व दिया जाता हैं |

(vi) विकसित मानव संसाधनों की आवश्यकता : निरंतर बदलते हुए तकनीकी वातावरण का सामना करने के लिए अधिक प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती हैं क्योंकि भविष्य की विभिन्न व्यावसायिक चुनौतिओं का सामना कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता हैं |

(vii) सार्वजनिक क्षेत्र की बजटीय सहायता में कमी : सरकार द्वारा अपनाई गई नई आर्थिक नीतियों के द्वारा सार्वजनिक क्षेत्रों को दी जाने वाली बजटीय सहायता में कमी की जाने लगी | जिससे सार्वजनिक क्षेत्र का महत्व कम होने लगा और निजी क्षेत्र का महत्व में वृद्धि हुईं |

 

 

 

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