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Chapter 1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय History class 10 in Hindi Medium ncert book solutions दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

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Chapter 1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

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दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Last Update On: 06 March 2026

 

4 अंक वाले प्रश्न:

प्रश्न - ‘पौलेंड’ में राष्ट्रीय भावनाओं के विकास में भाषा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उदाहरण देकर समझाइए ।

उत्तर - ‘

पोलैंड में राष्ट्रीय भावनाओं के विकास में भाषा की भूमिका (बिंदुओं में):

  1. रूसी कब्जे के बाद पोलिश भाषा पर प्रतिबंध लगाया गया – स्कूलों से पोलिश भाषा को हटाकर रूसी भाषा को जबरन लागू किया गया।

  2. 1831 में रूस के विरुद्ध विद्रोह हुआ – पोलैंड के लोगों ने रूसी शासन के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया, लेकिन उसे दबा दिया गया।

  3. भाषा को राष्ट्रवादी संघर्ष का हथियार बनाया गया – विद्रोह के बाद पोलिश लोगों ने अपनी भाषा को राष्ट्रीय विरोध का माध्यम बनाया।

  4. चर्च में पोलिश भाषा का उपयोग जारी रहा – चर्च के आयोजनों और धार्मिक शिक्षा में पोलिश भाषा का प्रयोग होता रहा।

  5. रूसी सरकार का दमन – इसके कारण कई पादरियों और बिशपों को जेल में डाल दिया गया।

  6. पोलिश भाषा राष्ट्रीय प्रतीक बनी – धीरे-धीरे पोलिश भाषा रूसी प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक बन गई।

प्रश्न - फ्रैंकफर्ट संसद के जर्मन राष्ट्र निर्माण में योगदान का उल्लेख कीजिए ।

उत्तर -

फ्रैंकफर्ट संसद का जर्मन राष्ट्र निर्माण में योगदान (बिंदुओं में):

  1. जर्मन क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की बैठक – जर्मन इलाकों के प्रतिनिधि फ्रैंकफर्ट शहर में एकत्र हुए और एक सर्व-जर्मन सभा (All German Assembly) बनाने का निर्णय लिया।

  2. फ्रैंकफर्ट संसद की स्थापना (18 मई 1848) – 18 मई 1848 को 831 निर्वाचित प्रतिनिधि एक सजे-धजे जुलूस में फ्रैंकफर्ट संसद पहुँचे और अपना स्थान ग्रहण किया।

  3. सेंट पॉल चर्च में सभा आयोजित हुई – यह संसद सेंट पॉल चर्च में आयोजित की गई, जहाँ जर्मनी के भविष्य पर चर्चा हुई।

  4. संविधान का प्रारूप तैयार किया – प्रतिनिधियों ने एकीकृत जर्मन राष्ट्र के लिए संविधान का मसौदा तैयार किया।

  5. राष्ट्रीय एकीकरण की माँग को मजबूत किया – उन्होंने संविधानवाद और राष्ट्रीय एकीकरण की माँग को एक साथ जोड़ा।

  6. राष्ट्र-राज्य की स्थापना का प्रयास – इस संसद ने जर्मनी में एक राष्ट्र-राज्य बनाने की माँग को आगे बढ़ाया और राष्ट्रवादी आंदोलन को मजबूत किया।

प्रश्न - 1871 के बाद बाल्कन क्षेत्र यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का कारण बन गया, कथन के संदर्भ में तीन तर्क दीजिए ।

उत्तर -

उत्तर (बिंदुओं में):

  1. यूरोपीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा – बाल्कन क्षेत्र में यूरोप के कई देश अपना प्रभुत्व बढ़ाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने वहाँ की समस्याओं को और अधिक जटिल बना दिया।

  2. ऑटोमन साम्राज्य का कमजोर होना – बाल्कन क्षेत्र पहले ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था। उसके कमजोर होने पर वहाँ की विभिन्न राष्ट्रीयताएँ स्वतंत्रता की माँग करने लगीं।

  3. राष्ट्रीयता की भावना का विकास – बाल्कन के लोगों ने स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों की माँग को राष्ट्रीयता के आधार पर प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने इतिहास का उपयोग यह सिद्ध करने के लिए किया कि वे पहले स्वतंत्र थे, लेकिन विदेशी शक्तियों ने उन्हें अपने अधीन कर लिया।

प्रश्न - एकीकृत इतावली गणराज्य के निर्माण में काउंट कैमिलों दे काबूर की भूमिका को स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर -

कैवूर का इटली के एकीकरण में योगदान (बिंदुओं में):

  1. कैवूर का नेतृत्व – एकीकृत इतालवी राष्ट्र के निर्माण का प्रमुख श्रेय काउंट कैमिलो डी कैवूर को दिया जाता है।

  2. प्रधानमंत्री बने (1852) – 1852 में कैवूर सार्डिनिया-पिडमोंट (Sardinia-Piedmont) का प्रधानमंत्री बना और इटली के एकीकरण के लिए कार्य करने लगा।

  3. कूटनीतिक नीति अपनाई – उसने अपनी कूटनीति और राजनीतिक चालों के माध्यम से इटली के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

  4. युद्धों के माध्यम से विस्तार – कैवूर ने विभिन्न युद्धों और समझौतों के माध्यम से इटली के अलग-अलग राज्यों को सार्डिनिया के साथ मिलाने का प्रयास किया।

  5. कई राज्यों का विलयलोम्बार्डी, मोडेना, पार्मा और टस्कनी जैसे राज्य धीरे-धीरे विदेशी सत्ता से मुक्त होकर सार्डिनिया में शामिल हो गए।

  6. ‘इटली का बिस्मार्क’ – अपनी सफल कूटनीति और नेतृत्व के कारण इतिहासकार कैवूर को ‘इटली का बिस्मार्क’ कहते हैं

प्रश्न - फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामाजिक पहचान की भावना पैदा करने के लिए कौन से चार कदम उठाए ।

उत्तर - फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामाजिक पहचान की भावना पैदा करने के लिए निम्नलिखित चार कदम उठाए:

1. क्रांतिकारियों ने घोषणा की कि यूरोप के लोगों को निरंकुश शासकों से मुक्ति दिलाई जाए।

2. नया फ्रांसीसी तिरंगा झंडा अपनाया गया, जिसने पुराने राजध्वज की जगह ले ली।

3. सक्रिय नागरिकों द्वारा चुनी गई नेशनल असेंबली का गठन किया गया।

4. राष्ट्र के सम्मान में नई स्तुतियाँ रची गईं, शपथें ली गईं और शहीदों का गुणगान किया गया।

प्रश्न - 1804 की नागरिक संहिता के चार प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए |

उत्तर - 1804 की नागरिक संहिता (नेपोलियन कोड) की चार प्रमुख विशेषताएँ:

  1. इस संहिता ने जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया।

  2. इसने कानून के समक्ष समानता और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया।

  3. इसने सामंती व्यवस्था और प्रशासनिक विभाजनों को समाप्त किया तथा किसानों को भू-दासत्व और जमींदारों के नियंत्रण से मुक्ति दिलाई।

  4. शहरों में कारीगरों के श्रेणी संघों के नियंत्रण हटाए गए और यातायात व संचार व्यवस्थाओं में सुधार किया गया, जिससे किसानों, कारीगरों, मजदूरों और नए उद्योगपतियों को नई स्वतंत्रता मिली।

प्रश्न - वियना संधि 1815 के चार प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करों |

उत्तर -

वियना संधि (1815) की चार प्रमुख विशेषताएँ:

  1. 1815 की वियना संधि ने नेपोलियन युद्धों के दौरान हुए अनेक राजनीतिक बदलावों को समाप्त कर दिया।

  2. फ्रांस में बुर्बो वंश के राजा को पुनः सत्ता में स्थापित किया गया।

  3. फ्रांस की सीमा के चारों ओर कई मजबूत राज्य स्थापित किए गए, ताकि भविष्य में फ्रांस का विस्तार रोका जा सके।

  4. प्रशा को पश्चिमी सीमाओं पर नए क्षेत्र दिए गए, जबकि ऑस्ट्रिया को उत्तरी इटली का नियंत्रण सौंपा गया।

प्रश्न - ‘‘ यूरोप में 1830 का दशक भारी कठिनाइयाँ लेकर आया’’ । चार कारण बताइए ।

उत्तर -  यूरोप में 1830 के दशक की कठिनाइयों के चार कारण:

  1. यूरोप में जनसंख्या में तेज़ वृद्धि हुई, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ गया।

  2. अधिकांश देशों में रोजगार की तुलना में नौकरी खोजने वालों की संख्या अधिक थी।

  3. नगरों के लघु उत्पादकों को इंग्लैंड से आयातित मशीन से बने सस्ते कपड़ों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।

  4. यूरोप के कई क्षेत्रों में कुलीन वर्ग अब भी सत्ता में था, जिससे आम लोगों को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

प्रश्न – जर्मन एकीकरण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: (संक्षेप में बिंदुओं में):

  1. जर्मनी में राष्ट्रवादी भावनाएँ मध्य वर्ग के लोगों में काफी समय से मौजूद थीं। उन्होंने 1848 में जर्मन महासंघ के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर एक निर्वाचित संसद द्वारा शासित राष्ट्र-राज्य बनाने का प्रयास किया।

  2. यह उदारवादी प्रयास असफल हो गया, क्योंकि राजशाही और सेना ने मिलकर इसे दबा दिया। प्रशा के बड़े भू-स्वामियों (जंकर्स) ने भी इसका समर्थन किया।

  3. इसके बाद प्रशा के प्रधानमंत्री ओटो वॉन बिस्मार्क ने प्रशा की सेना और नौकरशाही की मदद से जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

  4. सात वर्षों में प्रशा ने डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फ्रांस को युद्ध में हराया। अंततः 1871 में राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया और जर्मन एकीकरण पूरा हुआ।

प्रश्न – एक्ट ऑफ यूनियन 1707 ने किस प्रकार इंग्लैंड को स्कॉटलैंड पर व्यवहारिक रूप में अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सहायता की? चार बिंदुओं में लिखिए।

उत्तर: (संक्षेप में):

  1. एक्ट ऑफ यूनियन 1707 के द्वारा इंग्लैंड और स्कॉटलैंड की संसदों को मिलाकर ग्रेट ब्रिटेन की संसद का गठन किया गया।

  2. स्कॉटलैंड की संसद को समाप्त कर दिया गया और राजनीतिक शक्ति इंग्लैंड के हाथों में आ गई।

  3. स्कॉटलैंड में अंग्रेजी कानून, संस्थाएँ और प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर दी गई।

  4. इस प्रकार इंग्लैंड ने राजनीतिक और आर्थिक रूप से स्कॉटलैंड पर अपना प्रभाव और प्रभुत्व स्थापित कर लिया।

उत्तर: (Not available) 

प्रश्न - इटली के एकीकृत होने से पूर्व की चार परिस्थितियों का वर्णन करो ।

उत्तर -

1. इटली कई वंशानुगत राज्यों और बहुराष्ट्रीय हैब्सबर्ग साम्राज्य में बँटा हुआ था।

2. 19वीं शताब्दी के मध्य में इटली सात राज्यों में विभाजित था, जिनमें से केवल सार्डिनिया-पिडमोंट में इतालवी शासक का शासन था।

3. इटली का उत्तरी भाग ऑस्ट्रियाई हैब्सबर्ग साम्राज्य के अधीन, मध्य क्षेत्र पोप के नियंत्रण में और दक्षिणी क्षेत्र स्पेन के बुर्बो राजाओं के अधीन था।

4. उस समय इतालवी भाषा का एकीकृत रूप विकसित नहीं हुआ था और विभिन्न क्षेत्रों में उसके कई स्थानीय और क्षेत्रीय रूप प्रचलित थे।

प्रश्न – ‘रूपक’ से क्या तात्पर्य है? फ्रांस एवं जर्मनी के संदर्भ में इसकी व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

जब किसी अमूर्त विचार (जैसे स्वतंत्रता, न्याय, राष्ट्र आदि) को किसी व्यक्ति या वस्तु के माध्यम से व्यक्त किया जाता है, तो उसे रूपक (Allegory) कहते हैं। रूपकात्मक कथन के दो अर्थ होते हैं—एक शाब्दिक अर्थ और दूसरा प्रतीकात्मक अर्थ

फ्रांस के संदर्भ में:
फ्रांसीसी क्रांति के दौरान कलाकारों ने स्वतंत्रता, न्याय और गणतंत्र जैसे विचारों को व्यक्त करने के लिए विभिन्न प्रतीकों का प्रयोग किया। स्वतंत्रता को लाल टोपी (Red Cap) और टूटी हुई जंजीर के प्रतीक से दिखाया गया। न्याय को आमतौर पर एक महिला के रूप में दर्शाया गया, जिसकी आँखों पर पट्टी बँधी होती है और हाथ में तराजू होता है। फ्रांस में मैरिएन (Marianne) राष्ट्र का रूपक बन गई। उसकी प्रतिमाएँ सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित की गईं और उसकी छवि सिक्कों तथा डाक टिकटों पर भी अंकित की गई।

जर्मनी के संदर्भ में:
जर्मनी में जर्मेनिया (Germania) जर्मन राष्ट्र का रूपक बन गई। उसे अक्सर बलूत (ओक) के पत्तों का मुकुट पहने हुए दिखाया जाता था, जो वीरता और शक्ति का प्रतीक था। इस प्रकार रूपकों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना को लोगों के बीच प्रकट किया गया।

प्रश्न – आयरलैंड के संबंध में अंग्रेजों की नीति की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: (संक्षेप में)

  1. अंग्रेजों ने आयरलैंड में प्रोटेस्टेंट धर्म मानने वाले अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यक कैथोलिक लोगों पर प्रभुत्व स्थापित करने में सहायता दी।

  2. वोल्फ टोन (Wolfe Tone) और उसकी संस्था यूनाइटेड आयरिशमेन के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह हुआ, जिसे अंग्रेजों ने दबा दिया।

  3. इसके बाद 1801 में आयरलैंड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में शामिल कर लिया गया।

  4. एक नए ब्रिटिश राष्ट्र का निर्माण किया गया, जिसमें अंग्रेजी संस्कृति और परंपराओं को प्रमुखता दी गई।

प्रश्न. राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति का क्या योगदान था?

उत्तर:

  1. राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

  2. लोकगीत, लोककथाएँ और लोकनृत्य लोगों में राष्ट्रीय भावना जगाने के साधन बने।

  3. कलाकारों और कवियों ने राष्ट्रवाद से प्रेरित साहित्य और चित्रकला के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया।

  4. कई देशों में भाषा राष्ट्रीय पहचान का प्रमुख आधार बनी।

  5. इस प्रकार संस्कृति ने राष्ट्रवाद के विकास और प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


प्रश्न. 1848 की उदारवादी क्रांति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:

  1. 1848 की क्रांतियों का नेतृत्व उदारवादी और राष्ट्रवादी नेताओं ने किया।

  2. उन्होंने संविधान, प्रतिनिधि सरकार और नागरिक अधिकारों की माँग की।

  3. इन क्रांतियों में मध्य वर्ग, मजदूर और छात्रों ने भाग लिया।

  4. कई देशों में निरंकुश शासन के विरुद्ध आंदोलन हुए।

  5. हालांकि अधिकांश क्रांतियाँ असफल रहीं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रवाद और लोकतंत्र के विचारों को मजबूत किया।


प्रश्न. बाल्कन क्षेत्र को “यूरोप का बारूद का ढेर” क्यों कहा जाता था?

उत्तर:

  1. बाल्कन क्षेत्र में कई अलग-अलग राष्ट्रीयताएँ रहती थीं।

  2. यहाँ ऑटोमन साम्राज्य का शासन कमजोर हो रहा था, जिससे विद्रोह बढ़ने लगे।

  3. विभिन्न राष्ट्र स्वतंत्रता और राष्ट्र-राज्य की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे।

  4. यूरोप की बड़ी शक्तियाँ भी बाल्कन क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती थीं।

  5. इसलिए यह क्षेत्र लगातार संघर्ष और तनाव का केंद्र बन गया, जिसे “यूरोप का बारूद का ढेर” कहा गया।

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