1. फ़्रांसीसी क्रांति History class 9 in Hindi Medium ncert book solutions महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
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1. फ़्रांसीसी क्रांति
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Class 9 History – फ्रांसीसी क्रांति (NCERT Book)
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित :
प्रश्न: लूई XVI कब फ्रांस कि पर आसीन हुआ ?
उत्तर: 1774 में |
प्रश्न: लूई XVI जब फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन हुआ तब उनकी उम्र क्या थी ?
उत्तर: लूई XVI जब फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन हुआ तब उनकी उम्र 20 साल थी|
प्रश्न:लूई XVI जब की राजगद्दी पर आसीन होने के समय वितीय संसाधन नष्ट होने के क्या कारण थे?
उत्तर: लूई XVI जब फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन होने के समय वितीय संसाधन नष्ट होने के प्रमुख कारण थे लम्बे तक युद्ध का चलना |
प्रश्न: लिब्रे क्या है ? इसे कब समाप्त? कर दिया गया ?
उत्तर: यह फ्रांस कि मुद्रा होती है |जिसे 1794 में समाप्त कर दिया गया|
प्रश्न: फ्रांस को कब गणतंत्र घोषित किया गया ?
उत्तर: 21 सितंबर 1792 में |
प्रश्न: किस पुस्तक में सरकार के अन्दर सत्ता विभाजन की बात कही गई है ?
Que: Which book has proposed a division of power within government?
उत्तर:
प्रश्न: 18 वी शताब्दी में फ्रांसीसी समाज को कितने एस्टेट में बाँटा हुआ था?
उत्तर: 18 वी शताब्दी में फ्रांसीसी समाज को तीन एस्टेट में बाँटा हुआ था |
1.प्रथम एस्टेट
2.दूसरा एस्टेट
3.तीसरा एस्टेट
प्रश्न: फ़्रांसीसी समाज के कौन से एस्टेट के लोग कर (tax) अदा करते थे ? इस वर्ग में कौन कौन से लोग आते थे ?
उत्तर: फ्रांसिसी समाज के तीसरे एस्टेट के लोग ही कर अदा कर रहे थे | इस वर्ग में व्यवसायी वर्ग, किसान एवं मजदुर वर्ग के लोग आते थे |
प्रश्न: टाइद और टाइल में क्या अन्तर है ?
उत्तर: फ्रांस में धार्मिक कर को टाइद और प्रत्यक्ष कर को टाइल कहा जाता था |
प्रश्न: लूई सोलहवें के कर बढ़ाने के क्या कारण थे ?
उत्तर: लूई सोलहवें के कर बढ़ाने के निम्न कारण थे :
(i) की जनसंख्या में वृद्धि |
(ii) फ्रांसिसी सरकार पर कर्ज का बोझ |
(iii) वित्तीय संसाधन में कमी |
(iv) बार-बार युद्ध की मार |
प्रश्न: एस्टेट्स जेनराल क्या है ? यह क्या कार्य करता था ?
उत्तर: एस्टेट्स जेनराल एक सरकारी संस्था थी | नए कर कि मंजूरी के लिए एस्टेट्स जेनराल कि बैठक बुलाई जाती थी | यह नए प्रस्तावों पर अनुमोदन का कार्य करता था |
प्रश्न: सन 1791 में फ्रांसिसी संविधान ने कानून बनाने का अधिकार किसको सौप दिया ?
उत्तर: नैशनल असेंबली को सौपा था |
प्रश्न: ‘द सोशल कॉन्ट्रैक्ट’ पुस्तक के लेखक कौन है ?
उत्तर: रूसो |
प्रश्न: लुई सोलहवें की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर: न्यायालय द्वारा उसे देशद्रोह के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई | 21 जनवरी 1973 में उसे सार्वजानिक रूप से फाँसी दे दी गई |
प्रश्न: फ्रांस के इतिहास में किस समय को आतंक का युग कहा जाता है ?
उत्तर:
प्रश्न: फ्रांस में नेशनल असेम्बली चुनने के लिए मतदान का अधिकार किस प्रकार दिया गया था?
उत्तर:फ्रांस में नेशनल असेम्बली चुनने के लिए मतदान का अधिकार कुछ लोगो को ही प्राप्त था लोग दो तिहाई कर चुकाते थे | जो सक्रीय नागरिक थे, उन्हें ही मतदान करने का अधिकार प्राप्त था | महिलाएं मतदान नहीं कर सकती थी |
प्रश्न: फ्रांस में सम्राट लूई XVI के शासन में सक्रीय और निष्क्रिय नागरिक किस आधार पर बाँटे गए थे ? इनमे से किसको मतदान का अधिकार था?
उत्तर: 25 वर्षा से अधिक उम्र के पुरुष जो तीन दिन कि मजदूरी के बराबर कर चुकाते थे| उन्हें सक्रीय नागरिक का दर्जा दिया गया था | शेष सभी पुरुष तथा महिलाओ को केरूप में वर्गीकृत किया गया था |
प्रश्न:लूई सोलहवें के फिर से कर लगाने की खबर की कौन सी व्यवस्था ने लोगो के गुस्से को ओर बढ़ा दिया ?
उत्तर: के फिर से कर लगाने की खबर से विशेषाधिकार वाली व्यवस्था ने लोगो के गुस्से को ओर बड़ा दिया| इसमें कुछ विशेष वर्ग के लोगो को विशेषाधिकार दिए गए थे |
प्रश्न: फ़्रांस कि क्रांति में दार्शनिको के विचारो ने किस प्रकार आग में घी डालने का काम किया? उनके विचारो को किस प्रकार जन साधारण तक पहुचाया जाता था ?
उत्तर: लुई सरकार कि निरंकुश शासन और जर्जर हो चुकी भूखी जनता , महंगाई कि मार , अमीर –गरीब की चौड़ी खाई, और असुरक्षा की भावना से फ़्रांस में क्रांति की आग अभी सुलग ही रही थी कि के विचारो ने आग में घी डालने का काम किया | लोगों को उनके विचारों में अपना भविष्य नजर आया | उनके विचारों पर कॉफ़ी हाउसों व सैलूनो की गोष्ठियों में गर्मागरम बहस हुआ करती थी और पुस्तको तथा अखबरो के माध्यम से उनके विचारो का व्यापक प्रचार हुआ |प्रश्न: फ़्रांस की क्रांति के समय फ़्रांस में किसका शासन था?
उत्तर: फ़्रांस की क्रांति के समय फ़्रांस में लूई सोलहवें का शासन था |
प्रश्न: फ़्रांस की क्रांति के प्रमुख कारण क्या थे?
उतर: फ़्रांस की क्रांति के प्रमुख कारण निम्म थे |
1.लूई सरकार का निरंकुश शासन |
2.मजदूर व्यापरियों और किसानों का शोषण|
3. दार्शनिको के विचार जो लोगों को क्रांति के लिए प्रेरित किया |
4. महंगाई, बेरोजगारी और बार-बार युद्ध से फ्रांस की सरकार पर कर्ज का भोझ |
5. कर में भारी वृद्धि |
प्रश्न: फ्रांसिसी महिलाओं को मताधिकार का अधिकार कब प्राप्त हुआ ?
उत्तर: सन 1941 में |
प्रश्न: 'द सोसाइटी ऑफ़ रेव्लुशनरी एंड रिपब्लिकन वीमेन' क्या था ?
उत्तर: यह फ्रांस के सबसे मशहूर क्लबों में से एक था |
प्रश्न: मैक्समिलियन रोबेसप्येर कौन था ? उसकी मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर: मैक्समिलियन रोबेसप्येर जैकोबिन क्लब का नेता था | लुई की मृत्यु के बाद जैकोबिन का शासन हुआ | रोबेसप्येर ने अपनी नीतियों को इतनी सख्ती से लागु किया कि उसके समर्थक भी त्राहि-त्राहि करने लगे | जुलाई 1794 में न्यायालय द्वारा उसे दोषी ठहराया गया और फिर उसके अगले दिन उसे गिरफ्तार कर गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया |
प्रश्न: 'द सोसाइटी ऑफ़ रेव्लुशनरी एंड रिपब्लिकन वीमेन' क्लब की एक प्रमुख माँग क्या थी ?
उत्तर: 'द सोसाइटी ऑफ़ रेव्लुशनरी एंड रिपब्लिकन वीमेन' क्लब की एक प्रमुख माँग यह थी कि महिलाओं को पुरुषों के समान राजनितिक अधिकार प्राप्त होने चाहिए |
प्रश्न: 1791 के नए संविधान से फ्रांस की महिलाओं को किस बात से निराशा हुई थी ? उन्होंने क्या माँगे रखी ?
उत्तर: महिलाओं को इस बात से निराशा हुई कि 1971 के संविधान में उन्हें निष्क्रिय नागरिक का दर्जा दिया गया था |
उन्होंने निम्नलिखित माँगे रखी थी |
(i) महिलाओं को मताधिकार मिले |
(ii) उन्हें असेंबली के लिए चुने जाने तथा राजनितिक पदों की मांग रखी |
प्रश्न: क्रन्तिकारी सरकार ने महिलाओं के जीवन में सुधार लाने वाले कौन-कौन से कानून लागु किये ?
अथवा
प्रश्न: क्रन्तिकारी सरकार द्वारा फ्रांस में महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए लागु किये गए किन्ही पाँच कानूनों का उल्लेख कीजिए |
उत्तर:
(i) सरकारी विद्यालयों की स्थापना के साथ ही सभी लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा अनिवार्य बना दिया गया |
(ii) पिता उनके मर्जी के खिलाफ शादी के लिए बाध्य नहीं कर सकते थे |
(iii) शादी को स्वैच्छिक अनुबंध माना गया और नागरिक कानूनों के तहत उनका पंजीकरण किया जाने लगा |
(iv) इस कानून में तलाक को क़ानूनी रूप दे दिया गया |
(v) इस कानून के अनुसार महिलाएं अब व्यावसायिक प्रशिक्षण ले सकती थी, कलाकार बन सकती थी और छोटे-मोटे व्यवसाय चला सकती थी |
प्रश्न: आतंक राज के दौरान महिलाओं पर कौन-कौन से अत्याचार किये गए ?
उत्तर: आतंक राज के दौरान सरकार ने महिला क्लबों को बंद करने और उनकी राजनितिक गतिविधियों पर प्रतिबन्ध लगाने वाला कानून लागु किया गया | कई जानी मानी महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया और उनमे से कुछ महिलाओं को फाँसी पर चढ़ा दिया गया |
प्रश्न: जैकोबिन शासन के क्रांतिकारी सामाजिक सुधार कौन-कौन से थे ?
उत्तर:
(i) दास प्रथा का उन्मूलन जैसे सुधार प्रमुख थे |
(ii) महिलाओं के जीवन में सुधार और उनके शिक्षा और व्यवसाय कार्य में सुधार किये गए |
प्रश्न: डिरेक्टरी या डायरेक्टरी क्या हैं ?
उत्तर: जैकोबिन सरकार के पतन के बाद फ्रांस के नए संविधान में दो चुनी हुई परिषदों का प्रावधान किया गया | ये परिषद् पाँच सदस्यों वाली एक कार्यपालिका की नियुक्ति किया जिसे डिरेक्टरी या डिरेक्ट्री कहते है |
प्रश्न: फ्रांस सरकार के स्वरुप में वे कौन से तीन मूल्य थे जो प्रेरक आदर्श थे और फ्रांस ही नहीं बाकि यूरोप के राजनितिक आन्दोलन को भी प्रेरित किया ?
उत्तर: (i) स्वतंत्रता (ii) विधिसम्मत समानता और (iii) बंधुत्व फ्रांस सरकार के स्वरुप में तीन मूल्य थे जो प्रेरक आदर्श थे और फ्रांस ही नहीं बाकि यूरोप के राजनितिक आन्दोलन को भी प्रेरित किया |
प्रश्न: फ्रांस में 1791 के संविधान के तहत किस प्रकार राजनितिक पद्धति ने कार्य किया ?
उत्तर: फ्रांस में 1791 के संविधान के तहत निम्नलिखित राजनितिक पद्धति ने कार्य किया |
(i) सम्राट की शक्तियों को सिमित कर दिया गया |
(ii) अब सत्ता एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रीकृत होने के बजाय अब इन शक्तियों को विभिन्न संस्थाओं विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका में विभाजित एवं हस्तांतरित कर दिया गया।
(iii) मताधिकार के लिए दो श्रेणियां निश्चित कर दी गई, जिसमें सक्रीय नागरिक एवं निष्क्रिय नागरिक शामिल थे |
(iv) सक्रीय नागरिक वोट द्वारा न्यायधीश का चुनाव करते थे |
प्रश्न: रूसो ने किस पुस्तक में एक व्यक्ति एक वोट के सिद्धांत का उल्लेख किया था ?
उत्तर: द सोशल कॉन्ट्रैक्ट पुस्तक में |
प्रश्न: फ्रांसिसी क्रांति के पहले फ्रांस की स्थित का संक्षिप्त वर्णन पाँच बिन्दुओं पर कीजिए |
उत्तर: फ्रांसिसी क्रांति के पहले फ्रांस की स्थित निम्नलिखित थी |
(i) फ़्रांसिसी क्रांति के पहले फ़्रांस की स्थति दयनीय थी |
(ii) फ़्रांस भारी कर्जे में डूबा हुआ था और उसके वित्तीय संसाधन नष्ट हो चुके थे |
(iii) फ़्रांस की जनता गरीबी के जाल में फँसी हुई थी |
(iv) किसानों और गरीब जनता के बीच रोजी-रोटी का संकट था |
(v) फ्रांस में सामंतवादी व्यवस्था का बोलबाला था जिसमें किसानों को अपने स्वामी की सेवा - स्वामी के घर एवं खेतों में काम करना, सैन्य सेवाएँ देना पड़ता था |
प्रश्न: फ्रांस की क्रांति के समय फ्रांस में किस राजवंश का शासन था ?
उत्तर: बुर्बो राजबंश का शासक लूई सोलहवाँ का शासन था |
प्रश्न: फ्रांस में 1789 की क्रांति के प्रारम्भ में दार्शनिकों का योगदान क्या था ? पाँच बिन्दुओं में लिखिए |
उत्तर: दार्शनिकों ने अपने विचारों एवं अपने पुस्तकों के माध्यम से 1789 की क्रांति में बहुत बहुत बड़े योगदान दिए थे | जो निम्नलिखित है |
(i) टू ट्रीटाईज़ेज ऑफ़ गवर्नमेंट में लॉक ने राजा और निरंकुश अधिकारों के सिद्धांत का खंडन किया |
(ii) रूसो ने जनता और प्रतिनिधियों के बीच एक सामाजिक अनुबंध पर आधारित सरकार का प्रस्ताव रखा |
(iii) अपनी पुस्तक द स्पिरिट ऑफ़ लॉज नामक रचना में मान्तेस्क्यु ने सरकार के अन्दर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता विभाजन की बात कही |
(iv) दार्शनिकों के इन विचारों पर कॉफी हाउसों व सैलॉन की गोष्ठियों में गर्मागर्म बहस हुआ करती और पुस्तकों एवं अखबारों के माध्यम से इनका व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ।
(v) पुस्तकों एवं अखबारों को लोगों के बीच शोर से पढ़ा जाता ताकि अनपढ़ भी उन्हें समझ सके।
प्रश्न: फ्रांस की महिलाओं के द्वारा प्रारंभ की गई सबसे लोकप्रिय राजनैतिक क्लब का नाम लिखिए |
उत्तर: 'द सोसाइटी ऑफ़ रेव्लुशनरी एंड रिपब्लिकन वीमेन' |
प्रश्न: फ्रांसिसी क्रांति के दौरान जैकोबिन क्लब के सदस्यों के द्वारा अपनाए गए परिधानों की शैली का वर्णन कीजिए |
उत्तर: जैकोबिनों के एक बड़े वर्ग ने गोदी कामगारों की तरह धारीदार लंबी पतलून पहनने का निर्णय किया। ऐसा उन्होंने समाज के फैशनपरस्त वर्ग, खासतौर से घुटने तक पहने जाने वाले ब्रीचेस पहनने वाले कुलीनों से खुद को अलग करने के लिए किया। यह ब्रीचेस पहनने वाले कुलीनों की सत्ता समाप्ति के एलान का उनका तरीका था।
इसलिए जैकोबिनों को ‘सौं कुलॉत’ के नाम से जाना गया जिसका शाब्दिक अर्थ होता है - बिना घुटन्ने वाले। सौं कुलॉत पुरुष लाल रंग की टोपी भी पहनते थे जो स्वतंत्रता का प्रतीक थी लेकिन महिलाओं को ऐसा करने की अनुमति नहीं थी।
प्रश्न: फ्रांस में क्रांतिकारी विरोध के लिए उत्तरदायी कारणों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर: फ्रांस में क्रांति के मुख्य कारण सामाजिक असमानता, आर्थिक संकट, भारी कर व्यवस्था और निरंकुश राजशाही थे। तृतीय वर्ग पर करों का बोझ अधिक था जबकि पादरी और कुलीन वर्ग को विशेषाधिकार प्राप्त थे, जिससे जनता में असंतोष फैल गया।
प्रश्न: ‘सौ कुलॉत’ द्वारा पहने जाने वाली लाल रंग की टोपी किस बात का प्रतीक थी?
उत्तर: ‘सौ कुलॉत’ द्वारा पहनी जाने वाली लाल टोपी स्वतंत्रता का प्रतीक मानी जाती थी। यह अत्याचार और दासता से मुक्ति का संकेत देती थी।
प्रश्न: 18वीं शताब्दी में फ्रांस के मध्यवर्ग की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- मध्यवर्ग में व्यापारी, वकील, डॉक्टर और शिक्षित लोग शामिल थे।
- वे सामाजिक समानता और राजनीतिक अधिकारों की माँग करते थे।
- वे लोकतंत्र और स्वतंत्रता के विचारों से प्रभावित थे।
प्रश्न: नैशनल असेंबली द्वारा बनाए गए संविधान के किन्हीं पाँच प्रावधानों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
- मजदूरी और कीमतों की अधिकतम सीमा तय कर दी गई।
- गोश्त और पावरोटी की राशनिंग कर दी गई।
- महँगे और सफेद आटे के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई।
- सभी को साबुत गेहूँ से बनी ‘समता रोटी’ खाना अनिवार्य कर दिया गया।
- बोलचाल और संबोधन में बराबरी का आचार-व्यवहार लागू करने की कोशिश की गई।
प्रश्न: फ्रांस में 18वीं सदी में किसानों से ‘टाइद’ नामक टैक्स कौन वसूलते थे?
उत्तर: फ्रांस में चर्च (पादरी वर्ग) किसानों से ‘टाइद’ नामक कर वसूलते थे।
प्रश्न: फ्रांस में 1789 की क्रांति के बाद लोगों ने दैनिक जीवन में किस प्रकार के बदलाव देखे?
उत्तर: क्रांति के बाद समानता और स्वतंत्रता के विचार फैल गए। सामंती विशेषाधिकार समाप्त किए गए और लोगों को अधिक नागरिक अधिकार प्राप्त हुए।
प्रश्न: फ्रांस की क्रांति कब हुई?
उत्तर: फ्रांस की क्रांति 1789 ई. में हुई।
प्रश्न: फ्रांस में 1789 में प्रेस पर प्रतिबंध समाप्त होने के क्या परिणाम हुए?
उत्तर: प्रेस की स्वतंत्रता मिलने से अखबारों, पुस्तकों और पत्रिकाओं का प्रकाशन बढ़ गया। इससे क्रांतिकारी विचार तेजी से फैलने लगे।
प्रश्न: "स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के विचार फ्रांसीसी क्रांति की सबसे प्रमुख विरासत थे।" फ्रांसीसी क्रांति के आलोक में कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और लोकतंत्र के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया। इन विचारों ने न केवल फ्रांस बल्कि पूरे यूरोप में लोकतांत्रिक आंदोलनों को प्रेरित किया।
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