2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति History class 9 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास
2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति अभ्यास – Complete NCERT Book Solutions for Class 9 History (Hindi Medium). Get all chapter explanations, extra questions, solved examples and additional practice questions for 2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति अभ्यास to help you master concepts and score higher.
2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति History class 9 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास
NCERT Solutions for Class 9 History play an important role in helping students understand the concepts of the chapter 2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति clearly. This chapter includes the topic अभ्यास, which is essential from both academic and examination point of view. The solutions provided here are prepared strictly according to the latest NCERT syllabus and follow the guidelines of CBSE to ensure accuracy and relevance. Each question is explained in a simple and student-friendly manner so that learners can grasp the concepts without confusion. These NCERT Solutions are useful for regular study, homework help, and exam preparation. All textbook questions are solved step by step to improve problem-solving skills and conceptual clarity. Students of Class 9 studying History can use these solutions to revise important topics, understand difficult questions, and practise effectively before examinations. The chapter 2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति is explained in a structured way, making it easier for students to connect the theory with the topic अभ्यास. By studying these updated NCERT Solutions for Class 9 History, students can build a strong foundation, boost their confidence, and score better marks in school and board exams.
2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति
अभ्यास
अध्याय 2. यूरोप में समाजवाद और रुसी क्रांति
प्रश्न 1. रूस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात 1905 से पहले कैसे थे?
उत्तर: 1905 से पहले रूस के समाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात निम्नलिखित थे:-
(अ) सामाजिक हालात :- (i) समाजिक स्तर पर मजदूर विभाजित थे |
(ii) बहुत से मजदूर स्थायी रूप से शहरों में बस गये थे|
(iii) उनमें योग्यता और दक्षता के स्तर पर भी काफी फर्क था |
(iv) औरतो को पुरुषों से कम वेतन मिलता था |
(ब) आर्थिक हालात :- (i) रूसी साम्राज्य की 85 प्रतिशत जनता आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर थी|
(ii) उद्योग - धंधे बहुत कम थे|
(iii) सेंट पीटसबर्ग और मास्को प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र थे|
(iv) मजदूरों की दशा शोचनीय थी | उनको 10-15 घंटे कम करना पड़ता था |
(v) कोयला और स्टील उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा था| ज्यादातर कारखाने उद्योगपतियों की निजी संपति थे|
(स) राजनीतिक हालात:- (i) जार निकोलस II का शासन था|
(ii) रूसी साम्राज्य में मास्को के आस-पास पड़ने वाले भूक्षेत्र के अलावा इसमें आज का फ़िनलैंड, लातविया, लिथुआनिया , एस्तोनिया तथा पौलैंड, यूक्रेन व बेलारूस के कुछ हिस्से शामिल थे|
(iii)यह साम्राज्य प्रशांत महासागर तक फैला हुआ था और आज के मध्य एशियाई राज्यों के साथ-साथ जार्जिया, आर्मेनिया व अज़रबैजान भी इसमें शामिल थे|
प्रश्न 2. 1917 से पहले रूस की कामकाजी आबादी यूरोप के बाकी देशों के मुकाबले किन-किन स्तरों पर भिन्न थी?
उत्तर: रूस की कामकाज करने वाली जनसँख्या यूरोप के अन्य देशो से 1917 ई. से पहले भिन्न थी| एसा इसलिए क्योंकि सभी रूसी कामगार कारखानों में काम करने के लिए गाँव से शहर नहीं आये थे| इनमें से ज्यादातर गाँवों में ही रहना पसंद करते थे और शहर में काम करने के निमित्त रोज गाव से आते और शाम को व३अपस लौट जाते थे| वे सामाजिक स्तर एवं दक्षता के अनुसार समूहों में बटे हुए थे और यह उनकी पोशाको से परिलक्षित होता था| धातुकर्मी अपने को मजदूरों में खुद को साहब मानते थे| क्योंकि उनके काम में ज्यादा प्रशिक्षण और निपुणता की जरुरत रहती थी तथापि कामकाजी जनसँख्या कार्य स्थितियों एवं नियोक्ताओ के अत्याचार के विरुद्ध हड़ताल के मोर्चे पर एकजुट थी|
अन्य यूरोपीय देशो के मुकाबले में रूस की कामगार जनसँख्या जैसे कि किसानो एवं कारखान मजदूरों की स्थिति बहुत भयावह थी| एसा जार निकोलस द्वितीय की निरंकुश सरकार के कारण था जिसकी भ्रष्ट एवं दमनकारी नीतियों से इन लोगो से उसकी दुश्मनी दिनों-दिन बढती जा रहीं थी | कारखाना मजदूरी की स्थिति भी इतनी ही ख़राब थी| वे अपनी शिकायतों को प्रकट करने के लिए कोई ट्रेड युनियन अथवा कोई राजनीतिक दल नहीं बना सकते थे| अधिकतर कारखाने उद्योगपतियों की निजी संपत्ति थी|
किसान ज़मीन पर सर्फ़ के रूप में काम करते थे और उनकी पैदावार का अधिकतम भाग ज़मीन के मालिकों एवं विशेषाधिकार प्राप्त वर्गो को चला जाता था| कुलीन वर्ग, सम्राट तथा रूढ़िवादी चर्च के पास बहुत अधिक संपत्ति थी| ब्रिटेन में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान किसान कुलीनों का सम्मान करते थे और उनके लिए लड़ते थे किंतु रूस में किसानो को दी गई ज़मीन लेना चाहते थे| उन्होंने लगान देने से मना कर दिया और जमींदारों को मार भी डाला| तत्कालीन रूस के किसान अपनी भूमि एकत्र कर अपने कम्यून (मीर) को सौप देते थे और किसानो को कम्यून उस कृषि भूमि को प्रत्येक परिवार की आवश्यकता के अनुसार बाँट देता था, जिससे उस कृषि भूमि पर सुगमता से कृषि की जा सके|
प्रश्न 3. 1917 में ज़ार का शासन क्यों खत्म हो गया?
उत्तर: 1917 में ज़ार का शासन खत्म होने के निम्नलिखित कारण थे:-
(i) 85% जनता कृषि पर निर्भर थी| किसानो की दशा खराब थी| बेरोजगार किसान धर्मार्थ लंगरों में खाना खाते थे और खस्तहाल मकानों में रहते थे|
(ii) मजदूरों की दशा भी ख़राब थी| उन्हें 10-15 घंटे तक की पाली में काम करना पड़ता था| उनके वेतन कम थे|
(iii) 'ख़ूनी रविवार' की घटना ने हड़तालों में वृद्धि की| असंतोष बढ़ता गया|
(iv) 1905 की क्रांति के पश्चात् कुछ समय तक ट्रेड यूनियनें अस्तित्व में रहीं परन्तु फिर उन्हें गैर- कानूनी घोषित कर दिया गया|
(v) प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1914 से 1917 तक 70 लाख रूसी लोग मारे गये| ३० लाख से ज्यादा लोग शरणार्थी बने| इसमें जार का शासन बदनाम हो गया| लोग भी युद्ध से तंग आ चुके थे|
प्रश्न 4. दो सूचियाँ बनाइए : एक सूची में फरवरी क्रांति की मुख्य घटनाओं और प्रभावों को लिखिए और दूसरी सूची में अक्तूबर क्रांति की प्रमुख घटनाओं और प्रभावों को दर्ज कीजिए।
उत्तर: (क) फ़रवरी क्रांति की मुख्य घटनाए:-
(i) 1917 की सर्दी का मौसम - पोत्रोग्राद में मजदूरों के इलाके में खाद्य पदार्थो की कमी-भीषण कोहरा उअर बर्फबारी|
(ii) 22 फ़रवरी - एक फैक्ट्री में तालाबंदी|
(iii) 23 फ़रवरी - पचास फक्ट्रियों में हड़ताल |
(iv) 24-25 फ़रवरी - घुड़सवार सैनिक और पुलिस की तैनाती|
(v) 25 फ़रवरी - डयूमा को बर्खास्त करना|
(vi) 26 फ़रवरी- प्रदर्शनकारियों का इकट्ठा होना|
प्रभाव :-
(i) अंतरिम सरकार का गठन|
(ii) भविष्य के बारे में फैसला लेने की ज़िम्मेदारी संविधान सभा को सौपना, आधार सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार|
(iii) जनसभा करने और संगठन बनाने में लगी पाबन्दी को हटाना|
(iv) अन्य स्थानों पर सोवियतों का निर्माण |
(v) बोल्शेविक पार्टी का नाम कम्युनिस्ट पार्टी रखना|
(vi) ट्रेड यूनिनों की संख्यां में वृद्धि|
(vii) असंतोष में वृद्धि, सरकार की दमन नीति|
(ख) अक्टूबर की मुख्य घटनाएँ:-
(i) अंतरिम सरकार और बोल्शेविकों के टकराव में वृद्धि|
(ii) 24 अक्टूबर को विद्रोह प्रारंभ होना|
(iii) दिसंबर तक मास्को- पेत्रोग्राद इलाके पर बोल्शेविकों का नियंत्रण|
प्रभाव:-
(i) नवंबर, 1917 - ज्यादातर उद्योगों और बैंकों का राष्ट्रीयकरण|
(ii) ज़मीन को सामाजिक संपत्ति घोषित करना तथा किसानो को सामंतो की जमीनों पर कब्ज़ा करने की छूट देना|
(iii) अभिजात्य वर्ग द्वारा पुरानी पदवियों के प्रयोग पर रोक लगाना|
(iv) नवंबर में सविधान सभा के चुनाव करवाना|
(v) गुप्तचर पुलिस और बोल्शेविकों की आलोचना करने वालों को दंड देना|
(vi) रूस का एक- दलीय राजनीतिक व्यवस्था वाला देश|
(vii) गैर-रूसी राष्ट्रीयताओं को सोवियत संघ (दिसंबर , 1922) में राजनीतिक स्वायत्ता प्रदान करना|
प्रश्न 5. बोल्शेविकों ने अक्तूबर क्रांति के फौरन बाद कौन-कौन-से प्रमुख परिवर्तन किए?
उत्तर: अक्तूबर क्रांति के बाद निम्नलिखित प्रमुख परिवर्तन किये गए:
(i) ज़मीन को सामाजिक संपत्ति घोषित किया गया|
(ii) किसानों को सामंतो की ज़मीनों पर कब्ज़ा करने के लिए खुली छूट दे दी गई|
(iii) अभिजात्य वर्ग की पुरानी पदवियों पर रोक लगा डी गई|
(iv) सेना और सरकारी अफसरों की वर्दियां बदल दी गई|
(v) ज़मीनों के पुनर्वितरण का आदेश जारी किया गया|
(vi) बोल्शेविक पार्टी का नाम बदलकर रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक) रखा गया|
(vii) मार्च 1918 में बोल्शेविकों ने जर्मनी से संधि कर ली|
(viii) अखिल रूसी सोवियत कांग्रेस को संसद का दर्ज़ा दिया गया और रूस एक दलीय प्रणाली वाला देश बन गया|
प्रश्न 6. निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में लिखिए :
- कुलक
- ड्यूमा
- 1900 से 1930 के बीच महिला कामगार
- उदारवादी
- स्तालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम
उत्तर: (क) कुलक:- रूस के संपन्न किसानों को कुलक कहा जाता था|
(ख) ड्यूमा:- यह एक निर्वाचित परामर्शदाता संसद थी जिसका निर्वाचन 1905 की क्रांति के दौरान किया गया था|
(ग) 1900 से 1930 के बीच महिला कामगार:- 1914 में फैक्ट्री मजदूरों में औरतो की संख्या 31 प्रतिशत थी| उन्हें पुरूषों की तुलना में कम वेतन मिलता था| यह पुरुषों की तुलना में आधे से तीन चौथाई तक होता था| फ़रवरी 1917 में हड़ताल के समय बहुत सारे कारखानों में हड़ताल का नेतृत्व औरतों ने किया|
(घ) उदारवादी:- सभी धर्मों को समान जगह और सम्मान मिले| वे वंश आधारित शासको की अनियमित सत्ता के विरोधी थे| वे सरकार के समक्ष व्यक्ति मात्र के अधिकारों की रक्षा के पक्ष में थे| उनकीं नज़र में सरकार द्वारा व्यक्ति के अधिकारों को छीनने का अधिकार नहीं था| यह सार्वभौमिक मताधिकार के पक्ष में नही थे| उनके अनुसार वोट का अधिकार केवल संपत्तिधारियों को ही मिलना चाहिए|
(ड़) स्टालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम:- स्टालिन ने स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने तथा व्यापारियों के पास जमा अनाज को जब्त करना चाहा| किसानों से जबरदस्ती अनाज खरीदा और संपन्न किसानों या कुलको के ठिकानो पर छपे मरे परन्तु आनाज की कमी बनी रही| उपयुक्त स्थिति में आनाज़ की कमी को पूरा करने के लिए सामूहिकरण की नीति अपनाई गई| इसके पक्ष में यह तर्क दिया गया कि अनाज की कमी का कारण छोटे-छोटे खेत हैं| छोटे खेतो का आधुनिकीकरण नहीं किया जा सकता था| खेतो को विकसित करने और उनपर आधुनिक मशीनों से खेती करने के लिए कई कदम उठाए गये|
Topic Wise Notes:
1. समाजवाद का उदय
19वीं सदी में यूरोप में औद्योगिक क्रांति के कारण मजदूरों की स्थिति खराब हो गई। इसी के विरोध में समाजवाद के विचार विकसित हुए, जिनका उद्देश्य समानता और श्रमिक अधिकारों की रक्षा करना था।
2. समाजवाद के प्रमुख विचारक
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स समाजवाद के प्रमुख विचारक थे। उन्होंने वर्ग संघर्ष का सिद्धांत दिया और मजदूरों को पूंजीपतियों के खिलाफ संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।
3. रूस की सामाजिक और आर्थिक स्थिति
रूस में समाज मुख्यतः किसानों, मजदूरों और कुलीन वर्ग में बँटा हुआ था। अधिकांश किसान गरीब थे और जमींदारों के अधीन काम करते थे।
4. औद्योगिक विकास और मजदूर वर्ग
रूस में औद्योगिक विकास के साथ कारखानों में मजदूरों की संख्या बढ़ी, लेकिन उनकी मजदूरी कम और काम के घंटे बहुत अधिक थे।
5. 1905 की क्रांति
1905 में रूस में पहली क्रांति हुई जिसे रक्तरंजित रविवार (Bloody Sunday) की घटना से जोड़ा जाता है। इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई।
6. ड्यूमा की स्थापना
1905 की क्रांति के बाद ज़ार ने ड्यूमा (संसद) की स्थापना की, लेकिन वास्तविक सत्ता अभी भी ज़ार के हाथों में ही रही।
7. प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव
1914 में रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ, जिससे आर्थिक संकट, खाद्य कमी और सैनिकों की मृत्यु बढ़ गई।
8. फरवरी क्रांति (1917)
1917 में पेट्रोग्राद में मजदूरों और सैनिकों के विद्रोह के कारण ज़ार निकोलस द्वितीय को सत्ता छोड़नी पड़ी और अस्थायी सरकार बनी।
9. लेनिन और अप्रैल थीसिस
व्लादिमीर लेनिन ने अप्रैल थीसिस प्रस्तुत की जिसमें “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया गया।
10. अक्टूबर क्रांति (1917)
अक्टूबर 1917 में बोल्शेविकों ने अस्थायी सरकार को हटाकर रूस में समाजवादी सरकार की स्थापना की।
11. नई सरकार की नीतियाँ
नई सरकार ने भूमि किसानों में बाँट दी, उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया और रूस को युद्ध से अलग कर दिया।
12. रूसी गृहयुद्ध
क्रांति के बाद रूस में लाल सेना (Red Army) और श्वेत सेना (White Army) के बीच गृहयुद्ध हुआ।
13. सोवियत संघ की स्थापना
1922 में रूस सहित कई क्षेत्रों को मिलाकर सोवियत संघ (USSR) की स्थापना की गई।
14. रूसी क्रांति का प्रभाव
रूसी क्रांति ने पूरी दुनिया में समाजवादी विचारों को फैलाया और मजदूर वर्ग के अधिकारों को मजबूत किया।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. मुख्य बिंदु 2. अभ्यास 3. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 4. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Welcome to ATP Education
ATP Education