वाच्य-Voice | कर्तृ-वाच्य-Kartri-Vachchya | Hindi Vyakaran | हिन्दी व्याकरण
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वाच्य-Voice | कर्तृ-वाच्य-Kartri-Vachchya | Hindi Vyakaran | हिन्दी व्याकरण
वाच्य-Voice
कर्तृ-वाच्य-Kartri-Vachchya
कर्तृ वाच्य (Kartri Vachya) – विस्तृत व्याख्या एवं उदाहरण
हिंदी व्याकरण में वाच्य का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वाच्य से यह पता चलता है कि वाक्य में क्रिया का संबंध किससे है और वाक्य में कौन प्रधान है। कर्तृ वाच्य वह वाच्य है जिसमें कर्ता अर्थात कार्य करने वाला मुख्य होता है और वही क्रिया का संपादन करता है। सरल शब्दों में कहें तो जहाँ कर्ता स्वयं कार्य करता है और वही वाक्य का केंद्र बिंदु होता है, वहाँ कर्तृ वाच्य होता है। अंग्रेज़ी व्याकरण में इसे Active Voice कहा जाता है।
कर्तृ वाच्य की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वाक्य में कर्ता स्पष्ट रूप से उपस्थित रहता है और क्रिया उसी के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए –
राम पुस्तक पढ़ता है।
यहाँ ‘राम’ कर्ता है और वही पढ़ने का कार्य कर रहा है। इसी प्रकार सीता भोजन बनाती है। इस वाक्य में ‘सीता’ कर्ता है और ‘बनाती है’ क्रिया उसी के अनुसार है। दोनों उदाहरणों में कार्य करने वाला स्पष्ट है, इसलिए ये कर्तृ वाच्य के वाक्य हैं।
कर्तृ वाच्य सभी कालों में प्रयुक्त होता है।
वर्तमान काल में
जैसे –
1. बच्चा खेलता है।
2. शिक्षक पढ़ाते हैं।
3. मैं स्कूल जाता हूँ।
इन वाक्यों में कर्ता स्वयं कार्य कर रहा है।
भूतकाल में देखें तो –
1. राम ने पत्र लिखा।
2. सीता ने गीत गाया।
3. बच्चों ने मैदान में खेला।
यहाँ भी कर्ता ने स्वयं कार्य किया है। भविष्यकाल में उदाहरण हैं –
1. मैं परीक्षा दूँगा।
2. वह कहानी सुनाएगी।
3. हम यात्रा करेंगे।
इन सभी वाक्यों में कर्ता ही क्रिया का करने वाला है।
कर्तृ वाच्य का प्रयोग सामान्य बोलचाल और लेखन में सबसे अधिक होता है क्योंकि यह सीधा और स्पष्ट होता है। जब हम कहते हैं कि किसान खेत जोतता है, तो यह स्पष्ट होता है कि खेत जोतने का कार्य किसान कर रहा है। जब हम कहते हैं कि डॉक्टर मरीज का इलाज करता है, तो कर्ता ‘डॉक्टर’ है और वही कार्य कर रहा है। इसी प्रकार
1. विद्यार्थी पाठ याद करते हैं।
2. लेखक कहानी लिखता है।
3. खिलाड़ी मैच जीतते हैं।
– ये सभी कर्तृ वाच्य के उदाहरण हैं।
कर्तृ वाच्य को समझने के लिए यह भी देखना आवश्यक है कि क्रिया कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलती है। जैसे – वह जाता है, वह जाती है, वे जाते हैं। यहाँ क्रिया का रूप कर्ता के अनुसार परिवर्तित हो रहा है। यही कर्तृ वाच्य की विशेषता है।
कर्तृ वाच्य से कर्म वाच्य में परिवर्तन भी किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए –
1. राम पत्र लिखता है।
यह कर्तृ वाच्य है। यदि इसे कर्म वाच्य में बदलें तो वाक्य होगा –
1. पत्र राम द्वारा लिखा जाता है।
यहाँ पत्र प्रधान हो गया और कर्ता पीछे चला गया। इससे स्पष्ट होता है कि कर्तृ वाच्य में कर्ता मुख्य होता है।
अंततः कहा जा सकता है कि कर्तृ वाच्य वाक्य का सबसे सरल और सामान्य रूप है जिसमें कार्य करने वाला स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह भाषा को स्पष्ट, प्रभावी और सीधा बनाता है। लेखन और बोलचाल में अधिकतर वाक्य कर्तृ वाच्य में ही प्रयुक्त होते हैं क्योंकि इससे विचारों को सरलता से व्यक्त किया जा सकता है।
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