व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री History class 6 in Hindi Medium ncert book solutions अतिरिक्त प्रश्न
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व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री History class 6 in Hindi Medium ncert book solutions अतिरिक्त प्रश्न
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व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री
अतिरिक्त प्रश्न
अभ्यास - प्रश्नोत्तर:
प्रश्न: क्या तुम बता सकती हो कि ये सिक्के भारत कैसे और क्या पहुँचे होंगे?
उत्तर: रोम के व्यापारी समुद्री जहाजों तथ सड़क के रास्ते व्यापार करने के लिए दक्षिण भारत में आते थे और यहाँ के काली मिर्च, कीमती पत्थर, सोना तथा मसाले आदि खरीदने के लिए रोम के सिक्कों का प्रयोग करते थे इस प्रकार रोम के सिक्के भारत पहुँचे|
प्रश्न: कविता में उल्लिखित चीज़ों की एक सूची बनाओ| क्या तुम बता सकते हो कि इन चीज़ों का उपयोग किसलिए किया जाता होगा?
उत्तर:
कविता में उल्लिखित चीज़ें उपयोग
(i) घोड़े युद्ध के लिए
(ii) काली मिर्च मसाले के रूप में
(iii) रत्न आभूषण बनाने के लिए
(iv) सोना आभूषण बनाने के लिए
(v) चंदन की लकड़ी महलों की सजावट व इत्र बनाने
(vi) मोती आभूषण बनाने के लिए
(vii) मूँगे आभूषण बनाने के लिए
(viii) खाघान्न भोजन के लिए
(ix) मिट्टी के बर्तन खाना खाने के लिए
प्रश्न: क्या तुम बता सकती हो कि श्री सातकणी तटों पार नियंत्रण क्यों करना चाहता था?
उत्तर: श्री सातकणी तटों पार इसलिए नियंत्रण करना चाहता था क्योंकि तटों पार विदेशी व्यापारी आकर उतरते थे| और व्यापारियों कीमती उपहार लिए जाते थे तथा तटों के आसपास के इलाकों से भारी शुल्क वसूल किया जा सकता था जिसे राज्य की आय बढ़ सकती थी|
प्रश्न: सिल्क रूट गाड़ियों का उपयोग क्यों कठिन होता होगा?
उत्तर: सिल्क रूट गाड़ियों का उपयोग इसलिए कठिन होता क्योंकि ये रास्ते दुर्गम पहाड़ी तथा रेगिस्तानी इलाके में स्थित थे|
प्रश्न: चीन से समुद्र के रास्ते भी रेशम का निर्यात होता था| मानचित्र 6 में इसे ढूँढों| समुद्र के रास्ते रेशम भेजने में क्या सुविधाएं और क्या समस्याएँ आती होगी?
उत्तर: समुद्र के रास्ते रेशम भेजने में दुर्गम पहाड़ियाँ व रेगिस्तानी इलाके को पार करने परेशानियाँ नहीं होती थी, परन्तु समुद्री रास्ते में तेज़ वर्षा तथा समुद्री तूफानी हवाओं के कारण समुद्री जहाज के रास्ता भूताकाने या डूबने का खतरा रहता था|
प्रश्न: बाएँ: मथुरा में बनी बृद्ध की एक प्रतिमा का चित्र| दाएँ: तक्षशिला में बनी बृद्ध की प्रतिमा का एक चित्र| इन चित्रों को देखकर बताओं कि इनके बीच क्या - क्या समानताएँ हैं और क्या - क्या भिन्नताएँ हैं?
उत्तर:
समानताएँ -
1. भगवान बृद्ध दोनों चित्रों में अभय मुद्रा में हैं|
2. दोनों भगवान बृद्ध की उकेरी गई मूर्ति के चित्र हैं|
भिन्नताएँ -
1. एक चित्र में भगवान बृद्ध बैठे हुए हैं तथा दूसरे चित्र में भगवान बृद्ध खड़े हुए हैं|
2. बैठी हुई मूर्ति में भगवान बृद्ध का शरीर कपड़ों से ढका हुआ हैं जबकि खाड़ी हुई मूर्ति में भगवान बृद्ध की पीठ कपड़ों से ढकी हुई हैं|
प्रश्न: पृष्ठ 100 को एक बार फिर पढों| क्या तुम बता सकती हो कि बौद्ध धर्म इन इलाकों में कैसे फैला होगा?
उत्तर: पृष्ठ 100 पर श्रींलंका और म्यांमार का वर्णन हैं| शायद यहाँ जो व्यापारी करने के लिए आए होंगे| वे बौद्ध धर्म को मागते होगें| श्रीलंका और म्यांमार के लोग व्यापारियों के विचारों से प्रभावित हुए होगे| व्यापारिक संबंधों में वस्तुओं के आदान - प्रदान के साथ - साथ विचारों, भाषाओं, संस्कृति साहित्य, धर्म, खान - पान इत्यादि का भी आदान - प्रदान होता हैं इस प्रकार इन इलाकों में बौद्ध धर्म फैला होगा|
प्रश्न: बताओ कि फा - शिएन अपनी पांडुलिपियों और मूर्तियों को क्यों नहीं फेंकना चाहता था|
उत्तर: फा - शिएन बौद्ध धर्म का अनुयायी था| उसने पांडुलिपियां तथा मूर्तियाँ अपनी भरता यात्रा के दौरान संकलित की थी यह सब उसने काफी मेहनत तथा कई वर्षा तक भारत में घूम - घूम कर इकठ्ठा किया था जिसे वह फिर से प्राप्त नहीं कर सकता था इसलिए वह पांडुलिपियों और मूर्तियों को नहीं फेंकना चाहता था|
प्रश्न: श्वेन त्यांग नालंदा में क्यों पढना चाहता था, कारण बताओ?
उत्तर: उस समय का सबसे प्रसिद्ध बौद्ध विघा केंद्र नालंदा में था| नालंदा बौद्ध विघा केंद्र शिक्षक योग्यता तथा बृद्धि में सबसे आगे थे| बृद्ध के उपदेशों का वह पूरी ईमानदारी से पालन करते थे| पूरे दिन वाद - विवाद चलते ही रहते थे जिसमें युवा और वृद्ध दोनों ही एक - दूसरे की मद्द करते थे|
प्रश्न: कवि सामाजिक प्रतिष्ठा और शक्ति में किसकों ज्यादा महत्त्व देते हैं?
उत्तर: कवि समाजिक प्रतिष्ठा और भक्ति दोनों में से भक्ति को ज्यादा महत्त्व देते थे|
प्रश्न: मानचित्र 6 देखों और पत्ता लगाओं कि किस रास्ते से ईसाई धर्म प्रचारक भारत आए होगें?
उत्तर: ईसाई धर्म प्रचारक समुद्री मार्ग से भारत आए होगें|
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